Friday, November 28, 2014

पुष्प सज्जा की कला


जून घर पहुंच गये हैं, स्टेशन से ही उन्होंने फोन किया. उनके न होने से एक खालीपन तो है पर एक नयी ख़ुशी भी है कि उनके आने के बाद वे पहले से ज्यादा करीब होंगे, दूरियां निकटता को बढ़ा देती हैं. घर में सब ठीक होंगे उसे व नन्हे को याद कर रहे होंगे. कल शाम क्लब की एक सदस्या ने फोन किया, इस बार मीटिंग में पुष्प-सज्जा उसे एक सखी के साथ मिलकर करनी है. इस समय दोपहर के सवा बजे हैं, प्रूफ रीडिंग का काम हो गया है. सुबह पांच बजे वे उठ गये थे, नन्हा भी वक्त पर तैयार हो गया था, उसके कपड़ों को ठीक करना है, उसकी आलमारी भी ठीक करनी है. आज सुबह उसकी पिछले वर्ष की किताबें उठाकर देखीं तो पता चला दीमक ने घर बना लिया था. कल छोटी बहन का जन्मदिन है, कल उसे फोन करेगी, दीदी का फोन आए कई दिन हो गये हैं, बड़े भाई का भी, अब राखी के दिन उनसे बात होगी. सभी सुखी रहें यही उसकी कामना है. अड़ोस-पड़ोस में सभी को अमरूद भिजवाने हैं. उसने सोचा, नैनी के बेटे से तुड़वा कर यह कार्य भी सम्पन्न कर लेना चाहिए.

अभी-अभी छोटी बहन को जन्मदिन की बधाई दी, उसने कहा, पत्र लिखा है. भांजी और पिता से भी बात हुई. पिता ने भी पत्र लिखा है, उन्हें उसने लिखा था, माँ के पत्रों की कमी वह महसूस करती है, अभी तक उसके अंतर्मन में मोहमाया के बंधन बहुत गहरे हैं. कल रात दीदी का भी फोन आया. सुबह जून का भी, वह मित्र के बेटे की पढ़ाई के बारे में बात करने उसके यहाँ जाने वाले हैं. उनकी दिनचर्या बेहद व्यस्त रहेगी वहाँ. गुरू माँ अमीर खुसरो का लिखा एक गीत(जो गुरू की प्रशंसा में है) गा रही हैं, उनकी बातें दिल को छू जाती हैं, उनसे मिलने की इच्छा हृदय में उत्पन्न होने लगी है और वह जानती है ईश्वर उन्हें एक न एक दिन अवश्य मिलाएगा. वे दोनों उसी के द्वारा तो बंधे हैं.

“यह दिल है मेरा मन्दिर, और मन यह पुजारी है,
मन्दिर में जो रखी है, मूरत वह तुम्हारी है”

अगस्त का शुभारम्भ ! कल रात जून का फोन आया, वहाँ शाम से ही बिजली नहीं थी, घर में बैठे-बैठे वह परेशान हो रहे थे, उन्हें उसने अपनी फरमाइशें बता दीं, एक तो दीपक चोपड़ा जी की सलाह पर चांदी का टंग क्लीनर और दूसरी एक ड्रेस. कल शाम ही उसने तय किया है कि अब घर पर भी अच्छे वस्त्र पहनेगी, चालीस के बाद वैसे भी जीवन कितना रह ही जाता है जो चीजों को संभाल-संभाल कर रखा जाये. घर में भी यदि उसी तरह संवर कर रहा जाये तो अपना साथ खुद को तो भला लगेगा ही घर के अन्य लोगों पर भी इसका अच्छा असर पड़ेगा, सो पुराने वस्त्रों को अलविदा ! कल शाम की मीटिंग अच्छी रही, कार्यक्रम सभी अच्छे थे. पुष्प सज्जा का अनुभव भी अच्छा रहा. अभी एक सखी से मिलकर आ रही है जिसकी माँ घातक बीमारी से ग्रस्त हैं, अस्पताल में हैं. आज सुबह बाबाजी व गुरू माँ से भी मुलाकात हुई, उनकी वजह से ही उसका मन समता को पा सका है, ऐसा लगता है कि जीवन में आने वाली किसी भी स्थिति का सामना वह कर सकती है. ईश्वर उसके विश्वास की रक्षा करता है !



नंदन- बच्चों की पत्रिका


जिसके हृदय में ईश्वर का प्रेम उदित हो जाता है, वह पारस हो जाता है. वह जहाँ निवास करेगा वे स्थान तीर्थ हो जाते हैं. भक्त के विचार इतर विचारों से अलग हो जाते हैं, यदि मन में सांसारिक विषयों का ही चिन्तन चलेगा तो बातचीत में वही प्रकट होगा, बातचीत का विषय क्या है इसको देखकर ही अंतर्मन में चलने वाल चिन्तन प्रकट होता है. वाणी का संयम तभी सम्भव है जब विचारों का संयम हो, चिन्तन सही दिशा की ओर हो ! आज बाबाजी ने देश की गरिमा की ओर ध्यान खीँचा साथ ही उन स्वार्थी लोगों की तरफ भी, जिन्होंने शत्रुओं को भेद बताये और निज देश के मान-सम्मान का सौदा किया, जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो कौन बचा सकता है ? इसी तरह जब मानव स्वयं ही निज सुख का हनन करे, नियमों का पालन न करे तो हानि स्वयं को ही होगी. आज मौसम सुहावना है, बदली बनी है, हवा शीतल है. कल दोपहर बाहर लॉन में बैठकर एक कविता लिखी, भोगा हुआ यथार्थ ! कल ही जून ने आखिर प्रकाशक से बात की, नन्हे का आज हिंदी का इम्तहान है, कल शाम उसे पढ़ाती रही, सांध्य भ्रमण का समय नहीं मिला. शनिवार को जून जा रहे हैं, फिर पूरा एक हफ्ता उन्हें अकेले रहना होगा, पुस्तकें और लेखन उसका साथ देगा.

कल अंततः उसकी पुस्तक प्रूफ रीडिंग के लिए आ गयी. नदंन के सम्पादक श्री जयप्रकाश भारती जी ने भूमिका लिखी है, जून के बनारस से लौट आने के बाद ही वे उसे वापस भेजेंगे. रात को ठीक से सो नहीं पायी, अभी भी कभी-कभी मन कहा नहीं मानता. नन्हे का आज अंतिम इम्तहान है. उसके दो पेपर ठीक हुए हैं, दो सामान्य और आज का भी सामान्य होने की आशा है क्योंकि सुबह भी पढ़ रहा था. अगले सप्ताह से ज्यादा गम्भीर होने की जरूरत है. गुरू माँ ने कहा कि भक्ति योग के अनुसार मानव बूंद है, ईश्वर सागर है और वेदांत के अनुसार बूंद ही सागर है, अर्थात पहले के अनुसार सागर में बूंद और दुसरे के अनुसार बूंद में सागर ! कल उसने गुलदाउदी की पौध गमलों में लगा दी, अभी भी कुछ पौधे शेष हैं जिन्हें जमीन में लगाने का विचार है. बाबाजी ने आज पानी के प्रयोग बताये, सुबह उठकर सवा लीटर पानी पीना है और पैंतालीस मिनट तक कुछ खाना नहीं है. दोपहर व रात के भोजन के बाद डेढ़-दो घंटे तक पानी नहीं पीना है. आज भी मौसम ठंडा है, कल शाम काफी वर्षा हुई. वर्षा रुकने पर वह लाइब्रेरी गयी, दीपक चोपड़ा की एक पुस्तक लायी Perfect Health. जून को हल्की सर्दी है, वैसे वे सभी स्वस्थ हैं पिछले कई महीनों से. जून को प्राणायाम से लाभ हुआ है उसे ईश्वर के स्मरण से. यह अहसास कि कोई है जो हर पल उनके साथ है और उनका मनोबल उच्च करता है, सत्मार्ग पर ले जाता है, अपने आप में ही एक उपहार है, वे भटक नहीं रहे हैं, इतना सजग तो उन्हें रखता है.

आज जून कामरूप एक्सप्रेस से गोहाटी जायेंगे. सुबह साढ़े चार बजे वे उठ गये, पांच बजे उसे उठाया. नन्हे और उनके जाने के बाद वह संगीत की कक्षा में गयी, राग हमीर सिखाया अध्यापिका ने. अगले हफ्ते एक दिन दोपहर को भी जाएगी ऐसा उसने तय किया है. घर आकर भोजन की तयारी की, कपड़े प्रेस किये. ध्यान अभी नहीं किया है, आज सुबह बाबाजी से भी नहीं मिल सकी. कल शाम बहुत दिनों बाद दो मित्र परिवार मिलने आये. आज सुबह ससुराल से फोन आया, आसाम की चाय मंगवाई है, नन्हे के लिए राखी भेजी है. अगले कुछ दिन उसके पास वक्त ज्यादा होगा, ध्यान, संगीत और अध्ययन-लेखन के लिए. जून से मिलकर घर में सभी खुश होंगे और जून उनसे मिलकर,  उनकी याद तो आयेगी ही... !




Thursday, November 27, 2014

हैरी पॉटर की दुनिया


सतगुरू मेरा सूरमा, करे शब्द की चोट ! टीवी के माध्यम से उसे गुरू प्रतिदिन मिलते हैं, शब्द की चोट करते हैं, सदुपदेश देते हैं, अंतः करण में उस परम शक्ति का आवाहन करने की प्रेरणा देते हैं, कभी-कभी लगता है वह सही मार्ग पर जा रही है पर फिर असावधानी वश पीछे लौटना हो जाता है और स्वयं को उसी स्थान पर पाती है जहाँ से चली थी. परसों सुबह संगीत कक्षा में गयी, लौटी तो ध्यान आदि किया, भोजन बनाया, जून को फ़ील्ड जाना था. पूरा दिन उउपन्यास पढ़ते या टीवी देखते गुजरा. कल सुबह-सुबह ही जून से गुस्सा हुई, लेकिन इतना तो मानना पड़ेगा कि पता था गुस्सा हो रही है सो ५-१० मिनट से अधिक नहीं टिका, पर दिन उसी तरह गुजरा जैसे शनिवार गुजरा था. कल रात भर डरावने सपने देखती रही, harry potter मन मस्तिष्क पर जो छाया हुआ था. स्टार टीवी पर ‘आत्मा’ आ रहा है. गुरू माँ ने भक्ति का महत्व तथा भक्त के लक्षण बताए.

“मन में भाव न हो तो पूजा-अर्चना व्यर्थ है, ईश्वर के प्रति श्रद्धा का माप पूजा व आरती नहीं बल्कि अंतर्मन में ज्ञान का दीपक जलाने से होता है. गुरुनानक ने कहा है उस परमेश्वर की आरती का थाल यह गगन है, सूर्य, चाँद, तारे मानो उसमें दीपक जल रहे हैं, हवा, फूलों और वनस्पतियों रूपी धूप की सुगंध फैला रही है और चंवर डुला रही है. ऐसे विराट स्वरूप को क्या कोई मन्दिर में कैद कर सकता है ? मन्दिर की पवित्रता भी यदि किसी के भीतर पवित्र भाव न जगा सकी तो वहाँ जाना या न जाना बराबर है. हर क्षण जो उसकी याद में बीते, पूजा का क्षण है और हर स्थान पवित्र है, जितनी साँसें उसके स्मरण में लीं वही सार्थक हैं और जितनी उसे भुलाकर समझें गंवा दीं”. आज गुरू माँ ने उपरोक्त प्रेरणास्पद बातें कहीं. उसे लगा जैसे वह यह भी कह रही हों, सुबह-सुबह जब आकाश में सूर्य उदय हो रहा हो तो अपने अंतर में भी ज्ञान का सूर्य उदय हो ! पंछियों की चहचहाहट से जब बाहरी वातावरण गुंजित हो तो अंतर के प्रांगण में उसके नाम की गूँज हो. वे मन्मुख न हों तथा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानें. अपने भीतर ही उच्च जीवन की सम्भावनाएं छिपी हैं, सृजन की क्षमता है, सुख और आनंद का स्रोत है. कल जून पहले की तरह के अपने मूल स्वभाव में आ गये थे, आज सुबह उसने संयम की बात कही तो उन्होंने ‘जिद’ कहा. कभी न कभी यह संयम उन्हें भी सधेगा, तब मिठाई देखते ही उसे खाने की इच्छा को नियंत्रित कर सकेंगे. आज नन्हे की गणित की परीक्षा है, कल अंग्रेजी की हो गयी, उसका आत्मविश्वास बढ़ रहा है. बड़े भाई ने अभी तक फोन नहीं किया, ईश्वर ही मदद करेगा.

“जब दिल में राग-द्वेष न हो, स्वर्ग भीतर होता है, जब स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने के लिए अन्यों को नीचा दिखाते हैं तो हृदय में नर्क उत्पन्न होता है. जो व्यक्ति सामने न हो, उसकी बात करना उचित नहीं है. अन्यों के कल्याण की बातें ही मन सोचे, चारों दिशाओं में शुभकामनायें भेजे, जो हृदय की गहराइयों से निकली हों. सभी के प्रति, चाहे वे मित्र हों या अपरिचित स्नेह भाव बना रहे. भूलकर भी कोई अप्रिय बात या कटु वचन अथवा भावना भी दिल में न उपजे, तभी कोई ईश्वर का भक्त होने का दावा कर सकता है. हृदय पवित्र होगा, स्फटिक की तरह चमकदार, झील के शांत पानी की तरह स्वच्छ और स्थिर तो उसकी झलक मिलती है”. संतों के वचन उसे एक अनोखी दुनिया में ले जाते हैं, जहाँ प्रेम है, करुणा है, हित की भावना है, उच्च विचार हैं, जहाँ भौतिक वस्तुओं के प्रति उतना ही आदर है जिसके वे योग्य हैं पर मानसिक शांति व सुख की बड़ी पूछ है. आज नन्हे का गणित का इम्तहान है.



Tuesday, November 25, 2014

अज्ञेय की कविताएँ


दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने वार्ता को असफल नहीं बताया है, उम्मीद की किरण अभी भी रोशन है. कल रात से वर्षा हो रही है, मौसम कल जितना गर्म था आज उतना ही सुहावना है. बाबाजी आज कीर्तन करवा रहे थे. उससे पहले टैगोर की जापान यात्रा का एक संस्मरण सुनाया. गुरूमाँ ने ऐसे नृत्य का जिक्र किया जो किया नहीं जाता, हो जाता है. बहुत दिनों से उसके साथ ऐसा नहीं हुआ है शायद आज शाम को ही इसका अवसर आए, क्योंकि वर्षा यदि थमी नहीं तो घर पर ही टहलना होगा जो उसके मामले में कैसेट लगाकर थिरकना होता है. कल दोनों पत्र भी लिखे और दीदी को जवाब भी दिया है. कल रात छोटी बहन व पिता से बात हुई. आज दोपहर स्टोर की सफाई करनी-करवानी है.

सुबह-सवेरे भजन जब अपने आप होने लगे, मन परमेश्वर की स्मृति में सहज रूप से लगा रहे, उसे लगाना न पड़े तो ही जानना चाहिए कि प्रेम का अंकुर फूटा है. चारों ओर उसी का वैभव तो बिखरा है, उसी की सृष्टि का उपयोग वे करते हैं पर उसे भुला बैठते हैं. जबकि वह हर क्षण साथ है, दूर नहीं है. बस एक पर्दा है जो उन्हें एक-दसरे से अलग किये हुए है. वह हर क्षण श्रद्धा का केंद्र बना है, हर श्वास उसकी कृपा है. मन यदि हर क्षण उसी को अर्पित रहे तो इसमें कोई विक्षोभ आ भी कैसे सकता है. संसार की बातें उत्पन्न करने वाला भी वही है. यही आराधना ही राधा है, जिसके माध्यम से कृष्ण को पाया जा सकता है. वह आत्मा है, जिसके प्रसाद के बिना मन आधार हीन होता है, बाहर का सुख टिकता नहीं, यह अनुभव बताता है. उस एक से प्रीति हो जाने पर परम सुविधा मिलती है जो कभी छूटती नहीं, अपने उच्च तत्व का साक्षात्कार करना यदि आ जाये तो यह जो गड्डमड्ड, खिचड़ा हो गया है, देह के अस्वस्थ या मन के दुखी होने पर स्वयं को अस्वस्थ या दुखी मानना, छूट जायेगा. जैसी दृष्टि होगी यह जगत वैसा ही दिखेगा. अँधेरी रात में एक ठूँठ को एक व्यक्ति चोर समझता है, दूसरा साधू और तीसरा रौशनी करके उसकी असलियत पहचानता है. उन्हें भी इस जगत की वास्तविकता को पहचानना है. न इससे आकर्षित होना है न ही द्वेष करना है. तभी वे मुक्त हैं.

आज अमावस्या है. सुबह से ही मन में उत्साह है. एक वक्त के भोजन में फलाहार लेना है आज, जितना हो सके उतना व्रत पालना ही चाहिए. कल दोपहर और शाम को अज्ञेय की कविताएँ पढ़ीं, अनुपम हैं और भावना के उस लोक में ले जाती हैं जहाँ प्रेम है, शरद की चाँदनी, टेसू के फूल हैं, जहाँ इष्ट की आराधना है, “मैं संख्यातीत रूपों में तुम्हें याद करता हूँ” अज्ञेय की कविता अंतर को गहरे तक छू जाती है. अभी-अभी गुरू माँ ने कहा ईश्वर को प्रेम करने का अर्थ संसार का विरोधी हो जाना नहीं है. जब जीवन में प्रेम होता है, तब वह सभी के लिए होता है. उसमें समष्टि समा जाती है. ईश्वर, प्रकृति, मानव उससे कुछ भी अछूता नहीं रहता, प्रेम में महान ऊर्जा छुपी है, वह आस-पास की हर वस्तु को एक नये दृष्टिकोण से दिखाती है. उसे लगता है, मन को एकाग्र करना हर वक्त संभव नहीं पर यह सम्भव है कि इस बात का बोध रहे कब मन एकाग्र है और कब एकाग्र नहीं है, और कब एकाग्र नहीं है ? जब मन गुण ग्राही होता है, बुरी से बुरी परिस्थिति में भी कोई न कोई अच्छाई खोज लेता है, तब वह एकाग्र होना सीख लेता है. उसने प्रार्थना की, आज का दिन ईश्वर के प्रति समर्पित हो, दिन भर वह उसकी याद अपने मन में बनाये रखे, सभी के प्रति मंगल कामना से मन युक्त रहे !   



Friday, November 21, 2014

विनोबा की गीता


आज नन्हे का जन्मदिन है, सुबह उठी फोन की घंटी की आवाज सुनकर, उसके दादाजी का फोन था, उसके बाद नानाजी का, छोटे मामा-मामी तथा बड़ी बुआ व फूफा ने फोन द्वारा मुबारकबाद दी, नन्हा तो स्कूल चला गया था उन्होंने ही सबसे बात की. कल जून ने उसे मित्रों के लिए ढेर सारी चाकलेट्स लाकर दीं जो वह स्कूल में बाँटने वाला है. आज उसे उन्होंने कार्ड व उसने कुछ रूपये दिए पर उसके लिए पैसों का कोई महत्व नहीं है, उसे वापस आलमारी में रखने को कह गया है. एक तरह से अच्छा ही है, पैसों को उतना ही महत्व देना चाहिए जितने के वे हकदार हैं. ईश्वर की उन पर कृपा है कि उनकी जरूरत की सभी वस्तुएं प्रदान कर रहा है. बाबाजी ठीक कहते हैं ईश्वर प्रतिक्षण कृपा बरसा रहा है, उसकी प्रतीक्षा नहीं करनी है बस समीक्षा करनी है. आज शाम को एक मित्र उनके साथ भोजन खायेंगे, नन्हे के लिए विशेष डिनर बना रही है, कल दोपहर केक बनाया था. मौसम आज अच्छा है. कल शाम जून ने उसे प्राणायाम सिखाया पर सुदर्शन क्रिया बिना सीखे करना उचित नहीं है. सतत् अभ्यास से सम्भवतः वह कभी कर पाए. पिता से आज बहुत दिनों बाद बात की, उन्हें बताया कि उनके लेख नन्हे के काम आ रहे हैं. उनकी डायरी से वह आजकल विनोबा का गीता पाठ करती है, यह नहीं बताया. उनका सबसे बड़ा उपहार यही है. 

आज उसे RCT के लिए जाना है. उस सखी के लिए डिब्रूगढ़ भोजन भिजवाना है और  वे सारे कार्य करने हैं जो रोज की दिनचर्या में शामिल हैं. कल दोपहर बाद बड़े भाई का फोन आया नन्हे के लिये बधाई दी और यह भी कहा कि उसकी किताब के लिए उन्होंने अपने सहयोगी ( नाम वह भूल गयी है ) को कहा है. आज सुबह गुरू माँ ने सक्रिय ध्यान की विधि सिखाई, सुदर्शन क्रिया से मिलती-जुलती ही है. कहा कि जिन्हें शरीर से ज्यादा मोह होता है उन्हें ही डर लगता है, सो डरने की कोई बात नहीं है. बाबाजी का प्रवचन भी अति उत्साह देने वाला था. लोग चिंता इसलिए करते हैं क्योकि चिंता करना उनका स्वभाव ही बन गया है कमियां ढूँढने में दक्ष हो जाते हैं. नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाये रहते हैं तभी सारी परेशानियाँ चारे वे शारीरिक हों, मानसिक हो, अथवा आध्यात्मिक हों उत्पन्न होती हैं ! ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करना या आभार प्रकट करना तो दूर, वे सदा उससे शिकायत ही करते हैं. यह सुंदर जगत जिसे देखने, समझने और महसूस करने का सुअवसर उसने दिया है, जिसे वे खुद के लिए जंजाल बना लेते हैं. यदि वे अपने सम्मुख आने वाले अवसरों को ईश्वर का वरदान मानें और उनका सदुपयोग करते चलें, मन को सात्विक भावों से परिपूर्ण रखें और एक क्षण के लिए भी उस शक्ति को न भूलें जो सदा उनके साथ है तो कोई भय नहीं !

It’s a lovely morning, typical Assam weather, it is raining since night, breeze is cool just now she finished her “Pranayam and Meditation”,  yesterday dentist did the white filling in her tooth cavity, RCT was not required, she was unnecessary worried since last one month. After so many weeks or month she has switched over to English and finding it difficult, her handwriting as well as sentence making and vocabulary also spelling… all need attention. Last few months she read more hindi books than English. But English is as well as important. Jun is going to Dibrugadh on official trip, he will go to hospital also. Tomorrow she will also go to visit them. She has to send Rakhis this week and also e-mails to all. Yesterday evening they went to a anniversary party. Day after tomorrow Pakistan’s President General Musharraf is coming to India, 750 journalists are going to Agra to cover this historical summit of two leaders, hope something useful and good for both countries comes out of this effort. All is in their hands in fact in their mind.

Today she got up hearing jun’s practice. Nanha got up late and then got his left hand hurt. Jun was upset but when he forgot his water bottle he took it and followed his school bus. He loves him very much and it is natural. And when he sees misbehaving it is natural for him to get upset but with her it is different. Last night he was silent for some reason but did not tell her but in the morning after practice he was happy and then this Nanha;s episode. Any way she should concentrate on positive things, on the discourse by Guru Ma. Today she is telling about Bhakti of Gopies.



Tuesday, November 18, 2014

सुदर्शन क्रिया का अभ्यास


आज बाबाजी ने मन को एकाग्र करने की एक सरल युक्ति बतायी, ध्यान के समय जब मन किसी वस्तु का चिन्तन करने लगे तो यह भाव करें कि उस वस्तु को देखने वाला मानस-चक्षु और सोचने वाला मानस भी उसी आत्मा का अंश है ! कल शाम को वे टेक्निकल फोरम में गये थे, श्री राय ने काफी दक्षता से अपने विषय पर व्याख्यान दिया. एक विधि ETP भी सिखायी जो शरीर में होने वाले दर्द अथवा मानसिक परेशानी को दूर करने में सहायक थी. उनके अनुसार श्वास तथा विचारों में बड़ा गहरा संबंध है. साँस को नियंत्रित करके भावनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है. इसी तरह शरीर में होने वाले रोग आदि भी नकारात्मक भावनाओं/विचारों का परिणाम हैं. यदि सोच सकारात्मक हो और नियमित प्राणायाम का अभ्यास करें तो सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिल सकती है ! जून ने तीन दिनों की ट्रेनिंग ली जो उनके लिए बेहद उपयोगी है. वह पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गये हैं, अधिक सचेत हो गये हैं. उसे भी अपने ध्यान को बढ़ाना होगा और प्राणायाम नियमित करना होगा. आज दोपहर सिर्फ पुस्तक पढ़ते हुए ही नहीं बितानी है बल्कि कुछ लिखना भी है. कल ‘अपने अपने राम’ पूरी पढ़ ली, राम कथा को कहने का यह एक नया अंदाज है लेकिन प्रभावशाली है. कल माली ने गमलों के लिए मिट्टी खोदकर गैराज में रख दी है, गुलदाउदी के पौधों से कटिंग्स लगाने का काम भी इतवार तक हो जायेगा. रात को वर्षा हुई पर वातावरण में उमस पहले की तरह ही है.

आज सुबह भी जून ने उठकर अपना अभ्यास ( प्राणायाम+सुदर्शन क्रिया ) पूरा किया तो वह उठी. जून जैसे ही गये संगीत अध्यापिका का फोन आ गया, वहाँ से लौटते-लौटते साढ़े आठ हो गये. आज राग विहाग सिखाया. अभी तक सफाईवाला नहीं आया तो नैनी को आवाज दी है. जिसकी बेटी को कई दिनों से बुखार है, उस सखी से फोन पर बात की, वे लोग शायद सोमवार को उसे डिब्रूगढ़ ले जायेंगे. बुखार अभी भी है. आज गर्मी बेहद है, रात को भी वर्षा नहीं हुई. आज उसने शनिवार का विशेष भोजन ‘सिन्धी कढ़ी’ बनायी है, जून देर से आएंगे, दफ्तर के किसी काम से तिनसुकिया गये हैं. नन्हा अपने हॉउस का कैप्टन बना है इस साल, अगले हफ्ते उसका जन्मदिन है और उसके अगले दिन से उसके दांत का इलाज शुरू होगा.

कल रात वे जल्दी सोने गये जिससे सुबह जल्दी उठकर जून अपना अभ्यास कर सकें पर आधे घंटे बाद ही उनके एक सहयोगी ने फोन करके जगा दिया, पुनः सोये हुए अभी दो घंटे भी नहीं बीते होंगे कि आंधी-तूफान की आवाज ने नींद खोल दी, रही-सही कसर बिजली गुल हो जाने से पूरी हो गयी. उमस इतनी ज्यादा थी कि खिड़की व बरामदे का दरवाजा खोला, आधा घंटा जगे ही रहे फिर बिजली आ गयी, इसी बीच बादलों की गर्जन-तर्जन व बिजली का चमकना जारी रहा. सुबह उठे तो बगीचा, पेड़-पौधे तूफान की गवाही दे रहे थे, यूँ कल की भीषण गर्मी के बाद वर्षा राहत बनकर आयी है, हवा ठंडी हो गयी है, पर सुबह जल्दी नहीं उठ पाए. दलिया जल गया उसकी लापरवाही के कारण, उस दिन परसों ही तो चावल पतीले में लग गये थे, उसे ज्यादा सचेत होना है न कि रही-सही सुधबुध भी खो देनी है. जून आजकल शांत हो गये हैं, वह पहले की अपेक्षा ज्यादा स्थिर दीखते हैं, जैसे हर वक्त उन्हें पता हो क्या कहना है, क्या करना है. आज नन्हे के लिए केक बनाना है, उसने काले चने बनाने को कहा था पर वह भिगोना भूल गयी, एक और लापरवाही. उसने अभी तक स्नान-ध्यान नहीं किया है, कपड़े प्रेस करते समय बाबाजी को सुना, उन्होंने कहा ध्यान सुप्त शक्तियों को उजागर करने में मदद करता है.कल दोपहर बाद जून का सिरदर्द रेकी( ध्यान की ही एक विधि ) से हल्का हुआ, शनिवार को बांह का दर्द भी इसी तरह ठीक हुआ था, शक्ति पास ही है स्वयं को ठीक करने की भी और अन्यों की सहायता करने की भी ! जरूरत है वे ध्यान में ज्यादा से ज्यादा उतरें !






१०८४वें की माँ - महाश्वेता देवी की पुस्तक


मन जब पूरी तरह खाली होगा तभी परमात्मा का नाम गूंजेगा, जैसे किसी खाली हॉल में अपना नाम पुकारें तो गूँज सुनायी देती है न, ठीक उसी तरह यदि एक बार भी उसे पुकारें तो खाली मन से टकराकर वह बार-बार सुनाई देगा ! आज बाबाजी कथाएं सुना रहे हैं जिसमें उसकी रुचि नहीं है. कल जून लाइब्रेरी से कुछ पुस्तकें लाये, पी. वी. नरसिंहा राव का लिखा उपन्यास ‘अंतर्गाथा’ जो insider का हिंदी अनुवाद है. अज्ञेय व निराला की कविताएँ, महाश्वेता देवी का उपन्यास ‘१०८४ की माँ’ तथा भगवानसिंह की पुस्तक ‘अपने अपने राम’ ! सभी पुस्तकें उच्च कोटि की हैं पर कल कुछ पृष्ठ अंतर्गाथा के पढ़े सो कुछ स्वप्न देखे. जून आज से तीन दिनों तक art of living पर एक सेमिनार में जाने वाले हैं आज लंच पर देर से आएंगे. कल उस मित्र परिवार ने उनके साथ ही भोजन किया. दोपहर भर पढ़ती रही सो शाम को कुछ गर्मी की वजह से और कुछ पढ़ने की वजह से सिर में दर्द था पर अचानक एक क्षण ऐसा आया कि दर्द नहीं था, बिना दवा लिए इस तरह दर्द पहली बार ठीक हुआ है, वह तो इसे शुद्ध भगवद् कृपा ही मानती है ! ईश्वर हर क्षण उसके साथ है उसकी सहायता करता है. आज सुबह मन में एक भाव आया कि इस क्षण वह जीवित है, अपने घर में है, सुरक्षित है, स्वस्थ है, यह कितनी असीम कृपा है, वे नहीं जानते कौन सा क्षण उनके जीवन का अंतिम क्षण होगा, फिर उन्हें दुखी होने का क्या अधिकार है ऐसा करके क्या वे ईश्वर का अपमान नहीं कर रहे होते ! कल अज्ञेय की पुस्तक में एक सूत्र पढ़ा कि गद्य भाषा से लिखा जाता है और कविता शब्द से, कविता की मूल इकाई शब्द है ! इस पर अमल करते हुए शब्दों को क्रम में रखकर सोने से पूर्व एक कविता रची थी जो अब भी याद है, यदि वाक्य होते तो शायद भूल जाती.

यदि किसी के कार्य राग-द्वेष से प्रेरित होकर होंगे तो उद्वेग का कारण होंगे, लेकिन कार्य तो हरेक को करने ही होंगे. पूसी का बच्चा फिर नहीं बचा, उसने उसे बचाने के लिए कुछ भी नहीं किया, सफेद बालों वाला सुंदर जीव था, पूसी फिर एकाध दिन शोक मनाकर भूल जाएगी. पिछली बार जब ऐसा हुआ था उसने निर्णय लिया था अगली बार अवश्य उसे घर में रखेगी पर अपनी ही परेशानियों में उलझा रहने वाला मन दूसरों की पीड़ा कहाँ महसूस कर पाता है. अब जो दुःख उसे हो रहा है उससे बच गयी होती. आज दीदी का मेल दुबारा आया, उन्होंने अपना अकाउंट खोल लिया है, जून ने जवाब भी भेज दिया. अभी तक उसने स्वयं मेल भेजना सीखा नहीं है, सीखना ही होगा, कब तक इस कार्य के लिए जून और नन्हे पर निर्भर रहेगी. आज भी गर्मी बेहद है, जून का दूसरा दिन है, कल उन्होंने प्राणायाम सीखे. पीवी नरसिंहाराव की पुस्तक रोचक है, राजनीति का क्षेत्र विषमताओं से भरा होता है, जनता, पत्रकार, साथी कार्यकर्ता, रिश्तेदार, परिवार के लोग सभी अपना-अपना काम निकलवाना चाहते हैं. अभी दिन की शुरुआत है पर मन कैसा बुझा-बुझा सा लग रहा है. सुबह-सुबह पुसी का करुण रुदन सुना और बाद में उसके बच्चे का मृत घायल तन देखा, ऊपर से गर्मी का मौसम. मौसम का तो बस बहाना है, खैर, यह दुःख भी सदा रहने वाला नहीं है, सब बदलता रहता है, वक्त का पहिया घूमा करता है यूँही ! कल अमलतास पर कविता लिखने का प्रयास किया, इस वक्त भी कविता ही उसे आश्रय देगी पर उससे पूर्व ध्यान !

आज ‘गुरू पूर्णिमा’ है, गुरू का महत्व जीवन में सर्वोपरि है. उसके जीवन में भी गुरू की कमी झलकती है. साधना के पथ पर आगे जाते-जाते कब वह पीछे लौट आती है पता ही नहीं चलता, फिर स्वयं को उसी स्थान पाती है, श्रद्धा डोलती है, ध्यान सधता नहीं, मन पुनः-पुनः उन्हीं बातों की ओर लौटता है जो दुःख का नहीं तो द्वेष का कारण होती हैं. शुद्ध, मुक्त, पवित्र, असीम उच्च भावनाओं से युक्त मन ठहरता नहीं. आज उसने व्रत रखने का निश्चय किया है. आहार के साथ-साथ वाणी और मानसिक व्रत भी. जून ने कल ‘सुदर्शन क्रिया’ सीखी, उन्हें एक नया अनुभव हुआ, आज भी वे बहुत उत्साहित थे. कई वर्ष पूर्व उन्होंने ‘अन्तःप्राज्ञ’ कोर्स किया था तब भी ऐसे ही उत्साहित थे. प्राणायाम भी सिखाया है और ध्यान भी. आज शाम को इसी सिलसिले में क्लब में होने वाले कार्यक्रम में वह भी जा रही है. आज मौसम भी अनुकूल है. कल की भीषण गर्मी के बाद रात को वर्षा हुई. कल उसकी एक और कविता वापस आयी, इस क्षेत्र में भी उसे गुरू की जरूरत है, पर अब हरेक को अपना गुरू स्वयं ही बनना है. पहले भी वह स्वान्तः सुखाय ही लिखा करती थी अब भी वैसा ही करेगी अगर कभी ऐसा लगा कि बहुत अच्छा कुछ बन पड़ा है तभी भेजेगी. कल शाम को मेल भेजना सीखा, अभी प्रयोग शेष है. आज समय बहुत है जून दोपहर को घर नहीं आ रहे हैं. बाबा जी ने ह्रस्व, दीर्घ व प्लुत जाप का दस मिनट का नियम रात को सोने से पूर्व करने को कहा है. आज से करेगी. सुबह बिस्तर छोड़ने से पूर्व उनका बताया अभ्यास करने से बहुत लाभ हो रहा है. जीवन को सही मायनों में जीने के लिए गुरू का मार्ग दर्शन बेहद आवश्यक है !