ब्रह्मकमल की कलियाँ
आज दिन भर मौसम ठंडा बना रहा। बीच-बीच में होने वाली वर्षा के कारण तापमान पच्चीस डिग्री से ऊपर गया ही नहीं।सितम्बर में ओबीए की मीटिंग के लिए उन्हें कोयंबटूर जाना है। जून ने लोगों से होटल की बुकिंग के लिए एडवांस लेना शुरू कर दिया है। कल वे नन्हे का जन्मदिन मनायेंगे। सोनू श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी, जून ने केक का ऑर्डर दे दिया है। उनके फ़्लैट में काम पूरा हो गया है, वे देखने गये थे। घर पूरी तरह साफ़ था, सभी कुछ ठीक था। अब उसमें रहने वाले लोगों का इंतज़ार है। किरायेदार आयेंगे या ख़रीदार, यह तो समय ही बतायेगा। कल दो लोग घर देखने आने वाले हैं।आज सुबह नाश्ते में जून ने दोसा बनाया। सोनू ने साँवा चावल के साथ अलसी के बीज भी ब्रेड में डाले थे। लंच में पालक का सूप, कॉर्न और सैंडविचेज खाकर वे सरजापुर रोड पर स्थित ‘अरुआनी ग्रिड’ गये। जो बहुत बड़े इलाक़े में फैला एक गो कार्टिंग स्थल है। नन्हे ने वहाँ रेस कार चलायी। बहुत तेज गति से दौड़ती हुई कारें रोमांच उत्पन्न कर रही थीं। सूर्यास्त का समय हो रहा था, जब वे वहाँ से निकले। वापसी में हस्कर झील पर रुके। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास स्थित इस विशाल, शांत और सुंदर झील के किनारे बगीचे और भ्रमण पथ बने हैं; मानो यह एक पिकनिक स्थल हो।भविष्य में वे सभी फिर एक साथ वहाँ जाएँगे। नन्हे ने बताया जब उसकी कंपनी का आईपीओ आ जाएगा तब वह कुछ अन्य कार्य करने की सोच सकता है।उसे ‘एक जीवन एक कहानी’ का पिछला अंक पढ़कर अच्छा लगा। उन्होंने सोचा है, नन्हे के चालीसवें जन्मदिन पर वे सभी लक्ष्यद्वीप जाएँगे। पापाजी से बात हुई, उन्हें इस महीने का ‘नवनीत’ का अंक मिल गया है।उन्होंने गूगल से हुई बातचीत का विवरण बताया, नन्हे को आशीर्वाद भी दिया। उनकी बातें सुनकर बहुत आनंद होता है। आज सोनू ने उसे इंस्टाग्राम के बारे में कुछ जानकारी दी।
आज उन्होंने ‘बहत्तर हूरें’ देख ली, दिल को छूती है यह फ़िल्म, इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है, पर उस सोच के ख़िलाफ़ है, जो युवकों को दहशतगर्द बना रही है। शाम को नन्हे का फ़ोन आया था, वह खुश लग रहा था, अच्छी तरह से तैयार भी था। आज उन्होंने ‘तरला दलाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखनी शुरू की है, अच्छी है। भारत की होम शेफ़ और कुकिंग पुस्तकों की प्रसिद्ध लेखिका तरला दलाल की पहली पुस्तक उसने वर्षों पहले ख़रीदी थी, और कितनी ही स्वादिष्ट डिशेज़ उसे पढ़कर बनायी थीं। उनकी एक पुस्तक उसे उपहार में मिली थी, उसे फिर से खंगाला। नन्हे को भी अवश्य याद होगा, उसकी पसंद के ब्लैक फारेस्ट केक बनाना भी नूना ने उसी पुस्तक से सीखा था। उनकी संघर्ष भरी जीवनी पर आधारित है यह फ़िल्म।
आज सुबह व शाम को बहुत दिनों बाद ‘योग साधना’ में अद्भुत अनुभव हुए। उनके भीतर चिदाकाश है और अनेक रहस्य छिपे हैं। ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ ! पर वे थमकर देखते ही कहाँ हैं ? आज जून ने शाम को स्वयं कहा कि वह उसे कार चलाने का अभ्यास करायेंगे। उन्हें अवश्य ही तरला फ़िल्म से प्रेरणा मिली होगी। उनके भीतर भी पत्नी को आगे बढ़ाने में योगदान देने के लिए तरला दलाल के पति नलिन दलाल पर गर्व हुआ होगा।
कल की तरह आज भी वे ड्राइविंग के अभ्यास के लिए गये। आज कई दिनों बाद हारून ख़ालिद की पुस्तक ‘वॉकिंग विद नानक’ आगे पढ़ी। धर्म के नाम पर कितने सिखों और हिंदुओं को मुस्लिमों ने मारा, इसका ज़िक्र भी वह करते हैं। आज भी यह हिंसा कम नहीं हुई है। आज सुबह वे पब्लिक हेल्थ सेंटर भी गये थे।ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था। उसके लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र चाहिए। वहाँ पता चला, डाक्टर राधा मीटिंग में हैं, शाम तक मिलेंगी। वे वहाँ से फ़ोरम मॉल चले गये। नयी-नयी सब्ज़ियाँ मिल गयीं, शलजम, भिस, टिंडा और परवल, जो स्थानीय बाज़ार में नहीं मिलतीं।
दीदी का फ़ोन आया। उत्तराखण्ड में कल उनके घर में बाढ़ का पानी भर गया था। विदेश से उनके दोनों पुत्र आये हुए हैं।सबने मिलकर पानी बाहर निकाला।पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है। प्रधानमंत्री कल फ़्रांस जा रहे हैं , वहाँ पिछले दो हफ़्तों से हिंसा हो रही है। भारतीय सेना की टुकड़ियाँ फ़्रांस के राष्ट्रीय दिवस में भाग लेंगी।
आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया की। इतवार को नाड़ी परीक्षा है। शुक्रवार से ‘हैप्पीनेस कोर्स’ भी होने वाला है। आज सुबह वे देर से उठे। एक बार उठने के बाद दुबारा सोने पर एक स्वप्न देखा। कितना विचित्र था वह स्वप्न, अनोखे फूल तथा जीवंत पंछी-पशु देखे। कैसे मन स्वयं ही सभी आकार ग्रहण कर लेता है स्वप्न में।
आज वे असम में जून के अधिकारी रह चुके मित्र व उनके परिवार से मिलने गये। उन्होंने सदा की तरह स्वागत किया। गृह स्वामिनी ने दक्षिण भारतीय भोजन खिलाया। मूँगफली का लड्डू और गुड़ वाली काफ़ी भी स्वादिष्ट बनी थी। बाद में इस्तेमाल करने के लिए घर का बना इडली मिश्रण भी उसे दिया। वहाँ से वे कंपनी के एक स्वर्गीय वरिष्ठ अधिकारी की वृद्धा पत्नी से मिलने गये। उन्होंने अपने पुराने दिनों के अनेक किस्से सुनाये। मनीपाल व नारायण दोनों अस्पतालों में उनके पति का इलाज हुआ था। उन्हें काफ़ी प्रयत्न करना पड़ा था ताकि कंपनी से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर सकें। अगले हफ़्ते से वह महाजोंग सिखाने वाली हैं। अपनी सोसाइटी में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह भाग लेती हैं। वह नौवें दशक में हैं, पर इस उम्र में भी बहुत सक्रिय हैं।
पापाजी ने भी ओशो की किताब का कुछ भाग सुनाया।वह मानवों के मध्य होने वाले हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ थे, सारे संत होते हैं, जैसे गुरु नानक थे।अपने समय से बहुत आगे। हिंदू-मुस्लिम दोनों को आपसी भेदभाव भूलकर मेल-मिलाप से रहना सिखाते थे। ब्रह्म कमल में फिर से कलियाँ आयी हैं, शायद एक-दो दिन में खिलेंगीं।
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