आज सुबह सफाई करने-कराने में बीती, कल ही उसने स्वीपर
से कह दिया था, आज जाला साफ करना है, फौरन मान गया, नये साल में शायद उसने भी
पक्का इरादा किया होगा कि... नूना ने तो अभी तक एक भी पक्का इरादा नहीं किया,
जानती है सारे टूट ही जाते हैं चाहे कितने भी पक्के हों. दोपहर को उसकी पुरानी पड़ोसिन आ गयी, सारा वक्त वे बातें
करते रहे, थोड़ी थकान तो स्वाभाविक थी. नन्हे को आज सोशल के नम्बर भी मिल गये, उसने
मैडम से कहकर अपने छह नम्बर कम करवाए, उसकी टीचर भी क्या सोचती होंगी. शेष सभी विषयों
में मार्क्स कल ही मिल गये थे. नन्हे खेलने गया तो वह जून की लायी चिट्ठियां और
कार्ड्स देखने लगी, इस वर्ष सोलह कार्ड्स आ चुके हैं अभी तक. छोटे भाई की चिट्ठी
पढ़ी तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ या कहें खबर की गम्भीरता को उस वक्त महसूस नहीं
किया, पर शाम होते-होते मन ने पूरी तरह उस खबर को जो दुखद थी आत्मसात कर लिया और
बाद में ‘नमक हराम’ फिल्म देखते समय भी या क्लब में मैच देखते वक्त भी वही बात याद
आती रही. क्लब में साढ़े आठ बजे चाय मिली जिसमें दक्षिण भारतीय व्यंजन थे, ठंड कल
से भी ज्यादा थी. उसके सिर में शाम से होता दर्द बढ़ गया, जो घर आकर दवा लेकर सोने
पर ही गया. जून और नन्हा भी बिना कुछ खाए सो गये. रात को सपने में उसने दीदी और
बच्चों को भी देखा, वही छोटे-छोटे बच्चे.
जिस डायरी में वह इस वर्ष
लिख रही है, जून ने दी है उसकी ‘आयल’ से मिली अपनी डायरी, वह उसे बेहद चाहते हैं
इसका छोटा सा सबूत है यह, और उसके लिए वह क्या हैं इसे शब्दों में बयाँ करना
मुश्किल है. उनके बिना जीवन की कल्पना ही व्यर्थ है. परसों शाम दफ्तर से आकर जब
उन्होंने बताया मद्रास की उनकी ट्रेनिंग पक्की हो गयी है तो मन कैसे घायल हो गया
था, उनके बिना इस महीने उसे और नन्हे को दो बार रहना होगा, पहले आठ दिन और बाद में
दस दिन, पर आज उसकी आँखें किसी और वजह से ही नम हैं. छोटे भाई ने लिखा है, माँ-पापा
की अनुपस्थिति में घर में चोरी हो गई. हजारों का सामान गया, बात हजारों की नहीं है
चोरी हुई यही सबसे दुखद बात है. आज भी सुबह से मन उदास है, माँ पापा के दुःख में
शामिल, उन्हें मिलने का उन्हें खुश देखने का मन होता है. भाई ने लिखा है वे लोग
स्वस्थ व प्रसन्न हैं, उसे उन पर गर्व है. उन्हें कुछ उपहार भेजने का मन है, नये
वर्ष में उसकी, जून व नन्हे की तरफ से स्नेह सहित एक उपहार. भाई ने लिखे है, कपड़े,
गहने, साइकिल, बिस्तर, ट्रांजिस्टर सभी कुछ चला गया. वे चोर जो भी हों कभी खुश
नहीं रहेगें, ईश्वर उन्हें उनके किये की सजा जरुर देगा. एक खत व एक चेक भाई के नाम
भेजा है, पता नहीं वे लोग इस बात को किस रूप में लें पर उसे थोड़ा संतोष जरुर हुआ
है. शाम को वे फोन करने भी जायेंगे. आज उसे शिद्दत से इस बात का अहसास हो रहा है
कि वह उनसे अलग नहीं है.
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