Thursday, January 17, 2013

बच्चन की मधुशाला



आज सोमवार है, मौसम वही बादलों वाला, ठंड इतनी, जितनी दिसम्बर-जनवरी में होती है, चिड़ियों की चहकार के कोई शब्द नहीं, कुछ देर पूर्व फोन की घंटी बजी थी जिसकी आवाज पुरे घर में गूंज गयी थी. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मत हो रहा है, राव सरकार के लिए आसान सी चुनौती ! 

टीवी पर भारत और वेस्टइंडीज के बीच मैच चल रहा है, उसे सिर्फ २३ रन और बनाने हैं, लगता है भारत हार जायेगा, और सेमी फाइनल में शायद नहीं पहुंच पायेगा. हारते हुए देखना अच्छा नहीं लग रहा पर टीवी बंद कर दे, ऐसा भी तो नहीं कर सकती. आज नन्हे ने सुबह पिया दूध निकाल दिया, उसने कहा, स्कूल मत जाओ, अगर स्कूल में कुछ समस्या हुई तो, वह बोला टीचर से ‘एक्स्यूज मी’ कहकर सिंक के पास चला जाऊँगा और कुल्ला करना भी आता है, कितना क्यूट है वह.. स्कूल जाना उसे बहुत जरूरी लगता है, अच्छा भी लगता है.

आज भी ठंड काफी है और उसका मन कुछ कहना चाहता है, अभी कुछ देर पूर्व उस सखी का फोन आया जिसे देखने वह अस्पताल गए थे, बार-बार धन्यवाद दे रही थी, कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें कहने से उनकी खूबसूरती खत्म हो जाती है, उन्हें सिर्फ महसूस करना और करवाना चाहिए.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैच, भारत की हार, सेमीफाइनल से बाहर. जून ने फोन पर कहा कि आज उनके विभाग में जी.एम की विदाई पार्टी है, वह हिंदी या अंग्रेजी में एक छोटा सा भाषण लिख दे, उसने लिख तो दिया है, पता नहीं उसे पसंद आता है या नहीं.

शनिवार यानि व्यस्तता भरा दिन..सुबह अभी पूरी गुजरी नहीं है, नन्हा पड़ोस में खेलने गया है, वह कुछ देर पहले अस्पताल से आयी है, बाएं तरफ वाली पड़ोसिन से कुछ देर बात की, उसकी बेटी भी नन्हे के स्कूल में पढ़ती है.

आज कुछ देर पूर्व ही किचन में होली के लिए गुजिया और नमकपारे बनाते समय शायद देर तक खड़े रहने के कारण या गर्मी के कारण उसे चक्कर सा आ गया, हल्कापन सा लगा जैसे गिर ही जायेगी, नौकरानी भी वहीं थी, वह बेल रही थी, सब उसी पर सौंप कर वह कुछ देर के लिए लेट गयी, फिर स्नान करके एक कप दूध पिया. स्टेमिना नहीं है शरीर में..यह तो अच्छा है परिवार छोटा है नहीं तो एक दो घंटे किचन में खड़े होने पर आये दिन यही होता, गरमी भी यकायक बढ़ गयी है. जून कल दफ्तर से लौटे तो उदास थे, उनका पेपर टाइप नहीं हो पाया था आज जमा करना था, अब अगर आज हो जाये तो कल जमा कर सकते हैं. उनके बगीचे में इस वर्ष पॉपी के सुंदर डबल फूल खिले हैं, नन्हा स्वेटर पहन कर स्कूल गया है, कहता था क्या पता मौसम बिगड़ जाये, खूब बातें बनाता है. उसने सोचा है, होली पर जिन लोगों को वे बुलाएँगे उन्हें हँसाने के लिए पेयर-वाइज टाइटिल लिखेगी, बहुत साल पहले घर पर सभी को दिए थे.

होली का उत्सव अच्छी तरह से बीत गया. आज से उसने मैटी की डबल बेड की चादर काढ़नी शुरू की है, इस उम्मीद पर कि एक दिन तो यह पूरी हो ही जायेगी. साथ ही बच्चन की मधुशाला सुन रही है वह कैसेट से, अच्छा लगता है सुनना, हालाँकि वह इतना समझ नहीं पाती इसका वास्तविक अर्थ.

शनिवार को दोपहर को दो बजे नन्हे का एक मित्र आ गया खेलने, चार बजे उसकी माँ आयी, यानि उसकी सखी, फिर छह बजे उसके पापा आए जून के मित्र, पूरा दिन उन्हीं के नाम...दोस्ती के नाम पर सब सहना पड़ता है. परसों जून का पेपर ठीक पढा गया, इतने दिनों की व्यस्तता खत्म हो गयी है. आज उसे नन्हे के स्कूल जाना है, सिल्वर जुबली कार्यक्रम के सिलसिले में. घर से पत्र आया है, छोटी ननद के विवाह की तिथि तय हो गयी है.

बेचैनी यह आतुर मन की
अकुलाहट सूने नयनों की
अंतहीन भटकन कदमों की
प्रज्ज्वलित ज्वाला अंतरस्थल की !

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