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Wednesday, July 8, 2026

माई

माई 


आज सुबह भी नूना ने सूर्योदय की सुंदर तस्वीरें उतारीं। वापस आकर वे प्रतिदिन की तरह छत पर गये, हवा ठंडी थी, पर एक घंटे बाद धूप निकल आयी थी। दरवाज़े पर नयी घंटी लगी है, उसकी आवाज़ ऊपर तक नहीं गई, नीचे आये तो देखा, नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी।उसने ध्यान दिया, आजकल नाश्ता, लंच, डिनर सब कुछ गाय के दूध से बने मक्खन या घी से ही बन जाता है, नंदिनी दूध इस हिसाब से बहुत शुद्ध है।शाम को टहलते समय इसरो के एक भूतपूर्व अधिकारी व उनकी पत्नी से मिले, कुछ देर बातचीत होती रही।उन्होंने जून को सोसाइटी के नये बने तरणताल में तैरने आने के लिये कहा है। कल उन्हें ख़ाली पड़े उस फ़्लैट में भी जाना है, इंटीरियर कराने की बात करने के लिए दो बढ़ई बुलाये हैं। घर बिक नहीं रहा है, इसलिए किराए पर देने की बात मन में आई है। जून को व्यस्त रहने के लिए एक रोचक काम भी मिल जाएगा। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं । असम के एक पुराने परिचित यहाँ आये हुए हैं, उनसे मिलने के लिए वेगा मॉल जाने को भी तैयार हैं। जीवन ऐसे ही रंग बदलता रहता है। पापाजी से बात हुई, वह अपनी बात कहते रहे, सुनने में अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होने लगी है। असमिया सखी से बात हुई, वह अपना घर बनवा रही है, आने वाली बाधाओं को ख़ुशी-ख़ुशी झेलते हुए।

अभी कुछ देर पहले नन्हे का फ़ोन आया।वह कल सुबह आएगा। जून की कार आज उस सोसाइटी के गैराज में खड़ी करते समय ख़ंबे से टकरा गई थी, जहाँ वह बढ़ई से मिलने गये थे। नन्हा उनकी गाड़ी ले जाएगा व अपनी छोड़ जाएगा। उसमें तीन सौ साठ डिग्री देखने वाला कैमरा लगवाना है जो चारों तरफ़ किसी भी वस्तु के निकट आने पर अलार्म बजा देगा। उसके बाद कार का डेंट भी ठीक करवाना है। नन्हे ने एक बार भी सीख नहीं दी कि गाड़ी ठीक से पार्क करनी चाहिए थी। दुर्घटना तो किसी से भी हो सकती है। दोनों बढ़ई अपना कोटेशन देंगे, जून उसमें से एक का चुनाव करेंगे। रात्रि भ्रमण के समय उन्होंने एक बच्चे के साथ कुछ देर बैडमिंटन खेला, वह अकेला ही खेल रहा था। पापा-माँ दोनों जॉब में व्यस्त रहे होंगे। कामकाजी महिला के बच्चे (यदि अकेला बच्चा हो तो और भी )कितना अकेलापन महसूस करते होंगे। आज एओएल का एक अनुवाद कार्य आया है। अक्षय तृतीया के दिन बृहस्पति मेश राशि से मीन राशि में जा रहे हैं, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी के बारे में है। आज उसने नैनी से ज्वार की रोटी बेलना सीखा। इतना कठिन भी नहीं है, उसे लगातार घुमाते रहना है, वरना बिना टूटे हाथ पर उठा नहीं सकते। 

अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। आज एक नये रास्ते पर गये, कुछ नये घर देखे। हर घर अपनी तरह से बेहद सुंदर लग रहा था, अलग-अलग डिजाइन और अलग-अलग पौधों से सजा। श्वेत-श्याम रंग का एक बड़ा सा चितकबरा कुत्ता मिला, छोटी गाय के आकार का, उसका नाम उस दिन किसी ने बताया था, शायद डालमेटियन, या डालमेशियन । आज श्री अरविंद की पुस्तक ‘ऐस्से ऑन गीता’ पर एक व्याख्यान सुना, श्री अरविंद ने गीता को समझने की एक नयी दृष्टि दी है। शाम को पापाजी से काफ़ी देर तक बात हुई, वह ठीक से सुन भी पा रहे थे। उन्होंने कनाडा से आये छोटे नाती से हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। जब वह छोटे थे और पाकिस्तान से भारत आये थे, वह उनकी उस समय की कहानी सुन रहा था।उनके दादाजी का मकान गाँव में था, वह खेती करते थे। चार भाइयों में बँटवारा हो गया। उनके पिताजी को खेती में रुचि नहीं थी, अपना थोड़ा-बहुत हिस्सा लेकर वह परिवार के साथ शहर आ गये। हकीम का काम सीखकर उसी को आजीविका का साधन बनाया। बाद में विभाजन हुआ और भारत आकर नये सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। आज वह आज दोपहर उसने कुछ देर ध्यान किया, उसे लगता है, प्रगति नहीं हो रही है, पर यह भी तो अहंकार को बढ़ाना ही होगा। ईश्वर ने जहाँ रखा है, वहीं रहकर मन को शुद्ध करना है। नन्हा आज सुबह नहीं आ पाया था, जून अपनी कार गैराज में दे आये हैं। परसों मिलेगी। 

आज ईद है। जून ने चार किलो इमाम पसंद आम मँगवाये हैं। दुकानदार अपनी गाड़ी से घर आकर दे गया, साथ में उसका छोटा सा बेटा भी बैठा था। निकट ही क़स्बे के बाज़ार में उसकी फलों की दुकान है, शायद एक से अधिक। पूरे मौसम वे उसी से आम लेते हैं। आज सुबह वाली नैनी नहीं आयी, उसके ससुर का देहांत हो गया, शायद हफ़्ता भर न आये।शाम वाली भी अगले हफ़्ते छुट्टी पर जा रही है।    

आज सुबह वह छत पर योग साधना करने गयी तो सोलर पैनल के नीचे पड़े बोगनवेलिया के फूलों को देखा, जो झर कर उड़ते हुए वहाँ इकट्ठे हो जाते हैं। प्रेरणा हुई कि दायीं आँख से देखे, उठने के बाद से कुछ भारी लग रही थी। फूलों का रंग मटमैला दिखा, फिर बायीं आँख से देखा तो हल्का गुलाबी। मोबाइल पर मोतियाबिंद के बारे में पढ़ा, सुना, जून को बताया तो उन्होंने नन्हे को बता दिया। नन्हे ने डाक्टर से मिलने का समय ले लिया और वे फल खाकर आँख के अस्पताल चले गये। नन्हा वहीं आ गया था। अगले शनिवार को सर्जरी होगी। मल्टी फ़ोकल लेंस लगाया जाएगा। परमात्मा की असीम कृपा है कि समस्या का पता चलते ही समाधान सम्मुख आ गया। नूना, नन्हे व जून का जितना शुक्रिया अदा करे वह कम है। दोनों उसका बहुत ख़्याल रखते हैं। शाम को पापाजी ने पूछा, आज फ़ेसबुक पर कुछ पोस्ट नहीं किया। सर्जरी के बाद तो कुछ दिन कंप्यूटर व मोबाइल से दूर रहना होगा, तब उन्हें बताना पड़ेगा। टीवी पर पहली बार आशा भोंसले द्वारा अभिनीत एक मार्मिक फ़िल्म देखी, ‘माई’ बहुत दिनों बाद पद्मिनी कोल्हापुरे को भी देखा। सासु माँ की कितनी बातें याद आ गयीं, जब उन्हें भी भूलने की बीमारी हो गई थी। 

आज सुबह लगभग दस बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। सोनू के माँ-पापा भी आये थे। दोपहर को बच्चों ने स्वादिष्ट ‘थाई भोजन’ बनाया। सभी को पसंद आया। सभी ने एक साथ बैठकर कुछ देर एक फ़िल्म देखी, फिर निकट की एक झील पर ड्रोन उड़ाने गये। वहाँ बहुत भीड़ थी, कुछ बच्चे और महिलाएँ झील के पानी में उतर गये थे। शायद वे पहली बार वहाँ आये थे। वे लोग एक दूसरी झील पर गये, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग थे, वातावरण में शांति थी। वहीं चटाई बिठाकर कुछ देर सब बैठे और साथ लायी चाय का आनंद लिया। शाम को लौटने में सवा छह बज गये थे।