झुंड - एक अलग सा सिनेमा
मई का महीना शुरू हो गया, यानी मौसम का सबसे गर्म महीना ! लेकिन सुबह शीतल थी, उन्होंने सूर्योदय के चित्र उतारे, कुछ देर साइकिल चलायी।गुरुजी का जन्मदिन और बुद्ध पूर्णिमा इसी महीने में आती है।कल ईद है, जून ने नूना की ईद की कविता का एक कार्ड बना दिया है कैनवा पर। शब्दों का एक तोहफ़ा, उसे उम्मीद है बहुतों को अच्छा लगेगा, विशेष तौर पर पापाजी को, वह उसकी कविताएँ अवश्य पढ़ते हैं।कल सोसाइटी के चुनाव हो गये, पुरानी कमेटी लौट आयी है, यही वे चाहते थे।जून ने उनके ख़ाली पड़े फ़्लैट में कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाल लगवा दिया है। शाम को पापाजी से प्रतिदिन की तरह अध्यात्म पर चर्चा हुई, पिछले दिनों उनका स्वास्थ्य इतना अच्छा नहीं रहा, पर आज ठीक हैं। दिसंबर में उन्हें दो पारिवारिक विवाहों में सम्मिलित होने की खबर मिल गई है। आख़िर विवाह की तैयारी महीनों पहले से ही करनी पड़ती है।
आज शाम को वर्षा हुई, बल्कि दोपहर बाद से बूँदे झरने लगी थीं।मौसम सुहावना हो गया है।लेकिन वे संध्या और रात्रि दोनों बार भ्रमण के लिए नहीं जा पाये। जून को छाता लेकर टहलना नहीं भाता, सो नूना गैरेज में ही कुछ देर टहलते हुए पंचदशी सुनती रही।एक नयी कविता आज फ़ेसबुक पर प्रकाशित की।दीदी ने बताया, वह बहुत पहले से मोबाइल पर सुडोकू हल करती हैं, जून को भी करने को कहा।आज दो-तीन लोगों ने कल की कविता की तारीफ़ की। दिल से कही बात दिल को छू जाती है। कल शाम वे घर के सामने वाली लेन में रहने वाली एक महिला से छह किताबें लाए, उन्होंने अपने घर में सेल लगायी थी। नूना ने ऐन रैंड की एक किताब पढ़नी शुरू की है, वर्षों पहले ‘फ़ाउंटेन हेड’ पढ़ी थी तो उसे बहुत भायी थी। जून भी चि वॉकिंग पर एक किताब पढ़ रहे हैं।आज महात्मा बुद्ध पर एक फ़िल्म भी देखी, उन्हें निर्वाण का मार्ग मिल गया, संसार को दुखों से छुटकारा दिलाने का मार्ग। तृष्णा ही जन्म का कारण है और उससे छूटने का मार्ग बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग है। कितने महान थे वह, और कितना महान है उनका ज्ञान ! मानव जीवन में ही यह ज्ञान पाना संभव है। आज सुबह उठने से पूर्व भी कोई उड़ीसा शब्द कहा रहा था, उसकी उड़िया सखी की बेटी का विवाह कल संपन्न हो गया, उसी की याद दिला रहा था। दिन में उसे बधाई दी।
आज शाम वे बोटेनिका गये तो आकाश पर बादल थे, पापाजी को वहीं से वीडियो कॉल किया, उन्हें हरियाली के सुंदर दृश्य बहुत अच्छे लगे।एक चिड़िया की तस्वीर उतारी। आज उसने ‘सिंहासन बत्तीसी’ का पहला अंक देखा, मूलत: संस्कृत में लिखी गई यह पुस्तक विक्रमादित्य के बारे में है। शाम को इस्लाम के बारे में एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है। अगले हफ़्ते से गुरु जी की छोटी बहन भानु दीदी के साथ ऑन लाइन गुरु गीता कार्यक्रम आरंभ हो रहा है। आज उसी के अन्तर्गत आश्रम से दो किताबें मिली, ‘गुरुदेव’ तथा ‘इंटीमेट नोट्स फॉर ए सिंसियर सीकर’।
आज शाम वर्षा के कारण पाँच मिनट में ही घर लौटना पड़ा, रात्रि भ्रमण में वह पहले से ही छाता लेकर गये। हल्की बूँदाबाँदी हुई। सावन के आने से पहले ही यहाँ वर्षा का मौसम शुरू हो गया है। छोटी भांजी व गुरुजी के जन्मदिन पर आज कविताएँ लिखीं।आज सुबह जून पहली बार इलेक्ट्रिक साइकिल से दूर गाँव तक गये, चालीस मिनट लगे आने-जाने में।
आज सुबह नन्हा, सोनू और बड़ा भांजा आये, साथ ही उनकी एक मित्र भी थी।देखने में सीधी-सादी है, पर लगता है, बहुत लाड़-प्यार से पली है, भोजन के मामले में बहुत नख़रे हैं। अन्न का सम्मान करना नहीं जानती, या स्वाद का बहुत ज़्यादा ध्यान है उसे, पर शेष बातों में अच्छी लगी, आजकल बच्चे ऐसे ही होते हैं। शायद उसमें बचपना अभी तक गया नहीं है।वक्त बदल रहा है, अब बच्चों में पहले की तरह बड़ों का लिहाज़ नहीं है। बाद में नन्हा सभी को लंच के लिए ताज ले गया। नूना को महँगे होटल में बाहर खाने का कोई आकर्षण नहीं है , उसे तो तरह-तरह की गंध आती है वहाँ, सो… ख़ैर कभी-कभी ऐसा हो तो कोई बात नहीं। शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, जीजाजी को हल्की चोट आयी है, पर वह ख़ुद गाड़ी चलाकर अस्पताल गये। उनमें हिम्मत और ख़ुद्दारी का जज़्बा कूट-कूट कर भरा है।
सुबह उठी तो भीतर से कोई कह रहा था, ‘सेवा करो, एस सी शब्द सम्मुख आया। नींद में ही कोई लेख भी पढ़ा। उठते ही ध्यान में मन टिक गया। आज मातृ दिवस है। सुबह से ही संदेश, कवितायें आलेख पढ़े और भेजे। छोटी बहन कनाडा में बड़ी बिटिया के पास है। दोनों नन्दों से बात हुई, खुश थीं, बड़ी घर में हवन करवा रही थी। छोटी बेटे के विवाह की तैयारियों में लगी है।
आज से ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ में जाँच आरम्भ हो गई है। सुबह जून ने आम उठाने को मना किया, पर कल रात की आँधी-तूफ़ान के बाद ढेर सारे आम गिरे हुए थे, उसने चार उठाये, कल चटनी बनाएगी। जून इस बात पर थोड़ा नाराज़ हो गये से लगे, पर उनकी उदासी का कारण कुछ और भी हो सकता है। आज पड़ोस की एक नन्ही बालिका हिन्दी पढ़ने आयी। उसकी लिखाई में कुछ सुधार करना होगा। दिन में एओएल का अनुवाद कार्य किया।
आज उन्होंने एक अच्छी फ़िल्म देखी, ‘झुंड’ झोपड़-पट्टी के बच्चों व युवाओं में फुटबॉल के माध्यम से परिवर्तन लाया जा सकता है, इस पर एक वास्तविक प्रयोग हुआ था। विजय बारसे ने एक क्लब बनाया था, ‘स्लम सॉकर’ । अच्छी लगी फ़िल्म, पर इसे देखने के चक्कर में वे शाम को घर पर ही बैठे रहे। आज सुबह वे टहलने गये तो उसने जून को कुछ प्रेरणात्मक वाक्य कहे, शायद सुनकर या ऐसे ही उन्होंने कहा, चलो, ड्राइव पर चलते हैं। उसे उस गाँव तक ले गये, जहाँ वह कुछ दिन पहले साइकिल से गये थे। आज शाम को ‘गुरु गीता’ पर पहला सत्र है। जिसमें ध्यान के साथ मंत्रों का उच्चारण सिखाया जाएगा और उनका अर्थ भी बताया जाएगा।

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