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Friday, July 15, 2011

मोटरसाइकिल


आज सुबह से ही वह घर पर नहीं है, जोरहाट गया है मोटरसाइकिल लाने, सुबह कितनी वर्षा हो रही थी उसने कहा था कि हो सकता है उसे लौटने में देर हो जाये. पर अब तो मौसम कितना साफ है, स्वच्छ, सुंदर, निर्मल आकाश बिल्कुल उसके प्यार की तरह. नूना को सुबह से प्रतिपल उसका स्मरण हो रहा है. उसे लगता है जैसे अभी उसके प्रेम में उतनी पूर्णता नहीं है, जबकि वह उसके क्रोध को हँसी में उड़ाता रहा है.
परसों रात उनकी मोटरसाइकिल आ गयी, वह बहुत प्रसन्न है. कुछ देर पहले उसने नूना को बाइक पर घुमाया. आज वह मोरान गया है कल सुबह वापस आयेगा.  उसका मन उदास है, उसे मालूम है वह दुःखी होगा यह जानकर सो अब वह खुश रहेगी. उसने पुराने पत्र पढ़े और ठीक से फाइल में लगाये.
वे पहली बार बाइक से डिब्रूगढ़ गए. यहाँ से पचास किलोमीटर दूर, वह कितना थक गया होगा. वह बहुत अच्छी बाइक चलाता है. उन्होंने दोस्तोवस्की की white nights पढ़नी शुरू की है. उसका गला खराब है, आवाज बदल गयी है पर अपनी तबियत खराब होने पर भी वह नूना का ध्यान रखना नहीं भूलता. नूना ने एक पेंटिंग बनानी शुरू की है, किताबें पढ़ने के अलावा पहला कुछ ठोस काम. एक और किताब पढ़ी, captain’s doll . खबरों में सुना कि दिल्ली व अन्य पड़ोसी राज्यों में सिख आतंकवादियों ने बम विस्फोट किये. बीसवीं सदी में मनुष्य कितना विवश और असहाय हो गया है, क्रूरता, पाशविकता और भयानकता के आगे.