आज सुबह टीवी पर सुंदर वचन सुने थे. ज्ञान रत्नों से आत्मा को अपना श्रृंगार
करना है, फिर उस ज्ञान का उपयोग करना है.
सुने हुए को यदि व्यवहार में नहीं लाया, अपना संस्कार नहीं बनाया, तो सुनना व्यर्थ
ही है. योग की शक्ति से ही ज्ञान को भीतर स्थिर किया जा सकता है, अन्यथा स्वंय को
छलना ही कहा जायेगा. परमात्मा से यदि संबंध जुड़े तो आत्मा पवित्र बन जाती है,
पवित्रता की शक्ति स्वतन्त्रता की शक्ति है. पवित्र आत्मा को कर्मों के बंधन नहीं
बांधते. पञ्च तत्वों से बना यह तन भी तब आत्मा को बंधन नहीं लगता, वह इसका आधार
लेकर जगत में लीला करती है. वह देह में रहकर भी अशरीरी ही रहती है. ऐसी स्थिति में
दुःख का नाम भी नहीं रहता. इसी खुशी में आत्मा शरीर से मोह निकाल देती है. यदि देह
से ममत्व है तो आत्मा बंधन में है, जब तक पवित्र नहीं बने हैं, तथा कर्मातीत
अवस्था नहीं हुई है, तब तक विदेह भाव सिद्ध नहीं होता. देह सहित सब वस्तुओं से
ममत्व हटा देना है. जब देह इस स्थिति में नहीं है कि आत्मा स्वयं आनंद में हो और
अन्यों को आनन्द बांटे तो नई देह लेने का वक्त आ गया है, तब आत्मा नई राह पर निकल
पडती है. मक्खन से ज्यों बाल निकल जाता है, वैसे ही देह से आत्मा आराम से निकल
जाती है, यदि देह में ममत्व नहीं है.
स्कूल में दादा-दादी दिवस मनाया जा रहा है, उसे एक
भाषण देने के लिए कहा है. दोपहर को कुछ लिखने बैठी तो बचपन के कितने ही चित्र
सम्मुख आने लगे. दादी से सुनी कहानियाँ और दादा के यूनानी दवाघर से खाए स्वादिष्ट चूर्ण.
लगभग दस वर्षों तक वे सब साथ रहे. उसके बाद भी समय-समय पर मिलते रहे. आजकल कम ही
बच्चों को दादा-दादी का साथ मिल पाता है.
रात्रि के आठ बजे हैं. चार दिनों के बाद आज कलम उठाई
है. ब्लॉग पर आज कुछ भी पोस्ट नहीं किया, फेसबुक पर तस्वीरें अवश्य पोस्ट कीं. कल बड़े
भाई चले गये, जाते समय उनका भी मन भर आया था, दिन भर मन थोड़ा उदास रहा, पर वक्त के
साथ भावनाएं अपने आप ही सम्भल जाती हैं. उन्हें यकीनन यहाँ रहना अच्छा लगा होगा.
जून जब से आये हैं, उन्हें सर्दी-जुकाम की शिकायत है, ठंडे देशों से ही शायद यह
सौगात मिली है. उन्हें नीचे बैठने में दिक्कत हो रही है, सो कुछ देर कुर्सी पर
बैठकर प्राणायाम किया. दोपहर को एक सखी के घर गयी उसकी सासुमाँ का श्राद्ध था.
उसके बाद बच्चों की योग कक्षा में, अगले हफ्ते गाँधी जयंती मनाने के लिए उनसे कहा
है. कुछ सार्थक होना ही चाहिए. स्वच्छता अभियान के लिए कुछ करे ऐसा भी मन में आता
है. अपने समय और शक्ति का पूरा उपयोग करना होगा उसे, एक-एक क्षण का उपयोग करना
होगा. जून कल से दो दिनों के लिए गोहाटी जा रहे हैं. कल से दीवाली की सफाई भी
आरम्भ करनी है. पुब्लिक लाइब्रेरी से आयुर्वेद पर एक किताब भी लायी है, उस दिन भाई
को लाइब्रेरी दिखने ले गयी थी, वहीं मिली थी. काफी अच्छी किताब है.
मौसम आज भी सुहाना है. पिछले दिनों लेखन व साधना में
जो गतिरोध उत्पन्न हुआ, उसे पटरी पर लाने का सुंदर अवसर मिला है. सुबह स्कूल गयी.
बच्चों को योग सिखाया. कुछ बच्चे वाकई करना चाहते हैं, पर अन्यों के कारण कर नहीं
पाते. शिक्षिकाएं यदि अपनी-अपनी कक्षा के बच्चों पर थोड़ी नजर रखें तो सभी शांत रह
सकते हैं. उसने सोचा अगली बार यदि ऐसा हुआ तो वह स्कूल इंचार्ज से कहेगी.
प्रधानाध्यापिका कुछ दिनों के लिए बाहर गयी हैं. उनकी माँ वृद्धा हैं, उन्हें
भूलने का रोग हो गया है. भाई विदेश में रहते हैं. समाचारों में सुना, प्रधानमन्त्री
ने पाकिस्तान के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लिया है.
