Friday, July 3, 2020

भीगी काली सड़कें



आज सुबह भी वर्षा हो रही थी, वे छाता लेकर टहलने गए और घर के आसपास ही रहे. वर्षा और अँधेरे के कारण सड़क एकदम चमकदार व काली दिख रही थी. पांच बजे ही खम्भों पर लगी बत्तियां बुझा दी जाती हैं. सुबह का भ्रमण दिन को एक सुंदर आभा से भर जाता है. एक परिचित का फोन आया, वह मृणाल ज्योति के बच्चों के लिए एक गीत लिख रही है, अगले सप्ताह सिखाएगी. आज दोपहर वह गयी थी वहाँ, आते आते शाम हो गयी; पहले हिंदी कक्षा, फिर मीटिंग और अंत में वहाँ भी प्रेसीडेंट व उनके पतिदेव की विदाई का कार्यक्रम. सभी कुछ ठीकठाक हो गया. वापस आकर रात के लिए भोजन बनाया और फिर क्लब में मीटिंग थी, वर्किंग प्रेजिडेंट को कार्यभार सौंपा गया. वापस आयी तो जून ने कहा, कल तो कहीं नहीं जाना है ? पिछले तीन दिन से शाम को कुछ न कुछ कार्यक्रम था. कल शाम भी एक पार्टी है थैंक्सगिविंग पार्टी पर वह नहीं जाएगी. 

अभी-अभी स्कूल से आयी है, बोलने व सुनने में असमर्थ इन बच्चों को भाषा ज्ञान देना अपने आप में एक नवीन अनुभव है. उन्हें अक्षर ज्ञान हो गया है पर शब्दों का निर्माण कैसे होता है और उनका अर्थ क्या है , यही समझाना है. जब वे एक शब्द गढ़ लेते हैं तो बहुत खुश होते हैं. आज सुबह ब्लॉग पर लिखने बैठी तो स्वयं ही भीतर से विचार आते गए, परमात्मा की कृपा असीम है, वह अनंत है और उसका सान्निध्य भी अनंत है, वे ही हैं जो उससे पीठ कर लेते हैं. 

समय हो गया है, जून अभी तक लंच के लिए नहीं आये हैं, फ्राइडे मीटिंग में अक्सर देर हो जाती है. आज भी बदली छायी है, फरवरी में एक बार फिर ठंड लौट आयी है. कल रात देर तक नींद नहीं आयी, आयी भी तो कोई स्वप्न चल रहा था. सुबह उठकर भगवान को प्रणाम करने गयी तो मुख पर सहज प्रसन्नता नहीं थी, दोनों हाथों ने चेहरे को ढक लिया, यह सब जैसे घट रहा था और कोई इसे देख रहा था. पानी पीते समय बाबा रामदेव का एक वाक्य सुना और सहजता लौट आयी, वह अपने शुद्ध स्वरूप में टिकने की बात कह रहे थे. आज महीनों बाद कॉन्ट्रैक्टर उस कागज पर हस्ताक्षर करवाने आया जिस पर लिखा था घर में रंग-रोगन हुआ था. इतने दिनों तक क्या उसका पेमेंट नहीं हुआ होगा, इसीलिए ये लोग भी मजदूरों को दिहाड़ी देने में देर करते हैं. आज ध्यान में उसकी चेतना ने गुरूजी की आवाज में संदेश  दिया, जिसे अपने ही मन का खेल जानकर उसने हँसी में उड़ा दिया. मन की ताकत का अंदाज कोई नहीं लगा सकता. इस मन के पार जाकर टिके रहना वीरों का काम है. यदि चाहे तो एक दिन मन के पार जाकर उसमें टिके  रहना उसके लिए भी सहज होगा ... चाहे तो इसी क्षण भी !  

आज जून का लंच दफ्तर में है, एक कर्मचारी की विदाई पार्टी है. कुछ देर पूर्व मोदी जी को सुना. उनके बारे में पाकिस्तानी मीडिया पर भी कुछ बातें सुनीं. उनके आत्मविश्वास और देशप्रेम के जज्बे को सभी सलाम करते हैं, कभी उन्हें कट्टरवादी माना जाता था पर वे ‘सबका साथ-सबका विकास’ चाहते हैं उनका कोई और हेतु नहीं है. वह हृदय से भारत की सेवा करना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने जीवन का मर्म समझ लिया है. हर ज्ञानी अपने जीवन को लोकसंग्रह में लगाना चाहता है क्योंकि इसके सिवा वह कुछ और कर भी तो नहीं सकता. गुलाब खिलेगा तो सुगन्ध फैलाएगा, आत्मा जगेगी तो प्रेम फैलाएगी ! 

उस पुरानी डायरी में समय पर पत्र न आने पर उदासी भरा एक प्रलाप पढ़ा, और किसी कवि की कुछ पंक्तियाँ भी, आज उसे हँसी आ रही है, कितना ड्रामा करता रहा होगा  मन उन दिनों...हर पन्ने पर ऊपर एक सूक्ति छपी थी, उस दिन की सूक्ति थी - निष्क्रियता मनुष्य के लिए अभिशाप है - गाँधी जी. उसने लिखा  

निष्क्रिय तो उसकी कलम हो गयी है 
मन भी तो ! 
कुंद पड़ गयी मन की धार 
संवेदनाएं चूक गयीं हृदय की 
मृत हुए स्वप्न टूट गए मोती 
बिखरे पानी पानी आंसूं 
नियति यही कि मृत्यु बने अब 
जीवन अपना अपना जीवन ! 

हम भला बुरा सब भूल चुके, नतमस्तक हो मुँह मोड़ चले 
अभिशाप उठाकर होठों पर, वरदान दृगों से छोड़ चले 
अब अपना और पराया  क्या ? आबाद रहें रुकने वाले 
हम स्वयं बंधे थे और स्वयं हम अपने बन्धन छोड़ चले 

Thursday, July 2, 2020

शहीदों का वसंत

आज वसन्त पंचमी है. पूजा कक्ष में माँ सरस्वती की तस्वीर भव्य तरीके सजायी है. दोपहर को कुछ महिलाओं और बच्चों के साथ पूजा की. अभी कुछ देर पहले टीवी पर कुम्भ के दृश्य अनोखे हैं. करोड़ों लोग कुम्भ में आते हैं. सब एक ही लक्ष्य को लेकर, एक ही भाव के साथ. 

रात्रि के नौ बजे हैं. सरस्वती पूजा के किसी पंडाल से आवाजें आ रही हैं. कल भी देर तक आती रहीं. दिन में तेज आवाज में संगीत बजाते हुए और शोर मचाते हुए लड़कों का एक हुजूम देवी की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए ले जा रहा था. शाम को नदी से लौटते समय एक सुंदर मूर्ति को सड़क के किनारे पड़े हुए देखा. पूजा के नाम पर लोग कितना कुछ करते हैं पर वास्तविक पूजा से दूर ही रहते हैं. जून से बात हुई आज उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना बड़े से स्क्रीन पर. लन्च पर एक मित्र परिवार आया जो वर्षों पहले दूसरी जगह चले गए थे. शाम को उन्हें नदी पर ले गयी. चाय बागान भी ले गयी पर तब तक अँधेरा हो गया था. 

हरमन हेस की किताब ‘सिद्धार्थ’ पढ़ रही थी आज, वर्षों पहले पढ़ी थी, पर जरा भी याद नहीं थी. बदली के गरजने की आवाज है या जेट की, रात के सन्नाटे में गूँज रही है. आज बड़े भाई से बात हुई, उनके विवाह की  चालीसवीं वर्षगाँठ होती यदि भाभी होतीं, सुंदर तस्वीरों से एक वीडियो उन्होंने बनाया, वह खुश लग रहे थे. उन्होंने नन्हे के साथ उनकी एक पुरानी तस्वीर भेजी है, शायद उनके घर पर खींची गयी होगी. फेसबुक पर पोस्ट की. आज नैनी ने अपनी सास के बारे में मजेदार बातें बतायीं, वह कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी उठ जाती है और अपने आप से बातें करती है. कभी बच्चों की तरह उछलती हैं और खुश रहती हैं. उसके ससुर (जिसको गले का कैंसर है,) का गला अब पहले से ठीक है, तम्बाकू छोड़ नहीं सकता सो वह बीड़ी की जगह सिगरेट पीने लगा है. कितना स्वाधीन है मानव और कितना पराधीन, यह कभी-कभी ज्ञात हो पाता है किसी को जब उसके साथ कुछ ऐसा घटा हो. सामान्य जन के  लिए यह समझना भी कठिन है कि वह इतना परतन्त्र है. 

आज कश्मीर में जो हुआ वह भीषण है, भयानक है और निंदा करने के लायक है. कल तक प्रधानमंत्री कह रहे थे कि कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं पर आज दोपहर साढ़े तीन बजे विस्फोटक से भरी एक कार को जवानों से भरी गाड़ी से टकरा दिया, भयानक विस्फोट हुआ और उनतालीस जवान मारे गये. सारा देश स्तब्ध है और सभी के मन में क्रोध और दुःख है. शाम को क्लब में मीटिंग थी शायद वहाँ किसी को इस खबर की जानकारी नहीं थे, वे सामान्य ही रहे. प्रधानमंत्री ने पालम हवाई अड्डे पर श्रद्धांजलि अर्पित की उन शहीदों को, जो पुलवामा में मारे गए हैं. 

आज कम्पनी की हीरक जयंती का समापन समारोह है. जून अभी-अभी घर लौटे हैं. सुबह से वर्षा हो रही है, तापमान गिर गया है. पुलवामा हमले की साजिश रचने वाला कामरान आज मारा गया, चार सैनिकों को और शहादत देनी पड़ी. देश भर में आतंकवाद के खिलाफ क्रोध बढ़ता ही जा रहा है. देश में सभी दल एकमत होकर कार्यवाही करने को कह रहे हैं. चुनावी भाषा की जगह देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाने की भाषा नेता बोल रहे हैं.  

Wednesday, July 1, 2020

ट्रांसिडेंटल मैडिटेशन


जगत के प्रति राग-द्वेष जब कम हो जाता है तो उसकी स्मृति मन में नहीं आती. वह जैसे विलुप्त हो जाता है. ‘नई दृष्टि नई राह’ में अद्भुत ज्ञान सूत्र मिलते हैं. वे जितना-जितना समता में रहते हैं, आत्मा की शक्ति बढ़ती जाती है. शाम के पांच बजने वाले हैं. आज भजन का दिन है. सुबह गुरूजी को औरंगाबाद में कहते सुना, जीवन में गान, ध्यान और ज्ञान तीनों होने चाहिए. जून ने आज से मन्त्र जप शुरू किया है, ध्यान भी करेंगे और ज्ञान भी सुनेंगे. कुछ देर पूर्व वे लॉन में टहल रहे थे. ग्लैडियोली के फूल खिले हैं, डायन्थस, पॉपी आदि तो हैं. जरबेरा, गेंदा भी खूब खिल रहे हैं. सुबह सुबह को-ऑपरेटिव गयी, सभी ‘ज़ी न्यूज़’ पर मोदी का भाषण सुनने में तल्लीन थे. अभी टीवी पर सुना, मोदीजी कांग्रेस के खिलाफ बोल रहे हैं. चुनाव का वर्ष है, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगने व लगाने स्वाभाविक हैं. 

कल सुबह-सुबह जून को एयर पोर्ट जाना है. फ्लाइट दोपहर ढाई बजे है पर बंद( ताई अहोम द्वार) के कारण सुबह तीन बजे ही निकल जाना होगा. कल मोदी जी गोहाटी आ रहे हैं उनका विरोध करने के लिए ही इस बन्द का आयोजन किया गया है. जब कि वह एम्स की नींव रखेंगे, नुमालीगढ़ में बायो रिफाइनरी का शिलान्यास और ब्रह्मपुत्र पर एक सड़क पुल का भी. वह त्रिपुरा भी जा रहे हैं. वर्षों बाद भारत को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो देश के विकास के लिए दिन-रात एक कर रहा है. आज शाम को गुरूजी की किताब से कुछ वाक्य पढ़े तो सभी साधिकाओं के भीतर कोई न कोई विचार जाग उठा. वह ठीक कहते हैं , प्रेम जगत को गतिशील करता है. 

जून रात को दो बजे ही उठ गए, तीन बजे निकल गए. अभी भी एयरपोर्ट पर ही होंगे. प्रधानमंत्री कल पेट्रोटेक का उद्घाटन करेंगे, उस कार्यक्रम में भी शायद वह शामिल हो पाएं. इस समय चांगसारी में पीएम की रैली हो रही है. भीड़ बहुत ज्यादा है. उन्होंने कहा, कल गोहाटी से निकलने वाले अख़बारों में इसकी कोई खबर नहीं होगी, एक क्षण के लिए उनके स्वर में उदासी दिखी. पर अव वह असम के महापुरुषों को याद कर रहे हैं. उगते हुए सूरज की भूमि अरुणाचल में आज उनकी यात्रा हो रही है. हर राज्य की तरह यहाँ भी कई योजनाओं की घोषणा हुई. बीजेपी देश की संस्कृति को बढ़ावा देती है.. एक नए टीवी चैनल की भी शुरुआत हुई. ‘बच्चों की पढ़ाई, युवा को कमाई, वृद्धों को दवाई, किसान को सिंचाई, जन-जन की सुनवाई’ इस पंच धारा विकास को बढ़ावा देती है यह सरकार. कल सरस्वती पूजा है, नैनी ने आज सरस्वती माँ की तस्वीर को ढक कर रख दिया है. कल वह मृणाल ज्योति में पूजा के बाद दोपहर को खिचड़ी आदि का प्रसाद बनाकर घर पर भी पूजा करेगी. नन्हे से बात हुई, कल वे लोग नए घर जायेंगे.  

उस डायरी में पढ़ा, जाग्रत, स्वप्न और सुष्पति, तीन अवस्थाओं से ऊपर चौथी अवस्था में पहुँचना ध्यान है. मन को केंद्रित नहीं करना है न कोई प्रयत्न करना है, केवल मन्त्र को दोहराना है और शांत हो जाना है. उसे आश्चर्य हुआ,  कालेज में भी भावातीत ध्यान यानि ट्रांसिडेंटल मेडिटेशन की बात सुनी थी, पर तब इसका अर्थ जरा भी समझ नहीं आया होगा. अवश्य ही इसने अनजाने में नई दिशा और नई आशा प्रदान की होगी, इस पर चलने का समय अभी बहुत आगे था. 

उसे एक पत्र की प्रतीक्षा थी पर नहीं आया, सारी गड़बड़ डाक विभाग की है, है न ! वह सोचती है नम्रता बड़ी चीज है पर उसका स्वभाव ही ऐसा नहीं है. शायद अब पता नहीं क्यों मन पर एक किलो का बोझ लादा हुआ है, समाधान उपेक्षा से नहीं होगा, उतारना ही होगा, पर किस तरह यह स्पष्ट नहीं. (उस समय गुरु जो नहीं मिले थे) धर्मयुग में देश की वास्तविक आर्थिक स्थित पर लेख पढ़ा था दोपहर को, पढ़ती चली गयी. हे भगवान ! कितने कितने हथकंडे अपनाते हैं व्यापारी और सरकार का प्रोत्साहन ही उन्हें मिलता है. कंट्रोल का लाभ व्यापारियों को, नुकसान तो जनता को ही है. दिनमान भी पढ़नी है अभी. कालेज में एक सखी दिखी, एमजीआर उसने अनदेखा कर दिया, शायद जानबूझ कर, शायद वह समझती है उसके अनुत्तीर्ण हो जाने पर अब वह उसकी सखी नहीं है. एक अन्य सखी मिली बेहद खुश... नवविवाहिता का श्रृंगार नहीं पर स्वाभाविक प्रसन्नता जरूर दिखाई दी उसके चेहरे पर. अर अब यह की स्मृतियाँ मन में ही रहें, वहीं सुरक्षित हैं, कागज के पन्ने पर स्मृतियाँ नहीं रखी जा सकतीं. 

Tuesday, June 30, 2020

बसन्त में बौर

आज स्कूल में योग अभ्यास के बाद कक्षा तीन की एक छात्रा ने कहा, उसे योग करना अच्छा लगता है. उसने सामने आकर आसन भी किये. बाकी बच्चों को भी अवश्य ही इससे प्रेरणा मिलेगी. बच्चे ही नहीं बड़ों को भी आज के वक्त में योग सीखना ही पड़ेगा. उस दिन एक परिचिता आयी थी, जो बहुत परेशान थी. आज लड़कियाँ पढ़ लिख गयी हैं, अच्छा कमा रही हैं पर जीवन के सामान्य सुखों से वंचित हैं. वह यहाँ अकेली रहती है, ससुराल दूर है, तबादले की कोशिश कर रही है. आज दोपहर अस्पताल गयी जहाँ क्लब की वाइस प्रेसीडेंट इलाज करा रही हैं, वह कुछ दिन पहले गिर गयी थीं और घुटने में चोट लगी. वह उनके लिए फूल ले गयी और एक कविता भी, जो पढ़कर सुनाई. वापसी में क्लब में खिले फूलों की तस्वीरें उतारने कुछ देर के लिए रुकी. घर के सामने बने हैलीपैड कम वॉकिंग ट्रैक में  कोई टीम गिटार बजाकर शूटिंग कर रही है.

कल रात से ममता बनर्जी अपने ही राज्य में धरने पर बैठी हैं. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी उनके साथ थे, जिनसे पूछताछ करने कल सीबीआई की टीम आयी थी और उन्होंने उसे ही गिरफ्तार कर लिया था. देश में चुनाव से इतनी हलचल होनी शायद स्वाभाविक ही है. मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी पक्ष घबराने लगा है. जनता समझ रही है कि ममता जी अब बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रही हैं. रात्रि के आठ बजे हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं, उनके दफ्तर में ऑडिटिंग चल रही है, अभी दो दिन और चलेगी. बसन्त पर एक कविता लिखी, उस दिन सुबह एक मधुर सुवास का अनुभव हुआ तो जून ने कहा था यह आम के बौर की सुगन्ध है, तभी  लिखने का विचार मन में आया था. उनके विचार बदल रहे हैं, यात्रा पर जाने के लिए अब वह पहले जैसे उत्सुक नहीं दीखते. सादा भोजन पसन्द करने लगे हैं. यूट्यूब पर  गुरूजी को सुना, सरल शब्दों में गूढ़ प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने महान हैं वह, अपने आप में एक पूर्ण सत्ता ! कल रात्रि दो-तीन बार आँख खोलकर घड़ी देखी, सुबह की प्रतीक्षा थी. सुबह जगने से ठीक एक क्षण पूर्व आज्ञा चक्र पर सुंदर कलात्मक ॐ की आकृति दिखी. श्वेत प्रकाश पर काले रंग से बनी, कितना अद्भुत था वह दर्शन ! उसके बाद नीले प्रकाश में कोई चेहरा सा दिखा, सुबह से कई बार दिखा है, पहले भी दीखता है पर वह कौन है, कुछ ज्ञात नहीं. परमात्मा के सिवा जब यहाँ कुछ है ही नहीं तो वह उसकी का भेज देवदूत होगा. 

 नूना ने पुरानी डायरी पढ़ी - एक कविता, जो कालेज की लड़कियों के लिए लिखी थी. 

बड़ी समझदार, थोड़ी नादान
खुद से अनजान, करतीं पहचान 
वर्तमान और भविष्य की कड़ी लड़कियाँ
हवा सी तेज, पानी सा बहाव
आँखों को चुनौती देती 
घड़ी-घड़ी लड़कियाँ 
हँसती-खिलखिलाती 
सदा नए मोड़ पर खड़ी लड़कियाँ
जग की शान, परिवार का मान 
धरती की अंगूठी में जड़ी लड़कियाँ !

भगवद्गीता में कृष्ण कहते हैं, जो उन्हें हर जगह देखता है वह उसका नाश नहीं करते. उसे पूरा यकीन है कि एक दिन ऐसा आएगा जब सब यह तय कर लेंगे कि उन्हें एक साथ मिलकर अपनी अक्ल से आगे बढ़ना है. 
तुलसी यह जग आई के, सबसे मिलिए धाई
न जाने किस रूप में नारायण मिल जाई !

सुबह से वह मृत थी, स्पंदन का अनुभव हुआ अभी कुछ क्षण पूर्ण गेंदे के फूलों के मध्य; अब वह प्रसन्न है. उसके प्रिय वृक्ष के नीचे कितनी ही सूखी फलियाँ पड़ी थीं. उस जगह बैठते ही उसे विचित्र अहसास होता है जैसे वह धरती से दूर कहीं और पहुँच गयी है. उसे यकीन है कि चाहे किसी भी मूड में वहाँ जाये, जाते ही पोर-पोर अनजाने भय से, अनजाने सुख से सिहर उठेगा. अब वह स्वतन्त्र है, हर तरह के दुःख, परेशानियों से स्वतन्त्र, पढ़ने और लिखने के लिए स्वतन्त्र ! 

Sunday, June 28, 2020

श्री श्री और बाबा


आज बापू की पुण्यतिथि है, टीवी पर सर्वधर्म प्रार्थना का प्रसारण किया जा रहा है. बापू का जीवन भी पुण्यशाली था और मृत्यु भी, शहीद दिवस के रूप में उनकी पुण्यतिथि मनायी जाती है. स्कूलों के बच्चे मधुर स्वरों में गीत व भजन गा रहे हैं, गीत अत्यंत भक्तिभाव जगाने वाले हैं. आज सुबह गांधीजी की आवाज में उनके भाषण सुने. दूरदर्शन के अभिलेखागार में उनके वीडियो सुरक्षित रखे गए हैं. उनके हृदय में हर व्यक्ति के लिए प्रेम था, चाहे वह किसी जाति, किसी धर्म का हो. इस समय बहाई प्रार्थना कही जा रही है. परमात्मा से की गयी कोई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती. अब कुरान का पाठ किया जा रहा है. कल रात तारिक अहमद को सुना, जो पाकिस्तानी हैं पर उसके सबसे बड़े आलोचक भी हैं. हिंदुस्तान की तारीफ करते हैं. कल शाम को अचानक तेज वर्षा व आंधी आयी. एक योग साधिका ने कहा, गुरूजी का कोई सन्देश दे वह उन्हें घर जाने से पूर्व, वह साधिका हिंदी में कविता लिखती है और गाती भी अच्छा है. आज धोबी अपने बगीचे से नारियल और ढेर सारा हरा  धनिया लाया था, उसने भी दो पत्ता गोभी तोड़ कर दीं.

आज नए वर्ष के प्रथम माह का अंतिम दिन है. अब जून को सात माह का समय और यहाँ अपने विभाग प्रमुख के रूप में व्यतीत करना है. आज शाम को एक योग साधिका को विदाई दी, वह सूजी का हलवा बना कर लायी थी, शेष सभी लोग भी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे. नूना ने उसके लिए लिखी कविता पढ़ी. दोपहर की कक्षा में दस लोग थे, दो नई लड़कियों ने आना शुरू किया है जो बहुत मन से योग अभ्यास करती हैं. सुबह आसन किये, कुछ ही दिनों में शरीर हल्का लगने लगा है. पिछले दिनों यात्रा आदि के कारण नियमित व्यायाम न करने से वजन भी बढ़ गया है. 

दोपहर के साढ़े चार बजे हैं, आज टीवी पर कुछ नए चैनल देखे. यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जिसमें स्वस्थ रहने के लिए कुछ काम की बातें थीं. सुबह उठकर गर्म पानी पीना है, कुछ देर टहलना है. शंख प्रक्षालन के आसन नियमित करने हैं. भोजन के डेढ़ घण्टे बाद पानी पीना है . नमक कम, सफेद चीनी व मैदा नहीं खाना है. भोजन चबाकर खाना है. रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है. नाभि व छाती के मध्य की दूरी को बढ़ाकर रखना है. भोजन करते समय नीचे बैठना है अथवा सीधे बैठना है. भोजन स्वयं से ऊपर रखना है. दिन में सोना भी ठीक नहीं है.  रामदेव बाबा पर एक कार्यक्रम भी देखा. आज सुबह श्री श्री व रामदेव बाबा को संगम तट पर एक साथ योग करते हुए देखना एक अभूतपूर्व अनुभव था. दोपहर को लॉन की धूप में विश्राम किया, पैरों पर धूप पड़ रही थी और सिर छाया में था. इसी तरह जीवन में भले संघर्ष हो पर मन में विश्राम हो वह जीवन सार्थक है. बड़ी भांजी के लिए आज सुबह कविता लिखी, अपनेआप ही भीतर उतर आयी हो जैसे, सोचा नहीं था कि लिखनी है. 

Friday, June 26, 2020

बापू के सपनों का भारत



टीवी पर गणतन्त्र दिवस की पूर्व सन्ध्या पर राष्ट्रपति का भाषण प्रसारित हो रहा है. वह कह रहे हैं देश इस समय गरीबी को मूलतः कम करने अथवा खत्म  करने प्रयासों में अंतिम पायदान पर पहुँच गया है. विकास के नए-नए कार्य हो रहे हैं. जवान व किसान दोनों सशक्त हो रहे हैं . आम आदमी में भी अपने जीवन को ऊपर उठाने की लालसा जगी है. सरकारी सुविधाएँ नीचे तक जा रही हैं. बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं. विकास के अवसर सभी को मिले क्योंकि देश के संसाधन पर सबका अधिकार है. गांधीजी के सपनों का भारत धीरे-धीरे साकार होता जा रहा है. तकनीक और नई सोच के बल पर देशवासी एक साथ आगे बढ़ें इसके लिए अपने लक्ष्यों और उपलब्धियों को रेखांकित करना होगा. पारस्परिक सहयोग और साझेदारी के द्वारा ही समाज आगे बढ़ सकता है. विचारों का आदान-प्रदान हो, समाज में समरसता हो. भरत की संस्कृति में, परंपरा में लोकसेवा का बहुत महत्व है. अच्छी नीयत के साथ किये गये प्रयास को सराहना मिलनी ही चाहिए. भारत की सेना विश्व में शांति के लिए एक प्रमुख स्थान रखती है. आपदा में भारतीय जवान करुणा व संवेदना का प्रदर्शन करते हैं. राष्ट्रपति का भाषण बहुत ही सारगर्भित है. यह अवसर है भारतीयता को मनाने का. इस वर्ष गाँधीजी की डेढ़सौवीं जयंती है, संविधान दिवस भी आने वाला है. इसी वर्ष चुनाव भी होने हैं जिनमें इक्कीसवीं सदी में जन्मे मतदाता भी वोट दे सकेंगे. यह सदी भारत की सदी है. 

दो दिनों का अंतराल. इस समय शाम के साढ़े छह बजे हैं. शाम को उन्हें कम्पनी के एक अधिकारी की बेटी के विवाह की पार्टी में जाना है. जून और उसका वजन बढ़ता जा रहा है, अब दोनों समय टहलने जाना होगा, कुछ खान-पान में परिवर्तन करके तथा कुछ ज्यादा व्यायाम करके उसे सीमित करना है. मौसम अब उतना ठंडा नहीं रहा. शाल लेने से काम चल जायेगा. आज माँ की अठाहरवीं पुण्यतिथि है, सभी उन्हें याद कर रहे हैं. छोटी बहन से बात हुई, उसकी गाड़ी भी साइड से लग गयी, जैसे उसकी लगी थी. जून ने पैकिंग कर ली है, दो दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं. नन्हे ने कहा, अस्सी प्रतिशत काम हो गया है इंटीरियर का उनके नए घर में, सम्भवतः मार्च तक पूरा हो जायेगा. कल क्लब में महिला मीटिंग है, चार सदस्याओं का विदाई समारोह है, उसने सभी के लिए कविताएं लिखी हैं. 

उस तीन दशकों से भी पुरानी डायरी में पढ़ा, आज उस मैदान में दोनों बाहें सामने की ओर झूलते तेजी से दौड़ नहीं सकती. सुबह से एक हल्की खुमारी छायी है मन पर. उसके तर्कों में रंचमात्र भी बल नहीं है, वह उससे जो कुछ कह रही थी उस पर स्वयं भी विश्वास नहीं, लगता है उसके पास मस्तिष्क नहीं, वह सोच नहीं सकती, विचार नहीं कर सकती. वह सदा कल्पना ही किया करती है. उसके शब्द, उसके विचार खोखले हैं यदि कल्पना उनके साथ न हो. वह किस तरह इस कमी को पूरा कर सकती है. अभी तो उसके सम्मुख बस एक ही लक्ष्य है परीक्षा देना, सिवाय इसके कि उसकी परीक्षाएं कुछ दिनों में होनी हैं, अन्य बातें उसे भूल जानी चाहिये. ठंड लग रही है, उसने सोचा खिड़कियां बन्द कर दे या रहने ही दे, फिर रहने ही दिया. कल वसन्त पंचमी है और बापू की पुण्यतिथि भी. पिछले वर्ष जब उनकी कुछेक पुस्तकें पढ़ी थीं, बापू के आदर्श वाक्य उसे हर पल संभालते थे. अब कहाँ याद आते हैं, जबकि उनकी तस्वीर हर वक्त उसकी दृष्टि के सम्मुख रहती है. अब वह आसन, प्राणायाम और व्यायाम भी नहीं कर रही है. कल अवश्य करेगी. ठंडी हवा चुभ रही है स्वेटर को छेदती नीचे त्वचा तक. ब्लो ब्लो दाओ विंटर विंड यह तो उसने जंगल में कहा था और वह कमरे में भी नहीं बैठ सकती. तापमान 15 डिग्री से कम ही होगा, सेल्सियस और सेंटीग्रेट एक ही होता है न ! 

Wednesday, June 24, 2020

गायत्री परिवार के मुखिया



दाहिनी आँख में हल्का दर्द है, सम्भवतः पित्त बढ़ने से हुआ है. कल रात को एक पार्टी में गए, भोजन गरिष्ठ था,थोड़ा सा गाजर का हलवा भी खाया. देह जब तक है तब तक कुछ न कुछ इसके साथ लगा ही रहेगा. आज ठंड ज्यादा है पहली बार फिरन पहना है. आज भी किसी ‘बंद’ की सम्भावना थी पर समझौता हो गया लगता है, इसी कारण जून दस मिनट लेट हुए दफ्तर जाने में. आज दोपहर से मन स्थिरता का अनुभव कर रहा है. भीतर कुछ करने को नहीं है, आजकल ऐसा लगता है. जैसे हाथ में दो कंगन हों तो बजते हैं, एक रह जाये तो कैसी आवाज, जब हृदय व बुद्धि एक हो जाएँ तो भीतर मौन का ही साम्राज्य शेष रहेगा. ऐसा मौन जो सहज है, पुलक से भरा है और पूर्ण तृप्त है. इस समय शाम के साढ़े सात बजे हैं, टीवी स्क्रीन पर यू ट्यूब में प्रणव पांड्या जी तनाव पर बोल रहे हैं, वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ आर्ट ऑफ़ थिंकिंग पर भी बल दे रहे हैं. कल वह क्लब में आने वाले हैं, वे उन्हें सुनने जायेंगे. सुबह प्रेसीडेंट के यहाँ गयी थी, उन्हीने पीठा खिलाया, अपने इकलौते पुत्र के बारे में बताया जो मुम्बई में रहता है. आज छोटी बहन से बात हुई, उसकी एक परिचिता सदा के लिए भारत वापस आ रही हैं, उसे बगीचे के लिए कृत्रिम घास व एक फौवारा देकर जा रही हैं. उसने आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक कोर्स भी किया पिछले दिनों. कहीं दूर से गाने की आवाज आ रही है, सर्दियों के मौसम में दूर की आवाज ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है. आज एक योग साधिका का फोन आया, उसका नन्हा पुत्र भी अपने जैसा एक ही है. वह एक जगह टिककर नहीं बैठता है और पढ़ने में उसका मन ज्यादा नहीं लगता है. 

आज सुबह बड़ी भांजी के लिए एक कविता लिखी, कल उसके विवाह की वर्षगाँठ है. वर्षों पहले दिल्ली में जब उसका विवाह हुआ था, घर में पहला विवाह था, वे एक सप्ताह के लिए गए थे. आज बगीचे से मेथी और हरे लहसुन तोड़े, मकई के आटे में मिलाकर ठेपला बनाया. नन्हा व सोनू भी सड़क यात्रा पर जा रहे हैं, एक रात एक फार्म हाउस में रुकेंगे. यात्रा करना सभी को भाता है, मन एक अलग ही स्थिति में रहता है यात्रा में, सजग पर विश्रामपूर्ण ! आज सुबह वे उठे तभी से गायत्री मन्त्र, भजन तथा हवन में बोले जाने वाले मन्त्रों की ध्वनि आ रही है. डेली बाजार के पीछे गायत्री शक्ति पीठ की स्थापना हो रही है. कल प्रणव पांड्या जी का भाषण सुना. उनकी टीम ने भजन भी गाए और शांति पाठ किया, गायत्री मन्त्र का अर्थ भी समझाया. भोजन में मसालों की तरह जीवन में थोड़ा सा तनाव आवश्यक है, पर जब यह अधिक हो जाता है तो कई रोगों को जन्म देता है, ऐसा भी कहा. इस समय शाम के पांच बजे हैं, जून मोबाइल पर ‘अँधा धुन’ देख रहे हैं. दोपहर को  लॉन में ही विश्राम किया, धूप भली लग रही थी, दो बजे धूप आगे खिसक गयी तो उठकर भीतर आ गए. कल मोदी जी को भारतीय सिनेमा के संग्रहालय के उद्घाटन पर बोलते सुनना एक सुखद अनुभव था. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा- आज साढ़े छह बजे उठी, इसलिए सारा दिन एक छाया से आवृत रहा मन, जल्दी उठने पर दिन-दिन भर खिला रहता है. बुआजी ने उस यात्री की कहानी सुनाई जो ट्रेन में सफर करते-करते अपनी जिंदगी का आखिरी सफर भी तय कर गया. एक अनाम यात्री, जिसके साथ उसके अंतिम सफर में सिर्फ गैर थे कोई अपना नहीं. अभी एक घण्टे बाद टीवी पर कवि सम्मेलन दिखाया जायेगा. कल भी सुना था. कल जो कविताएं सुनीं थीं उनकी कुछ पंक्तियाँ नोट की हैं. कन्हैयालाल नंदन की जो छवि उसने सोची थी वह उससे बिलकुल उलटे दिखे. उनकी कविता भी ज्यादा अच्छी नहीं लगी. इंदु कौशिक की आवाज व गीत के भाव दोनों भा गये. सूरज, उगते सूरज से मिले.. अभी कवि सम्मेलन देख कर आयी है. गिरिजा कुमार माथुर, बिसारिया, कैलाश वाजपेयी, कुमार शिव के गीत और कविताएं सुनीं. फिर आये भवानी प्रसाद मिश्र, जिनके साथ उसकी एक मधुर स्मृति भी जुड़ी है. उनकी कई एक कविताएं भी उसने पढ़ी हैं. आज की कविता को मात्र कविता नहीं कहा जा सकता, वह तो एक संदेश था, दैवीय संदेश, प्रेरणादायक, स्फूर्तिदायक और साथ ही यथार्थ का सही बोध कराने वाला सीधा-सादा, मन पर चोट करने वाला उनका आंसुओं से भीगा कथ्य !