Tuesday, September 8, 2020

बारिश की बौछार

 

आज सुबह घर से निकलने के लिए तैयार थे पर न ओला मिली न उबर, काफी देर इंतजार किया फिर नन्हे के मित्र ने कहा, उसकी कार ले जाएँ. आधे घण्टे में ही पहुँच गए. रास्ता बहुत सुंदर है, सड़क भी अच्छी है, गांव से गुजरते हुए, मन्दिरों के दर्शन करते सोसायटी के पिछले गेट से वे घर पहुँचे तो जाली के दरवाजे लेकर कारीगर खड़े थे. जो उनकी प्रतीक्षा ही कर रहे थे. थोड़ी देर में एसी लगाने दो मकैनिक भी आ गए. दोपहर तीन बजे तक दोनों काम हो गये. कुछ देर विश्राम करने के बाद वे वापस आ गए. कुछ देर पूर्व नीचे शॉप में गयी तो शीशे का दरवाजा इतना साफ था कि खुला समझकर टकरा गयी, ध्यान कहीं और था. दोपहर को योग वशिष्ठ पढ़ा था जिसमें चेतना के जागरण के सिवा और कोई बात ही नहीं है. स्वयं के प्रति सजग व्यक्ति को जगत के प्रति असजग तो नहीं हो जाना चाहिए. नन्हे ने गृहप्रवेश के निमन्त्रण के लिए  सुंदर इ कार्ड बनाया है. पंडित जी व कैटरर को उसने एडवांस भी दे दिया है. कल रात्रि गुरूजी का एक वीडियो देखा, ‘कला’ के बारे में समझा रहे थे. बहुत सुंदर विधि से उन्होंने कला व कविता की परिभाषा बताई. सुबह सोमनाथ में दिए उनके प्रवचन को सुना, अमृत के समान मधुर हैं उनके बोल ! इस बार की कविता का विषय है ध्यान, उसने सोचा व्हाट्सएप कविता ग्रुप में ‘ध्यान’ पर लिखी कोई पुरानी कविता पोस्ट करेगी. 

शाम को घर वापस आ रहे थे कि अचानक तेज बूंदें पड़ने लगीं, विंड स्क्रीन पर लगातार चल रहे वाइपर के बावजूद सड़क साफ नहीं दिखाई दे रही थी. जून आज भी नन्हे के मित्र की कार लेकर आये.  दोपहर को एसी यूनिट के सिलसिले में दो मकैनिक आये. उन्हें दीवार में हुए छेद को सीमेंट से बन्द करना था, छत से रस्सी के सहारे लटक कर उन्होंने यह काम किया, काफी खतरा था इसमें. इसके अलावा माइक्रोवेव ओवन भी आयी और तकिये भी, अक्टूबर में जब वे यहां आएंगे अपने साथ कुछ सामान लाना ही शेष रहेगा. किताबें, वस्त्र, कलात्मक वस्तुएं, गमले और कुछ फर्नीचर. आज पहली बार यहां के डिपार्टमेंटल स्टोर में गयी, एक महिला चला रही थी, साथ में थी उसकी दुबली, लंबी बिटिया.  कुछ छोटे-मोटे सामान खरीदे, दो रातें उन्हें यहाँ बितानी होंगी. दोनों बिल्लियां सो रही हैं, दफ्तर जाते समय नन्हा उन्हें खाना-पानी देकर बालकनी में बन्द कर देता है, ज्यादातर समय सोती रहती हैं. योग वशिष्ठ पढ़ते समय कैसी अनुभूति होती है. इस संसार में सारा भय, विषाद और दुःख तभी तक है जब तक मन है, यानि आत्मा नहीं है. एक ही आत्म तत्व विभिन्न रूपों में प्रकट हो रहा है, जब तक यह ज्ञान दृढ नहीं हो जाता, दुःख से छुटकारा नहीं हो सकता. आज दोपहर को उनके पड़ोसी आये थे, वह बहुत शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं सुबह साढ़े तीन बजे उठ जाते हैं, टहलने जाते हैं, और घर आकर प्राणायाम करते हैं. 


अतीत के पन्ने .....कॉलेज की अंतिम परीक्षा का प्रथम दिन है. कितनी ख़ुशी होती है जब किसी वस्तु को वे अंतिम बार विदा देते हैं. जैसे आज वह पहले कोर्स को दे देगी. कल पढ़ाई के बीच में थोड़ा सा विश्राम लेने के लिए निर्मल वर्मा की एक सशक्त कहानी पढ़ी, किसी विदेशी कहानी जैसे लगती है. 

पहली परीक्षा के बाद सात दिन का अंतराल था. दिन भर पढ़ाई की, शाम को टीवी पर फिल्म थी ‘गमन’, अच्छी थी, एक समस्या प्रधान फिल्म. 


दिन भर किताबों में बीता पर शाम को यहाँ क्लब का वार्षिकोत्सव था, अच्छा लगा सिर्फ एक नाटक को छोड़कर, उस नाटक की कथावस्तु एक घटिया नारेबाजी जैसी बनकर रह गयी, जो लोगों को हँसा जरूर सकती है पर कुछ सोचने पर विवश नहीं कर सकती. पढ़कर उसे वे वर्ष याद आ गए, दो-तीन नाटकों में उसने भी अभिनय किया था. एक का निर्देशन भी. उस दिन नाटक और लेख प्रतियोगिता का पुरस्कार उसे भी मिला था. उसकी पढ़ाई पूरी होने वाली थी, अब तो आत्मनिर्भर होना था, यही लक्ष्य था उसका अब नौकरी ढूंढना. शमे फिरोजा प्रोग्राम में सुना था कि जिंदगी बेमकसद हो तो जिंदगी नहीं रहती. एक सीधी सच्ची राह चुन कर उस पर चलते जाना है जैसे एक दिन एक जिन्न ने आदमी से कहा उसे खजाना पाना है तो इस रास्ते पर सीधा चलता  जाये, दांये-बांये देखा तो पत्थर बन जायेगा. 


6 comments:

  1. मनस्पर्शी कहानी

    हार्दिक शुभकामनाएं 🙏💐🙏

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  2. स्वागत व आभार !

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10.9.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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