गोलू का आयोजन
आज गांधी जी का जन्मदिन है और शास्त्रीजी का भी। नूना ने सुबह उनकी आवाज़ में एक संदेश सुना, फिर उन पर बनी एक फ़िल्म (वृत्त चित्र) का कुछ भाग देखा। गांधी जी के बारे में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट भी प्रकाशित की।उसने हिंदी में अनुवाद का काम पूरा करके बहुत दिनों बाद एक चित्र बनाया।सुबह-सवेरे एक कविता लिखी थी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, जिसमें कई लोग हैं, एक काली सी लड़की है, जो उससे किसी बात के लिए बार-बार आश्वासन चाहती है, नूना चुप है, पर अंत में मुस्कुरा देती है तो वह खुश हो जाती है। अवश्य यह किसी पिछले जन्म की बात होगी। मन के भीतर कितने भाव, कितने दर्द छुपे रहते हैं, सभी को निकाल कर देख लेना है। आत्मा को भीतर रहने का स्थान भी तो चाहिए। यदि वहाँ राग-द्वेष का वास हो तो आनंद कहाँ वास करेगा? गुरुजी का सुमिरन अब बना रहता है और मन में एक शीतलता का अनुभव भी। कबीरदास ने इसीलिए कहा है, बलिहाररी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो बताय। परमात्मा स्वयं तो आ नहीं सकता, वह अपनी जगह गुरु को भेजता है, उसे कोई तन तो चाहिए न, गुरु साक्षात ईश्वर होते हैं ! जून दोपहर बाद मीटिंग के लिए गये, तीन घंटे बाद लौटे। एक किरायेदार व मकान मालिक का झगड़ा हुआ, उन्हें अच्छा नहीं लगा।कल नन्हा और सोनू आयेंगे, माली आज ही आकर चला गया, सो कल उनका स्वागत वे ठीक से कर पायेंगे।
इतवार के दोपहर के भोजन के बाद वे बच्चों के साथ उनके घर चले गये। घर बहुत सुंदर लग रहा था, सभी कमरों में नये पर्दे लगे हैं, दीवारों पर नया पेंट और नयी तरह की, कई रंगों वाली बत्तियाँ भी लगायी हैं। शाम से कुछ पहले अति विशाल बीटीएम झील देखने गये, अनेक पंछियों का बसेरा है वहाँ, अनेक पक्षी बाहर से भी आते हैं। अन्य कई लोग झील किनारे घूमने आये थे।शाम को नन्हा और जून ‘महेंद्रा एक्सयूवी ७००’ गाड़ी बुक करने गये, मिड नाईट ब्लैक रंग की है।एक दिन पहले सोनू अपनी उदयपुर वाली सखी के गृह प्रवेश में कुछ खाकर आयी थी, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था।आज दो पोस्ट लिखीं। किसान आंदोलन हिंसक होता जा रहा है, विपक्षी पार्टियाँ किसी भी तरह इस मुद्दे को बनाये रखना चाहती हैं। नवरात्रि का उत्सव आने वाला है, इस महीने दो जन्मदिन और दो विवाह की सालगिरह आती हैं, देवी माँ की स्तुति के साथ, सभी के लिए कुछ नूना कुछ लिखेगी।देवी पुराण भी पढ़ने का विचार है। राजनीतिक चर्चा सुनने से बेहतर होगा वह कन्नड़ भाषा सीखना पुन: आरंभ करे।
सुबह वे सोमनहल्ली तक घूमने गये, बादलों के कारण सात बजे भी आकाश सुबह पाँच बजे जैसा लग रहा था।दिन भर प्रतीक्षा कराने के बाद शाम से ही हल्की बूँदाबाँदी हो रही है।जून आज भी दफ़्तर गये थे, कल सुबह उन्हें फिर साढ़े आठ बजे जाना है, उनकी व्यस्तता बढ़ती जा रही है। घर पर एक महिला मिलने आयीं, वह भी असोसिएशन की कमेटी में हैं। उनके पतिदेव पहले इसरो में काम करते थे। एक बिहारी प्रोफ़ेसर भी आये। फंड जमा करने के सिलसिले में मीटिंग हुई।
आज नवरात्र पर गुरुजी का एक वीडियो देखा, कितनी सुंदर व सरल भाषा में वह देवी की महिमा का गान कर रहे थे। मंदिर की विशेष सज्जा के लिए जून ढेर सारे फूल लाए हैं।आज से फलाहार भी शुरू किया है। घुटने में हल्का दर्द था, जून ने दो बार घुटने के व्यायाम करवाये।काफ़ी आराम मिला। असम में एक पारिवारिक मित्र के पुत्र का विवाह है, आज संगीत का कार्यक्रम है, उन्होंने उपहार में गूगल होम भेजा है, आज के बच्चों की पहली पसंद तो यही है। पापाजी से बात हुई, वृद्धावस्था के कारण अब उनका कष्ट बढ़ने लगा है। लंबी उम्र वरदान भी है और अभिशाप भी, परमात्मा ही जाने, अब कोई कम तो कोई ज़्यादा क्यों जीता है। उनके यहाँ एक बिल्ली आती है, जिसे वह दूध आदि देते हैं, नन्हे ने उसके लिए कैट फ़ूड भेजा है।
आज सोसाइटी में वार्षिक सामान्य सभा संपन्न हो गयी। नन्हा व सोनू जल्दी आ गये थे, वे भी शामिल हुए और बाद में कुछ लोगों को विशेष नाश्ता भी कराया। शाम को उनके जाने के बाद वे आश्रम गये। बादल दिन भर बने रहे थे, बाद में बरसने भी लगे। आश्विन आ गया है, पर यहाँ तो जैसे सावन-भादों ही चल रहा है। नैनी ने पेड़ से ढेर सारे पपीते तोड़कर दिये।
आज पहली बार वे एक विला में स्थित सोसाइटी का अस्थायी क्लब देखने गये, जहां कैरम, बिलियर्ड, कार्ड रूम तथा जिम भी है। सुबह नींद खुलने से पूर्व मन में दो शब्द तेज़ी से आये, बासी दही और गिफ्ट्स ! लगा, पहला पदार्थ नहीं खाना है और दूसरा अधिक से अधिक बाँटना है।
भावी पड़ोसन ने अपने यहाँ नवरात्र की सज्जा देखने के लिए बुलाया, जिसे यहाँ ‘गोलू’ कहते हैं।जून उसे वहाँ छोड़ते हुए दफ़्तर चले गये, पहले आयुध पूजा हुई फिर प्रसाद मिला। उनके यहाँ मूर्तियों का खजाना है।
आज सुबह नूना असोसिएशन कमेटी में जून के सहयोगी की पत्नी से मिलने उनके घर गई। उनका टैरेस गार्डन देखा, छोटे-बड़े गमलों में लगे बीसियों पौधे पूरी छत को भरे हुए थे, चलने की जगह भी नहीं है।उनकी लाइब्रेरी भी देखी, दीवारों में बनी लंबी आलमारियों में किताबें भरी हुई हैं। ऊपर वाली पुस्तकें निकालने के लिए एक सीढ़ी भी रखी है। बाग़वानी व किताबें पढ़ना, दोनों में केवल उनके पतिदेव को ही रुचि है।
आज सोनू का जन्मदिन उन्होंने सोल्लास मनाया। सुबह भांजा आ गया था, बाद में नन्हा, सोनू, उसकी मौसेरी बहन व ममेरा भाई और उसकी पत्नी। शाम को छोटे भाई से बात हुई, उसकी नातिन का जन्मदिन अगले महीने है, निमंत्रण दे रहा था। पिछले दिनों सोसाइटी में कुछ साइकिलें चोरी हो गई थीं, जो अब मिल गई हैं। पता चला, एक बारह वर्ष का लड़का उन्हें ले गया था और दो हज़ार में बेच चुका था। पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड्स को जब कड़े शब्दों में समझाया, तो वे इस केस को सुलझा पाये। अब सभी चैन की सांस ले रहे होंगे। पापाजी ने बताया, कैट फ़ूड मिल गया है।वह अगले हफ़्ते अपने पुराने मित्र व सहकर्मी की तेरहवीं में जाएँगे।कहने लगे, फल जब पक जाता है, तब गिरता है। पुरानी फसल कटती है तो नये बीज बोए जाते हैं। वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हैं और मृत्यु के लिए भी तैयार हैं।
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