Wednesday, April 15, 2026

नये नये ले-आउट


नये नये ले-आउट



सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। लंच उन्होंने ही बनाया, राजमा, मेथी आलू और बेक्ड वेज। दोपहर बाद जिग्सा पजल में कुछ टुकड़े जोड़े। शाम को सभी घूमने निकले, पहले दो नर्सरी देखीं, फिर दो झीलें। सूर्यास्त के समय वे झील किनारे थे, फ़ोटोग्राफ़ी की। दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


एक दिन और बीत गया, उपलब्धि के नाम पर, दोपहर को साहित्य रचना की, कुछ शब्द उतरने दिये कलम द्वारा। एक सखी से बात की, फूलों और  प्रकृति के चित्र उतारे। बगीचों की सैर की, आकाश को निहारा, चाँद-तारों से बातें कीं, हवा की ठंडक को महसूस किया। भोजन बनाया, खिलाया, खाया। चलते-फिरते राजनीति पर कुछ चर्चा सुनी। हिंदू-मुस्लिम, दलित, यादव, ब्राह्मण के जोड़-तोड़ चल रहे हैं। नापा में एक और व्यवसायिक इमारत बननी शुरू हुई है। पापाजी से बात की,उन्होंने उसकी कविताओं की तारीफ़ की, रोज़ की तरह। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कविता भेजनी है उन्हें। 


आज शाम को एक महिला डॉक्टर आयीं, वह महिला दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं। जून ने इस पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। आज सुबह भी वह कमेटी के काम से बाहर गये थे। दोपहर को एक स्थानीय महिला ने ऑनलाइन कन्नड़ भाषा का पहला पाठ पढ़ाया।मार्च में छोटा भाई दुबई जाने वाला है और दीदी-जीजा चंडीगढ़। 


आज गणतंत्र दिवस है। नन्हा व सोनू कल रात को ही आ गये थे। रात्रि भोजन के बाद छत पर हवन वाली कड़ाही में अग्नि देव का आवाहन किया। इस बार लोहरी पर वे लोग आ नहीं पाये थे। आज बड़ा भांजा भी आ गया। असम का एक पुराना मित्र परिवार और नापा में नया बना एक मित्र परिवार भी। गाँव की पंचायत की अध्यक्षा भी आयी थीं, जिन्हें झंडा आरोहण के लिए बुलाया गया था। दोपहर को नेता जी पर एक अच्छी सी फ़िल्म देखी, गुमनामी।वह उनकी आत्मकथा भी मँगवा रही है, पिछले दिनों उनके बारे में इतना कुछ सुना और पढ़ा, कि और जानने की उत्सुकता हो रही है। 


नूना का स्वास्थ्य सौ प्रतिशत ठीक नहीं है। सिर में हल्का दर्द है और गले में हल्की ख़राश भी।आजकल हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई समस्या हो रही है, कोरोना के वेरिएंट का वायरस हवा में है। सुबह टहलकर आये तो नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी, उसका फ़ोन ख़राब हो गया है। नन्हे को कहा, तो उसने नया फ़ोन ऑर्डर कर दिया है, कल आ जाएगा।उसने घर के लिए भी कुछ सामान भेजा है। उसे कुछ भी कमी दिखती है तो शीघ्र ही पूरा करने का प्रयास करता है। 


आज गाँधीजी की पुण्यतिथि है।कल शाम ‘बीटिंग रीट्रिट’ का शानदार  कार्यक्रम देखा, ड्रोन का प्रदर्शन बहुत अच्छा लगा। जून ने आज गाजर का हलवा बनाया है।नन्हा और सोनू केक लाये थे, आज उनके विवाह के रजिस्ट्रेशन को पाँच वर्ष हो गये।नूना ने नाश्ते में गोभी के पराँठे बनाये और लंच में लोभिया। शाम को वे सब ड्राइव पर गये, आसपास बन रहे कई ले-आउट देखे। बिल्डर खेतों को काटकर प्लॉट्स बना रहे हैं और संभवत: किसान भी इससे बहुत मुनाफ़ा कमा रहे हैं। बच्चों के जाने के बाद वे दोनों सोसाइटी के एक निवासी के यहाँ उनका तबला वादन सुनने गये। उनकी बेटी भी बहुत अच्छा गाती है। नन्हे ने छत के लिए एक बड़ी सी चाइम भेजी है और जून के बाथरूम के लिए नई फिटिंग्स। सोनू के भाई की मंगनी पर जून ने सूखे मेवों का एक डिब्बा भेजा है।     


फ़रवरी का आरम्भ ! पाँच तारीख़ को वसंत पंचमी है, पर उत्तर भारत में ठंड कम नहीं हुई है।आज बड़ी भांजी का जन्मदिन है, नूना ने कविता भेजी है। पापा जी ने बताया, छोटा भाई ड्यूटी पर सिक्किम पहुँच गया है।कल वे लोग नापा में रहने वाले इसरो के एक वैज्ञानिक पति-पत्नी से मिले, जो दुनिया के अनेक देशों की यात्रायें कर चुके हैं।दक्षिणी ध्रुव तक हो आये हैं। आने वाले कल उन्हें एक वृद्ध गांधीवादी व्यक्ति से मिलने जाना है। 


आज नूना पहली बार इस कमरे में अकेले सो रही है। जून सुबह उठे तो तबियत पूरी तरह ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी कुछ देर टहलने गये। वापस आकर ध्यान भी किया, पर स्नान के बाद ज्वर महसूस हुआ, जो दिन में दवा लेने पर उतर गया। वह नीचे वाले कमरे में हैं। उसे लगता है मामूली सर्दी-जुकाम का असर है, पर जून कोरोना की संभावना बता रहे हैं। अगले सात दिन अब उन्हें अकेले ही रहना है और उन दोनों को ही घर से निकलना नहीं है। नैनी भी नहीं आएगी और न ही कोई और आ सकता है। बीत ही जाएँगे ये सात दिन, उसे एक फ़िल्म का नाम याद आया, वह सात दिन ! दिन आज गर्म है, शायद रात कुछ ठंडी होगी।नन्हे का फ़ोन दो बार आ चुका है , उसने फल-सब्ज़ियों का ऑर्डर कर दिया था।नेता जी की आत्मकथा आ गई है, बहुत रोचक ढंग से लिखी गई है। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म में बहुत रुचि थी।पापाजी आजकल अंग्रेज़ी कविताओं की पुस्तक पढ़ रहे हैं।   


जून का बुख़ार उतर गया है, उन्होंने सुबह एक बार ही दवा ली।बड़ी ननद को भी कोविड हो गया है, जून ने दोनों बहनों से बात की। कुछ देर पहले सोनू की मॉम का फ़ोन आया, बेटे की मँगनी के लिए उनके यहाँ मेहमान आने शुरू हो गये हैं। कल नन्हा व सोनू भी पहुँच जाएँगे। आज असोसिएशन के पुराने प्रेसिडेंट की पत्नी का फ़ोन आया, जून के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रही थी। यहाँ सभी लोग बहुत ध्यान रखते हैं। पड़ोसी भी किसी भी तरह की मदद के लिए फ़ोन करके कह चुके हैं। शाम को नन्हा व सोनू भी आ गये, उनसे रहा नहीं गया। नूना को लग रहा है, डायरी लेखन की कला जैसे भूल ही गई है, न ही लेख अच्छा आ रहा है, न ही विचार ठीक से व्यवस्थित हो रहे हैं। आज ध्यान भी नहीं किया, सारा दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


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