Showing posts with label सिलाई. Show all posts
Showing posts with label सिलाई. Show all posts

Friday, July 1, 2011

सूना घर


आज वह सुबह ही जोरहाट चला गया, कितना खाली-खाली लग रहा है घर उसके बिना, जाते वक्त कितनी-कितनी हिदायतें देकर गया, सुन-सुन कर नूना को कैसा-कैसा लग रहा था कि उसके बिना वह अच्छा सा खाना बना कर खाये, आज इतने दिनों में पहली बार अकेले खाना खाया. आज बिजली भी नहीं है, वह पड़ोसन के यहाँ गयी थी कुछ देर के लिये, वह भी अकेली थी, समय का पता ही नहीं चला, अभी कुछ देर में वह आने वाला है. उसने कहा है, नूना दो तकियों के गिलाफ पर उसका और अपना  नाम काढ़ दे, कुछ सिलाई का काम भी शेष है.