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Thursday, August 27, 2020

आर्थर मिलर का नाटक


रात्रि के आठ बजने वाले हैं, कुछ देर पूर्व ही वे इस घर लौटे हैं. आज भी वहाँ नैनी से सफाई करवाई. नन्हे ने काफी सामान भी भेजा, सभी को उनके यथोचित स्थान पर रखा, घर काफी सुंदर लग रहा था, छोटी बहन से वीडियो कॉल पर बात की, घर दिखाया. दीदी शायद व्यस्त थीं. वापस आकर कपड़े समेटे व किचन के बर्तन, कुक खाना बना रहा है. बिल्लियों को एक बरामदे से दूसरे में शिफ्ट किया. कल शाम को इस समय गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा होने लगी थी, यह बरामद गमलों में पानी भर जाने से बाहर आयी मिट्टी से गंदा हो गया था, आज मौसम ठीक है. कल नन्हे की कम्पनी का स्थापना दिवस था, उन्होंने खाने का इंतजाम आउटडोर में किया था पर मौसम का मिजाज बदल जाने से उन्हें सारा कार्यक्रम बदलना पड़ा. कल आश्रम में गुरूजी को कन्नड़ में बोलते सुना, अच्छा लगा, कई शब्द संस्कृत व हिंदी के भी हैं. कल पिताजी ने तस्वीरें देखीं और बधाई दी. 


शाम के साढ़े आठ बजे हैं, असम में होते तो रात्रि के. सुबह दस बजे वे घर से निकले थे,  पौने दस बजे तक सुबह के सारे काम हो चुके थे और आज तो व्हाट्सऐप व फेसबुक की गलियों का एक-एक  चक्कर भी लग गया था. पहले पर्दों के शो रूम में गए वहाँ से एक बजे नए  घर पहुँचे, साथ लाया लन्च खाया. रास्ते में ढेर सारे भुट्टे कल दिखे थे, आज भुट्टे के खेत दिखे. जंगल व गांव के बीच से जाता हुआ रास्ता बहुत अच्छा है. दीदी का फोन आज आया, जून ने उन्हें घर दिखाया. दोपहर को सोलर पैनल का सिस्टम सेट हो गया, फिर जाली के दरवाजों की नाप लेने कारीगर आये, उसके बाद सफाई कर्मचारी. घर के दायीं तरफ का कचरा अब उठा लिया गया है तथा पिछली गली में जाने वाला शॉर्ट कट रास्ता भी बन्द कर दिया है. अब आते-जाते लोगों की ताक-झांक नहीं होगी. नन्हे का कहना है कि कुछ दिनों में लोग फिर खोल लेंगे, पर उसे लगता है कुछ दिन बन्द रहने से लोगों को दूसरे रास्ते की आदत पड़ जाएगी. आज एशियन पेण्ट वाले भी आये, सीढ़ी के पास की दीवार पर ग्रे रंग करना है, कल पूरा हो जायेगा. कूरियर से चाय बनाने वाली इलेक्ट्रिकल केतली आयी और मॉप के साथ ट्विन बकेट भी, नन्हे को घर में काम आने वाले सभी सामानों की जानकारी है. अक्टूबर में उनके आने तक वह पूरा घर सेट कर ही देगा. वह स्वतन्त्र विचारधारा रखता है, किसी की भी टोका-टाकी उसे पसन्द नहीं है. हर आत्मा की पहली मांग है पूर्ण स्वतन्त्रता ! इस समय वह फोन पर इंटरव्यू ले रहा है. सोनू आज देर से आने वाली है. कुक खाना बनाकर चला गया है. आज उससे एक गास्केट जल गया, जो दूसरे कुकर के तले पर चिपका था. कल उन्हें चार दिनों तक आश्रम में रहने के लायक सामान लेकर जाना है और सम्भव हुआ तो उसके बाद नए घर में ही रुक जायेंगे. 


बरसों पहले की बात ....कल रात नाटक सुनकर सोयी थी. स्वप्न में नाटक देखा पर नाटक के पात्र वास्तविक बन गए थे और उस सेल्समैन ने किताबें सचमुच दी थीं बस में बैठे यात्रियों को ! उसे भी एक किताब दी थी, कोई धार्मिक पुस्तक थी. उस नाटक के अंतिम डायलॉग सुने जो सेल्समैन और उसका विरोधी बोलते हैं.  उसके पहले क्या कारण था कि उसे किताबें मुफ्त बांटनी पड़ी थीं. एक कोर्ट सीन था, अदालत फैसला देती है कि उसे ऐसा करना होगा और उस बुद्धू लड़की को भी देखा जिसे वह सबसे पहले किताबें देता है. स्टेज पर किताबें ही किताबें हो गयी थीं, नाटक के बाद वह सचमुच किताब घर लायी थी. आर्थर मिलर का नाटक ‘डेथ ऑफ़ अ सेल्समैन’ कितना प्रभावशाली रहा. उसे उस सेल्समैन पर तरस आता है, मोटा, बुद्धू दीखता था पर वह कितना महत्वाकांक्षी था और लिंडा तो देवी थी.  वह कहाँ गलत हो गयी कि... शायद वह अपने पति से अत्यधिक प्रेम करती थी, अपने पुत्रों से भी अधिक. क्यों उसे इसकी जरूरत थी पर वह होटल और बस्टिन में वह लड़की. हैप्पी तो जानता था तभी वह अपने पिता का आदर नहीं करता था, प्यार जरूर करता था. वह सेल्समैन झूठ ही खाता था, झूठ ही ओढ़ता था, झूठ ही पहनता था, तभी वह कभी सफल नहीं हो पाया. वह स्वप्न के महल खड़े करता था फिर काल्पनिक बातों को सत्य बताता था. लिंडा इसे समझती नहीं थी, वह भी उस पर दया करती थी और वह भी तो उसे कितना मानता था.