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Monday, July 27, 2026

सूरज के अठारह पौधे

सूरज के अठारह पौधे


आज भी वे आयुर्वेदिक अस्पताल गये थे। पंचकर्म के अगले अंग ‘अभ्यंग’ का आज प्रथम दिन है। वैद्य ने उन्हें इसके बारे में आवश्यक जानकारी दी। ग़लत आहार-विहार, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, व्यायाम की कमी आदि कारणों से शरीर में त्रिदोष इकट्ठा हो जाते हैं, औषधि युक्त गर्म तेल से मालिश करने से अर्थात अभ्यंग से शरीर को स्वस्थ किया जाता है। इससे तन और मन की ऊर्जा में संतुलन आता है। वात के कारण शरीर में आये रूखेपन को यह दूर करता है। रक्त प्रवाह व अन्य द्रवों के प्रवाह में सुधार आता है। जोड़ों और मांसपेशियों की अकड़न-जकड़न दूर होती है। त्वचा की सारी अशुद्धियाँ दूर होती हैं और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। पाचन तंत्र ठीक होता है।  शिरोधारा के लाभ भी बताये, इससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है। नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इसमें जड़ीबूटियों से युक्त गुनगुने तेल को मस्तक पर धारा के रूप में डाला गया। तन कितना हल्का लग रहा है। अभी और तीन दिन स्नेहन व स्वेदन क्रिया होगी। उसके बाद विरेचन क्रिया करायी जाएगी। 

आज अभ्यंग का दूसरा दिन था। शरीर और हल्का हो गया है। शाम को लगभग बीस मिनट तक नूना घर पर ही टहलती रही, जब जून नन्हे और सोनू को लेने गये थे। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने आज भी फ़ेसबुक पर उसकी कविता पर कमेंट लिखा। वह आज अकेले हैं, भाभी अपनी माँ-पिताजी से मिलने गई हैं।कल लौट आयेंगी। वह बहुत साहसी महिला हैं।नूना ने मृणाल ज्योति की पत्रिका में लिखने के लिए पहले कई लोगों को लिखा था, सभी को स्मरण-पत्र भेजे, देखें, कितने लोग अपनी रचनाएँ भेजते हैं। 

आज सुबह वे उठे तो स्वास्थ्य ठीक था, कल की क्रिया के बाद दुर्बलता महसूस हो रही थी। धीरे-धीरे वे सामान्य भोजन करने लगेंगे। लेकिन अब इस बात का ध्यान रखना है कि पुनः शरीर में भारीपन न होने पाये। संतुलित आहार, समुचित व्यायाम, नियमित प्राणायाम और ध्यान, किसी भी व्यक्ति की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अति आवश्यक हैं। आज वे सुबह-शाम थोड़ी देर टहलने भी गये। जीवन जैसे ठहर सा गया है, पर समय बदलते देर नहीं लगती। आज शाम को तेज वर्षा हुई, तब उनके मित्र दंपत्ति यहीं बैठे थे। कश्मीर जाने के लिए थॉमस कुक को बुक करने की बात हुई। पापाजी ने नवनीत में पढ़े एक लेख पर चर्चा की, जो दलित समस्या पर है। उन्हें जैसे पूरा लेख याद ही था, वह बहुत ध्यान से और गहराई से पढ़ते हैं। नूना ने भी पर्यावरण पर कई आलेख पढ़े, समस्या बहुत बड़ी है और जो लोग विकास में समाधान ढूँढ रहे हैं, वे असफल ही होंगे। आज नन्हे ने जून के एक मित्र के पुत्र के लिए किताबों का एक सेट भेजा है, अवश्य उसे पसंद आयेंगी। कल उसके उपनयन संस्कार में उन्हें जाना है। 

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये। गुरुजी को भी आमने-सामने बहुत दिनों बाद सुना। वही सादगी, वही सरलता और सवालों के सटीक जवाब। आयुर्वेदिक चिकित्सा के बाद शरीर व मन जैसे नये हो गये हैं। जीवन को हर ओर से गुरुकृपा ही सम्भालती है। गुरुजी के कारण ही यह घर मिला, आश्रम तथा अस्पताल मिला। उन्हीं के कारण ज्ञान मिला, प्रेम शांति और आस्था का वरदान मिला। आज सुबह सवा दस बजे वे जनेऊ संस्कार में शामिल होने भी गये थे, डेढ़-दो घंटे रहे। पूजा काफ़ी देर तक चलती रही। बहुत लोग आये थे। आज वर्षों बाद फ़ेसबुक पर तस्वीर बदली, वर्षों से वही चल रही थी। अब अगले दस वर्ष यही रहने वाली है। बहुत लोगों ने कमेंट किया है। 

आज सुबह वे दो हफ़्ते बाद दूर तक तथा देर तक टहलने गेय। शरीर में हल्कापन आ गया है और मन में भी।संभवत: ऊर्जा व शक्ति लेने के कारण भी, एक टेबलेट फ़ार्म में एक ड्राप फॉर्म में। ! अभी रात्रि के आठ भी नहीं बजे हैं और वे रात्रि भोजन के बाद भ्रमण करके भी आ गये हैं। पढ़ाई-लिखाई के लिए पूरा एक घंटा है। आज शाम को दो छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं। अगले हफ़्ते उनके यूनिट टेस्ट हैं। लगता है, आजकल बच्चे केवल परीक्षा देने के लिए ही पढ़ते हैं, ज्ञान पाने के लिए या पढ़ने का आनंद लेने के लिए नहीं। कल फिर आयेंगी, ऐसा कहकर गयी हैं। आज हफ़्तों बाद जून ढेर सारे फल व सब्ज़ियाँ लाए हैं। पिछले दिनों आहार कितना सीमित था। 

आज उन्होंने अवतार कृष्ण कौल द्वारा निर्देशित उनकी पहली और अंतिम, एक पुरानी श्वेत-श्याम फ़िल्म देखी ‘२७ डाउन’। रमेश बख्शी के उपन्यास ‘अठारह सूरज के पौधे’ पर आधारित है यह फ़िल्म। नायक संजय बचपन से ही पिता के ख़ौफ़ में जीता आया है, उसके जीवन के निर्णय वही लेते हैं और वह उनके परिणामों से भागता रहता है। कितने ही डर मानव के मन में समाये रहते हैं, जिनसे बचने के लिए वह अपने ही ख़िलाफ़ खड़ा हो जाता है। इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। शाम को पापाजी से बात हुई। सुबह दीदी-जीजाजी, बड़े भाई, मंझले भाई-भाभी सभी से। भीतर आनंद हो तो वह बाँटना चाहता है। जून ने भी छोटी बहन, अपने एक मित्र व सोनू से बात की। नन्हे ने इतवार के लिए ‘आदिपुरुष’ की टिकट बुक कर दी है। नई फ़िल्म है। 

आज का दिन चन्दर और सुधा के नाम रहा। यू-ट्यूब पर उसका पाठ सुना, फिर हॉट स्टार पर उस पर बना धारावाहिक देखा, कितनी मार्मिक कथा है दोनों की। धर्मवीर भारती का यह उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ वर्षों पहले पढ़ा था। ऐसे ही शेखर - एक जीवनी भी याद है। कभी न कभी पढ़ने या सुनने को मिल जाएगा। पापाजी व छोटी भाभी से बात की। छोटे भाई से बात किये बहुत दिन हो गये हैं। इस इतवार को अवश्य करेंगे। जून आजकल ख़ुश रहते हैं। उनकी कश्मीर यात्रा के लिए टिकट बुक हो चुके हैं।


Friday, July 24, 2026

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

आज शाम को वे एक मित्र दंपत्ति के घर गये, अमेरिका से आयी उनकी बहन से मिलने, जिसका ज़िक्र उन्होंने कुछ दिन पहले किया था। नौ वर्ष पहले वह दिल्ली में रहती थीं, उनके पति व वह स्वयं सरकारी नौकरी में उच्च पदों पर कार्यरत थे। कुछ समय हैदराबाद में भी रह चुकी हैं। जब उनके पति नहीं रहे, तब बड़ी पुत्री उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गई। इस बार कई वर्षों के बाद भारत आयी हैं, जयपुर, दिल्ली, बैंगलुरु और मुंबई घूमते हुए वापस जायेंगी। तमिल भाषी होते हुए भी हिन्दी अच्छी बोल लेती हैं, कन्नड़ भाषा भी जानती हैं।  

नूना और जून की पंचकर्म की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। अगले दो हफ़्ते चाय-काफ़ी नहीं लेनी है। हल्का भोजन लेना है। उदर हल्का रहे तो मन भी हल्का रहता है। सुबह वे सूर्योदय की तस्वीर लेने सोसाइटी के गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ़ गये पर बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। वापस आकर साधना करते समय देवदत्त पटनायक की आवाज़ में उनकी पुस्तक ‘मेरी गीता’ का कुछ अंश सुना। न जाने कितने कितने अनुवाद और व्याख्याएँ हुई हैं आज तक भगवद् गीता की, कृष्ण ने तो अर्जुन को एक ही बात कही होगी, पर हर लेखक अपने अनुवाद को वास्तविक बताता है, इसी लिए कहा गया है, “हरि अनंत हरि कथा अनंता”। जून आजकल मुग़ल बादशाह अकबर की कहानी पर बना एक टीवी शो देख रहे हैं। नवनीत का जून अंक पर्यावरण पर आधारित है, जिसके बार में जितनी जानकारी लोगों को दी जाये कम है। कर्नाटक जैसे विकसित राज्य में, बैंगलोर जैसे जागरूक शहर में, सड़कों पर अभी भी  कूड़े के ढेर दिखायी पड़ते हैं।ट्रैफ़िक का जो हाल है, वह तो जगत प्रसिद्ध है, हर दिन सैकड़ों नये वाहन आ जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। झीलें सूखती जा रही हैं, उन्हें साफ़-सफ़ाई की भी ज़रूरत है और वर्षा के जल को रोककर रखने के उपायों की भी। एओएल का एक अनुवाद कार्य भी उसने किया, जो पूरे दिन को एक पावन भाव से भर देता है। 

पंचकर्म में आयुर्वेदिक दवा लेते हुए आज दूसरा दिन है। सिर के पिछले हिस्से व दाहिनी आँख में हल्का दर्द है। शरीर के भीतर जो भी फेर-बदल हो रहे हैं, उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप यह स्वाभाविक है। अवश्य ही उनका वजन भी कुछ कम होगा। नूना ने अमेरिका से आयी नयी परिचिता के लिए एक कविता लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। घुटने के दर्द के लिए व्यायाम पर बनाया जून का वीडियो भी उन्होंने देखा, जिसका लिंक उसने भेजा था। हो सकता है, घुटने के दर्द में उन्हें आराम मिले। शरीर में भारीपन होने से अर्थात वजन बढ़ जाने से उनका दर्द अधिक बढ़ गया है। आज ऑडिबल पर एक नई पुस्तक सुनना आरंभ की। नवनीत में एक-दो अच्छी कहानियाँ पढ़ीं। दीदी के जन्मदिन पर एक कविता उन्हें भेजी। 

आज सुबह नैनी को नहीं आना था, सो वे आराम से उठे। छह बजे टहलते हुए सुबह के समाचार सुने। उड़ीसा में हुई भयंकर रेल दुर्घटना के बारे में सुना, पर इसकी भीषणता का पता तब चला, जब शाम को छह बजे टीवी पर समाचारों में ह्रदय विदारक दृश्य देखे। बालासोर ज़िले में तिहरे रेल हादसे में लगभग तीन सौ लोग मारे गये सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। कोरोमंडल एक्सप्रेस, ग़लत सिग्नल के कारण मुख्य लाइन की बजे लूप लाइन में चली गई, जहाँ एक मालगाड़ी खड़ी थी, टक्कर के कारण उसके कई डिब्बे पटरी से उतर गये और साथ वाले ट्रैक पर आ रही बैंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गये। किसी की छोटी सी भूल की कितनी बड़ी सजा सैकड़ों परिवारों को भुगतनी पड़ी है। उसकी आँखें अभी भी पूर्ववत् नहीं हुई हैं, कुछ और समय लगेगा। इस समय बायीं आँख में हल्की सी जलन है, दायीं आँख में हल्का भारीपन आज भी था, जून ने डाक्टर को दिखाने की बात कही। उसने अगले एक महीने के लिए, डालने वाली दवा दे दी है। अब ईश्वर का ही आश्रय है, जो भी होगा अच्छा ही होगा। 

आज नन्हा और सोनू आये थे। सब मिलकर लंबी ड्राइव पर गये। उन्हें नया बन रहा ले आउट ‘विशुद्ध प्रकृति’ भी दिखाया। नन्हे ने ड्रोन उड़ाया। फ़ार्म हाउस, हरे-भरे मैदानों और झील के सुंदर चित्र भी लिए, कई वीडियो भी बनाये।आज ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा है, चंद्र दर्शन के बाद जून ने तस्वीरें उतारीं। 

आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है। असम से एक सखी ने बच्चों की योग कक्षा की तस्वीरें माँगी हैं। उस समय हर वर्ष वे लोग बच्चों के साथ पौधे लगाते थे व आसपास सफ़ाई का काम करते थे। दोपहर को पर्यावरण दिवस पर एक पोस्ट लिखी। कुछ देर पहले आयुर्वेदिक अस्पताल की डाक्टर से बात हुई। कल सुबह वहाँ जाना है, स्नेह पान करना होगा। विरेचन  का अगला भाग कल से शुरू हो रहा है।  

आज सुबह ख़ालीपेट वे ‘स्नेहपान’ के लिए अस्पताल गये थे।पहले औषधि युक्त तीस मिली घी पिलाया गया फिर थोड़ा सा गरम पानी भी।जून ने दस बजे ढेर सारे पानी में उबाल कर थोड़े से चावल खाये, उसे दोपहर साढ़े बारह बजे तक जरा भी भूख नहीं लग रही थी। आज एसी नहीं चलाना है, शरीर को गर्म रखना है। अभी दो दिन यही दिनचर्या रहेगी। उसके बाद दो दिन  अस्पताल में रहना होगा।ईश्वर ही इस प्रक्रिया से (शरीर शुद्धि के साथ मन भी जुड़ा है) बाहर ले जाएँगे। सुबह उठी तो ध्यान स्वतः ही होने लगा था, ब्रह्म मुहूर्त में कितनी शांति होती है, वह पवित्र समय है, देवताओं के जागने का समय ! आज शरत चन्द्र की कहानियों पर बनी दो फ़िल्में देखीं, ‘अनुराधा’ व ‘विराज बहू’। पुरानी फ़िल्में कितनी सारगर्भित होती थीं, भावपूर्ण और संगीतमय भी। 

आज सुबह भी वे स्नेहपान के लिए गये थे। आज पचहत्तर मिली घी पिलाया गया। दोपहर के दो बजे तक भूख का नाम नहीं था। आज दिन में एक अच्छी पुरानी फ़िल्म देखी, ‘सरस्वती चन्द्र’। शाम को कुछ देर टहलने भी गये।पापाजी से बात की, उन्हें नवनीत के लेख बहुत अच्छे लग रहे हैं। उसके  लेखन कार्य में एक विराम लग गया है, पहले आँख के कारण अब पंच कर्म के कारण। लेकिन शरीर्व की शुद्धि के लिए यह आवश्यक है। वे भोजन पर कितने अधिक आश्रित हो गये थे। ऐसे भोजन पर भी जो उनके लिए हानिप्रद था। पिछले एक हफ़्ते से चाय के बिना जरा भी दिक्क्त नहीं हो रही है। उसे पूरी उम्मीद है इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर उनका स्वास्थ्य पहले से कहीं अधिक अच्छा होगा। 

आज स्नेहपान का तीसरा दिन है। सुबह साढ़े छह बजे ही वे अस्पताल पहुँच गये थे। नब्बे मिली घी उसे व जून को सौ मिली घी पीना था। वापसी में गुलमोहर के वृक्षों के चित्र खींचे। शाम के चार बजे तक मुँह में घी का स्वाद बना हुआ था। भोजन के बार में सोचने का भी मन नहीं था। शाम को उबली हुई खिचड़ी खायी, जिसे पतीले में बनाना था, कुकर में नहीं। शाम को उनके मित्र दंपत्ति मिलने आये थे, अक्तूबर में होने वाली उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में बात करने।उन्होंने कुछ वीडियोज़ देखे और टूर ऑपरेटर से बात की। नन्हे का फ़ोन भी आया। वह घर जा रहा था, रास्ते में ट्रैफ़िक के कारण एक जगह रुका हुआ था।


Friday, May 31, 2024

चंदन का लेप

चंदन का लेप


आज रविवार है, माली आने का दिन, सो योगाभ्यास का अवकाश। उसने माली से सारे गमलों की निराई-गुड़ाई करवायी और ‘रात की रानी’ के पौधे ज़मीन में लगवाये। ‘मॉर्निंग ग्लोरी’ के गमले ऊपर सिट आउट में रखवाए हैं। बच्चे आये तो उन्हें नाश्ते में कटहल दोसा मिक्स से बना दोसा खिलाया। जून ने गेहूं का दलिया भी बनाया था, वह इसमें निपुण हो गये हैं। दोपहर बाद सब मिलकर दो मकान देखने गये, सोनू के माँ-पापा भी बैंगलुरु में आकर बसना चाहते हैं। शाम को चार बजे से ‘जोड़ों के दर्द’ पर डेढ़ घंटे के वेबिनार के एक सत्र में भाग लिया, जिस पर आधारित एक लेख उसे लिखना है।स्वस्थ रहने के लिए कितने ही नुस्ख़े और आदर्श जीवन शैली के बारे में वैद्य ने बताया। सुबह मुँह का स्वाद कुछ कड़वा सा था, ‘धौति’ क्रिया की। इस समय भी देह में ताप का अनुभव हो रहा है। वे आयुर्वैदिक अस्पताल जाने का विचार कर रहे हैं। 


आज फ़रवरी का प्रथम दिवस है।वसंत ऋतु दस्तक दे रही है। आम के बगीचे से भीनी-भीनी सुगंध बहती रहती है। सुबह वे टहलने गये तो आकाश पर तारे टिमटिमा रहे थे। वापस आकर ‘हेल्थ इन योर हैंड’ पुस्तक निकाल कर कुछ पन्ने पढ़े, उसमें लेखक ने सामान्य रोगों को दूर करने के कई सरल उपाय बताये हैं। आज भी स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं है। सुबह से सिर में हल्का दर्द है। इस समय मस्तक पर चंदन का लेप लगाया है, जो भीतर की गर्मी को खींच लेगा। जीरा-सौंफ वाला पानी पिया। कैस्टर आयल लिया। दिन  में  नारियल पानी व मट्ठा भी लिया था।शरीर में अग्नि तत्व बढ़ गया है। शाम को कुछ देर ‘चन्द्र नाड़ी प्राणायाम’ भी किया, ‘शीतली प्राणायाम’ भी। नाड़ी की गति बैठे रहने पर भी ९५ रहती है। चलते समय पैरों में जकड़न सी महसूस होती है। अचानक ही इतने सारे लक्षण आ गये हों, ऐसा नहीं है। पाचन क्रिया मंद रहने की समस्या तो कुछ दिनों से थी ही। ख़ैर, यह सब शरीर को हो रहा है, मन भी शरीर का ही सूक्ष्म हिस्सा है। पिछले दिनों रात को नींद ठीक से नहीं आयी, उसका असर रहा होगा।जो भी हो, आत्मा साक्षी भाव से सब कुछ देख रही है, उस पर कुछ भी असर नहीं हो रहा है।आज सुबह एक सखी से बात की, दोपहर को दीदी-जीजा जी से, शाम को भी एक परिचिता  से वार्तालाप हुआ, सभी से सामान्य बातें हुईं। दोपहर को ‘जोड़ों के दर्द’ पर लेख लिखना आरम्भ किया। ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वार्षिक बजट प्रस्तुत किया, जिसे बहुत सराहा जा रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। एक और दिन स्वास्थ्य की देखभाल करते बीत गया। सुबह कितना हल्का महसूस हो रहा था पर दोपहर बाद कुछ भारीपन लग रहा था। रात्रि भ्रमण के समय पैरों को भली प्रकार पता चला कि चलने के लिए  भी एक प्रयास करना पड़ता है। सुबह सवा चार बजे नींद खुल गई थी। सुबह सामान्य रही। याकुल्ट, नारियल पानी, ग्रीन टी तथा खीरा नींबू वाला पानी पिया दिन भर।संभवत: वजन भी बढ़ गया है। सारी समस्या इसी कारण हो रही है। इसे कम करने का उपाय करना होगा।छोटी भांजी के जन्मदिन के लिए लिखी कविता उसे भेज दी, बहन के साथ उसने दुनिया की सबसे लंबी ‘ज़िप लाइन’ में भाग लिया। शाम को नन्हे का फ़ोन आया, सोनू की मौसेरी बहन को एक और सर्जरी करानी पड़ेगी। उसे गॉल ब्लेडर में स्टोन हो गया था। 


आज एक संत को सुना, “आगे से जवाब देना, उल्टा बोलना, ज़ोर से बोलना, दूसरे की बात को न सुनना या नकार देना, ये सभी वाणी के दोष हैं, जिनसे साधक को बचना चाहिए। अहंकार ही आत्मा को प्रकट न होने देने में सबसे बड़ी बाधा है, और उपरोक्त सभी बातें अहंकार से उपजती हैं, न कि विवेक से।विवेक तो सदा आत्मा से युक्त रहता है, जो प्रेमस्वरूप है।” उसकी अस्वस्थता में उसका इतना ध्यान रखने वाले जून को जब वह कभी आगे से जवाब दे देती है तो उन्हें कितना बुरा लगता होगा। उनका धैर्य अपार है, जो उसकी सारी हिमाक़त चुपचाप सह लेते हैं और सुबह से शाम तक हर कार्य में उसकी सहायता करने को तत्पर रहते हैं। आज से बल्कि अभी से वह प्रण करती है कि उनकी हर बात को अपने लिए आज्ञा मानकर शिरोधार्य करेगी ताक़ि उसका अहंकार छूट जाये और आत्मा में स्थिति दृढ़ हो जाये; जो कि उसका वास्तविक स्वरूप है। उसका रोग भी तो शरीर के साथ स्वयं को जोड़कर देखने से ही हुआ है। भोजन के प्रति आसक्ति का ही यह फल है।