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Thursday, July 2, 2020

शहीदों का वसंत

आज वसन्त पंचमी है. पूजा कक्ष में माँ सरस्वती की तस्वीर भव्य तरीके सजायी है. दोपहर को कुछ महिलाओं और बच्चों के साथ पूजा की. अभी कुछ देर पहले टीवी पर कुम्भ के दृश्य अनोखे हैं. करोड़ों लोग कुम्भ में आते हैं. सब एक ही लक्ष्य को लेकर, एक ही भाव के साथ. 

रात्रि के नौ बजे हैं. सरस्वती पूजा के किसी पंडाल से आवाजें आ रही हैं. कल भी देर तक आती रहीं. दिन में तेज आवाज में संगीत बजाते हुए और शोर मचाते हुए लड़कों का एक हुजूम देवी की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए ले जा रहा था. शाम को नदी से लौटते समय एक सुंदर मूर्ति को सड़क के किनारे पड़े हुए देखा. पूजा के नाम पर लोग कितना कुछ करते हैं पर वास्तविक पूजा से दूर ही रहते हैं. जून से बात हुई आज उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना बड़े से स्क्रीन पर. लन्च पर एक मित्र परिवार आया जो वर्षों पहले दूसरी जगह चले गए थे. शाम को उन्हें नदी पर ले गयी. चाय बागान भी ले गयी पर तब तक अँधेरा हो गया था. 

हरमन हेस की किताब ‘सिद्धार्थ’ पढ़ रही थी आज, वर्षों पहले पढ़ी थी, पर जरा भी याद नहीं थी. बदली के गरजने की आवाज है या जेट की, रात के सन्नाटे में गूँज रही है. आज बड़े भाई से बात हुई, उनके विवाह की  चालीसवीं वर्षगाँठ होती यदि भाभी होतीं, सुंदर तस्वीरों से एक वीडियो उन्होंने बनाया, वह खुश लग रहे थे. उन्होंने नन्हे के साथ उनकी एक पुरानी तस्वीर भेजी है, शायद उनके घर पर खींची गयी होगी. फेसबुक पर पोस्ट की. आज नैनी ने अपनी सास के बारे में मजेदार बातें बतायीं, वह कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी उठ जाती है और अपने आप से बातें करती है. कभी बच्चों की तरह उछलती हैं और खुश रहती हैं. उसके ससुर (जिसको गले का कैंसर है,) का गला अब पहले से ठीक है, तम्बाकू छोड़ नहीं सकता सो वह बीड़ी की जगह सिगरेट पीने लगा है. कितना स्वाधीन है मानव और कितना पराधीन, यह कभी-कभी ज्ञात हो पाता है किसी को जब उसके साथ कुछ ऐसा घटा हो. सामान्य जन के  लिए यह समझना भी कठिन है कि वह इतना परतन्त्र है. 

आज कश्मीर में जो हुआ वह भीषण है, भयानक है और निंदा करने के लायक है. कल तक प्रधानमंत्री कह रहे थे कि कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं पर आज दोपहर साढ़े तीन बजे विस्फोटक से भरी एक कार को जवानों से भरी गाड़ी से टकरा दिया, भयानक विस्फोट हुआ और उनतालीस जवान मारे गये. सारा देश स्तब्ध है और सभी के मन में क्रोध और दुःख है. शाम को क्लब में मीटिंग थी शायद वहाँ किसी को इस खबर की जानकारी नहीं थे, वे सामान्य ही रहे. प्रधानमंत्री ने पालम हवाई अड्डे पर श्रद्धांजलि अर्पित की उन शहीदों को, जो पुलवामा में मारे गए हैं. 

आज कम्पनी की हीरक जयंती का समापन समारोह है. जून अभी-अभी घर लौटे हैं. सुबह से वर्षा हो रही है, तापमान गिर गया है. पुलवामा हमले की साजिश रचने वाला कामरान आज मारा गया, चार सैनिकों को और शहादत देनी पड़ी. देश भर में आतंकवाद के खिलाफ क्रोध बढ़ता ही जा रहा है. देश में सभी दल एकमत होकर कार्यवाही करने को कह रहे हैं. चुनावी भाषा की जगह देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाने की भाषा नेता बोल रहे हैं.  

Sunday, January 5, 2014

राखी का त्योहार


मुझसे काफ़िर को तेरे इश्क ने यूँ शरमाया
तुझको देख के दिल धड़का तो खुदा याद आया

टीवी पर संगीत का सुरीला कार्यक्रम ‘सारेगामा’ आ रहा है. आज दोपहर भी वह गयी थी, राग यमन सिखाया, बहुत कठिन था, सुर पकड़ में नहीं आ रहे हैं. अभ्यास करने से शायद वह किसी हद तक गा पायेगी. संगीत के जादू ने अपने बस में किया है तो वही आवाज में असर भी लायेगा. कभी ये शब्द कितने अनजाने थे पर अब अपने से लगते हैं. आज सुबह उसकी स्टूडेंट नहीं आई तो कुछ पंक्तियाँ लिखीं उस वक्त,

लालकिले की प्राचीर से तिरंगा
जब फर फर लहराता है

कोटि कोटि हृदयों की आशाओं के साथ
कोटि कोटि दिलों में हिलोरें जगाता है

अस्तित्व का प्रतीक गौरव अस्मिता का  
पहचान हमारी सारे जग से कराता है

अख़बार पढ़े तो आजकल हर पेज पर हिंसक वारदातें ही पढने को मिलती हैं. इन्सान कहाँ जा रहा है, इस अंधी दौड़ का कोई तो अंत होगा. रक्षा बंधन के कारण आज नन्हे का स्कूल बंद था, ‘जागरण’ में भारत के पुराने रीति-रिवाजों के बारे में डॉ पंडया के भाषण के कारण उसने नन्हे और जून दोनों को राखी बाँधने को कहा, जून लेकिन दफ्तर जाने से पूर्व उतार गये, देखा-देखी नन्हे ने भी वही किया. ‘जागरण’ में भारत के गौरवपूर्ण अतीत और सुनहरे भविष्य की बात सुनकर विश्वास करने को जी नहीं चाहता. जहाँ हिंसा इतनी गहरे पैठ चुकी हो और भ्रष्टाचार जीवन का अंग बन चुका हो, होकर भी वहाँ सद्गुण अर्थहीन हो जाते हैं. असम में फिर वही तनाव और अराजकता का वातावरण है, जो कुछ वर्ष पहले था जब राष्ट्रपति शासन की घोषणा करनी पड़ी थी. अभी कुछ देर पूर्व भगवद गीता में पढ़ा कि जो कुछ भी हो रहा है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के विशाल क्रियाकलाप का एक अंश मात्र है और इसको न हम रोक सकते हैं न कम कर सकते हैं. आज सुबह उसने oat porridge बनाई, जून को बहुत पसंद है पर उसे उतनी नहीं.

कल से उनके कोरस की रिहर्सल भी शरू हो गयी है, ‘साज’ फिल्म का गीत है, जो १५ अगस्त को ही फिल्म में गाया गया था. शाम को छह बजे क्लब गयी, वापस आते-आते आठ बज गये, ये कुछ दिन कैसे बीत जायेंगे, सम्भवतः एक मोहक याद बनकर साथ रह जायेंगे. रात होने पर गीत का मन ही मन अभ्यास करते हुए नींद कब आँखों में भर आती है पता ही नहीं चलता. नन्हा और जून को थोड़ा और करीब आने का मौका मिल रहा होगा. जून उनकी शाम की चाय के लिए नाश्ते का इंतजाम करते हैं और उस दिन की चाय के लिए भी सारा सामान लायेंगे, उन्हें यह काम बोझ नहीं बल्कि अच्छा लग रहा है उसकी तरह. आज भी मौसम कल की तरह मेहरबान है, पिछले कई दिनों से कोई पत्र आदि नहीं आया है, रेलवेज बंद है, आये दिन आंतकवादियों के बम विस्फोटों के कारण ट्रेनें रोक दी गयी हैं. आज हिंदी में व्याकरण पढ़ाया, उसे लगा सिखाते हुए वह खुद भी काफी कुछ सीख रही है.