Showing posts with label खेती. Show all posts
Showing posts with label खेती. Show all posts

Monday, April 20, 2020

विश्वकर्मा पूजा


रात्रि के आठ बजने वाले हैं, आज विश्वकर्मा पूजा का उत्सव उन्होंने जून के दफ्तर में मनाया. सुबह साढ़े नौ बजे वह उनके एक सहकर्मी की पत्नी के साथ वहाँ पहुँच गयी थी. पूजा दस मिनट पहले ही समाप्त हो चुकी थी, प्रसाद वितरण की तैयारी थी. जाते ही नाश्ते का एक पैकेट मिला. एक मिठाई, एक नमकीन व एक केला. प्रसाद में नारियल व अदरक के टुकड़े मिश्रित अंकुरित मूंग व चने तथा चिनिया केला. पहले तंबोला और लॉटरी निकलने का मजेदार खेल हुआ फिर भोजन, जो बाहर से मंगवाया गया था. घर आकर कुछ देर आराम किया, पर नींद नहीं आ रही थी, मन में उत्सव के विचार आ रहे थे, फिर सुबह सुनी गुरु माँ की बात याद आयी. जप को गहरा करके पैर के अगूँठे तक स्पंदन को महसूस करना है, मन एकाग्र हो जाता है, ऐसा ही हुआ. दोपहर बाद उसी सखी के साथ एक अन्य सखी को देखने अस्पताल गयी. उसकी किडनी में स्टोन है छोटा सा. उसके पति दफ्तर के काम से विदेश  गए हैं, पुत्र भी यूरोप में जॉब के सिलसिले में हैं, तथा ससुर जी दूसरे अस्पताल में एडमिट हैं, उनका आपरेशन हुआ है शायद एक-दो दिनों में घर आ जायेंगे. भगवान सबकी सहायता के लिए किसी न किसी को भेज ही देता है, उनका माली ससुर की सेवा में है और उसकी पत्नी घर की देखभाल कर रही है, पुत्र ससुर जी के लिए भोजन लेकर गया है. शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने पूछा, उसके बाएं पैर में दर्द है, क्या करे, तिल के तेल की मालिश से अवश्य ही लाभ होगा, ऐसा उसे बताया. 

रात्रि के आठ बजे हैं, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में गणेश पूजा का एपिसोड आ रहा है. जिसमें मूसलाधार वर्षा हो रही है. कुछ देर पहले क्लब की अध्यक्षा का फोन आया, कैंटीन में उनके द्वारा मंगाए गए उपहार आ गये हैं. पहली बार ऐसा हो रहा है कि सभी सदस्याओं को वार्षिकोत्सव के बाद उपहार दिए जायेंगे. शाम को बेसिक कोर्स का फॉलोअप था, सुदर्शन क्रिया करायी गयी. दोपहर को अगले महीने होने वाले क्लब के एक कार्यक्रम की तैयारी के लिए मीटिंग थी, परसों कुक को बुलाकर मेनू तय करना है. आज सुबह पीछे वाले घर से लड़कियों के रोने की आवाजें आयीं तो नैनी को भेजकर बुलवाया. दो किशोरी कन्याओं को उनके चाचा ने पिता के कहने पर डंडे से पीटा. उसे भी बुलाया, डांटा। लड़कियों को समझाया, वे दोनों रात भर गांव में कोई कार्यक्रम देखकर सुबह घर लौटी थीं. किशोरावस्था में दोनों ने कदम रखा ही है और मित्र बना लिए हैं. आज माली ने बांस का एक गोल ढाँचा बनाया, जिस पर पॉलीथिन लगाना है. क्यारी में बीज डालकर उसे ढकना होगा वर्षा जल से बचाने के लिए. आज फिर दो ठेले गोबर की खाद के खरीदे बगीचे के लिए. यह वर्ष उनकी खेती-बाड़ी के लिए अंतिम वर्ष है, इसलिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है. 

आज का दिन कुछ अलग था, सुबह-सुबह ही प्रेसीडेंट का फोन आया. साढ़े दस बजे वे उपहार में दिए जाने वाला सामान देखने कैंटीन गए, वहां के लोगों का व्यवहार बहुत शालीन था. एक घंटे के अंदर उन्होंने सामान भिजवा दिया.  दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष तथा दो सदस्यों से मिलने का अवसर मिला. जिला बाल वेलफेयर अधिकारी भी आयीं थीं. मीटिंग काफी देर तक चली. वे साढ़े तीन बजे घर लौटे. जून सुबह नौ बजे ही दफ्तर चले गए थे और दोपहर को डिब्रूगढ़. विशेष बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार कितनी सजग है, कई बातों की जानकारी हुई. 

मौसम काफी गर्म है आज, सितम्बर का तीसरा हफ्ता चल रहा है पर अभी तक जून का सा आभास हो रहा है धूप में. आज सुबह कुक आया था अक्टूबर में क्लब के कार्यक्रम में नाश्ते व भोजन का जिम्मा उसे दिया गया है. कुछ देर पूर्व टीवी पर राजस्थान सीकर से गुरूजी का ज्ञान सुना जो वे किसी कालेज के छात्र-छात्राओं को दे रहे थे. सीधी-सरल भाषा में उन्होंने ज्ञान के गहरे सूत्र समझा दिए. उनकी बातें इतनी सरल होते हुए भी कितना गहरा अर्थ लिए होती हैं. दोपहर को हिंदी की कक्षा के लिए मृणाल ज्योति गयी. एक से ग्यारह तक गिनती के साथ कुछ शब्द लिखवाये. मोबाइल पर साइन लेंग्वेज में हिंदी सिखाने का तरीका देखा, उसकी सहायता से पढना आसान हो गया है. 

Wednesday, February 27, 2019

हवा में गंध



आज आकाश में बादल हैं, शायद शाम तक वर्षा हो, हवा में एक अजीब तरह की गंध है, यहाँ के अस्सी प्रतिशत लोग खेती से जुड़े कार्यों में रत हैं. साधन न होने के कारण खेती के लिए उपलब्ध जमीन के मात्र छह प्रतिशत पर ही खेती की जा रही है. कल रात को किसी पशु के रोने की आवाज आ रही थी, जिसे सुनकर बचपन में मेहतरों के मोहल्ले से आती करूण पुकार स्मरण हो आयी. काश इन्हें भी शाकाहारी भोजन व्यवस्था के बारे में जानकारी देने वाला कोई संत मिले. चर्च में इनकी आस्था है पर वहाँ न नशे के खिलाफ कुछ कहा जाता है न मांसाहार के ही. डेढ़ वर्ष पहले तक यह शुष्क राज्य था, पर अब सरकारी दुकानें हैं तथा हर व्यक्ति को कार्ड के आधार पर नियत मात्रा में मादक पेय दिया जाता है.

गेस्टहाउस के कर्मचारियों ने जो वहाँ पिछले कुछ वर्षों से रह रहे हैं कुछ रोचक बातें बतायीं. मिजोरम में संयुक्त परिवार होते हैं. परिवार के बड़े पुत्र को जायदाद नहीं मिलती, बल्कि सबसे छोटे पुत्र को परिवार का उत्तराधिकारी बनाया जाता है. विवाह और तलाक के मामलों में भी चर्च का कानून ही चलता है. माता-पिता के न रहने पर अथवा असमर्थ होने पर बच्चों की देखभाल का जिम्मा भी चर्च का होता है. क्रिसमस के अलावा छरपार कुट मनाया जाता है, उत्सव के लिए मिजो शब्द कुट है. यहाँ कोई पिक्चर हॉल नहीं है. हिंदी फ़िल्में यहाँ नहीं दिखाई जातीं. टीवी पर आने वाले धारावाहिक वे मिजो भाषा में डब करके देखते हैं. यहाँ की साक्षरता दर केरल के बाद दूसरे नम्बर पर है. मिजो भाषा की कोई लिपि नहीं है, रोमन भाषा को ही इन्होंने अपनाया है. यहाँ की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता होती है. यह छात्रों का एक संगठन YMA बहुत शक्तिशाली है. यह समाज हित के कार्य भी करता है तथा दुर्घटना आदि होने पर आपसी सुलह भी कराता है. यहाँ किसी के घर में प्रवेश करने पर सबसे पहले रसोईघर में प्रवेश होता है, यहीं मेहमानों को बैठाया जाता है. पीने का पानी यहाँ खरीदना पड़ता है. अन्य कामों के लिए ये लोग वर्षा ऋतु में पानी का संग्रह कर लेते हैं, हर घर के नीचे पानी का टैंक होता है. इसी तरह सोलर पावर का भी लगभग सभी लोग इस्तेमाल करते हैं.

सुबह ग्यारह बजे ही उन्होंने वापसी की यात्रा आरम्भ की, एक दिन कोलकाता में रुकना पड़ा क्योंकि डिब्रूगढ़ में अभी तक रात के समय फ्लाईट उतरने की सुविधा नहीं है. अगले दिन सुबह की उड़ान से वे मिजोरम की मधुर स्मृतियों को मन में संजोये हुए वापस घर आ गये.