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Tuesday, August 25, 2020

ओला और उबर

 

साढ़े ग्यारह बजे हैं दोपहर के या कहें सुबह के. आज धूप काफी तेज है. प्रातः भ्रमण के बाद लौट रहे थे तो उस सोसाइटी के वही सज्जन मिले जिन्होंने एक बार उन्हें पार्क में योग अभ्यास करते देखकर कहा था, यहां की सड़कें सभी के लिए खोल दी गयी हैं पर पार्क नहीं. आज मुस्कुरा कर अभिवादन किया. वापस आकर नाश्ता बनाया, इतवार को कुक नहीं आता है. सोनू को अपने सहेली की बेटी के नामकरण पर जाना है, वह लौटेगी तब वे सब नए घर जायेंगे. ‘तीन’ का शेष भाग आज देखा. आज स्वास्थ्य काफी ठीक लग रहा है. कैल्शियम, विटामिन्स आदि सभी डॉक्टर ने लिख दिए थे. आयु बढ़ रही है. नए घर में काफी काम रहेगा, साथ ही आश्रम भी जाना होगा, स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा. चिंता और तनाव से मन को मुक्त रखना होगा.

रात्रि के आठ बजे हैं. आज योग वसिष्ठ में प्रह्लाद की कहानी पढ़ी. दीर्घतपा की कहानी भी, जो वर्षों पहले सुनी थी. आत्मा में टिकना जिसने सीख लिया वह अपने ही मन की उहापोह से बच जाता है. एक ही तत्व से यह सारा जगत बना है, यह गुरू-वाक्य जब अपना अनुभव बन जाता है तब मन में न राग बचता है न द्वेष, कुछ पाने और और कुछ छोड़ने की आकांक्षा भी तब नहीं रहती, एक गहन विश्रांति में मन टिक जाता है. कल दोपहर बाद वे नए घर गए थे, सफाई का काम चल रहा था. कई मजदूर लगे थे, महिलाएं भी थीं. शाम को नन्हा व भांजा डिपार्टमेंटल स्टोर से चाय का सामान ले आये, वहां पहली बार चाय बनाई. सबने बैठकर पी, कुछ तस्वीरें उतारीं, भेजीं, सभी की बधाई मिली. पिताजी को फोन करके कहा, यहां आने का मन बनाएं पर उन्होंने असमर्थता दिखाई. जून को इसी माह देहरादून जाना है वहां से उनसे मिलने भी जायेंगे. सुबह बड़े भाई का फोन आया, दोपहर को बड़ी ननद का, दोनों को गृह प्रवेश में आने का निमन्त्रण दिया. आज सुबह वहां जाने के लिए न ओला मिल रही थी न ऊबर, काफी प्रतीक्षा के बाद कार आयी. नया घर सेट करने में कितना श्रम होता है. दोपहर जून को काफी काम करवाने पड़े. अभी वापस आकर विश्राम करने लगे, सो शाम का योग आदि कुछ भी नहीं हुआ आज. सोनू ने दोपहर का लन्च पैक कर दिया था जो उन्होंने बारी-बारी से खाया. कुक अब रात का भोजन बना रहा है. वहाँ काम कुछ आगे बढ़ा है, इलेक्ट्रिशियन आया था, एक बार उसे और आना होगा. कार जो कल बन्द हो गयी थी और वे उसे वहीं छोड़कर आ गए थे, अभी भी वहीं है. आज मकैनिक नहीं गया, सम्भवतः कल जायेगा, कल ही होम एप्लाइंसेस भी इंसटाल होंगे.


ग्यारह बजे हैं. आधा घन्टा पूर्व वे यहां पहुंचे हैं. पड़ोसी से बात हुई. एक नैनी जाती हुई दिखी और अपने आप ही रुक गयी. शाम को चार बजे आएगी. असमिया पड़ोसी की बहू स्थानीय है, उसने हिंदी में समझाया, यहां भाषा की समस्या उन्हें होने वाली है. भाषा सीखनी पड़ेगी, अच्छा है, आज से ही शुरू कर दे. बढ़ बजे पर्दे आने वाले हैं, उसके बाद फ्रिज व डिश वाशर लगाने वाला आएगा. शाम को वे वापस जायेंगे, इस घर से उस घर. अभी-अभी कन्नड़ सिखने का एक ऐप डाउनलोड किया. पहले दिन का पाठ सीखा जिसमें मैं, हम, तुम, मेरा, हमारा, तुम्हारा  आदि के लिए नानू, नाबू, नीनू, नन्ना, नम्मा, निन्ना हैं. मेरे लिए, हमारे लिए, तुम्हारे लिए आदि के लिए नानाडू, नामाडू, निनागे हैं. 


और अब उस अतीत के आईने में देखा, लिखा था...वह पागल होती जा रही थी, ऐसा उसे लगा. उसने सोचा कि जो जो बातें उसके साथ घटित हों उन्हें डायरी में लिखती जाये ताकि उसे पढ़कर उसकी केस हिस्ट्री से किसी डॉक्टर को कुछ ज्ञान मिल सके फिर उसने आइना देखा और लगा उसकी आँखें हँस रही हैं और यूँ लगा कि वह जिन्दा है, जिन्दी जीती जागती ! और वह खिलखिला कर हँस पड़ी, पागल कहाँ है वह ! 


उस दिन वह बेहद खुश थी, एक पत्र आया था साहस और उम्मीद भरा पत्र, समझदारी और अच्छी सलाहों से भर पत्र, अपनेपन और हास्य से भरा पत्र. वह हमनाम सखी भी मिली उसे रस्ते में, वे बातें करते घूमते रहे मधुबन में ठंडी घास पर नंगे पाँव. उन्होंने निष्कर्ष निकाला, जो स्नेह का प्रति उत्तर स्नेह से देना नहीं जानती वह कैसे कविता की अधिकारिणी बन सकती है. उस दिन सुबह दादी के यहां भी गयी थी और मासी के यहां भी. उसके पेन की निब जो खराब हो गयी थी बदलवाई, और सोचा अब किसी को नहीं देगी, इसके साथ भी एक स्मृति जुड़ी है, उसकी हर वस्तु की तरह या हर पेन की तरह. एक जानकारी भी मिली थी उस दिन, अभी कुछ दिनों पहले तक क्वार्क्स सबसे छोटे कण माने जाते थे किसी तत्व के लेकिन एक महीने पहले किये गए रिसर्च के अनुसार अब प्रियोन्स सबसे छोटे कण हैं.