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Wednesday, August 2, 2017

अक्की रोटी और नीर दोसा









आज वे कूर्ग के एक रिजॉर्ट अमनवन में हैं, कावेरी नदी के तट पर स्थित यह एक हरा-भरा स्थान है. रंग-बिरंगे फूलों से लदी लताओं, वृक्षों और झाड़ियों से सजा यह स्थान पहली नजर में ही मन को भा गया है. यहाँ विभिन्न खेलों की सुविधाएँ भी हैं और स्विमिंग पूल तथा स्पा भी. फुटपाथ के किनारे जगह-जगह एकांत में बैठने के लिए चेयर टेबल रखे हैं, नदी किनारे उसकी ध्वनि सुनते हुए कुछ पढ़ने-लिखने का आनन्द लिया जा सकता है अथवा तो पंछियों की आवाजें ही सुनते रहें. दोपहर बाद सभी पर्यटकों को नदी पर ले जाया गया, रिवर ट्रैकिंग का अनोखा अनुभव पहली बार किया. तट पर बंधें वृक्षों से रस्सी को बांध दिया जाता था और उस के सहारे कई जगह से नदी पार करनी थी. कावेरी का स्वच्छ जल चट्टानों, वृक्षों की झुकी हुई डालियों को छूता हुआ बह रहा था, उसका कलकल नाद हृदय को आंदोलित करने वाला था. पानी का तापमान विभिन्न स्थानों पर भिन्न प्रतीत हुआ. ऐसा लगा जैसे प्रकृति कितने-कितने उपायों से विस्मित करना चाहती है, उस अनजान सृष्टा की याद दिलाती है. कावेरी के जल में पूरी तरह भीगकर जब वे लौटे तो शाम हो चुकी थी. संयोग की बात उनके कमरे का नम्बर वही है जो पिछले तेईस वर्षों तक घर का नम्बर रह चुका था.

यहाँ का स्नानघर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है. बड़े से बाथटब पर दिन में धूप तथा रात्रि में चाँद की रोशनी आ रही थी, छत पर शीशा लगा था. निकट ही शेल्फ पर किताबें पड़ी थीं. एलिस इन वंडर वर्ल्ड के ‘रैबिट इन द होल’ की तरह वे भी दुनिया से दूर एक अनोखी दुनिया में आ गये थे. रात्रि भोजन में ‘अक्की रोटी’ ‘नीर दोसा’ तथा केसरी भात के रूप में कूर्गी भोजन का आनन्द भी लिया.
आज वे ‘दुबारे’ नामक स्थान पर गये जहाँ हाथियों का एक कैम्प है, जिसमें उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है. कुछ देर रिवर राफ्टिंग की और फोटोग्राफी भी. लौटकर ‘कॉफी प्लांटेशन’ देखने भी गये, जहाँ कॉफ़ी के पौधों को छाया देने के लिए बीच-बीच में नारियल के पेड़ों पर काली मिर्च की लताएँ भी उगी हुई थीं. शाम को ‘निःसर्ग धाम’ देखने गये, जहाँ एक छोटा सा बाजार है, पशु घर तथा प्राकृतिक सुन्दरता भी. नदी पर बना रस्सी से लटकता पुल, सफेद खरगोशों की मासूम हरकतें और बारहसिंगों को हरी घास खिलाते लोग ‘निसर्गः धाम’ को यादगार बना देते हैं. लौटे तो अमन वन में पेड़ों के नीचे जगह-जगह जलते लैम्प, मोमबत्तियां व डालियों पर लगी रोशनियाँ वातावरण को एक रहस्य तथा गरिमा से भर रहे थे.

आज तीस किमी दूर मडिकेरी नामक पहाड़ी स्थान पर स्थित ‘abbey falls’ देखने गये, मडिकेरी से आठ किमी दूर पश्चिमी घाट पर स्थित यह झरनों का एक समूह है जो विशाल चट्टानों से जल की एक चौड़ी झालर बनाता हुआ अति वेग से घाटी में गिरता है और कावेरी में मिल जाता है. झरने के सामने रस्सियों पर लटकता हुआ एक पुल है जिसे खड़े यात्री जल फुहारों ला आनन्द लेते हैं. पास ही कॉफ़ी तथा काली मिर्च के बगीचे हैं. दशहरे के कारण लोगों की भीड़ यहाँ भी बहुत ज्यादा थी. वापसी में मैसूर में एक सम्बन्धी के यहाँ होते हुए रात्रि दस बजे बंगलुरु लौट आये, दो दिन बाद वापस असम जाना है.


Tuesday, August 1, 2017

कुर्गी साड़ी


सुबह आँखों की जाँच करवा कर दोपहर को वे सेन्ट्रल मॉल गये जहाँ एक बड़े भवन के आगे  विलेज – “रेस्तरां नहीं एक अनुभव” लिखा था. सारा हाल रंग-बिरंगी झंडियों से सजा हुआ था, जो जगह-जगह लगे अदृश्य पंखों से हिल-डुल रही थीं. एक गाँव का माहौल बनाया गया था, जगह-जगह छोटी-छोटी दुकानें थीं, चना जोर गरम, कुल्फी वाला, बिल्लू बारबर, पुलिस थाना और तो और एक जेल भी थी, ज्योतिषी और मेंहदी वाला भी था. बीच-बीच में साइकिल पर सवार होकर चाय वाला और और अन्य हॉकर भिन्न वेश-भूषा में सजे सामान बेच रहे थे. मुख्य भोजन स्टाल भी विभिन्न पकवानों से सजा था. लगभग दो घंटे वहाँ गुजारे. नवरात्रि के कारण वहाँ कठपुतली डांस तथा डांडिया नृत्य का आयोजन भी किया गया था.

फोर्टिस में “फुल बॉडी – मेडिकल चेकअप” कराने के बाद घर लौटे तो तीन बज चुके थे. घर में पड़ी एक किताब पर नजर गयी, प्रसिद्ध मॉडल याना गुप्ता की लिखी पुस्तक थी, स्वास्थ्य और भोजन से सम्बन्धित, आज ही वह डाईटीशियन से मिलकर आई थी सो उसमें उत्सुकता हुई, लिखा था, भोजन के प्रति गलत रवैया ही कई रोगों को जन्म देता है. कल इस्कॉन मन्दिर जाना है और परसों ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ आश्रम.

रात्रि के नौ बजे हैं, नन्हा अभी तक नहीं आया है, शायद रास्ते में होगा. इस कमरे में ठंडी हवा आ रही है, यहाँ शाम के बाद हवा में ठंडक भर जाती है, एक अजीब सी निस्तब्धता का आभास हो रहा है. आज सुबह भी झील किनारे घूमने गये. लौटे तो कुछ देर एक अलमारी की सफाई की, फिर मन्दिर गये. इस्कॉन मन्दिर की भव्यता देखते ही बनती है, काफी ऊँचाई पर बना है और कितने ही घुमावदार रास्तों से होकर जब मुख्य प्रतिमाओं के दर्शन मिलते हैं तो भीतर एक सहज पुलक भर जाती है. दोपहर का भोजन भी वहीं किया. वापसी में नन्हे के दफ्तर गये, एक बड़ी इमारत की चौथी व पांचवी मंजिल पर स्थित ऑफिस आयुध पूजा (विश्व कर्मा पूजा जैसी) के लिए सजा था, नवरात्रि के कारण शाम को यहाँ भी डांडिया  होने वाला था.

आज एक पुराने कन्नड़ मित्र के यहाँ गये, जिन्होंने दक्षिण भारतीय भोजन परोसा. खसखस, चावल व नारियल से बनी खीर बहुत स्वादिष्ट थी. उन्हीं के साथ श्री श्री के आश्रम गये. गेट पर ही कार की पार्किंग कर जब अंदर प्रवेश किया तो लोगों का हुजूम देखकर बहुत आश्चर्य हुआ. हजारों की संख्या में पंक्ति बद्ध लोग दूर तक पलकें बिछाये बैठे व खड़े थे, उन्होंने भी पंक्ति में खड़े होकर निकट से गुरूजी के दर्शन किये. कल उन्हें कूर्ग जाना है जो कर्नाटक का एक पहाड़ी स्थान है. उसने नेट पर पढ़ा, कूर्गी लोग सैनिक परंपरा से आते हैं और आज भी उन्हें हथियार रखने का अधिकार है. यह जानकर आश्चर्य हुआ कि कूर्गी महिलाएं जो साड़ी पहनती हैं उसमें प्लेट्स पीछे की तरफ होती हैं तथा पल्लू किनारे पर लटका होता है.