आज वे बहुत खुश हैं, चहकते पंछियों की तरह, बहते झरनों की तरह. कल जून का जन्मदिन है. आज शाम वे बाजार गए थे उपहार लेना था, पर यहाँ मन के मुताबिक कुछ मिलता नहीं, छोटा सा बाजार है. बस रुमाल लिये, जबकि उसने नूना के लिये सलवार का कपड़ा ले दिया. उन्होंने सोचा है कि नवम्बर में या अगले वर्ष दक्षिण भारत की यात्रा पर जायेंगे. कल जापान एयरलाइन्स का बोईंग ७४७ दुर्घटना ग्रस्त हो गया, जिसमें ५२४ यात्री थे, उनमें से केवल चार यात्री बच गए हैं. पिछले दो ढाई महीनों में यह तीसरी विमान दुर्घटना है. दोपहर को बिजली नहीं थी, ऐसा बहुत कम होता है यहाँ, मानसरोवर के दोनों अंक लगभग पढ़ लिये हैं, पर अब सोचा है, पढ़ने पर राशन लगाना होगा, आँखों में दर्द होने लगा है. जून की आँखें अब ठीक हैं पर कान अभी भी पूरे नहीं. जून के छोटे भाई का खत आया है मुम्बई वाले मौसा नहीं रहे.
एक सामान्य सा दिखने वाला जीवन भी अपने भीतर इस सम्पूर्ण सृष्टि का इतिहास छिपाए रहता है, "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" के अनुसार हर जीवन उस ईश्वर को ही प्रतिबिम्बित कर रहा है, ऐसे ही एक सामान्य से जीवन की कहानी है यह ब्लॉग !
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Friday, February 3, 2012
पढ़ने पर राशन
आज वे बहुत खुश हैं, चहकते पंछियों की तरह, बहते झरनों की तरह. कल जून का जन्मदिन है. आज शाम वे बाजार गए थे उपहार लेना था, पर यहाँ मन के मुताबिक कुछ मिलता नहीं, छोटा सा बाजार है. बस रुमाल लिये, जबकि उसने नूना के लिये सलवार का कपड़ा ले दिया. उन्होंने सोचा है कि नवम्बर में या अगले वर्ष दक्षिण भारत की यात्रा पर जायेंगे. कल जापान एयरलाइन्स का बोईंग ७४७ दुर्घटना ग्रस्त हो गया, जिसमें ५२४ यात्री थे, उनमें से केवल चार यात्री बच गए हैं. पिछले दो ढाई महीनों में यह तीसरी विमान दुर्घटना है. दोपहर को बिजली नहीं थी, ऐसा बहुत कम होता है यहाँ, मानसरोवर के दोनों अंक लगभग पढ़ लिये हैं, पर अब सोचा है, पढ़ने पर राशन लगाना होगा, आँखों में दर्द होने लगा है. जून की आँखें अब ठीक हैं पर कान अभी भी पूरे नहीं. जून के छोटे भाई का खत आया है मुम्बई वाले मौसा नहीं रहे.
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