Tuesday, March 11, 2014

नये स्कूल में पहला दिन


आज का इतवार कुछ अलग है, जून सुबह नौ बजे ही नाश्ता करके निकल गये, दो बजे लौटे. नन्हा यहीं पडोस में किसी के यहाँ पिकनिक पर गया है. मौसम आज गर्म है, कुछ देर पूर्व कुछ बूँदें पड़ीं फिर थम गयीं. कल दोपहर भर और सुबह भी नन्हा टेनिस खेलता रहा, धूप से चेहरा लाल हो गया पर जोश कम नहीं था. वह DPS जाने के लिए तैयार हो गया है, अब कुल मिलाकर बीस बच्चे हो गये हैं जो यह से जायेंगे.

कल फिर उड़ीसा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों में तूफान आया सो यहाँ भी बदली फिर छाई है, उन्हें थोड़ी देर बाद दिगबोई के लिए निकलना है, नन्हे की फ़ीस जमा करनी है, ड्रेस व किताबें खरीदनी हैं. कल से वह स्कूल जाएगा. सुबह उसे उठाया तो अपने खराब मूड में था, शायद नींद से उठाने पर बच्चों का ऐसा ही मूड रहता हो, शायद उन्हें सपनों से जगाया जाना नागवार गुजरता हो. वह सुबह-सवेरे ही उस पर झुंझला गयी, कुछ देर वह उदास रहा फिर सामान्य हो गया. कल से उसे और भी जल्दी उठाना होगा, देखें क्या होता है, कहीं उनकी सुबहें करुण दृश्यों से न भर जाएँ ! कल शाम उसने नन्हे को संज्ञा के भेद, उदाहरण आदि पढाये, जाने से पूर्व सर्वनाम भी पढ़ाना है. उसने देखा है, अक्सर उसके जबड़े एक दूसरे पर दबाव डालते हैं. तनाव ग्रस्त होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है, पर सामान्य अवस्था में भी ध्यान न देने पर ऐसा हो जाता है. शायद नींद में भी ऐसा होता होगा. नींद में तरह-तरह के विचार एक के बाद एक मन में आते हैं. जिनका आपस में कोई तारतम्य नहीं होता न ही कोई अर्थ निकलता है. ध्यान किये हफ्तों बीत गये हैं. नन्हे के DPS जाने पर सुबह वक्त मिल सकेगा.
आज नन्हा पहली बार अपने नये स्कूल में नई कक्षा में बैठा होगा, सुबह वह पांच बजे उठी, सवा  पांच बजे उसे उठाया और साढ़े छह बजे तक ही जून और वह दोनों तैयार थे. आज उसका रिजल्ट भी निकलने वाला है. पड़ोस का बच्चा ले आएगा. उसकी कुछ किताबें नहीं मिली हैं, स्वेटर भी बाजार बंद होने के कारण नहीं मिला. कल शाम वह पुराना गृह कार्य करता रहा. रात वे जल्दी सो गये ताकि सुबह तरोताजा होकर जल्दी उठ सकें. नन्हे का स्कूल का अनुभव ही बतायेगा कि उनका उसे दिगबोई भेजने का निर्णय सही है या गलत. आज जून को अपना पेपर प्रस्तुत करना है. इतवार को उन्हें बाहर जाना है. आज कृष्णामूर्ति की पुस्तक में पढ़ा कि जीवन में क्रम स्वयंमेव आना चाहिए प्राकृतिक रूप से, ऊपर से थोपी हुई कोई भी वस्तु स्वाभाविक नहीं होती और न ही उसका असर होता है. प्रत्येक मानव यदि अपने स्वाभाविक रूप में रहे तो द्वंद्व पैदा ही न हो.

कल नन्हे का रिजल्ट आया और जैसी कि उन्हें उम्मीद थी वह अपने सेक्शन में प्रथम आया है. वैसे वह इससे भी अच्छा कर सकता है, कल उसका पहला दिन अच्छा रहा, शाम को आया तो खुश था, कल से कई लोगों ने बधाई दी है, कुछ लोग पूछते हैं कि नन्हे को DPS में दाखिला कैसे मिला आदि. उनकी ख्वाहिश थी कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ायें सो ईश्वर ने पूरी कर दी है. आज बहुत दिनों बाद उसने पीटीवी पर एक ड्रामा देखा, दिल को छू जाते हैं भोले भाले किरदार, अपने बेहद अपने लगते हैं. आज सुबह उसने ‘रामकुमार भ्रमर’ की एक कविता रजनी बाला पढ़ाई, उस छात्रा को अपनी लिखी एक कविता भी दिखाई. पिछले पूरे हफ्ते वह DHC के लिए नहीं पढ़ सकी. अर्थात हिंदी लेखन के कोर्स के लिए.  




Monday, March 10, 2014

असम स्टाइल का घर


सच्ची ख़ुशी का राज है सृजन, कल शाम उसने इस वर्ष की अपनी पहली कविता लिखी..और लग रहा है असीम सम्भावनाओं के द्वार खुल गये हैं, आज प्यार की सच्ची परिभाषा पढ़ी जहाँ कोई प्रतिदान चाहता है वहाँ व्यापार होता है और जब किसी का मन अपनी ख़ुशी के लिए किसी अन्य पर निर्भर करता है तो वह आजाद नहीं है, वह प्रेम नहीं कर सकता. यह खुबसूरत दुनिया और इसमें बसने वाली हर शै से हमें प्यार तो करना है पर उन पर निर्भर नहीं होना है. आत्मनिर्भरता ही निडरता को जन्म देती है, जब हम किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे तो भयभीत होने की भी जरूरत नहीं, एक नाजुक बेसहारा, कमजोर आश्रित होकर जीने से कहीं बेहतर है मजबूत आत्मशक्ति के साथ जीना, क्योंकि वह शक्ति कहीं बाहर से मिलने वाली नहीं है, हमारे अंदर ही मौजूद है. जगत में सच का सामना करते हुए निर्भयता पूर्वक अपनी बात कह देने का आत्मविश्वास लिए जीना ही सही मायनों में आजाद होकर जीना कहा जायेगा. आज सुबह हिंदी कक्षा में ‘वियोगी हरि’ का एक निबंध पढ़ा, ‘विश्व मन्दिर’ फिर IGNOU में एक अफ्रीकन लेखक का साक्षात्कार सुना/देखा. लेखक अपने समाज की विसंगतियों, विषमताओं, कलह तथा अराजकता के प्रति सचेत होता है, लोगों का ध्यान इनकी ओर दिलाना तथा उनको दूर करने के उपाय सुझाना भी उसीका काम होता है. अपने परिवेश तथा समाज, राष्ट्र में चल रही गतिविधियों के प्रति जागरूक होता है और अनुभव करने की उसकी शक्ति तीव्र होती है. वह बदलाव को भी भांपता है और ठहराव को भी. कवि बनने का उसका स्वप्न भी एक दिन पूर्ण होगा !

कल रात भीषण वर्षा हुई, आंधी और तूफान के साथ, एक बार तो बिजली इतनी जोर से कड़की की उनकी नींद टूट गयी, लगा जैसे पास ही में कहीं बिजली गिरी हो. उसके बाद जो नींद आई, एक स्वप्न देखा जिसमें उसे बिजली का करेंट लग जाता है. सुबह आधा घंटा देर से आँख खुली. कल शाम एक मित्र के यहाँ गये, वे लोग जैसे उनका इंतजार ही कर रहे थे, चेहरे बदल जाते हैं लेकिन कोई न कोई ऐसा परिचित परिवार सदा रहा है जहाँ उनका दिल से स्वागत होता है. वहाँ से हँसते-हँसाते लौटे तो रास्ते में ही मूसलाधार वर्षा शुरू हो गयी, एक भीगते हुए परिचित को लिफ्ट भी दी. समाचारों में उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में आये तूफान के बारे में सुनकर प्रकृति की भीषणता और शक्ति का अहसास होता है, प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानव विवश है. यहीं आकर उसे ईश्वर की याद आती है, इस विशाल ब्रह्मांड में अपनी तुच्छ स्थिति का बोध होता है. किन्तु मानव ने भी प्रकृति के आगे हार न मानने की कसम खायी है, उन्हीं तटवर्ती इलाकों में जहां तूफान आते हैं, लोग फिर भी बसेंगे. कल दिन भर लिखने-पढने में व्यस्त रही, अरुंधती राय की किताब रोचक है, आराम से पढ़ रही है, उसका बचपन पढ़ते-पढ़ते अपना भी याद आने लगता है.
   
पिछले दो दिनों में कितना कुछ घट गया, नन्हे को वे परसों दिगबोई ले गये. लंच उन्होंने दिगबोई के Blw No २६ में किया. असम स्टाइल का खूबसूरत लकड़ी का दुमंजिला घर, खुले-खुले कमरे, ड्राइंग रूम से आगे काफी खुला बरामदा ऊपर, बेडरूम से थोड़ा नीचे उतर कर बाथरूम, सामने सुंदर लॉन और कई वृक्ष. ऊँचाई पर स्थित इस बंगले में घुमावदार मार्ग से आना पड़ता है. दिगबोई वाकई सुंदर जगह है. डीपीएस स्कूल भी काफी अच्छा लगा, बगीचा है, सुन्दर फूल-पौधे हैं, कक्षाओं में रंगीन फर्नीचर है, डेस्क ऐसे हैं जिसके अंदर बच्चे अपना बैग रख सकते हैं. नन्हे का टेस्ट अच्छा हो गया, वह खुश था पर थोड़ा परेशान भी. कल वे सुबह-सवेरे ही दिगबोई चले गये, दोपहर को लौटे, नन्हे का दाखिला भी हो गया. कल रात को चोर फिर आए थे, गाड़ी की बैटरी चोरी करने, पर बोनट में चेन बंधी होने के कारण काट नहीं पाए. जून बेहद परेशान हैं, नन्हा अलग परेशान है कि उसे सेंट्रल स्कूल छोड़कर नहीं जाना है, उसे समझाना आसान कार्य नहीं है. उसे रोज इतना सफर करके पढ़ने जाना होगा, वह पता नहीं किस बात घबरा रहा है. बच्चे खुलकर अपने मन की बात बता भी नहीं पाते, शायद सभी चीजों का मिलाजुला असर हो. उसका मेडिकल checkup भी आज होना है और फोटो भी खिंचानी है. इस वक्त जून उसे लेकर अस्पताल गये हैं.


Friday, March 7, 2014

भारतेंदु हरिश्चन्द्र का कवित्त


आज नन्हे की काम करने की गति देखते ही बनती है, सुबह साढ़े सात बजे उठकर भी नहा-धोकर नाश्ता करके पढ़ाई करने बैठ गया ताकि नौ बजे खेलने जा सके. जाते समय फरमाइश करके गया है कि दोपहर को भोजन में दाल माखनी, मिक्स्ड वेज तथा मलाई कोफ्ता तीनों ही होने चाहियें. सो नूना का ध्यान आज किचन की ओर ही लगा हुआ है. कल उसने पापा से एक केक के लिए भी ढेर सारा सामान मंगवाया है, पर स्वयं बनाने या सहायता करने के लिए घर में रुकना गवारा नहीं, खैर, उसकी पहली पसंद टेनिस है, इससे यह तो पता चलता है है. कल शाम जून बहुत अच्छे मूड में थे, पर आने वाले कल की शाम नहीं होंगे, क्यों कि कल शाम चार बजे उसे फिर मीटिंग में जाना है. उसके बिना उनकी शामें बेहद अकेली हो जाती हैं.

नन्हे का Black Forest cake बन कर तैयार हो गया है, उसने जून से कहा भी इसकी एक तस्वीर खींच लें, बहुत सुंदर दिख रहा है पर उन्हें उसके स्वाद से मतलब है न कि रूप से.. नन्हा और वह दोनों ही उसे काटने के लिए बेताब हो रहे हैं.

मार्च की एक सुहानी सुबह ! अलसुबह तेज आंधी आई, कुछ क्षणों के लिए अँधेरा छा गया, हवा की गति प्रचंड थी, फिर वर्षा हुई और देखते ही देखते हवा भी थम गयी, बादल न जाने कहाँ उड़ गये, सूर्य का राज्य पुनः छा गया और धूप चमकने लगी. ईश्वर के मंच पर दृश्य परिवर्तन इतनी शीघ्र होता है कि मन रोमांचित हो उठता है. आज सुबह उसकी छात्रा आयी थी, आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता प्रसिद्ध कवि भारतेंदु हरिश्चन्द्र की एक कविता कवित्त छंद में पढ़ी, पढ़ायी. अभी नौ भी नही बजे हैं, नन्हे का मित्र उसे लेने आ गया है, वह अभी पढ़ रहा है, अच्छा तो यही होगा कि मित्र उसकी पढ़ाई में मदद करे. कल कमेटी मीटिंग में सेक्रेटरी देर से आई, उसे ही पिछली मीटिंग के मिनट्स पढ़ने पढ़े, बाद में उन्हें अपने पति के कोलकाता से लौटकर आने के बाद भी पूरे समय रुकना पड़ा, उनका मन घर पर रहा होगा लेकिन ड्यूटी तो ड्यूटी है. वह देर से आई तो भी जून सामान्य मूड में थे, बल्कि उन्होंने डिनर भी बना दिया था. कल रात उसने एक विचित्र स्वप्न देखा, मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि स्वप्न छिपी हुई इच्छाओं और कामनाओं का प्रतीक होते हैं तो बिना उसे ज्ञात हुए कब उसकी यह कामना हुई, समझ से बाहर है, नींद को मोहक इसीलिए कहा गया है न कि व्यक्ति एक दूसरी ही दुनिया में विचरण करने लगते हैं जहाँ कोई नियन्त्रण नहीं रहता.


इन्सान का मन मिटटी के कोमल लोंदे की तरह होता है, जैसी छाप डाल दें वैसा ही बन जाता है, दुनिया की कोमलतम वस्तु से भी कोमल, छुईमुई की तरह लजीला और यही मन वक्त पड़ने पर कठोर भी बन जाता है, जो हल्की सी उपेक्षा भी सहन नहीं कर पाता वही समय के थपेड़ों को सह पाने में सक्षम हो ही जाता है, भावुक मन हो तो सोने पर सुहागा, जहाँ अपने प्रतिकूल कुछ भी होता या घटता दिखाई दिया, झट कुम्हला गया, जैसे किसी ने ऊर्जा शक्ति ही छीन ली हो, मुरझाए हुए फूल की तरह फिर पड़ा है जमीन पर. आज पत्रों के जवाब का दिन है और अभी कुछ देर पूर्व जून का फोन आया, तिनसुकिया जाने का दिन भी है. कल शाम वे असमिया सखी की बेटी के नामकरण संस्कार में गये, उसने एक स्वेटर बुना था उसके लिए, लेकर गयी पर वह अभी भी उठने की हालत में नहीं थी, पतिदेव की समझ में नहीं आ रहा था मेहमानों का स्वागत कैसे करें. वहाँ से वे लाइब्रेरी गये, और कुछ नई किताबें लाये, Gods of small things भी मिल गयी. अरुंधती राय की किताब ! जिसमें उसका एक बहुत सुंदर सा फोटोग्राफ है. 

Tuesday, March 4, 2014

चुलबुली सी बालिका


आज वह बेहद हल्का महसूस कर रही है. दादा धर्माधिकारी की पुस्तक में मनुष्यता की परिभाषा पढकर मनुष्य की गरिमा और उसकी शक्ति पर विश्वास और बढ़ गया है. कल का दिन एक भरपूर दिन था. कल दिन भर उसने एक एक पल को पूरे मन से जीया. मानव होना और फिर स्त्री होना, संस्कार युक्त, शिक्षित और स्वस्थ होना, अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, कुछ न कुछ करते रहने की तीव्र इच्छा, निरंतर कुछ न कुछ सीखने की आकांक्षा, जीवन को कलात्मक रूप से जीने का प्रयास, स्वयं को समाज के प्रति या परिवार के प्रति उत्तरदायी मानते हुए अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करना, ये सारी बातें उसमें किसी हद तक तो हैं न, और हर बात के लिए स्वयं को दोषी मानते रहना अपनी शक्ति पर संदेह करना, अपने आप पर भरोसा न कर पाना ये दोष भी हैं. पर अब उसे भयभीत होकर पीछे-पीछे रहकर चलने की जरूरत नहीं है, उसकी कमियां जो भी हों उन्हें लेकर स्वयं को अपमानित महसूस करने की जरूरत नहीं है. सदा ही तृतीय स्थान पाने की अपनी आदत को जारी रखने की भी नहीं. आज नन्हे का गणित का इम्तहान है जो उसे कठिन लगता है, पर वह जानती है वह बहुत होशियार है, अवश्य अच्छा करेगा. कल शाम वे टहलने गये, हवा ठंडी थी और चेहरे को छूकर सिहरा जाती थी

Today again she is so happy ! yesterday one friend got a prize of 16,000 Rs from the makers of Nyle Shampoo. They went there to celebrate the joy and to eat sweets. Today she rang her to say that they liked it, then she talked to asamiya friend, she is waiting for the D-day, she promised her to be there in the hour of need and it makes her happy that she will be of some use to someone ! Nanha has prepared well for Sanskrit exam. He has learnt twenty shlokas in Sanskrit, when she was of his age she never learned so many shlokas..

पिछले चार दिनों से नहीं लिख पायी, आज उन्हें तिनसुकिया जाना है, लंच भी वहीं खाना है. कल होली मनायी, परसों शाम बड़े भाई भाभी को फोन किया, छोटी बहन को फोन किया कल सुबह -सवेरे दीदी का फोन आया, उन्होंने कहा, बड़ा भांजा और छोटी भांजी शायद यहाँ आयें छुट्टियों में.

आज संगीत कक्षा में ‘काफी’ की तान सिखाई गयी. कल वे तिनसुकिया में ही थे कि पता चला उस सखी ने बिटिया को जन्म दिया है, वापसी में अस्पताल गये, गुलाबी रंग की छोटी सी बच्ची आँखें बंद किये लेटी थी, अभी तक चेहरा स्पष्ट नहीं था कि किस पर गया है, माँ स्वस्थ लगी, साहसी है वह, वैसे भी उम्र के इस मोड़ पर आकर माँ बनने का निश्चय करना ही साहस पूर्ण कदम था जो वह नहीं उठा पायी थी, अपना सब कुछ दे देना पड़ता है न. आज से उसकी छात्रा ने फिर से आना शुरू कर दिया है. कल उसने एक चप्पल ली, एक जोड़ी बुँदे, एक नेल पॉलिश और एक लिपस्टिक यानि अपने ऊपर खर्च ! इस समय तीन बजे हैं, नन्हा एक कहानी लिखते-लिखते बीच में ही टेनिस खेलने गया है. शाम को वे पुनः अस्पताल जायेंगे और बाद में एक मित्र के यहाँ, उनकी छोटी बेटी बहुत प्यारी है उतनी ही चुलबुली भी.   

‘कविता लेखन के सामान्य सिद्धांत’ पढना शुरू किया तो भीतर विचार जगने लगे. उसे लगा, मन जितना संवेदन शील होगा जितना गहराई से सोचेगा जीवन उतना ही अर्थपूर्ण होगा, वे हैं कि उथले-उथले ही जीए जाते हैं, अंतर में झाँकने से डरते हैं खुद के भी और इर्दगिर्द भी, कहीं कुछ ऐसा न दिख जाये जो आँखों में खटक जाये, बस आँखें बंद किये ताउम्र जिए चले जाते हैं, न ही टूटकर प्यार करते हैं न ही नफरत, बस कामचलाऊ जिंदगी जीते हैं, शिद्दत की कमी है अहसासों  में ती जीवन में गहराई कहाँ से आये.

पिछले कई दिनों से, हफ्तों से, महीनों से कुछ नहीं कहा, कविता लिखी नहीं जाती, कही जाती है पहले अपने आप से फिर कागज से, ऐसा तो नहीं कि महसूस करने की शक्ति नहीं रही, अब भी एक मार्मिक शब्द आँखों को धुंधला जाता है, मौसम के बदलते रूप और ढंग अदेखे नहीं रहते, आते-जाते उगता डूबता सूरज और चाँद जब दिखता है तो मन में एक हिलोर सी जगती है, फूल अब भी भाते हैं और दर्द अब भी होता है पर ऐसा भी बहुत कुछ है जो अब नहीं होता जैसे कि अपनी सुविधा-असुविधा की परवाह किये बिना किसी की सहायता करने की ललक. अपना ख्याल पहले आता है जैसे कि इस डर से फोन न पकड़ना कि कहीं पड़ोसिन किसी काम के लिए न बुला ले, अब अपने नियमित रूटीन को तोड़कर उसके लिए समय निकालना जबकि अपना सिर भी दुःख रहा हो, सेवा/सहायता ही कहलायेगा न, पर क्यों कि लोग नितांत अपने लिए जीते हैं ! दूसरों के लिए इसमें जगह कहाँ है ?





Sunday, March 2, 2014

कपास के पुष्प



कल रीडर्स डाइजेस्ट में एक ऐसी किताब के बारे में पढ़ा जो आँख की पलक के इशारे से लिखवाई गयी है, वह लेखक कितना बेबस था पर अपनी विवशता को उसने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उसके पास सारे अंग सही-सलामत हैं फिर भी कविताएँ नहीं लिखीं, इस नये वर्ष में तो अभी तक एक भी नहीं ! आसमान में आज बादल है और उसके मन में भी, पिछले कई दिनों से ऐसा महसूस हो रहा है कि..किसी स्तर पर भीतर प्रेम सुप्त हो गया है, आज सुबह उठी तो पहला ख्याल यही आया, रात को सोई थी तो अंतिम भी यही था, हो सकता है यह उसका भ्रम हो पर...? सुबह चुनाव की खबरें सुनी, वही डेढ़ साल पहले की स्थिति है थोड़ी सी रद्दोबदल के साथ, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, फिर खिचड़ी सरकार बनेगी और टूटेगी..पता नहीं यह सिलसिला कब खत्म होगा. कल दोपहर नन्हे को पढ़ाने में बीती, पहला इम्तहान अंग्रेजी का है. उसकी तैयारी हो चुकी है, इसीलिए निश्चिंत है. जब वह पेपर हल कर रहा था, उसने भी अपनी किताबें पढ़ीं, प्रश्न पत्र भी आये हैं, जिन्हें सितम्बर से पहले कभी भी भेज सकते हैं. शाम को गेस्ट हाउस गयी, क्लब की एक सदस्या आज जा रही हैं, किसी को भी विदाई देना मन को भारी बना जाता है, विदा लेने वाले का दिल भी जरूर भर आता होगा. वह महिला भी अपनी मिसाल आप थी. कल रात उसे दो स्वप्न दिखे, एक में उसकी असमिया सखी के  पुत्र को देखा, जो गोरा, बेहद सुंदर और कोमल लगा, वह सखी स्वयं साइकिल चलाकर उनके लिए कुछ लेने जा रही है. उनके बगीचे में कपास के वृक्ष पर सुंदर श्वेत पुष्प लगे हैं. दूसरे स्वप्न में नन्हा और वह एक लम्बी पैदल यात्रा पर जा रहे हैं, एक बूढ़ी औरत उन्हें रास्ता बता रही थी फिर वह अचानक गायब हो जाती है आगे निकल जाती है और वे अरुणाचल प्रदेश के किसी गाँव का पता पूछते-पूछते आगे बढ़ते हैं, रास्ते का नाम ‘चींटी पथ’ है.

अभी नन्हे को बस तक छोड़ कर आई, हर बार की तरह थोड़ा परेशान था, पडोस के बच्चे का भी यही हाल था. मौसम आज भीगा-भीगा है, रात भर शायद पानी बरसा है. आज सुबह जून ने नींद न आने की शिकायत की तो उसने अपने मन की बात उन्हें बता दी, पर सुनकर वे सामान्य थे, पर उनका यही सामान्य होना तो उसे असामान्य लग रहा है. आज दोपहर उसे हिंदी क्लास के लिए जाना है, जून को उसने कहा है कि नन्हे के साथ रहने के लिए वह आधे दिन की छुट्टी ले लें, पिछले हफ्ते भी उनके न रहने के कारण वह नहीं जा पायी थी. कल जून वे दोनों पुरस्कार लाये, जो उसे ऊर्जा संरक्षण प्रतियोगिताओं में मिले थे. एक छोटा कुकर और दूसरा दीवार घड़ी. उसकी थोड़ी सी मेहनत का इतना अच्छा फल, मेहनत का फल मीठा होता ही है.

अभी-अभी दो बार फोन की घंटी बजी, वह उठाती उसके पूर्व ही बंद हो गयी, सुबह उसे भी अपने फोन का जवाब नहीं मिला था, शायद वहीं से आया हो. कल जून को उसने दो बार सही बात नहीं बतायी, एक बार बताना तो इसीलिए नहीं चाहा कि वह उसे नन्हे को अकेले घर में छोड़कर जाने के लिए टोकते और दूसरी बार यूँ ही, क्या यह अधःपतन की निशानी है ? कितने आराम से वह झूठ बोल सकती है, इसका पता उसे भी नहीं था, क्या इसलिए कि वह आसानी चाहती है, कोई असुविधा या प्रतिकूल शब्द सहन नहीं कर सकती और वह इतनी कमजोर है कि सच के वेग को सह नहीं पायेगी, अपनी आत्मा पर बेवजह दाग लगा रही है, अपने आप को तो कोई धोखा नहीं दे सकता न, चाहे कितना भी सामान्य क्यों न हो, झूठ तो झूठ ही है न !

Today is world women’s day ie her day ! she realized her importance ie importance of being a woman. Nanha and jun are with her in the celebration, cause today is Sunday…jun made tea and now making “lunch”, special lunch for special day. She rang to her friends and wished them, all said they had forgotten that today was women’s day. Nanha is preparing for maths paper and asking who invented this subject ? he is doing well in exams.




Saturday, March 1, 2014

इतवार की इडली


आज की मीटिंग अच्छी रही पर लौटने में देर हो गयी, पौने नौ बजे थे, नन्हा घर पर अकेला था, उसके खाने का वक्त भी निकल चुका था, पर वह काफी समझदार है, नैनी को बुलाकर रोटी बनवा रहा था जब वह घर पहुँची. जून का फोन भी आया, वह कल शाम को वापस आ जायेंगे तो जिन्दगी में फिर क्रम आ जायेगा. सुबह छह बजे उनका फोन आया तो उनकी आवाज काफी बदली-बदली सी लगी, फिर कुछ देर बाद उनका फोन आया तो राहत मिली. सुबह-सुबह ही नैनी स्वेटर का डिजाइन पूछने आ गयी, काम में देरी हुई पर उसे भी कोई जल्दी नहीं थी. दोपहर को बहुत दिनों बाद पार्लर गयी, बालों में मेहँदी लगवाने, फिर पड़ोसिन के यहाँ, वह पिछले कई दिनों से अकेली है. दोपहर को अकेले भोजन के लिए बैठी तो पता नहीं क्यों भूख महसूस नहीं हो रही थी, समय हो गया है भोजन कर लेना चाहिए, इसलिए खा लिया.

कल रात्रि बहुत तेज वर्षा हुई, वे खिड़की खोल कर सोये थे, पानी अंदर आ गया, शुरू में वैसे ही उसे नींद नहीं आ रही थी, बाद में वर्षा की तेज आवाजों से खुल गयी, उठकर खिड़की, दरवाजा बंद किया और फिर न जाने कब नींद आ गयी. स्वप्न में एक बहुत बड़ा आयोजन देखा. कल मीटिंग में ‘हसबैंड नाइट’ का जिक्र हो रहा था, शायद इसी लिए प्रेसीडेंट ने सभी को धन्यवाद दिया और कहा कि प्रोग्राम अच्छा रहा, कमियों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिलाया, भारतीयों की यही खासियत है कि कमियों को, गलतियों को याद भी नहीं करना चाहते कि किसी के सेंटीमेंट्स को बात लग न जाये क्यों कि समूह में काम करना आता नहीं है, हरेक अपना व्यक्तिगत लक्ष्य लेकर चलता है, खैर, आज सुबह जून के फोन से ही नींद खुली, वह आज आने वाले हैं, नन्हे और नूना का जीवन दो दिनों में थोड़ा अस्त-व्यस्त हो गया है पर रोचकता बनी हुई है, अपने मन मुताबिक सोना, जगना...पर यह जीवन क्रम यदि ज्यादा दिन चला तो अस्वस्थता को निमन्त्रण देने जैसा होगा. रात को सोचकर सोयी थी कि सुबह संगीत का अभ्यास करेगी पर इधर-उधर के कामों में ही समय हाथ से निकला जा रहा है. रात के वादे ऐसे ही होते हैं. दूध वाले से शिकायत करनी थी, एक सखी से बात करनी थी, नन्हे की आलमारी की सफाई का प्रोजेक्ट भी अधूरा है. जून के बिना जीवन भी तो अधूरा है.

पिछले तीन दिनों से डायरी नहीं खोल पाई, अभी-अभी महसूस हुआ, जायजा लिया जाये, पिछले दिनों क्या-क्या हुआ, शुक्र की शाम को जून आये, वे तीनों साथ-साथ रह कर खुश हो गये थे. शनि की सुबह जून को अदरक वाली चाय बनाकर दी, उनके गले में खराश लग रही थी, शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, इतवार की सुबह इडली बनाई, शाम टहलने व नन्हे को पढ़ाने में बीती. जून ने कार की सफाई की, क्योंकि नैनी का बेटा ‘आता हूँ’ कहकर गायब हो गया. कल सुबह माँ से बात की, अभी तक उन्होंने अपने दाँतों का व पिता ने अपनी आँखों का इलाज करवाना शुरू नहीं किया है. टीवी पर लगातार चुनाव परिणाम प्रसारित हो रहे हैं, बीजेपी आगे है पर इतना तो तय है कि पूर्ण बहुमत से काफी पीछे है. वह Amitav Ghosh की एक किताब पढ़ रही है आजकल. बहुत सी पत्रिकाएँ भी हैं पर समय नहीं है, नन्हे के इम्तहान छह मार्च से हैं, यानि सिर्फ तीन दिनों के बाद. आज संगीत कक्षा में वह सरगम सुना सकी, अध्यापिका ने राग काफी सिखाना शुरू किया.

सुबह-सुबह सेक्रेटरी का फोन आया, आज शाम को सारे कमेटी मेम्बर्स को गेस्ट हाउस जाना है. उसे फोन करके सभी को बताना था, एक महिला को फोन किया तो पहले वे बगीचे में थीं, फिर रियाज करने बैठ गयीं, उनके पतिदेव ने संदेश ले लिया, फोन पर तो वे बेहद संजीदा caring लगे, अगर वह कभी उन्हें यह बात कहे तो वह हँसेंगी. नन्हा आज भी स्कूल नहीं गया, पर सुबह से बिना नहाये बैठा था, उसने नहाने के लिए कहा तो मुँह बना लिया. बच्चे कोई भी बंधन नहीं चाहते किसी भी तरह का नियम-कानून तो वे जानते ही नहीं, जब जिस बात का मन होगा वही करेंगे, उसे लगा यह नई पीढ़ी बिलकुल निरंकुश होती जा रही है. स्कूल में अध्यापक की बात का कोई महत्व नहीं और घर पर माँ-पिता की बात की कोई अहमियत नहीं. आज भी मौसम भला सा है, सुबह समाचार सुने, बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, उधर UF और कांग्रेस जो एक-दूसरे के खिलाफ थे फिर एक होकर सरकार बनाने की बात कर रहे हैं, यह राजनीति का खेल आम  जनता की समझ से बाहर है.