Tuesday, April 7, 2026

अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब

  अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब 


आज मृणालज्योति में शिक्षक दिवस मनाया गया। एक शिक्षिका ने उनकी तरफ़ से उपहार ख़रीद कर बाँटे, तस्वीरें भेजी और शाम को एक अन्य शिक्षिका ने फ़ोन पर बात की।नूना के मन में  कितनी ही स्मृतियाँ सजीव हो उठीं। सुबह रामचंद शुक्ल का “कविता क्या है” निबंध सुना, कविता के बारे में कल रात को भी यू ट्यूब पर सुना था। सारे विचार और भाव गुनते-गुनते मन काव्यमय हो चुका था। दोपहर को एक लेख लिखा, काव्यालय में भेजा है, आगे हरि इच्छा! शाम को पापा जी से बात की, आत्मज्ञान पाने का ख़्याल वह संतों, महात्माओं के लिए छोड़ देना चाहते हैं, पर नूना को लगता है, ध्यान और समाधि का अभ्यास करना उनका काम है, शेष परमात्मा की कृपा! 


सुबह वे टहलने गये तो भीतर एक स्थिर तत्व की धारणा की। शरीर चल रहा था, पर भीतर कोई स्थिर था। बाद में प्राणायाम के बाद बाहर शोर था, भीतर मौन था। शाम को ध्यान के लिए बैठी तो मंत्रजाप के साथ अर्थ भी भासित हो रहा था। शाम को पापाजी को बताया, चेतना चारों ओर है, मन को उसकी ओर ट्यून करना है, अर्थात मन का सुर उसके साथ मिलाना है। दो दिन बाद यहाँ गणेश उत्सव आरम्भ हो रहा है, सुंदर पंडाल पहले ही लग गया है। एक दिन नैनी ने एक फ़ार्म हाउस में स्थापित गणपति को देखने को भी बुलाया है।


आज का दिन गणपति के नाम था, सुबह फार्म हाउस, दोपहर को पड़ोसी के यहाँ और शाम को सोसाइटी की सार्वजनिक पूजा में वे सम्मिलित हुए।ललिता सहस्रनाम का पाठ भी हुआ, कल दोपहर विष्णु सहस्रनाम का जाप है, पीत रंग के वस्त्र पहनकर जाना है, परसों हरे। 


आज ग्यारह सितम्बर की घटना को हुए बीस वर्ष हो गये, नूना को आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्स किए भी। गुरुजी ने आज मुरुगन मंजुल वाटिका का उद्घाटन किया।


आज गणेश पूजा का विसर्जन हो गया। उन्होंने शयन कक्ष के बाहर बने बड़े से छज्जे पर बैठकर एक ट्रैक्टर पर गणपति की सजी-धजी विशाल प्रतिमा को ले जाते हुए देखा।कुछ लोग नाच रहे थे, कुछ एक-दूसरे पर रंग लगा रहे थे, ढोल आदि बज रहे थे। 


आज छोटी ननद से एक परिचिता के बारे में बात हुई। इसी महीने कोर्ट में केस की अंतिम तारीख़ है, शायद तलाक़ का फ़ैसला हो जाये। परसों नूना से उसके पति ने बात की थी, कह रहा था, रिश्ते निभाना इतना सरल भी नहीं होता।पत्नी के ख़िलाफ़ तलाक़ का केस उसी ने दाखिल किया है और अब चाह रहा है, समझौता हो जाये, पर इसके लिए पहल भी ख़ुद नहीं करना चाहता। कोई और उसकी बात पत्नी को जाकर बताये और वह सब कुछ भुलाकर उसे माफ़ कर दे।कितना विचित्र है मानव का मन ! अपनी गलती देखना ही नहीं चाहता। अक्सर पति-पत्नी एक दूसरे से सदा परेशान रहते हैं। अब हर समय कोई किसी की जी-हजूरी तो नहीं कर सकता, हर आत्मा स्वतंत्र है। जीवन सभी को एक सा मिला है, ताली दोनों हाथ से बजती है। 

 

आज हिन्दी दिवस पर हिंदी भाषा पर पापाजी से चर्चा हुई, ध्यान के बारे में भी।सजगता ही ध्यान है, सजगता ही ज्ञान है, वही शांति है और वही प्रेम है। जब वह सजग होती है, भीतर एक शक्ति का अनुभव होता है। कल रात साढ़े ग्यारह बजे घर की सारी बत्तियाँ अपने आप जल गयीं, नींद खुल गई, फिर देर तक नहीं आयी। ऑटोमेशन में ही शायद कुछ गड़बड़ी हुई।


आज दोपहर वे कब्बन पार्क घूमने गये। यह पार्क १८७० में बनाया गया था, ३०० एकड़ में फैला है। वहाँ के राज्य पुस्तकालय के हिन्दी विभाग में कई किताबें देखीं। तेलगू कवि सी एन रेड्डी की किताब ‘कविता मेरी सांस’ की एक सुंदर कविता पढ़ी। डिजिटल फॉर्म में उसे यह पूरी किताब मिल गई है। 

आज मोदी जी का जन्मदिन है।नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी। उन्होंने शंघाई में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता ग्रहण करने को मान्यता नहीं दी, बल्कि इसे ग़लत बताया है।उनके अनुसार यह समावेशी सरकार नहीं है। इंसानियत के नाते भारत फिर भी उनकी सहायता करना चाहता है। भांजी और भतीजी का जन्मदिन भी एक दिन पड़ता है, उनके लिए भी उसने कविताएँ लिखीं। आज सुबह नींद खुली तो एक स्वप्न में ड्राइवर एक गाड़ी को गोल-गोल घुमा रहा था, जैसे मन कल्पना के घोड़े दौड़ाता है, पर कहीं नहीं पहुँचता। वास्तव में आत्मा को कहीं पहुँचना ही नहीं है, थमकर ख़ुद को देखना भर है!  


कल सुबह वे एक पुराने मित्र के यहाँ गये थे, एक दिन व एक रात बिताकर आज लौट आये। कितनी ही पुरानी बातें की, उनका नया घर देखा और सोसाइटी में टहलते रहे। बातों-बातों में सखी ने कहा, वे लोग एक कमरे में सामान रखकर, घर किराए पर देकर असम चले जाएँगे, ऐसा विचार कर रहे हैं। 


सलारपुरिया सिलेस्टा का 

फ़्लैट नंबर चार सौ चार 

रहता है जहाँ दशकों पुराना 

एक मित्र परिवार 

घर जैसा मिला वहाँ आदर सत्कार 

अपनापन और सहज प्रेम प्यार 

झील किनारे बैठ कर 

गुजारी शाम 

लौटते पक्षियों को निहार 


आज नूना ने अमेजन से मँगवायी माइकल फ़िशमैन की पुस्तक ‘स्टमबलिंग इनटू इनफिनिटी’ पढ़नी आरम्भ की है। लेखक वर्षों से आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े रहे हैं ।उनकी आध्यात्मिक यात्रा व जीवन के संघर्ष के बारे में यह पुस्तक है। अवश्य ही उसे अच्छी लगेगी। पापा जी ने आज “एक ओंकार सतनाम…” का अर्थ बताया। शाम को आश्रम में स्वामी अलेक्ज़ेंडर मिले, वह “श्री श्री योग भाग-२”  सिखा रहे हैं। वर्षों पूर्व असम में वह उन्हें मिले थे और उनके साथ बेसिक कोर्स भी किया था।जून आज असोसिएशन की पहली मीटिंग में भी गये थे।


गुरुजी ने कुछ दिन पूर्व ‘मृत्यु’ पर कुछ प्रश्नों के उत्तर दिये थे, नूना को उन्हीं को आधार बनाकर एक लेख लिखना है। उसने सोचा, कल जून गाड़ी की सर्विसिंग के लिए जाएँगे, उस समय लिखेगी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, कोई सामान ठीक कर रही है कि अचानक हाथ के ऊपर से छोटे-छोटे हाथी गुजरने लगते हैं, हल्के बैंगनी रंग के हाथी हैं, इतने स्पष्ट और सुंदर दिख रहे थे, उनके पैर व सूंड, सभी कुछ सुडौल थे, पर शीघ्र ही आँख खुल गई और जाना कि यह स्वप्न ही था। माइकल फ़िशमैन की किताब में कितने ही चमत्कारों का ज़िक्र है, गुरुजी के साथ जो भी जुड़ा है, उसके जीवन में चमत्कार होते ही रहते हैं। आज असोसिएशन की सभा उनके घर पर थी। 


आज पूरा दिन बहुत ही अलग बीता। कल रात स्वप्न में गुरुजी को देखा था, सुबह तो उसका असर था ही, शाम तक मन इतना हल्का हो गया, जैसे कोई पुराना बोझ उतर गया हो। यह बोझ भीतर था, इसका भी बोध नहीं था, यह जैसे अस्तित्त्व का भाग ही बन गया था, ह्रदय पर जैसे कोई चट्टान पड़ी थी, जो पहले हटी तो थी पर थोड़ा सा भाग वहीं रह गया था, उसे संभाल कर रखा हुआ था। भय, सहानुभूति पाने की आकांक्षा, स्वयं को पीड़ित समझने की भावना, और स्वयं के प्रति हुए अन्याय को सहेज कर रखने का प्रयास, अपने रोष को उचित ठहराने के तर्क ! इतना क्रोध तो स्वाभाविक है, आख़िर अपना भी तो कोई स्वाभिमान है, अपने को श्रेष्ठ मानने की भावना, ये सारे पत्थर ही थे, जो उस चट्टान को वहाँ रखे हुए थे। अच्छा है कि घर जाने से पहले यह बोध घटा है। मन हल्का है भीतर तक। स्वयं को पूरी तरह स्वीकार करने के बाद ही कोई इस जगत को पूरा स्वीकार कर पाता है। यह जगत परमात्मा की लीला है। हर पल यहाँ कितना कुछ घट रहा है। वह अनंत चैतन्य सब जानता है, क्योंकि जानने वाला वही है। मन सीमित है, बुद्धि एक पोखर के समान है, पर सागर विशाल है। उस विशाल के प्रति पूर्ण समर्पण ही मुक्त करता है। उसे अपने लिए कुछ नहीं करना है, उसी ने जन्म दिया है, वही कुशलक्षेम की रक्षा करेगा। आज की रात कितनी भिन्न होगी और स्वप्न कितने अनोखे ! आज वह भी असोसिएशन की मीटिंग में गई थी, जून को अध्यक्ष चुना गया है।     


  


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