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Tuesday, April 11, 2023

सफल हुई तलाश


सुबह के साढ़े दस बजे हैं। जून को कल रात ठीक से नींद नहीं आयी, इसलिए आराम कर रहे हैं। मौसम धूप भरा है। कल दोपहर उन्होंने सोसाइटी के एप अड्डा पर संदेश देखा, नन्हे की एक बिल्ली काफ़ी ऊँचाई से गिर गयी है और नीचे कहीं मिल नहीं रही है। उसे चोट लगी होगी और डर कर छुप गयी है। शाम को पाँच बजे बात हुई तो पता चला अभी तक नहीं मिली है, उसकी आवाज  में काफ़ी चिंता थी, पालतू पशु परिवार के अंग जैसा हो जाता है। उन्होंने निश्चय किया कि वहाँ जाना चाहिए। अभी आधे रास्ते तक ही पहुँचे थे कि पता चला, मिल गयी है, घर पहुँचे तो वे उसे लेकर डाक्टर के पास जा रहे थे। वहीं सांध्य भ्रमण किया, शाम की चाय पी और गुरु जी द्वारा  निर्देशित ध्यान किया, फिर ‘देवों के देव’ देखा, जिसमें पार्वती अब बड़ी हो गयी हैं, पर उनकी भेंट अभी महादेव से नहीं हुई है।वह शिव को पाने के लिए साधना करना चाहती है, पर वे सफल नहीं होने दे रहे हैं ।प्रतीक्षा करते-करते उन्होंने खाने की मेज सजा दी, रसोइया ख़ाना बनाकर चला गया था। साढ़े आठ बजे दोनों बच्चे वापस आए; बताया, बिल्ली को रीढ़ की हड्डी में मामूली चोट लगी है, एक इंजेक्शन भी डाक्टर ने लगा दिया है । खाने की मेज पर उन्होंने सुबह का पूरा क़िस्सा सुनाया। लगभग ग्यारह बजे वे दोनों अपने-अपने ऑफिस के काम में व्यस्त थे, कि नीचे वाले फ़्लोर से एक फ़ोन आया, आपकी बिल्ली फंस गयी है। उन्होंने देखा, मुख्य शयन कक्ष की खिड़की से निकल कर वह पाइप के सहारे सातवीं मंज़िल पर चली गयी है।और रो रही है, उसे उतारने का कोई साधन नहीं था। एक घंटा तक कई उपाय आज़माते रहे पर आख़िर वह नीचे गिर गयी, पर उसकी गति शायद दीवार से टकराने से कम हो गयी थी, सो ज़्यादा चोट नहीं लगी। वे लोग उसी समय से बिना कुछ ग्रहण किए लगातार बेसमेंट में उसे ढूँढते रहे, आख़िर वह एक कार के नीचे पीछे वाले पहिए पर चढ़ी मिली। शायद वह डर कर या थककर सो गयी होगी।  कहते हैं न मुसीबत कभी अकेले नहीं आती।एक नकारात्मक घटना दूसरी नकारात्मक घटना को जन्म देती है। पिछले हफ़्ते ही वे लोग कोरोना के भय से मुक्त हुए थे।जीवन में ऐसी घटनाएँ इंसान को मजबूत बनाने के लिए होती हैं। रात्रि भोजन करने में काफ़ी देर हो गयी सो उस दिन वे वहीं रुक गए। वे पूरे सात महीने बाद वहाँ गए थे, कोरोना के कारण जाना ही नहीं हुआ था। नन्हे ने टीवी पर आशुतोष राणा का दिनकर लिखित ‘रश्मि-रथी’ के तीसरे सर्ग का पाठ सुनवाया, उन्हें कंठस्थ था, प्रस्तुतीकरण बहुत प्रभावशाली था। जब नन्हे ने कहा, वे लोग नियमित योग सीख रहे हैं, जून ने उन्हें इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना नाड़ी के बारे में बताया। कुछ दिन पहले गुरुजी से  वेगस नाड़ी के बारे में भी सुना था जो शरीर में सबसे लम्बी नाड़ी है और कई अंगों से जुड़ी है।प्राणायाम के द्वारा इन नाड़ियों को शुद्ध रखा जा सकता है।  


आज टाटा की नयी इलेक्ट्रिक कार आ गयी है; नील हरित रंग यानी मोर के रंग की। शाम को नन्हा और सोनू भी आ गए, रात्रि भोजन  के बाद सब ड्राइव पर गए। दस बजे वे लोग वापस चले गए। आज वर्षों पूर्व की डायरी का एक पन्ना पढ़ा, कितनी मधुर यादें हैं और कितनी मीठी कश्मकश। उस वक्त जो तलाश भीतर चल रही थी, वह अब पूरी हो गयी है। कितना ठहराव आ गया है मन में। आज शाम को तेज वर्षा हुई, थे कि सारी खिड़कियाँ बंद करनी पड़ीं। शाम को पापा जी से बात हुई, उन्हें ट्रांज़िस्टर पर विविध भारती सुनने में कठिनाई हो रही थी। उन्हें ऑल इंडिया रेडियो का एक एप ‘न्यूज़ ऑन एयर’ डाउन लोड करने को कहा है, जिस पर रेडियो कभी भी सुना जा सकता है। 


आज नन्हे का एक मित्र भी आया था, जो उसके साथ कालेज में था। दोपहर को जब बाक़ी लोग विश्राम करने लगे तो वे दोनों ड्रोन उड़ाने चले गए;  कुछ समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दो घंटे खोजने के बाद पता चला कि पिछली गली में एक विला की छत पर गिरा था। इलेक्ट्रिशियन को फ़ोन करके उसकी सीढ़ी मँगवाई, क्योंकि विला का मालिक दूसरे शहर में था। शाम काफ़ी हो गई थी, कुछ फल खाकर वे लोग वापस चले गये। उसने दीदी के विवाह की वर्षगाँठ के लिए कविता लिखी।


Tuesday, September 8, 2020

बारिश की बौछार

 

आज सुबह घर से निकलने के लिए तैयार थे पर न ओला मिली न उबर, काफी देर इंतजार किया फिर नन्हे के मित्र ने कहा, उसकी कार ले जाएँ. आधे घण्टे में ही पहुँच गए. रास्ता बहुत सुंदर है, सड़क भी अच्छी है, गांव से गुजरते हुए, मन्दिरों के दर्शन करते सोसायटी के पिछले गेट से वे घर पहुँचे तो जाली के दरवाजे लेकर कारीगर खड़े थे. जो उनकी प्रतीक्षा ही कर रहे थे. थोड़ी देर में एसी लगाने दो मकैनिक भी आ गए. दोपहर तीन बजे तक दोनों काम हो गये. कुछ देर विश्राम करने के बाद वे वापस आ गए. कुछ देर पूर्व नीचे शॉप में गयी तो शीशे का दरवाजा इतना साफ था कि खुला समझकर टकरा गयी, ध्यान कहीं और था. दोपहर को योग वशिष्ठ पढ़ा था जिसमें चेतना के जागरण के सिवा और कोई बात ही नहीं है. स्वयं के प्रति सजग व्यक्ति को जगत के प्रति असजग तो नहीं हो जाना चाहिए. नन्हे ने गृहप्रवेश के निमन्त्रण के लिए  सुंदर इ कार्ड बनाया है. पंडित जी व कैटरर को उसने एडवांस भी दे दिया है. कल रात्रि गुरूजी का एक वीडियो देखा, ‘कला’ के बारे में समझा रहे थे. बहुत सुंदर विधि से उन्होंने कला व कविता की परिभाषा बताई. सुबह सोमनाथ में दिए उनके प्रवचन को सुना, अमृत के समान मधुर हैं उनके बोल ! इस बार की कविता का विषय है ध्यान, उसने सोचा व्हाट्सएप कविता ग्रुप में ‘ध्यान’ पर लिखी कोई पुरानी कविता पोस्ट करेगी. 

शाम को घर वापस आ रहे थे कि अचानक तेज बूंदें पड़ने लगीं, विंड स्क्रीन पर लगातार चल रहे वाइपर के बावजूद सड़क साफ नहीं दिखाई दे रही थी. जून आज भी नन्हे के मित्र की कार लेकर आये.  दोपहर को एसी यूनिट के सिलसिले में दो मकैनिक आये. उन्हें दीवार में हुए छेद को सीमेंट से बन्द करना था, छत से रस्सी के सहारे लटक कर उन्होंने यह काम किया, काफी खतरा था इसमें. इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन भी आयी और तकिये भी, अक्टूबर में जब वे यहां आएंगे अपने साथ कुछ सामान लाना ही शेष रहेगा. किताबें, वस्त्र, कलात्मक वस्तुएं, गमले और कुछ फर्नीचर. आज पहली बार यहां के डिपार्टमेंटल स्टोर में गयी, एक महिला चला रही थी, साथ में थी उसकी दुबली, लंबी बिटिया.  कुछ छोटे-मोटे सामान खरीदे, दो रातें उन्हें यहाँ बितानी होंगी. दोनों बिल्लियां सो रही हैं, दफ्तर जाते समय नन्हा उन्हें खाना-पानी देकर बालकनी में बन्द कर देता है, ज्यादातर समय सोती रहती हैं. योग वशिष्ठ पढ़ते समय कैसी अनुभूति होती है. इस संसार में सारा भय, विषाद और दुःख तभी तक है जब तक मन है, यानि आत्मा नहीं है. एक ही आत्म तत्व विभिन्न रूपों में प्रकट हो रहा है, जब तक यह ज्ञान दृढ नहीं हो जाता, दुःख से छुटकारा नहीं हो सकता. आज दोपहर को उनके पड़ोसी आये थे, वह बहुत शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते हैं, टहलने जाते हैं, और घर आकर प्राणायाम करते हैं. 


अतीत के पन्ने .....कॉलेज की अंतिम परीक्षा का प्रथम दिन है. कितनी ख़ुशी होती है जब किसी वस्तु को वे अंतिम बार विदा देते हैं. जैसे आज वह पहले कोर्स को दे देगी. कल पढ़ाई के बीच में थोड़ा सा विश्राम लेने के लिए निर्मल वर्मा की एक सशक्त कहानी पढ़ी, किसी विदेशी कहानी जैसे लगती है. 

पहली परीक्षा के बाद सात दिन का अंतराल था. दिन भर पढ़ाई की, शाम को टीवी पर फिल्म थी ‘गमन’, अच्छी थी, एक समस्या प्रधान फिल्म. 


दिन भर किताबों में बीता पर शाम को यहाँ क्लब का वार्षिकोत्सव था, अच्छा लगा सिर्फ एक नाटक को छोड़कर, उस नाटक की कथावस्तु एक घटिया नारेबाजी जैसी बनकर रह गयी, जो लोगों को हँसा जरूर सकती है पर कुछ सोचने पर विवश नहीं कर सकती. पढ़कर उसे वे वर्ष याद आ गए, दो-तीन नाटकों में उसने भी अभिनय किया था. एक का निर्देशन भी. उस दिन नाटक और लेख प्रतियोगिता का पुरस्कार उसे भी मिला था. उसकी पढ़ाई पूरी होने वाली थी, अब तो आत्मनिर्भर होना था, यही लक्ष्य था उसका अब नौकरी ढूंढना. शमे फिरोजा प्रोग्राम में सुना था कि जिंदगी बेमकसद हो तो जिंदगी नहीं रहती. एक सीधी सच्ची राह चुन कर उस पर चलते जाना है जैसे एक दिन एक जिन्न ने आदमी से कहा उसे खजाना पाना है तो इस रास्ते पर सीधा चलता  जाये, दांये-बांये देखा तो पत्थर बन जायेगा. 


Saturday, April 11, 2020

श्वेत गुलाब


पौने ग्यारह बजे हैं. आज का दिन कुछ भारी है शायद या फिर अभी वह अनाड़ी है. आज सुबह कार लेकर गयी, कालोनी में ही एक चक्कर लगाया, वापस आयी तब तक भी ड्राइवर नहीं आया था , सो अकेले ही बाजार चली गयी, ट्रैक्टर को ओवरटेक करते हुए गाड़ी का बायां भाग लग गया. कार को गैराज में ले जाना पड़ेगा. कल रात को नींद खुलती रही, फिटबिट सब खबर रखता है. बहुत दिनों बाद सब्जी में प्याज डाला, कैसी अजीब सी लग रही थी उसकी गंध. सात्विक भोजन खाकर  तन-मन दोनों ही हल्के रहते हैं. एक सीनियर महिला ब्लॉगर ने उसकी तीन पोस्ट्स को ब्लॉग बुलेटिन में जगह दी, इसका अर्थ है उन्होंने अवश्य ही उन्हें ध्यान से पढ़ा भी होगा. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं, जून अपने मोबाइल पर व्यस्त हैं. दोपहर को वे गाड़ी बनने के लिए दे आये, दो हफ्तों बाद मिलेगी. अब भविष्य में बहुत सतर्क होकर गाडी को हाथ लगाना होगा, फ़िलहाल कालोनी में चलाना ही ठीक रहेगा. उसके बाद तिनसुकिया गए, छाता बन गया, सब्जियां-फल आदि खरीदे. जून को भी गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने का ज्यादा बुरा नहीं लगा, उन्होंने पहली बार इंश्योरेंस क्लेम किया है. कल स्कूल में मीटिंग ठीक रही, अब कुछ महीने बाद स्टेज बनने का कार्य आरम्भ हो जायेगा. समय का सदुपयोग करना हो तो पुस्तक पढ़ने से अच्छा कौन सा काम हो सकता है, कल वी एस नायपॉल की अच्छी सी पुस्तक लायी थी, पढ़ना आरम्भ किया है. नन्हे व सोनू के चश्मे गाड़ी से सामान निकालते समय मिले, उन्हें याद ही नहीं था कि वहां रखे थे.  

‘इंसान जिसके बारे में सोचता है, वैसा ही बन जाता है’. वे वही बन जाते हैं, जैसा वे बनना चाहते हैं, जैसा वे सोचते हैं. मन की गहराई में जो आकांक्षा बलवती होती है, वह एक न एक दिन मूर्तरूप अवश्य लेती है. वह बचपन से ही अध्यापिका बनना चाहती थी, पढ़ना और पढ़ाना, ये दो ही उसके प्रिय कार्य रहे हैं. परमात्मा ने उसे इस योग्य बनाया है कि वह अन्य लोगों को ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकती है. आज यदि वह अपने भीतर जाये तो वहां कोई आकांक्षा नहीं मिलेगी, एक मौन और सन्नाटा ! पर वह मौन रसपूर्ण है, एक सहज शांति उसमें से पल-पल रिसती रहती है. खिड़की से बाहर हरियाली नजर आ रही है, पौधे, वृक्ष कैसे शांत खड़े हैं. हवा का एक कण भी नहीं है, आकाश भी थिर है, वर्षा के बाद का खुला, स्वच्छ आकाश ! दूर से पंछियों की आवाजें आ रही हैं और घास काटने की मशीन की भी. अचानक हवा बहने लगी है और अब श्वेत गुलाब की टहनी हिलकर स्थिर हो गयी है. वह जिस आकाश में स्थित है वह तो सदा ही स्थिर है. मन का आकाश भी सदा अडोल है. उसमें विचारों का स्पंदन होता है, जो साक्षी है वही मन बन जाता है और वही स्वयं में ठहर जाता है. नैनी किचन में काम कर रही है, उसने कहा, शरीर में दर्द है, उसे क्रोसिन की दो टेबलेट दी हैं. आजकल उसके पास सिलाई का काम आ रहा है, शायद झुक कर, देर तक सिलाई करने से ही ऐसा हुआ हो. दो दिन बाद गणेश पूजा है. उसी दिन वे बच्चों को नए वस्त्र देंगे. 

Wednesday, June 1, 2016

नई नवेली कार


जीवन में हजारों, लाखों, करोड़ों, अरबों या कहें अनंत पल खुशियों के आते हैं, बल्कि कहें कि जीवन सुख व आनन्द की एक अनवरत श्रृंखला है. अनगिनत जन्मों को जोड़कर देखें तो न जाने किस अतीत के काल से वे बने हुए हैं. परमात्मा की भांति वे भी अनादि हैं, उसकी भांति वे भी साक्षी हैं, कुछ न करते हुए भी सबका आनन्द लेने वाले, हर श्वास एक आनन्द की लहर की खबर देती है, जो स्वयं ही आनन्द हो उसे भी अपने आनन्द का स्वाद लेने के लिए देह में आना पड़ता है. परमात्मा को मायाविशिष्ट चेतना में आकर लीला का आनन्द लेना पड़ता है तो जीव को स्वप्नविशिष्ट चेतना में ! वे स्वप्न ही तो देख रहे हैं, एक लम्बा स्वप्न जिसमें उन्होंने एक नया रोल धरा है. शरीर, मन व बुद्धि का एक नया संयोग खड़ा किया है. स्वप्न से जागकर ही पता चलता है क उसमें प्रतीत होने वाले सुख-दुःख मिथ्या थे वैसे ही मृत्यु के क्षण में पता चलता है सब कुछ छूट रहा है, एक स्वप्न का अंत हो रहा है. उनका ध्यान यदि मृत्यु से पूर्व इस ओर चला जाये तो सदा के लिए मृत्यु का भय छूट जाये ! जीवन एक खेल ही लगने लगेगा तब !

आज सद्गुरु ने गणेश जन्म का एक नया अर्थ बताया. पर्व के दोष से उत्पन्न आनंद को ज्ञान के द्वारा पावन किया गया. पर्व पार्वती है, मैल दोष है, जिससे आनंद रूपी गणेश उत्पन्न हुआ है, हाथी का सिर ज्ञान है. गणेश को विघ्न हर्ता भी कहते हैं, हाथी के आगे कोई बाधा नहीं टिकती. गणेश का चूहा तर्क का प्रतीक है और बीज मन्त्र का भी. आज छोटे भाई का जन्मदिन है, वह नई कार ले रहा है, blushing red Iten, इत्तेफाक है कि बड़ी ननद भी काली कार ले रही है. आज भी वर्षा थमी नहीं है, पिछले कई हफ्तों से रोज ही बादल बरसते हैं.

सुंदर वचन सुने आज, ‘सत्य के सूर्य को अस्ताचल ले जाने के लिए संध्या रूपी माया आ जाती है ! कमल को जैसे तुषारापात समाप्त कर देता है वैसे ही सत्य को माया समाप्त कर देती है. ऐसी माया को दूर से ही त्याग देना चाहिए, यही जन्म-मृत्यु का कारण है’. अध्यात्म की साधना का मुख्य उद्देश्य संस्कारों से मुक्ति है. कल रात स्वप्न में एक विकार की ग्रन्थि को पूर्ण रूप से देखा तथा उससे मुक्ति का अनुभव भी किया. पिछले पचीस वर्षों मन न जाने कितनी बार स्वयं व्याकुल हुआ और अन्यों को भी किया. माया के चंगुल में फंसकर कषायों के मल में धंस कर न जाने कितना दुःख वे व्यर्थ ही उठाते रहते हैं. भीतर की ग्रंथियाँ कट रही हैं, मन पावन हो रहा है. परमात्मा को वे अपने भीतर प्रकट  होने से रोकते रहते हैं.अशुद्ध वृत्तियों का पर्दा उन्हें उससे दूर ही रखता है, जबकि वह सहज प्राप्य है.

अज दोपहर से बिजली नहीं है, मौसम अच्छा है सो पंखे के बिना भी ठीक लग रहा है. मृणाल ज्योति के लिए एक कविता लिखी है.शाम को प्रिंट करेगी  कल उन्हें वहाँ जाना है, सम्भव हुआ तो पढ़ भी सकती है. जून अभी तक आये नहीं हैं, उनका गला थोड़ा खराब है. कल वह नाहक ही क्रोधित हो रहे थे. मनुष्य अपने आप को नहीं जानता, इसलिए स्वयं को दुःख दिए जाता है. कृष्ण कहते हैं जो न आकांक्षा करता है न द्वेष करता है, वह मुक्त है.



Friday, June 13, 2014

सांध्य भ्रमण


आज शनिवार है, दस बजने में कुछ समय शेष है और यही है उसके लिखने का समय. कल शाम को एक सखी के साथ क्लब में ‘करीब’ देखी, आधी फिल्म देखकर जब वे लौट रहे थे तो उसने बताया कि उसे पैदल चलना और रास्ते में दिखने वाले फूल-पौधे, घास, पेड़ सब बहुत अच्छे लगते हैं, वह खुश थी पर घर जाकर उसने फोन किया, एक मित्र की कार का टायर पंक्चर होने से एक्सीडेंट हो गया, वे लम्बी यात्रा करके नई कार ला रहे थे, सभी सुरक्षित हैं पर गाड़ी को काफी क्षति पहुँची है. हर क्षण जीवन में कुछ न कुछ घटित होता रहता है लेकिन स्वप्न मानकर इन सब स्थितियों का सामना करने का माद्दा मानव में तभी आता है जब उसके विवेक का तीसरा नेत्र खुला हो, तब दुःख होता है जरूर पर कम होता है और उसका असर भी देर तक नहीं रहता.. उनके साथ घटी उस घटना को वे भी आज तक नहीं भूल तो नहीं पाए हैं पर उस वक्त भी उन्होंने समझ से काम लिया था और व्यर्थ की चर्चा से बच गये थे.

फिर एक अन्तराल, लिखने का अभ्यास बीच-बीच में छूट जाता है फिर एक दिन प्रेरणा होती है और कोरे पेज भरने लगते हैं. आज सुबह कई कार्यों के बारे में सोच रही थी जो करने हैं, कपड़ों की आलमारी सहेजना, फ्रिज की सफाई, बैठक की साज-सज्जा और रुमाल बनाने हैं जिनके लिए कपड़ा पिछले महीने लाई थी. माह का आज अंतिम दिन है, सुबह-सुबह छोटी बहन को जन्मदिन की बधाई दी. फोन से बात करके लगता है भेंट हो गयी, पत्रों का जमाना अब पीछे छूट गया, न किसी के पास पत्र लिखने का समय है न पढ़ने का. कल घर बात करके पता चला छोटे भाई को वायरल फीवर हो गया है. कल वे जून के जन्मदिन के लिए टीशर्ट खरीदने गये पर उन्हें कोई पसंद ही नहीं आई. आज सुबह जे कृष्णामूर्ति की किताब में पढ़ा, “जैसे-जैसे लोग बड़े होते जाते हैं, उनके मस्तिष्क मृत होते जाते हैं, वे संवेदनहीन बनते जाते हैं जिज्ञासा करना छोड़ देते हैं. शरीर की मृत्यु से पूर्व ही ज्यादातर मस्तिष्क की मृत्यु हो चुकी होती है.. ऐसा मन जो अपनी आदतों का गुलाम है, पलायनवादी है, संकुचित है मृतक के समान है. शब्द भी अपना असर न छोड़ें न ही यह दुनिया और उसके कार्यकलाप, न ही हर दिन को नया दिन मानने की और उत्साह पूर्वक उसका सामना करने की आकांक्षा, तब मानना पड़ेगा कि मन हार मान चुका है. उसे भी लगता है मानव वही है जो वह सोचता है. जो वह आज है वह उसके अतीत के विचारों का परिणम है और जो वह आज सोचती है वैसी ही भविष्य में होगी. परमात्मा ने उसे यह अवसर दिया है और उसे इसका सच्चाई और कृतज्ञता पूर्वक लाभ उठाना चाहिये.

अगस्त महीने का आरम्भ हुए तीन दिन हो गये हैं. But she could not write earlier. Today in the morning when she was reading “Ramayana” by R.K. Narayana based on Tamil Ramayana composed by “Kamban” , one known  lady,who is principal of a school, rang her and asked about joining her school, said that she had told her earlier about her wish to work in school. But Nuna said, no, it was she who had asked her. But now she has made her mind and is interested in teaching. Lady  was not at home, in fact she had not reached home when she rang her to tell her affirmation. She likes doing something more useful than sitting and passing time in this or that. Of course she will not leave music or reading books. Last evening they went to a birthday party, but the main topic of discussion was the train accident occurred on Monday night near Jalpaigudi between Avadh-assam and Brahma putra express. Many people died and many got injured. When she heard the news on TV, she was shocked and could forget it only while practicing music in her teacher’s place.


Friday, April 11, 2014

अंकल चिप्स कहाँ हैं


कल नन्हा स्कूल से आया तो प्रसन्न था. वे बहुत दिनों बाद शाम को घर से निकले. एक मित्र के यहाँ भी जाना था, उनके बेटे की जीभ घर में खेलते वक्त गिर जाने से कट गयी थी. रात की तेज वर्षा के कारण मौसम आज ठंडा है, उसने खिड़की से देखा, माली सिल्विया और गुलदाउदी के पौधों के लिए क्यारी बना रहा है. कल्पना में उसने खिलते हुए फूलों को देखा और एक मुस्कान अंतर को भर गयी. कल दोपहर उसकी पड़ोसिन आई थी, आज सम्भवतः फिर आयेगी, उसका मिठाई तोड़ना, गिलास में हाथ डालकर धोना, बिना बात ही हँसना और...उसकी ग्रामीण बैक ग्राउंड का परिचायक लगा, खैर...अपना-अपना स्वभाव है. कल रात जून ने अपनी बचत का रिकार्ड उससे डायरी में लिखवाया, उसके पूर्व शाम को बाहर जाते समय साड़ी पहनने पर (एक पुरानी सिंथेटिक साड़ी) जून और नन्हे ने उसे जब टोका तो उसने व्यक्ति की आजादी पर छोटा सा भाषण सुना दिया फिर रात को जब नन्हे को जून ने अपने कमरे में जाने को कहा तो वह चुप हो गया और सोने जाने तक कोई बात नहीं की, नूना को अच्छा नहीं लगा और फिर बाल मनोविज्ञान पर कुछ बातें उसने जून को बतायीं, वह चुपचाप सुनते रहे, नन्हे का उदास हो जाना उन्हें भी खलता है सुबह उसके स्कूल जाने तक वह बहुत प्यार से उससे बातें करते रहे, प्यार करना ज्यादा आसन है बजाय गुस्सा करने के क्योंकि गुस्सा करने वाला खुद ज्यादा परेशान होता है.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिख सकी, शनि की सुबह कपड़ों की सिलाई (पुराने कपड़ों की) में व्यस्त रही, इतवार का दिन तो कई और कामों में कैसे गुजर जाता है पता ही नहीं चलता. कल रात बेहद गर्मी थी, उसके सर में हल्का दर्द हुआ अभी भी हल्का-हल्का सा भारी है सर. ptv की एंकर ने अपना ख्याल रखने व मुस्कुराते रहने की हिदायत के साथ अपना कार्यक्रम समाप्त किया है. वहाँ शरीयत का कानून लागू होने से ptv के कार्यक्रमों पर अभी तक तो कोई असर नहीं पड़ा है. उसने शाम को मीटिंग में साथ जाने के लिए पड़ोसिन से बात की, मोज़े बन गये हैं यह भी उस सखी को बताया. कल वे बाजार गये, नैनी के लिए साड़ी खरीदी वायलेट रंग की फिर कादम्बिनी ली, प्रवेश में अपनी कुछ कविताएँ भेजना चाहती है.

Today is first day of Sept ! Jun went to Moran this morning to come back at 6 in the evening. She is feeling a sense of freedom to do any thing at any time till Nanha comes from school. There are so many things to do- music, letter writing, TV, stitching,  exercise and cooking, also she can do some new things like painting if time permits. she  learned two beautiful lessons from the two books which she reads these days after bath. One is – Don’t expect gratitude, it is rare like rose and ingratitude is like weed, it is everywhere. Second is – Do whatever you like with whole heart otherwise not do it. Yesterday’s meeting was successful . Dance drama cultivated by DR Sharma  was very good and she liked the tea also. Today she talked to ma-papa, they are going to sister’s place this month. She will be meeting them in year end.


आज सुबह अलार्म बजते ही जून रोज की तरह फौरन उठ गये और बहुत पहले जैसे वह करते थे फिर पांच मिनट लेटे रहकर उठे. वह खुद भी उठकर बिस्तर के पैताने पर बैठ गयी यूँ ही, रात को देखे सपनों का जायजा लेने, फिर उठी तो ब्रश करने के बजाय बाथरूम में ही दिमाग में आई इधर-उधर की बातों को सोचती रही. सुबह सोकर उठो तो दिमाग एकदम खाली होना चाहिए, साफ-स्वच्छ, पर नहीं, बीती रात की कोई बात पता नहीं क्यों किसी छेद से घुसकर कुरेदती रहेगी फिर एक बार जो ब्रश किया तो सुबह के कामों में व्यस्त हो गयी, बस सुबह के वे ५-७ मिनट यूँ ही गंवा दिए. कल से इस बात का ध्यान रखेगी, फिर जून ने जब कहा कि कल वह ऑफिस की चाबी ले जाना भूल गये तो बजाय उस बात को सुन लेने के उन्हें नसीहत देने लगी जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी, नन्हे के स्कूल चले जाने के बाद जून जब तक कार की प्रतीक्षा कर रहे थे वह वहीं बैठी रही अपना कर्त्तव्य समझकर, तभी उसमें स्नेह नहीं था, सो उन्हें कह भी दिया कि उसका काम छूट रहा है. togetherness की फीलिंग नहीं थी जिसमें मात्र साथ रहना ही भला लगता है, ड्यूटी समझ के कोई किसी का ख्याल रखे तो उसे विवशता ही कहा जायेगा न, सो अभी सुबह के मात्र पौने नौ ही हुए हैं और दिल है कि इतनी सारी खताएं कर चुका है या वह करवा चुकी है. आज शाम को एक सखी आ रही है उसकी माँ भी, जो उसी की तरह दुबली-पतली ही होंगी गोरी और नाजुक या...? नन्हा आजकल स्वस्थ व खुश है इतवार की शाम वह फिर रूठ गया था क्योंकि अंकल चिप्स नहीं लाकर दिए थे ! 

Tuesday, April 8, 2014

गैराज की सफाई


कल दोपहर पेड़ काटने वाला आदमी काम बीच में ही छोडकर चला गया था, बिना खाए-पिए लगातार छह घंटे वह काम करता रहा. यही तो है भारत का आम आदमी, मजदूर और किसान, इनके विकास के लिए सरकार करोड़ों रूपये खर्च करती है पर इनकी हालत वही रहती है. कल शाम को लाइब्रेरी में ‘२१सवीं सदी में प्रवेश’ पर एक किताब देखी, दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो सारी सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी ग्लोब के दूसरे सिरे पर रहने वाले एक गरीब किसान की पीड़ा का अनुभव कर सकते हैं, यह दुनिया ऐसे ही व्यक्तियों के कारण तो चल रही है और यह ख़ुशी की बात है कि ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा होती जा रही है. कल घर से माँ का पत्र आया है, लिखा है छोटी बहन उन्हें बुला रही है पर वह अभी जा नहीं सकतीं. काश ! वह स्वयं कुछ दिनों के लिए उसके पास रह पाती पर यहाँ  नन्हे और जून का काम उसके बिना नहीं चलने वाला है.

नौ बजने को हैं, सुबह सुहानी थी, शीतल हवा और आकाश पर बादलों के बिखरे रंग उसे मोहक बना रहे थे. इस समय वह पहले पहर के मध्य में पहुंच चुकी है. आज गैराज साफ करवाया और ड्राइव वे भी. कल जून ने अपनी कार बेच दी यानि उनकी मारुति ८०० किन्हीं ठेकेदार महोदय को. अब उन्हें नई कार के लिए १५-२० दिन तक इंतजार करना है हो सकता है एक महीना भी. स्कूल से लौटकर जब नन्हे ने यह समाचार सुना तो वह बहुत नाराज हो गया था, उसे लगा आधे घंटे में सामान्य हो गया है. लेकिन बाद में जब उसे गृहकार्य करने को कहा तो उसने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया, शाम को एक मित्र परिवार आया तो जून ने उसे डांट कर पढ़ने बैठने को कहा, उसे लगा न चाहते हुए भी उसे अनुशासन सिखाने के लिए उन्हें ऐसा करना ही पड़ा. Today she read the second lesson of ‘Stop worrying and start living by Dale Carnegie. writer advises to accept the worst and then to think clearly instead of worrying when one faces any problem. कल रात स्वप्न में एक कहानी का प्लाट मिला. नायिका अपने छोटे भाई के साथ उसके कालेज जा रही है. रस्ते में पांच-छह असामाजिक तत्व उनके पीछे हो लेते हैं. एक जगह किसी वजह से उन्हें रुकना पड़ता है. बहुत bold होने का अभिनय करती हुई वह झूठमूठ में नशा करती है और उन्हें अपनी बातों में फंसा लेती है. किसी नशीले द्रव्य के अपने पास होने का भ्रम उन्हें दिलाती है अब सभी उसकी रक्षा का उपाय सोचने लगते हैं साथ चल पड़ते हैं, पर वह अभी भी खतरे से बाहर नहीं है, आगे का स्वप्न कुछ याद नहीं है. कल दोपहर जो कहानी उसने लिखी उसका अंत अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है. नीतेश ने अपने गुम होने की खबर स्वयं ही दी थी जब उसे मामा पर शक हुआ कि उसके पिता को धमकी भरे पत्र वह भेज रहे हैं. मामा सिर्फ अपना मान रखने के लिए रिपोर्ट लिखने व विज्ञापन देने की बात स्वीकारते हैं. लिखना उसे बीच में रोकना पड़ा, दरवाजे की घंटी बजी थी.



Saturday, February 22, 2014

बैटरी की चोरी


और आज उनकी बैटरी चोरी हो गयी, अर्थात उनकी मारुति कार की. चोर रात को दो बजे से थोड़ा पहले आया होगा, बड़ी सफाई से उसने कार का दरवाजा खोला और फिर बोनट. ‘आराम से किया काम है, सूझ-बुझ से निकाली गयी है’, ये दोनों वाक्य थे उस सिक्योरिटी ऑफिसर के जो देखने आया था कि बैटरी कैसे चोरी हुई. जून को आज सुबह-सवेरे ही मोरान जाना था, वह वहाँ से दो बार फोन कर चुके हैं. वह भी कितने ही फोन कर चुकी है. पहले सेक्रेटरी को फोन किया कि शाम को मीटिंग में नहीं आ पायेगी पर प्रेसिडेंट ने इसरार किया, उसे जाना ही चाहिए. इस महीने एक मीटिंग और है CMD आ रहे हैं, उसके बाद सम्भवतः तीन दिन का बंद है, चुनावों के बहिष्कार के लिए इस बंद का आयोजन किया गया होगा. उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं लगता, कल सुबह से ही उस बच्चे के पैर से बहता खून देखकर मन जैसे क्षत-विक्षत हो गया है, उसका असर तन पर भी पड़ा ही है. सुबह साढ़े चार बजे उठी, छात्रा पढ़कर गयी तब तक सब ठीक था, जून बाहर निकले और जब अंदर आये तो चेहरा फक था, वे सभी बाहर गये. चोर के निशान कहीं नहीं थे पर बोनट के अंदर की खाली जगह मुंह चिढ़ा रही थी. नन्हे ने कहा, गनीमत है गाड़ी नहीं गयी. वह सकारात्मक सोच सकता है, उसके लिए अच्छा ही है.

कल के घाव का दर्द अब कम हो गया है, वक्त के साथ इन्सान का मन बड़े से बड़ा दुःख भी सह सकता है. कल शाम आखिर उसे जाना ही पड़ा, लौटी तो जून बेहद थके हुए थे, दिन भर की यात्रा के कारण थकान हुई सो अलग, शाम को दो परिवार आ गये चोरी की बात सुनकर. मेहमान नवाजी की भी एक थकान होती है. उनका skit होगा या नहीं समय ही बतायेगा, लेकिन उसके लिए उसे घर की शांति भंग नहीं करनी चाहिए, इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बना लेना चाहिए. ईश्वर जो करेगा अच्छा ही करेगा. माँ-पापा के जाने में मात्र एक हफ्ता रह गया है, फिर वे तीनों रह जायेगे, अपनी छोटी सी दुनिया में. इन्सान के मन में कभी-कभी ऐसे विचार भी आते हैं जिन्हें वह खुद से भी छिपाना चाहता है. अपनी आजादी की कीमत पर वह कुछ भी नहीं चाहता. आज के भौतिकतावादी युग ने भीड़ में भी अकेले रहने की आदत डाल दी है, अथवा सवाल यह है कि उसे जो है वह नहीं जो नहीं है वह चाहिये.

आज सुबह की चाय पी ही थी, वह कुछ देर बैठकर उन लोगों से बातें कर रही थी, वे लोग चार-पांच दिन बाद जाने वाले हैं, हर वक्त यह बात मन में बनी रहती है कि अचानक पिता को कुछ घबराहट सी महसूस हुई, चक्कर आ रहा है कुछ ऐसे ही. वह तो बहुत डर गयी, दौड़कर पानी लेने गयी और जून को बताया, वह भी फौरन शेव छोड़कर आये और पिता को लेटने को कहा. तब तक वह थोड़ा ठीक महसूस कर रहे थे. जब से वे लोग आये हैं पहली बार ऐसा हुआ है बल्कि उन्होंने बताया कई साल पहले एकाध बार हुआ था.

आज धूप फिर भली लग रही है, हवा में ठंडक है इसलिए धूप का रेशमी स्पर्श भा रहा है. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, प्रोजेक्टर से इंग्लैण्ड व हालैंड में खिंची स्लाइड्स देखीं, बहुत सुंदर फोटो आये हैं, रगीन फूलों के चित्र, बिगबेन और बंकिघम पैलेस के चित्र, हालैंड के ट्यूलिप और अन्य फूल बेहद सुंदर थे, टेम्स पर बने पुल, जहाज से यात्रा, उन्नत देश ऐसे ही होते हैं. तभी तो जो भारतीय एक बार विदेश जाते हैं, वापस भारत की धूल भरी टूटी-फूटी सडकों पर लौटना नहीं चाहते. आज सुबह से सभी कुछ सामान्य रहा है, लेकिन कल रात कोकराझार में हुई बम विस्फोट की घटना से कुछ सोच सबके मनों में है. अगले हफ्ते तक ट्रेनस् सामान्य रूप से चलने लगेंगी या नहीं इसे लेकर.







Friday, June 14, 2013

स्कॉटलैंड यार्ड-रोचक खेल


It is 12 noon, jun has sent a massage through his boss that he will come at 2 pm with their friend. Today early in the morning when they were in the bed, he called him to come with him to Dibrugadh and they left at 6.15 am. Nanha helped her a lot in washing clothes and other works. He is such an understanding child, loving and caring. And jun is also very compassionate and loving.. He never disappoints her, whatever and whenever she says a thing he tries to fulfill it.  She loves them both very very much. She prayed to God  to help  their friends. She wished them health and happiness.

Yesterday they were studying Assamese, when her friend called them, they wanted ‘business’ the board game, they went to give it and while she was sitting there she felt some sadness. They both were tired, so came back early. Nanha’s Birth day is just four days ahead and weather is excellent. They will celebrate it and make it a great occasion

9.10 am.Her morning chorus is complete and heart is filled with tender and soft fellings. Yesterday they went to TSK to celebrate nanha’s birthday. Really they enjoyed it. Jun was in good mood and Nanha was calm and happy. She was feeling so close to them. She wondered how she could be so rude to them on earlier occasions. They both are so loving and she is nothing without them. Seeing her friend suffering for her husband she finds some change in her attitude towards life. Emotions play a vital role in day to day life and one should spread only love and compassion through feelings not anger and hatred. she is at ease with herself  and jun. कल उनकी मारुति कार में ग्रिल भी लग गयी, बाहर से देखने में ठीक है पर अंदर से उतनी अच्छी नहीं लगती, सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो ठीक ही है. कल नन्हे ने “Scotland Yard” Board game  लिया, अभी उन्होंने इसे खेलना नहीं सीखा है, यकीनन यह एक रोचक खेल होगा. अभी तो उसे ‘असमिया’ का गृहकार्य पूरा करना है.



Sunday, February 3, 2013

रिमोट कंट्रोल वाली कार


आज नन्हा घर पर है, उसके स्कूल में रक्षाबंधन का अवकाश है. उसने नारियल की बर्फी बनाई है जो यकीनन जून को पसंद आयेगी. कल छोटे भाई का खत आया, वह उदास है पर उसकी कविता उसे मिली होगी..शायद कुछ पलों के लिए ही सही उसे उत्साह मिला तो होगा. कल शाम जून के विभाग के दक्षिण भारतीय सहकर्मी अपनी नव विवाहिता पत्नी को लेकर आए थे, उनकी माँ भी साथ थीं. वे लोग बहुत अच्छे लगे खासतौर पर उनकी पत्नी जिसका नाम भी पूछना वह भूल गयी. वह जीवन-उर्जा से भरी हुई थी और उसका व्यक्तित्त्व भी बहुत आकर्षक था.

साल का आठंवा महीना भी आधा बीत गया यानि यह डायरी अब उसके साथ कुछ ही वक्त रहेगी, फिर नया साल और नई डायरी. कितने वर्षों से कितनी ही डायरियां उसके साथ चली हैं लेकिन सही अर्थों में लिखना उसे अभी तक नहीं आया. डायरी अपने मन का आईना होती है लेकिन क्या वह, वह सब लिख पाती है जो लिखना चाहिए, कभी मूड नहीं होता, कभी समय नहीं, कभी रात को सोते वक्त कोई बात याद आती है लेकिन सुबह तक भूल जाती है. वैसे भी मन पर वश है कहाँ, जैसे आज लिखने को कह रहा है कल पलट भी सकता है. आज मौसम  अच्छा है, धुप मद्धिम है, जून के आने का वक्त हो गया है, अभी भोजन का कुछ कार्य शेष है मसलन रोटी बनाना, सो वह पाकशाला में चली गयी.

कल वह तीसरी बार कर्मचारियों के क्लब में लगा मेला देखने गयी, सोनू और उसका मित्र उत्साह से भरे थे, उसकी असमिया सखी को लॉटरी खेलने का मन था. वह यूँ ही सबके साथ गयी थी. कल कोई खत नहीं आया, पता नहीं उसे किन पत्रों की प्रतीक्षा है. दीदी, माँ-पिता, छोटी बहन, तीनों भाई, शायद सभी के पत्रों का. नन्हे को अगले वर्ष से वे पिलानी के पब्लिक स्कूल में पढ़ाएंगे, ऐसा उनका विचार तो है और अब धीरे-धीरे वह भी रूचि लेने लगा है.उसे एडजस्ट करने में ज्यादा मुश्किल नहीं होगी क्योंकि साल भर में मानसिक रूप से वह तैयार हो जायेगा. जुलाई में परीक्षा होगी. अभी पूरा एक वर्ष है. और इस एक वर्ष में उसे यहाँ के सेंट्रल स्कूल में जाना है, जो किसी भी लिहाज से आदर्श स्कूल नहीं है.

उसके साथ कई बार ऐसा हुआ है, पिछले हफ्ते एक दिन उसने सोचा कि बहुत दिनों से वह अस्वस्थ नहीं हुई है और कल से परेशान है इस सर्दी से. कल व परसों हल्की खराश सी थी गले में, लेकिन आज ऑंखें भी भारी लग रही हैं और आवाज भी बदल गयी है. कल शाम वे कहीं जाने के लिए तैयार हो रहे थे कि उनका परिचित एक पंजाबी परिवार आ गया, अच्छा लगा उनसे बातें करके, उनकी छोटी सी गुड़िया खूब बातें करती है. कल दोपहर को उसने गोलगप्पे बनाने का असफल प्रयास किया, पांच-छह ही फूले, बाकी की पापड़ी बन गयी. फिर जून ने अच्छी सी चाट बनाई-पापड़ी, आलू, चने की चाट. नन्हे की रिमोट कंट्रोल वाली कार का एक छोटा सा पार्ट कहीं खो गया कल रात, सुबह जल्दी उठकर वह ढूँढ भी रहा था..लेकिन मिला नहीं. कल उसका अंग्रेजी का टेस्ट है. कल नूना ने असमिया की किताब पढनी शुरू की थी, कम से कम इतनी असमिया तो सीख ही लेनी चाहिए कि किसी का हालचाल पूछ सकें.








Saturday, January 19, 2013

कभी खुशी कभी गम



अयोध्या में निर्माण तोड़ने पर लोकसभा में हंगामा, यूपी सरकार को चेतावनी..वही राममंदिर बाबरी मस्जिद विवाद. कल बहुत दिनों के बाद उन्होंने घर के कोर्ट में बैडमिंटन खेला और सांध्य भ्रमण को भी गए. मौसम सुधरा था पर रात इतनी तेज वर्षा हुई कि लॉन की हालत देखी नहीं जाती, माली भी नहीं आया है, सुबह तीन बजे के करीब जोरों का तूफान आया था और शायद ओले भी गिरे थे, आवाज से ऐसा लग रहा था और इस समय भी सूर्य देव आंखमिचौली खेल रहे हैं. सुबह उठते ही उसे गले में हल्की चुभन महसूस हुई, लिपटन का टी बैग शायद कुछ राहत दे.

उल्फा नेता परेश बरुआ हथियार समर्पण को तैयार नहीं. कल शाम लगभग साढ़े पांच बजे  फोन आया और साढ़े सात बजे जब वे क्लब से वापस आए, उनकी कार वे लोग ले गए. एक ही लड़का था, उम्र भी कुछ खास नहीं थी, उसने गुस्से में या आवेश में कुछ बातें कह दीं, जो उसे नागवार गुजरीं, और उसे लगता है कि जल्दी वह कार वापस नहीं करेगा. कल उस समय से कितनी ही बार मन में वे सारी बातें स्पष्ट हो आयी हैं, कितना दूसरी बातों में मन लगाये पर ध्यान उसी ओर चला जाता है, अब जब तक कार वापस नहीं आ जाती, ऐसा ही होगा.

आज तीसरा दिन हो गया. कल दिन भर आँखें दरवाजे पर लगी रहीं और कान आहटों को पहचानने में, पर कार वापस नहीं आयी. अब तो इंतजार करना छोड़ दिया है, आ जायेगी अपने आप. जून के चेहरे से हँसी ही गायब हो गयी है, आँखों में एक अजीब सा सन्नाटा. कुछ दिन पहले बल्कि पिछले हफ्ते आज ही के दिन तो वे कितने खुश थे, होली थी उस दिन. ठीक ही कहा है किसी ने-
मुरझा जाती हैं कुछ कलियाँ, सारी कलियाँ कब खिलती हैं?
इस दुनिया में सारी की सारी खुशियाँ किसको मिलती हैं ?

एक पल खुशी का तो दूसरा उदासी भरा, उसकी आँखें किसी भी पल बरसने को तैयार हैं, अंदर ही अंदर कोई घुटन सी खाए जा रही है जैसे, पर जानती है रोने से कुछ होने वाला नहीं है, इसी घुटन को अपनी हिम्मत बनानी है. ऐसे में जिन्हें वे अपना हित चिंतक समझते हैं तथाकथित मित्र गण भी कैसे चुपचाप बैठ जाते हैं..जैसे उनसे कोई परिचय ही न हो. वह ही मूर्ख है जो...पर यह सब लिखकर वह कोई अच्छा कार्य तो नहीं कर रही. इस दुनिया की यही रीत है हरेक को रोना अकेले ही पड़ता है, जबकि साथ हँसने के लिए कई साथी मिल जाते हैं.

कल रात आठ बजे कार मिल गयी. आज मन हल्का है और स्वास्थ्य भी ठीक है. कल कितनी कमजोरी महसूस कर रही थी, जून का भी यही हाल था कल शाम तक. अब सब पूर्ववत् हो गया है, हाँ वे कुछ और करीब आ गए हैं, दुःख व्यक्तियों को जोड़ता है और असली-नकली दोस्तों की पहचान भी कराता है. वे थोड़े गम्भीर भी हो गए हैं इस घटना के बाद..पता नहीं कितने दिनों तक.



Tuesday, January 15, 2013

हम दीवानों की क्या हस्ती



उल्फा लीडर भारत सरकार से बात करने के पक्ष में नहीं हैं, भगवान जाने असम का भविष्य क्या होगा. कल सूजी व नारियल के लड्डुओं के कारण वह कुछ ज्यादा नहीं लिख सकी, सो दिन भर बेचैनी सी रही, अजीब सी बेचैनी, जैसे हरारत हो गयी हो. दोपहर को जून अभी घर पर ही थे, वह सो गयी, नन्हे ने सब कुछ अपने आप किया, वह अब सचमुच बड़ा हो गया है, बहुत समझदार और बहुत प्यारी बातें करता है. अपने आप होमवर्क करके खाना खाकर सोने चला गया.
कल शाम जून एक फिल्म का कैसेट लाए थे, Hook  इंडिया टुडे में सुबह ही पढ़ा था उसके बारे में, कल्पना की उड़ान है पूरी फिल्म, अजीब-अजीब से दृश्य जादू लोक में ले जाते हैं. अभी पूरी नहीं देखी उन्होंने, नन्हे को बहुत अच्छी लग रही थी, पर सुबह स्कूल जाने से पहले बोला, उसे अंग्रेजी फिल्मों में या तो कॉमेडी अच्छी लगती है या जेम्स बॉण्ड की फिल्म. बच्चे पिता को अपना आदर्श मानते हैं, उसका अच्छा उदाहरण आजकल देखने को मिल रहा है, जून ने कुछ दिन पूर्व कहा कि वह हर सब्जी में आलू क्यों डालती है, उसे आलू अच्छे नहीं लगते, और दो दिन बाद नन्हा भी वही बात कह रहा है, जबकि आलू उसे बहुत पसंद थे. घर से पत्र आया है सासु माँ ने ननद के लिए तकिये के गिलाफ, टीवी कवर, और मेजपोश बनाने के लिए कहा है, कल वे तिनसुकिया जाकर कपड़ा लायेंगे, कल ही बाजार से  वह लक्ष्मी, उनकी नौकरानी के लिए ऊन लायी थी, पर पता नहीं उसे स्वेटर बनाना आता भी है या नहीं.

आज पूरा दिन व्यवस्तता में बीता. सुबह उसकी मित्र का फोन आया उनकी कार का छोटा सा एक्सीडेंट हो गया है, तिनसुकिया जाकर विंड स्क्रीन बदलवानी पड़ेगी. दोपहर के भोजन के बाद वे तिनसुकिया गए, लौट कर टीवी पर पहले बजट देखा, फिर शाम की फिल्म. डॉ मनमोहन सिंह ने कुशलता के साथ बजट पढ़ा बीच-बीच में हँसाते भी रहे, पीवी नरसिंहाराव को एक अच्छे वित्त मंत्री मिल गये हैं. उसने आज अपने केश भी कटवाए, जून को स्टाइल पसंद नहीं आया, चिढ़ाने लगे, कल फिर जाना होगा, टीवी देखते-देखते और दिन में जरा भी आराम न होने के कारण वह थकी हुई तो थी ही, उसे क्रोध  आ गया पर हमेशा की तरह उनका स्नेह, उनकी उदारता और मीठी-मीठी बातें..वह जल्दी ही हँसने लगी.
कल दोपहर उसकी असमिया सखी अपने बेटे को जो नन्हे का हमउम्र है, छोड़ गयी फिर शाम को वे लोग उसे लेने आये. दोनों बच्चों में बहुत दोस्ती है, मनोयोग से खेल खेलते हैं, कभी  कुछ योजनायें बनाते हैं. शाम को वे सब क्लब गए, टीटी खेला, पहले अभ्यास फिर दो गेम खेले.

आज भी आधा दिन टीवी के नाम, “चाणक्य” और विश्वकप श्रंखला में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मैच देखने में, भारत जीतते-जीतते... मात्र एक रन से हार गया. उसका मन उदासी से भर गया यह सोचकर कि पूरे भारत में कितने ही व्यक्ति जो मैच देख रहे होंगे बेहद उदास महसूस कर रहे होंगे. अब पाकिस्तान के साथ होगा अगला मैच उसे तो जीतना ही होगा. शाम को उन्हें पड़ोसी के बेटे के जन्मदिन की पार्टी में जाना था, वहाँ कई लोगो से मुलाकत हुई कुछ परिचित कुछ अपरिचित..रात को सोने की तैयारी करते-करते टीवी पर “मधुरिमा” देखा, भगवतीचरण वर्मा के गीत तो बहुत सुंदर थे पर छायांकन अच्छा नहीं लगा सिर्फ एक गीत छोड़कर...’वह एक छोटा सा विहग...अपनी उमंग में उमग’. ‘हम दीवानों की क्या हस्ती, मस्ती का आलम छोड़ चले’...भी बहुत अच्छा गीत है, बहुत पहले उनके स्वर्गवास पर धर्मयुग में पढा था उसने.
नन्हे का स्कूल शिवरात्रि के कारण बंद था, उसके साथ क्रिकेट खेला, पहले क्लब, फिर उसके मित्र के यहाँ ले गयी उसे. शाम को वे अपने एक परिचित परिवार में गए, शिवरात्रि का व्रत रखा था उन्होंने, छोटा सा आपरेशन होना है पेट का गृहणी का, वैसे तो जरा-जरा सी बात पर घबरा जाती है पर आज निर्भय लगी. घर आयी तो उसके पेट में हल्का दर्द हो रहा था, खाना बनाने का भी मन नहीं कर रहा था, खिचड़ी बना दी उसने जो नन्हे और जून दोनों को पसंद है. फिर चुपचाप बिस्तर में लेट कर ‘सरिता’ पढ़ती रही, सरिता के कुछ पुराने अंक पंजाबी दीदी ने दिए हैं.