Saturday, July 13, 2019

सेमल के फूल



पिछले पांच दिन कुछ नहीं लिखा, कारण क्या हो सकता है सिवाय प्रमाद के. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं. जून बंगलूरू में हैं, परसों वापस आ रहे हैं. आज दिन भर कुछ नहीं सुना, अब और कुछ सुनने की आवश्यकता नहीं है, भीतर के मौन को ही सुनना है. निरंतर भीतर एक स्मृति बनी रहती है. एक अचल मौन का भान होता है. कानों में कोई रुनझुन बजती है और विचार दूर प्रतीत होते हैं. उनके पास परमात्मा का दिया बहुत कुछ है. उसके लिए कृतज्ञ होना है. जीवन में चुनौतियाँ तो आने ही वाली हैं, उनका सामना करना है, बचना या भागना नहीं है उनसे. हर दिन कोई न कोई सृजनात्मक कार्य करना है और अन्यों का सहयोग भी. यदि किसी का हाथ नहीं बंटा पाए तो सोचना है किसी को कोई दुःख तो नहीं दिया. यदि स्वस्थ हुए तो भी परमात्मा का धन्यवाद करना है और अगर अस्वस्थ भी हो गये तो भी यही सोचना है कि हमारी मृत्यु तो नहीं हो गयी, अभी श्वासें शेष हैं तो मुक्ति की सम्भावना है !  

कल रात स्वप्न में बूढ़े माली को देखा, कह रहा था, साहब ने उसका अपमान किया था, उससे नाराज नहीं था. इसलिए बगीचे से सब्जी तोड़कर नहीं देगा. स्वप्नों की दुनिया जागृत से कितनी भिन्न होती है. हर बार स्वप्न देखने वाला अलग ही होता है, कोई दो रात लगातार धारावाहिक सपने नहीं आते. कल शाम दायीं तरफ की पड़ोसिन के यहाँ भजन है, वे जायेंगे. बाद में रात्रि भोजन भी वहीं होगा. दोपहर को अगले हफ्ते डिब्रूगढ़ में होने वाली मृणाल ज्योति की मीट के लिए कुछ पढ़ा, अभी दो-तीन दिन और पढ़ना होगा. उसे एक भाषण में सहायता करनी है. दीदी का फोन आया सुबह, जीजाजी का स्वास्थ्य अब ठीक है. उससे पूर्व एक मराठी सखी का नया घर देखने गयी, उसके माता-पिता से मिली. गणेश की मूर्ति ले गयी थी, उन्हें अच्छी लगी. एक अन्य सखी के यहाँ गयी, और बड़े आराम से उससे बातें कीं. उसके प्रति जो भी दुविधा मन में थी, अब नष्ट हो गयी है. अब इस पूरे संसार में कोई नहीं है जो उससे उद्ग्विन हो और जिससे वह उद्ग्विन हो. सारा संसार अपना घर बन गया है, गुरूजी का ज्ञान सफल हो रहा है. सुबह सेमल के वृक्ष की फोटो भी उतारी. कितने सुंदर फूल होते हैं सेमल के. इतने वर्षों में पहली बार इस बड़े वृक्ष के फूल देखे, पहले कई बार सेमल के फाहे देखे थे हवा में उड़ते हुए. जून का फोन आया अभी-अभी, उन्होंने अकेले ही भोजन किया. नन्हा फ्लाइट में है, रात को साढ़े बारह बजे तक आएगा. सोनू भी ग्यारह बजे तक आएगी. आज पिताजी से बात नहीं हुई. वह बंगलूरू जाने के लिए तैयार हैं. उनका नया घर जब तैयार हो जायेगा, वह वहाँ जायेंगे.

कल दिन में फिर कुछ नहीं लिखा, रात नींद नहीं आ रही थी. सुमिरन करने लगी फिर पता ही नहीं चला, कब नींद आ गयी. स्वप्न देखा जिसमें मन परेशान हुआ तो झट स्मृति आ गयी, यह स्वप्न है. किसी ने कहा, 'अब वह नहीं भटकेगी'. स्वप्न में भी संदेश सुन सकी. जो जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति तथा समाधि का आधार है, उसे वे भुला देते हैं. जो उनको राह दिखाने वाला है, पथ प्रदर्शक है. जून कल वापस आ रहे हैं. उन्होंने ढेर सारे काम निपटाए आज. नये घर के लिए कितने ही जॉब शेष थे. वह आज आँख के अस्पताल भी गये थे, उनकी दूसरी आँख के आपरेशन के लिए भी डाक्टर ने कह दिया है. आज उनके दफ्तर का ड्राइवर घर आकर गाड़ी धोने के लिए कहने लगा, फिर धोयी, खुली जगह और खुला पानी देखकर उसे अच्छा लगता होगा. शाम को नैनी ने कहा उसका राशिफल पढ़कर सुनाये. उसकी राशि मीन है. वह उदास थी. उसके माता-पिता भी नहीं हैं, इस बात को लेकर आँसूं भी बहाये. मानव का मन कितना नाजुक होता है, एक फूल से भी कोमल. उसे समझाया पर इस दुःख का इलाज तो खुद ही ढूँढना होता है. थोड़ी ही देर में वह सामान्य भी हो गयी. बगीचे से फूल गोभी, शलजम, पत्ता गोभी, लाइ साग आदि लाकर दिए. काफ़ी दिनों से सब्जी नहीं लाये हैं वे बाजार से, काम चल ही रहा है. उसकी सास ने सहजन के फूल भी लाकर दिए, उसके दायें हाथ का अगूँठा कितना सूजा हुआ था. अपने छोटे-मोटे दर्द को ये लोग सहते ही रहते हैं. पिताजी से बात हुई आज. छोटी भाभी ने पकौड़े बनाये थे शाम को, आलू के पकौड़े. पिछले दिनों से अक्सर उसे भिन्न-भिन्न तरह की गंधों का अनुभव होता रहा है. हलवा बनने की गंध, मीठी सी गंध, कभी घी की गंध, कभी विचित्र सी गंध. कल-परसों से मुख का स्वाद भी कुछ अलग सा है. जीवन एक रहस्य है और वह रहस्य गहराता ही जा रहा है. आज सुबह भी प्रातः भ्रमण से वापस आकर कुछ शब्द लिखे, जिन्हें दोपहर को ब्लॉग में लिखा. परमात्मा कितना सृजन शील है, इसलिए ही उसे कवि कहते हैं. आज योग कक्षा में उपस्थिति ज्यादा थी. शिव के नाम का जप किया और उनके 'चन्द्रशेखर' नाम पर चिन्तन भी.

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (15-07-2019) को "कुछ नया होना भी नहीं है" (चर्चा अंक- 3397) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत आभार !

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