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Wednesday, March 27, 2019

नीरज की कविता




सुबह चार बजे वे उठे. वर्षा होकर थम चुकी थी सो प्रातः भ्रमण में कोई बाधा नहीं पड़ी. सड़कें धुलकर स्वच्छ हो गयी थीं और वृक्ष नींद से जैसे जग रहे थे. लौटकर प्राणायाम करते समय आयुर्वेद पर कुछ विचार सुने. मानव की हितायु होनी चाहिए, मात्र सुखायु नहीं, अहितायु तथा दुखायु तो कदापि नहीं. परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण हो तभी यह घटित होती है. जब वे अपनी अल्प बुद्धि से अपने जीवन को चलाते हैं तो दुःख के भागी होते हैं. जब प्रकृति के नियमों के अनुसार चलाते हैं तो जीवन धारा सहज रूप से बहती है. अस्तित्त्व के साथ एक होकर जीने का अनुभव कितना अलग होता है हर दिन. आज पहली बार किसी ने भीतर से कहा, वह विदेह है, आज से पूर्व न जाने कितनी बार ये शब्द दोहराएंगे होंगे, पर इनका वास्तविक अर्थ आज घटा लगता है. असम्प्रज्ञात समाधि भी एक दिन तो घटेगी ही ! आज नरेंद्र मोदी एप पर आज की सरकार को रेटिंग दी, अच्छा लगा, इस तरह सरकार और जनता के मध्य एक संवाद चलता है. सरकार के इरादे नेक हैं, यह तो उसकी चाल-ढाल से प्रतीत होता है. दो दिन पहले किसी उल्फा उग्रवादी ने तेल की पाइप में बम लगाया, खुद भी मारा गया, हजारों लीटर तेल व्यर्थ बह गया, आदमी की मूर्खता की कोई सीमा नहीं है.

आज क्लब में कविता पाठ प्रतियोगिता है. ‘गोपाल दास नीरज’ की कविता, ‘जब याद किसी की आती है’, उसने ही चुनकर दी थी. उसने भी याद कर ली है, प्रतियोगिता में भाग नहीं लेगी पर अवसर मिला तो सुना सकती है. मौसम अच्छा है. बांग्लादेश में आये ‘मोरा’ तूफान का असर उत्तर-पूर्व पर पड़ना ही था, वैसे उतना ज्यादा भी नहीं पड़ा है. परसों सुबह मंझले भाई से बात हुई, फिर भाभी से भी. भतीजी के साथ जो भी घटा, वह उन्होंने बताया, अब अलग होने के सिवा कोई रास्ता नहीं है. वह दो हफ्ते पूर्व घर वापस आ गयी है. परसों व कल भी दिन भर मस्तिष्क में वही बात याद आती रही. कल शाम को छोटी बहन से बात हुई. जीवन को उनके ही कर्म सुंदर या असुन्दर बनाते हैं. वे ही अनजाने में अपने दुर्भाग्य के निर्माता होते हैं, पर जानते नहीं कि इस दुश्चक्र से बाहर कैसे निकलें. कल जन्मदिन अच्छा रहा, फेसबुक तथा व्हाट्सएप पर ढेरों शुभकामनायें मिलीं. काव्यालय की संचालिका का मेल आया, वह उसकी एक कविता प्रकाशित करना चाहती हैं. दीदी अगले हफ्ते विदेश से वापस आ रही हैं, वहाँ ठंड बढ़ गयी है. परसों उनका जन्मदिन है, केक की जगह वह तरबूज काटती हैं जन्मदिन पर. छोटे भाई ने जून से कहा है, चाची जी के मकान के लिए कुछ मदद आजकल में भेज दें.

जून का प्रथम दिन ! रिमझिम झड़ी लगी है. आज पहली बार उसने रसगुल्ले की सब्जी बनायी. मृणाल ज्योति की पानी की समस्या के बारे में जानने के लिए जून भी आज उसके साथ जाने वाले हैं. उनसे जितना बन सके, समाज की सहायता करनी है. सद्गुरू सेवा पर इतना जोर क्यों देते हैं, अब समझ में आने लगा है. भीतर की शुद्धि तभी हो सकती है जब उनका मन सेवाभाव से युक्त हो. आज दिन भर पढ़ने का समय नहीं निकल पायी. ढेर सारी किताबें हैं आजकल पढ़ने के लिए, लाइब्रेरी की किताबें, उसके जन्मदिन पर नन्हे की भेजी किताबें. उसे नई पुस्तकों को सही प्रकार से रखने के लिए एक उचित स्थान की भी आवश्यकता है. जून आजकल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ देखते हैं.

आज बहुत दिनों बाद कम्प्यूटर पर कुछ लिखने का मन नहीं हुआ, किताब पढ़ती रही. पानी लगातार बरस रहा है. कल रात स्वप्न में देखा, वह एक छत पर जाती है. लाल और हरे फूलों वाली ड्रेस पहनी है. एक सखी मिलती है, कहती है, वही सुबह वाले वस्त्र पहने हैं, तो वह कहती है, नहीं, सुबह तो श्वेत कुरते पर गुलाबी फूल थे, फिर वह और ऊपर जाती है. बड़ा सा प्लेटफार्म है. उस पर ध्यान करने बैठती है, पर वह चारों तरफ टकराता है बरी-बारी से, फिर नींद खुल जाती है. पिछले दिनों नियमित ध्यान में नहीं बैठी शायद इसीलिए यह स्वप्न आया हो. इस समय मन शांत है, भीतर एक तृप्ति का अहसास भी है. कुछ पाने की लालसा ही मन को अशांत करती है. आज मंझले भाई-भाभी पिताजी से मिलने घर गये हैं, ईश्वर उन्हें भी सद्बुद्धि व शांति प्रदान करे.

Tuesday, July 4, 2017

बोगेनविलिया का पेड़



सदा खुश रहने के लिए बुद्धि को स्वच्छ रखना है. बुद्धि स्वच्छ हो तो उनके कृत्य भी स्वच्छ हो जाते हैं. बुद्धि को स्वच्छ रखने के लिए ‘मेरे’ के भाव का  का त्याग करना है. यहाँ सब कुछ मिला हुआ है, पहले देह फिर परिवार तथा फिर वस्तुएं ! सब कुछ परमात्मा का ही है. जितना-जितना उनका मोह घटेगा, प्रेम बढ़ता जायेगा. वे जब यह स्वीकार करना सीख जाते हैं, तब सारा फ़िक्र परमात्मा को दे देते हैं. आज टीवी पर सुंदर प्रेरणादायक वचन सुने, कोई दक्षिण भारत के संत थे-

Bring powerful completion in yourself and then every day, when you wake up, looks like Shiva is creating new world. When we are complete everything radiates completion, whatever we touch. When one is incomplete inside he or she cannot see the incompletion around him. We can change from karmic life to Avatar life. Move yourself to more and more of completion. Yoga gives us energy and little more we need we should from food. First rest should come from completion and little more from sleep. Prana is the greatest healer and completion is greatest rest.

शाम के सात बजे हैं. नैनी आज बगीचे से हरे प्याज लायी थी, उसी की रोटी बनाने का निश्चय किया है. आज दोपहर को बरामदे के सामने ही लॉन में लगा बोगेविलिया का पेड़ तेज हवा के कारण गिर गया. पहली बार गिरा तो वह घर के अंदर थी. माली को बुलवाकर खड़ा करने को कहा. एक घंटे बाद बाहर गयी तो एक बांस के सहारे खड़ा था. वह अक्सर वहीं बैठकर चाय पीती है. दोपहर को रोज की तरह वहाँ जाकर बैठी तो कुछ ही देर में पेड़ फिर गिर गया. वह उसके नीचे चाय के कप सहित दब गयी. मगर ‘जाको राखे साईंया मार सके न कोई’, न चाय के कप को कुछ हुआ न ही उसे. थोड़े से प्रयास से बाहर निकल आई. बाद में पुनः उसे अच्छी तरह से खड़ा किया गया. बहुत दिनों बाद आज पौधों में पानी भी खुद दिया. शाम को बच्चे भी आये, अब अगले बुधवार को आएंगे.

कल शाम को गुरूपूजा है उनके घर में, उसकी तैयारी शुरू कर दी है. फोन पर सभी को निमन्त्रण दिए. जून ने नये फोन खरीदे हैं उन दोनों के लिए, उन्हें जल्दी हो रही है कि नया सिम एक्टिवेट हो जाये. जिसे एक काम में जल्दी हो उसे हर काम में जल्दी होती है. उन्होंने दो दिनों से भगवद्गीता सुनना शुरू किया है. गुरूजी का छह सीडी का सेट है. जून भी सुन रहे हैं, पर उन्हें अभी संसार से मोहभंग नहीं हुआ है, सो बहुत दिल उसमें नहीं लगाते हैं. हरेक को अपनी गति से ही यात्रा करनी होती है. हरेक का मार्ग भी अलग होता है. आज टीवी पर गुरूजी को कहते सुना था, हरेक को शीघ्र विकास के लिए अपने जीवन में एक दिन पागलखाने में, एक दिन स्कूल में, एक दिन कोर्ट में तथा एक दिन अस्पताल में बिताना चाहिए. वह स्कूल तथा अस्पताल तो जा सकती है पर बाकी दो में जाना मुश्किल है. कल बहुत दिनों या कहें वर्षों बाद मामीजी से फोन पर बात की. परसों होली है, पर उन्हें इस वर्ष होली नहीं मनानी है. जैसे राखी मनाने का उत्साह नहीं था वैसे ही होली मनाने का भी भी मन ही नहीं है. पिताजी के बिना जैसे सब त्योहार अपनी आभा खो चुके हैं.