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Tuesday, March 11, 2014

नये स्कूल में पहला दिन


आज का इतवार कुछ अलग है, जून सुबह नौ बजे ही नाश्ता करके निकल गये, दो बजे लौटे. नन्हा यहीं पडोस में किसी के यहाँ पिकनिक पर गया है. मौसम आज गर्म है, कुछ देर पूर्व कुछ बूँदें पड़ीं फिर थम गयीं. कल दोपहर भर और सुबह भी नन्हा टेनिस खेलता रहा, धूप से चेहरा लाल हो गया पर जोश कम नहीं था. वह DPS जाने के लिए तैयार हो गया है, अब कुल मिलाकर बीस बच्चे हो गये हैं जो यह से जायेंगे.

कल फिर उड़ीसा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों में तूफान आया सो यहाँ भी बदली फिर छाई है, उन्हें थोड़ी देर बाद दिगबोई के लिए निकलना है, नन्हे की फ़ीस जमा करनी है, ड्रेस व किताबें खरीदनी हैं. कल से वह स्कूल जाएगा. सुबह उसे उठाया तो अपने खराब मूड में था, शायद नींद से उठाने पर बच्चों का ऐसा ही मूड रहता हो, शायद उन्हें सपनों से जगाया जाना नागवार गुजरता हो. वह सुबह-सवेरे ही उस पर झुंझला गयी, कुछ देर वह उदास रहा फिर सामान्य हो गया. कल से उसे और भी जल्दी उठाना होगा, देखें क्या होता है, कहीं उनकी सुबहें करुण दृश्यों से न भर जाएँ ! कल शाम उसने नन्हे को संज्ञा के भेद, उदाहरण आदि पढाये, जाने से पूर्व सर्वनाम भी पढ़ाना है. उसने देखा है, अक्सर उसके जबड़े एक दूसरे पर दबाव डालते हैं. तनाव ग्रस्त होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है, पर सामान्य अवस्था में भी ध्यान न देने पर ऐसा हो जाता है. शायद नींद में भी ऐसा होता होगा. नींद में तरह-तरह के विचार एक के बाद एक मन में आते हैं. जिनका आपस में कोई तारतम्य नहीं होता न ही कोई अर्थ निकलता है. ध्यान किये हफ्तों बीत गये हैं. नन्हे के DPS जाने पर सुबह वक्त मिल सकेगा.
आज नन्हा पहली बार अपने नये स्कूल में नई कक्षा में बैठा होगा, सुबह वह पांच बजे उठी, सवा  पांच बजे उसे उठाया और साढ़े छह बजे तक ही जून और वह दोनों तैयार थे. आज उसका रिजल्ट भी निकलने वाला है. पड़ोस का बच्चा ले आएगा. उसकी कुछ किताबें नहीं मिली हैं, स्वेटर भी बाजार बंद होने के कारण नहीं मिला. कल शाम वह पुराना गृह कार्य करता रहा. रात वे जल्दी सो गये ताकि सुबह तरोताजा होकर जल्दी उठ सकें. नन्हे का स्कूल का अनुभव ही बतायेगा कि उनका उसे दिगबोई भेजने का निर्णय सही है या गलत. आज जून को अपना पेपर प्रस्तुत करना है. इतवार को उन्हें बाहर जाना है. आज कृष्णामूर्ति की पुस्तक में पढ़ा कि जीवन में क्रम स्वयंमेव आना चाहिए प्राकृतिक रूप से, ऊपर से थोपी हुई कोई भी वस्तु स्वाभाविक नहीं होती और न ही उसका असर होता है. प्रत्येक मानव यदि अपने स्वाभाविक रूप में रहे तो द्वंद्व पैदा ही न हो.

कल नन्हे का रिजल्ट आया और जैसी कि उन्हें उम्मीद थी वह अपने सेक्शन में प्रथम आया है. वैसे वह इससे भी अच्छा कर सकता है, कल उसका पहला दिन अच्छा रहा, शाम को आया तो खुश था, कल से कई लोगों ने बधाई दी है, कुछ लोग पूछते हैं कि नन्हे को DPS में दाखिला कैसे मिला आदि. उनकी ख्वाहिश थी कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ायें सो ईश्वर ने पूरी कर दी है. आज बहुत दिनों बाद उसने पीटीवी पर एक ड्रामा देखा, दिल को छू जाते हैं भोले भाले किरदार, अपने बेहद अपने लगते हैं. आज सुबह उसने ‘रामकुमार भ्रमर’ की एक कविता रजनी बाला पढ़ाई, उस छात्रा को अपनी लिखी एक कविता भी दिखाई. पिछले पूरे हफ्ते वह DHC के लिए नहीं पढ़ सकी. अर्थात हिंदी लेखन के कोर्स के लिए.