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Friday, June 26, 2020

बापू के सपनों का भारत



टीवी पर गणतन्त्र दिवस की पूर्व सन्ध्या पर राष्ट्रपति का भाषण प्रसारित हो रहा है. वह कह रहे हैं देश इस समय गरीबी को मूलतः कम करने अथवा खत्म  करने प्रयासों में अंतिम पायदान पर पहुँच गया है. विकास के नए-नए कार्य हो रहे हैं. जवान व किसान दोनों सशक्त हो रहे हैं . आम आदमी में भी अपने जीवन को ऊपर उठाने की लालसा जगी है. सरकारी सुविधाएँ नीचे तक जा रही हैं. बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं. विकास के अवसर सभी को मिले क्योंकि देश के संसाधन पर सबका अधिकार है. गांधीजी के सपनों का भारत धीरे-धीरे साकार होता जा रहा है. तकनीक और नई सोच के बल पर देशवासी एक साथ आगे बढ़ें इसके लिए अपने लक्ष्यों और उपलब्धियों को रेखांकित करना होगा. पारस्परिक सहयोग और साझेदारी के द्वारा ही समाज आगे बढ़ सकता है. विचारों का आदान-प्रदान हो, समाज में समरसता हो. भरत की संस्कृति में, परंपरा में लोकसेवा का बहुत महत्व है. अच्छी नीयत के साथ किये गये प्रयास को सराहना मिलनी ही चाहिए. भारत की सेना विश्व में शांति के लिए एक प्रमुख स्थान रखती है. आपदा में भारतीय जवान करुणा व संवेदना का प्रदर्शन करते हैं. राष्ट्रपति का भाषण बहुत ही सारगर्भित है. यह अवसर है भारतीयता को मनाने का. इस वर्ष गाँधीजी की डेढ़सौवीं जयंती है, संविधान दिवस भी आने वाला है. इसी वर्ष चुनाव भी होने हैं जिनमें इक्कीसवीं सदी में जन्मे मतदाता भी वोट दे सकेंगे. यह सदी भारत की सदी है. 

दो दिनों का अंतराल. इस समय शाम के साढ़े छह बजे हैं. शाम को उन्हें कम्पनी के एक अधिकारी की बेटी के विवाह की पार्टी में जाना है. जून और उसका वजन बढ़ता जा रहा है, अब दोनों समय टहलने जाना होगा, कुछ खान-पान में परिवर्तन करके तथा कुछ ज्यादा व्यायाम करके उसे सीमित करना है. मौसम अब उतना ठंडा नहीं रहा. शाल लेने से काम चल जायेगा. आज माँ की अठाहरवीं पुण्यतिथि है, सभी उन्हें याद कर रहे हैं. छोटी बहन से बात हुई, उसकी गाड़ी भी साइड से लग गयी, जैसे उसकी लगी थी. जून ने पैकिंग कर ली है, दो दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं. नन्हे ने कहा, अस्सी प्रतिशत काम हो गया है इंटीरियर का उनके नए घर में, सम्भवतः मार्च तक पूरा हो जायेगा. कल क्लब में महिला मीटिंग है, चार सदस्याओं का विदाई समारोह है, उसने सभी के लिए कविताएं लिखी हैं. 

उस तीन दशकों से भी पुरानी डायरी में पढ़ा, आज उस मैदान में दोनों बाहें सामने की ओर झूलते तेजी से दौड़ नहीं सकती. सुबह से एक हल्की खुमारी छायी है मन पर. उसके तर्कों में रंचमात्र भी बल नहीं है, वह उससे जो कुछ कह रही थी उस पर स्वयं भी विश्वास नहीं, लगता है उसके पास मस्तिष्क नहीं, वह सोच नहीं सकती, विचार नहीं कर सकती. वह सदा कल्पना ही किया करती है. उसके शब्द, उसके विचार खोखले हैं यदि कल्पना उनके साथ न हो. वह किस तरह इस कमी को पूरा कर सकती है. अभी तो उसके सम्मुख बस एक ही लक्ष्य है परीक्षा देना, सिवाय इसके कि उसकी परीक्षाएं कुछ दिनों में होनी हैं, अन्य बातें उसे भूल जानी चाहिये. ठंड लग रही है, उसने सोचा खिड़कियां बन्द कर दे या रहने ही दे, फिर रहने ही दिया. कल वसन्त पंचमी है और बापू की पुण्यतिथि भी. पिछले वर्ष जब उनकी कुछेक पुस्तकें पढ़ी थीं, बापू के आदर्श वाक्य उसे हर पल संभालते थे. अब कहाँ याद आते हैं, जबकि उनकी तस्वीर हर वक्त उसकी दृष्टि के सम्मुख रहती है. अब वह आसन, प्राणायाम और व्यायाम भी नहीं कर रही है. कल अवश्य करेगी. ठंडी हवा चुभ रही है स्वेटर को छेदती नीचे त्वचा तक. ब्लो ब्लो दाओ विंटर विंड यह तो उसने जंगल में कहा था और वह कमरे में भी नहीं बैठ सकती. तापमान 15 डिग्री से कम ही होगा, सेल्सियस और सेंटीग्रेट एक ही होता है न ! 

Thursday, January 17, 2013

विश्व कप- क्रिकेट का उत्सव



पाकिस्तान को हराकर भारत के तीन अंक हो गए हैं, अगला मैच दक्षिण अफ्रीका से है, उसमें तो विजय निश्चित है. इसलिए वे खुश थे, एक मित्र के यहाँ गए, उसके माँ-पिता दिल्ली से आए हुए थे, उनसे भी मिलना था, वहाँ पता चला, उसकी एक सखी अस्पताल में दाखिल है. नन्हे की परीक्षा की तारीखें आ गयी हैं, स्कूल में रिवीजन शुरू हो गया है, और घर पर भी. कल रात उसका खाने का मन नहीं था, हाथ बांध कर वह बैठ गयी तो कहने लगा मेरा भी तो हाथ है आप इससे खाइए...बच्चे कितने मासूम होते हैं..भोले..फूलों की तरह पवित्र..

सुबह के साढ़े दस बजे हैं, आज धूप का नामोनिशान नही है, ठंड जाते-जाते फिर लौट आती है. बहुत दिनों से उसने कोई कविता नहीं लिखी, अगर वे चंद पंक्तियाँ कविता कही जा सकती हैं जो वह लिखती है. सुबह देखे एक स्वप्न में कितनी आसानी से वह कवितायें कह रही थी  पर अब कुछ याद नहीं आता, पर उस समय उसने सोचा था, लिख लेना चाहिए इन्हें. विश्वकप श्रृंखला में आज दो मैच हैं, पता नहीं भारत का कौन सा स्थान होगा, पर हम भारतीय हर हाल में खुश रहना जानते हैं, यही तो हमारी विशेषता है, जो भी स्थान मिलेगा, उसी के अनुकूल एक्सक्यूजेस निकल लेंगे, आखिर परेशान होकर मिलेगा भी क्या? कल रात जून नींद आने के बावजूद उसकी हल्की सी करवट लेने से उठ गए और रोज की तरह बातें कर के वे सोये, बातें जिनमें होंठ नहीं सिर्फ मन बोलते हैं, सिर्फ एक आश्वस्ति भरा स्पर्श..वह किस तरह समझते हैं..कितना अप्रतिम होता है स्नेह का यह रिश्ता...बातें करना क्या जरूरी है जब चुप रहकर ही सब कहा जाता है. कितनी सुरक्षा..कितना अपनापन..उनकी किसी बात का उसे बुरा नहीं मानना चाहिए..क्योंकि वह कभी नहीं चाहते, वह उदास रहे, नन्हे के लिए भी उनका प्रेम असीम है, उसने खुद से पूछा, आज क्यों वह इतना याद आ रहे हैं..

रात से ही बादल बरस रहे हैं, मार्च का महीना है पर लगता है सावन आ गया है, ठंड भी काफी बढ़ गयी है. सोनू की बायीं आँख सुबह लाल थी, उसने उसे स्कूल जाने से मना किया पर स्कूल छोडना उसे गवारा नहींहोता, वैसे भी वर्षा के कारण आज काफी कम बच्चे आये होंगे. जून कल शाम काफी देर तक अपना पेपर लिखते रहे. उसके पूर्व वे अस्पताल गए थे. पता नहीं क्यों वहाँ से आकर मन कुछ अजीब सा हो गया था जो आधा घंटा एक परिचित के यहाँ बैठने से भी दूर नहीं हुआ और बिस्तर तक उसके साथ गया. एक हफ्ता हो गया कोई भी चिट्ठी नहीं आयी, इसी तरह न जाने कितने दिन, कितने हफ्ते गुजरते जा रहे हैं. नन्हे को दिनोंदिन बड़ा होते, समझदार होते देखना अच्छा लगता है. एक पल वह बच्चा बन जाता है फिर कोई ऐसी बात बोलेगा कि लगता है बड़ा हो गया है, रात ही कह रहा था, “माँ जब मैं अकेला होता हूँ तो अकेला नहीं होता कोई मेरे साथ रहता है, जो मेरी बातें सुनता है बस जवाब नहीं दे पाता”, उसने पूछा, कौन ? तो बोला, “मेरा मन, मैं उसके साथ बहुत बातें करता हूँ”. आज जून के एक मित्र भी खाने पर आएंगे, उसने सोचा अब लिखना बंद करना चाहिए. जल्दी से बादलों पर चार लाइनें लिखने का प्रयास करेगी-

उमड-घुमड़ कर अजब रूप धर
काले, भूरे, धूसर बादल,
जब देखो छा जाते नभ पर
और बरसने लगते झर-झर !

विश्वकप के नियमों के तथा वर्षा की बदौलत भारत और जिम्बाववे के मैच में भारत विजयी हुआ है. बहुत दिनों बाद ‘हमलोग’ देखा, कहानी बहुत धीरे धीरे बढ़ रही है.
आज सोमवार है, मौसम वही बादलों वाला, ठंड इतनी, जितनी दिसम्बर-जनवरी में होती है, चिड़ियों की चहकार के कोई शब्द नहीं, कुछ देर पूर्व फोन की घंटी बजी थी जिसकी आवाज गूंज गयी थी. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मत हो रहा है, राव सरकार के लिए  आसान सी चुनौती !