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Wednesday, June 20, 2012

कामवाली का इंतजार


आज लग रहा है जो भी बदलाव था वह ऊपर ही ऊपर था, दरअसल लोग जब खुद उदास होते हैं तो आस-पास के वातावरण पर भी उसकी झलक पड़ने लगती है. वे वही देखते हैं जो उनका मन दिखाता है, आज उसका मन कितना हल्का है. वे पहले की तरह ही अनुभव कर रहे हैं. यही जीवन है. वह अक्सर सुबह न स्नान कर पाती थी न समय पर नाश्ता ही. जून की परीक्षा भी नजदीक आ रही है, वह रात को देर तक पढ़ता है पर ध्यान उसका उन दोनों की ओर ही रहता है. नन्हें के सब काम करना चाहता है.
शिशु की नींद गहरी थी, उसे मालिश करके बाँधकर सुलाने से आराम से सोता रहता है. सो दोपहर को उसने कई पत्र लिखे राखी भेजने के लिये सभी भाइयों को. घर से इस हफ्ते का पत्र अभी तक नहीं आया है, शायद सोमवार को आये, उसने सोचा. इसी महीने जून का जन्मदिन है और स्वतंत्रता दिवस भी, वे दोनों दिन बड़े जोश से मनाते हैं.
नन्हा बड़ा हो रहा है, खूब हँसता है, और रोता भी तो बहुत है. कल रात शायद कोई स्वप्न देखकर डर गया, पहले बहुत रोया फिर दुबक कर सो गया. उसके नए कपड़े सिलकर आ गए हैं, बहुत जंचता है वह उन वस्त्रों में. आज काम वाली अभी तक नहीं आयी है, कुनमुना कर, हिलडुल कर वह पुनः सो गया है, अभी उसे नहीं उठना चाहिए, महरी को अब आ ही जाना चाहिए, या वह आज नहीं आयेगी? उसने अलसाते हुए किचन की ओर देखा.