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Monday, June 11, 2018

नीरजा - एक वीरांगना



कुछ लिखने के लिए कलम उठायी है, पर क्या लिखे ? सुबह की शुरुआत प्रातः भ्रमण से हुई. हवा में हल्की ठंडक थी और फूलों की गंध भी. अभी ग्रीष्म आने में देर है, सो इस मॉडरेट मौसम का भरपूर लुत्फ़ उठाया जा सकता है. उसके बाद स्कूल गयी, बच्चों को योग करने में आनंद आता है, लेकिन स्कूल के प्रबंधक सिर्फ आधे घंटे का समय देते हैं वह भी सप्ताह में एक बार. शुभता का प्रतीक योग कब शिक्षा का मुख्य अंग बनेगा, यह सोचने की बात है. एक नई कविता लिखी आज. निराला की एक कहानी पढ़ी. बच्चन की कविता पढ़नी अभी शेष है. शाम को जून के एक सहकर्मी भोजन के लिए आ रहे हैं. नैनी सब्जी काट रही है, उसके बाद वह पाकघर में जाएगी. कल इतवार था, उसने सुबह योग कक्षा ली और जून ने दोसे के नाश्ते की तैयारी कर ली, छुट्टी के दिन उन्हें भोजन बनाने में बहुत आनंद आता है. बचपन में उनके घर से स्कूल जाते समय हलवाई की दूकान पड़ती थी, वह रोज ही देखा करते थे, शायद वही संस्कार मन पर हैं. कल शाम क्लब में सत्य घटना पर आधारित फिल्म ‘नीरजा’ देखी, बहुत अच्छी फिल्म है. जिसमें तेईस वर्ष की एक एयर होस्टेस लड़की अपनी जान की परवाह नहीं करती और कराची से अपहरित विमान के यात्रियों की जान बचाती है. उसे मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था. कुछ आत्माएं इस धरती पर अल्पकाल के लिए आती हैं, पर कोई ऐसा कारनामा कर जाती हैं कि उनका नाम अमर हो जाता है.

मार्च का प्रथम दिन ! सुबह समय से उठे वे, ठंड अब घट गयी है, पांच बजे ही दिन निकल आता है. प्राणायाम किया, निशब्द में टिकता है मन अब शीघ्र ही. नाश्ते में बंगलूरू से लाया दलिया बनाया, जिसमें दिल्ली से लाया गुड़ मिलाया. व्हाट्सएप, फेसबुक और ब्लॉग पर सबसे दुआ-सलाम हुई. दोपहर को सिर्फ चावल पकाए, शेष कल रात के राजमा और धनिये वाले आलू. बच्चन की कुछ कविताएँ पढ़ीं, बापू की मृत्यु पर उन्होंने कई कालजयी कविताएँ लिखी हैं. बाल्मीकि रामायण का एक और सर्ग ब्लॉग पर लिखा. रॉबिन शर्मा का एक वीडियो देखा, अच्छी बातें सुझाई हैं उन्होंने. टैगोर, निराला, देवदत्त पटनायक को भी पढ़ा, भगवद गीता का एक श्लोक भी, सारे साधु एक मत, सत्य एक है, उसके खोजी अलग-अलग हो सकते हैं पर अनुभूति एक सी होती है. योग वशिष्ठ के भी दो पेज पढ़े, अद्भुत पुस्तक है. मानव इसी देह में अनंत सुख पा सकता है, बिना कुछ भी किये. मन के द्वारा ही वह दुःख पाता है, जो मन से मुक्त हुआ वह आनन्द का अनुभव करता है.