Friday, April 10, 2026

कार्तिकेय का मंदिर


कार्तिकेय का मंदिर

आज भगवद् गीता कोर्स का दूसरा दिन था। गुरुजी ने कितनी अच्छी तरह से, कितनी कुशलता से श्लोकों का अर्थ समझाया।यदि कोई अंत काल में भगवान का स्मरण करता है, तो वह मोक्ष को प्राप्त होता है।ब्रह्मा के दिन और रात की अवधि और सृष्टि के बार-बार प्रकट होने और विलीन होने की प्रक्रिया का वर्णन भी इस अध्याय में है।मृत्यु के बाद जीवात्मा की दो गतियों का वर्णन किया। प्रकाश का मार्ग, जिससे जाने वाले वापस नहीं लौटते, और अंधकार का मार्ग, जिससे जीवात्मा पुनः जन्म लेती है।प्रवचन देते हुए गुरु जी की प्रसन्नता छलकती रहती है।उनके हाव-भाव व चाल बिलकुल बच्चों जैसे है और उनका ज्ञान ऋषि-मुनियों जैसा। शाम को नूना और जून नापा से पन्द्रह-बीस मिनट की दूरी पर स्थित एक पहाड़ी ‘एपिक रॉक’ देखने गये, जहां एक छोटा सा झरना बह रहा था, जिसका जल सड़क को पार करता हुआ, नीचे चट्टानों से होता हुआ, घाटी व खेतों में जा रहा था। निकट ही हनुमान जी एक प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है, रावण के द्वारा ले जाते समय सीता जी ने इसी क्षेत्र में अपने आभूषण गिराये थे। उन्हें वह स्थान बहुत सुंदर प्रतीत हुआ। कुछ आयताकार, चारों ओर से खुली सरंचनाओं के साथ वहाँ एक जलकुण्ड भी है, ज्ञात हुआ कि लोग पिंडदान के लिए भी वहाँ आते हैं। आज सोसाइटी में किसी का टर्टल, कछुआ खो गया है।लोग बिल्ली-कुत्तों, मछलियों व पंछियों के साथ कछुए भी पालते हैं, नूना को आश्चर्य हुआ। 


आज सोमवार के दिन काशी में विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया गया। केवल तीन हज़ार वर्ग फ़ीट वाला परिसर अब पाँच लाख वर्ग फ़ीट में फैल गया है। अब यह कारिडोर मंदिर को सीधे गंगा नदी से जोड़ता है। ललिता घाट में स्नान के बाद भक्त यात्री सीधे मंदिर आ सकते हैं।यात्रियों के लिए यहाँ विश्राम गृह, संग्रहालय, पुस्तकालय और आध्यात्मिक केंद्र जैसी कई सिविधाओं का निर्माण किया गया है।मोदी जी ने इस अवसर पर ओजस्वी भाषण दिया। संतों का आगमन भी हुआ पर उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया, न ही उन्हें संबोधित किया गया। नूना को लगा, संत समाज का सम्मान होना चाहिए था, किंतु यह भी तो सच है, संत मान-अपमान से ऊपर उठ चुके होते हैं। जो भी मान-अपमान से ऊपर उठ सके, वही संत हो जाता है। कल रात नींद गहरी नहीं थी, आज भी उसे ऊर्जा का स्तर रोज़ से कुछ कम लग रहा है। 


आज सुबह सात बजे वे दोनों अपने पड़ोसी दंपत्ति के साथ उन्हीं मित्र के यहाँ गये, जो कुछ दिन पहले उनके घर आये थे। दो घंटे की यात्रा के बाद घर पहुँचे। मेज़बान सखी ने हार्दिक स्वागत किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सभी सोसाइटी के हरे-भरे बगीचों में टहलने गये। वहाँ व्यायाम करने के उपकरण था तथा सभी तरह की आधुनिक सुविधाएँ थीं। वापस आकर कार्ड्स का खेल ‘ब्रिज’ खेला और नूना ने पहली बार किसी को ‘पेशेंस’ गेम खेलते हुए देखा।दोपहर के भोजन के बाद कुछ देर विश्राम करके वे शाम तक घर लौट आये।शाम को पापा जी ने उसकी नयी कविता के बारे में बात की। 


जून ने शयन कक्ष के बाहर छज्जे में कृत्रिम घास लगवा दी है, हरियाली से आँखों को सुकून तो मिलता ही है, बगीचे की शोभा बढ़ गई है। नूना ने वहाँ बैठकर योगासन किये, अनुभव अच्छा रहा।आजकल सुबह वह नापा के किसी न किसी एक बगीचे का निरीक्षण करने भी जाती है, माली भी पहचान गये हैं और देखते ही काम शुरू कर देते हैं। चारों तरफ़ सफ़ाई का काम चल रहा है।नन्हे और सोनू ने उसे नेटफ़्लिक्स पर साइंस फ़िक्शन ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ देखने को कहा, एक एपिसोड देखा है, कितनी विचित्र संस्कृति है अमेरिका की, जिससे भारत की युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है। मोदी जी को इसीलिए भारत की संस्कृति के पुनर्जागरण की आवश्यकता महसूस हो रही है। 


अब ठंड बढ़ने लगी है, सुबह तापमान १८ डिग्री था। पापाजी ने कहा, वहाँ छह डिग्री पहुँच गया है, उन्हें बहुत ठंड लग रही थी। उनकी बिल्लियों ने घर में गंदा किया तो कल से वे उन्हें गली में ही कैट फ़ूड देने वाले हैं। कल रात वह बाहर बालकनी में नीचे घास पर दरी बिछाकर सोयी। सुबह उठी तो मन ध्यानस्थ था। रात को आकाश में चाँद दिख रहा था, उस पर त्राटक करते-करते नींद आ गयी, फिर पता ही नहीं चला कब सुबह हो गयी। जून आज असोसिएशन के काम के सिलसिले में काफ़ी समय बाहर रहे।बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, वह दुबई में एक्सपो देखने गई थी। भारत के मंडप में उसे मोदीजी की तस्वीरें देखकर कुछ अच्छा सा नहीं लगा। सरकार को अपना प्रचार इतना भी नहीं करना चाहिए, ऐसा उसका कहना था। भारतीय अपनी आलोचना करने में बहुत कुशल होते हैं। 


आज जून, नन्हे और सोनू को भी एपिक रॉक दिखाने ले गये। रास्ते बहुत अच्छे थे। खेतों और गाँवों को पार करते हुए, पर्वतों को निहारते वे गंतव्य तक पहुँचे। वापसी में सोमनहल्ली झील में सुंदर पक्षी भी देखे।नूना ने अहल्याबाई होलकर पर एक धारावाहिक देखना आरम्भ किया है, बहुत अच्छा लग रहा है।सभी ने अच्छा अभिनय किया है।इसमें राजमहलों की राजनीति को भी दर्शाया गया है। आज पहली बार नूना असोसिएशन की दो महिला सदस्याओं के साथ मेट्रो मॉल गयी, जो होलसेल मॉल है।वहाँ क्रिसमस की अनुपम सजावट की गई थी। 


आज सुबह उगता हुआ लाल सूरज देखते हुए छत पर सूर्य नमस्कार करने का अवसर मिला। परमात्मा के प्रति श्रद्धा को गहराई से महसूस करते हुए एक कविता अनायास ही लिखी गयी। आज क्रिसमस की पूर्व संध्या है, दोपहर बाद से ही कार्यक्रम शुरू हो गये थे। नन्हा और सोनू भी आ गये हैं।सोनू केक बनाकर लायी है। नापा के ही एक व्यक्ति सांता बने और परेड में शामिल हुए। जून ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में भाग लिया। 


आज वे राज राजेश्वरी नगर में एक पहाड़ी पर स्थित शृंगगिरि श्री शंमुख स्वामी मंदिर देखने गये, जो यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है। यह भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक सुंदर मंदिर है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 62 फीट ऊंचा गोपुरम है, जिस पर भगवान शंमुख के छह विशाल मुख बने हुए हैं।गोपुरम के ऊपर  स्फटिक का एक विशाल गुंबद है, जिसमें लगभग ढाई हज़ार क्रिस्टल लगे हैं। दिन के समय सूर्य की किरणें इन पर पड़ने से इंद्रधनुषी छटा बिखरती है, जबकि रात में यह एलईडी बत्तियों से जगमगाता है।मंदिर में गणेश की प्रतिमाओं का विशाल संग्रह है। अनेक प्रकार की मुद्राओं में, विभिन्न पदार्थों से बनी मूर्तियाँ वहाँ रखी गई हैं।यहाँ तक कि आधुनिक वेशभूषा में भी गणपति को दिखाया गया है।


इस मंदिर के निकट ही एक अन्य विशाल मंदिर भी देखा।माता पार्वती के त्रिपुर सुंदरी स्वरूप को समर्पित राज राजेश्वरी मंदिर बहुत विशाल है और इसका गोपुरम मीनाक्षी मंदिर की याद दिलाता है। देवी के विभिन्न रूपों को वहाँ दर्शाया गया है। नन्हा और सोनू भी साथ थे, बाद में उनका एक मित्र परिवार भी आ गया और सभी ने १९४७ नामक रेस्तराँ में दोपहर का भोजन किया।


वे सुबह चार बजे उठे, टहलते समय इसका ध्यान रखा कि श्वास नाभि तक जाये और मंत्र का यथा संभव अभ्यास किया, बाद में योग साधना। पापा जी से बात की, दो-तीन दिनों के लिए वह अकेले रहने वाले हैं। अपनी दिनचर्या बताते समय उनका उत्साह देखते ही बनता है।रोज़ की तरह परमात्म चर्चा भी हुई। जून आज काफ़ी व्यस्त थे, सुबह-शाम मिलाकर छह घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। नया वर्ष आने में मात्र दो दिन रह गये हैं। एक मीठी सी गंध का अनुभव आज हो रहा है, कोई जीवाणु है या कोई दिव्य गंध, कौन जानता है ? एक रहस्य ही तो है यह जगत! 


कल वर्ष का अंतिम दिन है। नये वर्ष का स्वागत नेचर कैंप में करने का उनका स्वप्न अब पूरा होने को है। कल सुबह नन्हा और सोनू के साथ उसकी भांजी भी आ रही है।उनका वही मित्र परिवार भी आएगा। कल की रात वे वहीं गुजारने वाले हैं; नये वर्ष की सुबह भी, दोपहर बाद घर लौटेंगे।   


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