Wednesday, June 27, 2012

पल-पल रंग बदलता मौसम


ग्यारह बजने को हैं, भोजन भी बन गया है और स्नान भी हो गया, कभी-कभी एक ही काम हो पाता है, दूसरा जून के आने के बाद और कभी एक भी नहीं, जब नन्हा पूरी सुबह जगता है. वैसे  पिछले दो-तीन दिनों से उसका उठने-सोने का समय कुछ-कुछ निश्चित होता जा रहा है. सो अब उतनी जल्दबजी नहीं होती. धीरे-धीरे वह बड़ा हो जायेगा. एक साल का फिर दो तीन वर्ष का, स्कूल जाने लगेगा फिर वह अकेली रह जायेगी, उन दोनों की प्रतीक्षा करते हुए. वह मुस्कुराई, अभी बहुत दिन हैं उस बात को, फ़िलहाल तो आज की बात करनी है. नन्हे की दायीं आँख से पानी आ रहा है, डॉक्टर को दिखाना होगा. उसे डिब्बे का दूध देना भी बंद कर दिया है, शायद अभी इसकी जरूरत ही नहीं थी. उसे घर की याद आयी, छोटी बहन के पत्र की प्रतीक्षा थी, पहली बार घर से बाहर गयी है अभ्यस्त होने में थोड़ा वक्त लगेगा. उसने अगस्त माह की सर्वोत्तम उठा ली, लगभग हर अंक में वैवाहिक जीवन पर एक न एक लेख होता है, जो बहुत व्यवहारिक होता है, सीधी-सादी भाषा में. जून आज बाइक से दफ्तर गया है थोड़ा जल्दी आ सकता है.

एक सप्ताह बीत गया, सब कुछ सामान्य चलता रहा. कल नन्हें के फोटो भी बन कर आ गए, कितना छोटा सा लगता है वह उनमें. जून अपनी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा है. उसे अवश्य ही सफलता मिलेगी. आजकल यहाँ छात्र संगठन के कारण तनाव है. वह तो दिन भर घर में ही रहती है. जून कहता है कि शाम पांच-छह बजे के बाद बाजार या क्लब जाना सुरक्षित नहीं है. मौसम आजकल रोज ही कितने रूप बदलता है, सर्दी, गर्मी, वर्षा तीनों एक ही दिन में.  


Thursday, June 21, 2012

अरबी की सब्जी


आज शिक्षक दिवस है. कभी वह भी पढ़ाती थी. पहले स्कूल में, फिर घर पर, और तब कॉलेज में. बचपन से ही वह शिक्षिका होना चाहती थी. वे बचपन में स्कूल-स्कूल खेला करते थे. सब भाई-बहन, जिसमें फुफेरे भाई–बहन भी शामिल होते थे और कुछ आस-पड़ोस के बच्चे. और आज वह इतनी बड़ी हो गयी है कि माँ बन गयी है, उसने सोते हुए शिशु की ओर देखा. तभी तो वह लिख पा रही है. सुबह भी वह सोया था जब जून ऑफिस गया. उसने स्नान किया, खाना बना कर रख दिया. तब जाकर वह उठा. उसके सारे काम करते, नहलाते-खिलाते दो घंटे कैसे बीत गए पता ही नहीं चला, और तब पुनः उसे नींद आने लगी, मालिश-स्नान व आहार पाकर वह अब सुख की नींद सोया है. अब वह स्नान के समय पहले की तरह रोता नहीं है उन्हें हँसते देखकर, कितना प्यारा हँसता है. कल दिन भर बहुत कम सोया, शाम से रात तक बहुत परेशान रहा, जून उसे रोता हुआ नहीं देख पता, घंटा-घंटा भर तक गोद में लेकर झुलाता है जब तक कि वह सो न जाये.

जून को दुबारा बाजार जाना पड़ा, सेब लाया था वह, पूरे चौदह रूपये किलो, पर खराब निकल गए, दुकानदार वापस लौटा तो लेगा. सुबह फिर वह देर से उठा, रात को नींद पूरी नहीं हो पाती, दिन भर भी वह आराम नहीं कर पाता. आज उसके एक सहकर्मी की माँ की मृत्यु हो गयी, वह आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं, उन्हें घर के लिये विदा करने वह उनके घर गया था.

आज नन्हा पूरे दो महीने का हो गया. अभी लिखने के लिए उसने कलम उठाया ही था कि वह जग गया पर जब तक चुपचाप लेटा है, तब तक वह दो चार लाइनें लिख ही पायेगी, उसने सोचा. बाहर मूसलाधार वर्षा हो रही है. अभी शाम है पर रात का आभास हो रहा है.
रात को उन दोनों ने मिलकर इस मौसम में पहली बार अरबी की सब्जी बनायी, नूना के हाथों में अरबी छीलने पर काटती है, इसलिए जून स्वयं ही काट कर देता है, बहुत ख्याल है उसे हर बात का.


नीरज की कविता



आज राजीव गाँधी का जन्मदिन है और हरचंद लोंगोवाल की पुण्य तिथि, दोनों पर समाचारों में सुना. कल रात इतनी जोर से बिजली कड़की लगा कि कमरे की छत टूट कर गिरने ही वाली है. शायद कहीं बादल फटा हो. माँ का पत्र आया है, बच्चे के बारे में कितनी सारी बातें पूछी हैं, सुबह से कितनी बार सोया और उठा है, अब कम से कम दो घंटे तो उसे सोना ही चाहिए. पढ़ा था कि बच्चे नींद में बढ़ते हैं.
कई दिनों तक कुछ नहीं लिखा, कभी व्यस्तता कभी मूड. आज कृष्ण जन्माष्टमी है. बचपन में वे कितने उत्साह से प्रतीक्षा करते थे. उस दिन झांकी सजाते थे, या शाम को झांकियां देखने जाया करते थे. सुबह वह गीता पाठ करती थी. कृष्ण के भजन तो कुछ दिन पूर्व से ही बजने आरम्भ हो जाते थे. और उस दिन तो कृष्ण भजन ही सुनाई देते थे सभी रेडियो स्टेशनों पर गानों की जगह. किन्तु अब तो सभी त्यौहार बस नाम के लिये हैं, रेडियो पर समाचारों से सुनकर पता चल जाता है आज यह त्योहार है, इतना ही बहुत है. उस दिन ‘नीरज’ की कविता सुनी, “युद्ध नहीं होगा”, बेहद सुंदर थी. और शोभा सिंह का इंटरव्यू भी कम नहीं था. दोनों घरों से पत्र आया है, छोटी बहन का मेडिकल में चुनाव हो गया है, बड़ी नन्द का विवाह तय हो गया है. दिसम्बर में होगा,, तिथि अभी तय नहीं हुई है. आज वे नन्हे को पहली बार प्रैम में घुमाने ले गए, शायद थक गया होगा सो शाम के वक्त भी सो रहा है. 

Wednesday, June 20, 2012

कामवाली का इंतजार


आज लग रहा है जो भी बदलाव था वह ऊपर ही ऊपर था, दरअसल लोग जब खुद उदास होते हैं तो आस-पास के वातावरण पर भी उसकी झलक पड़ने लगती है. वे वही देखते हैं जो उनका मन दिखाता है, आज उसका मन कितना हल्का है. वे पहले की तरह ही अनुभव कर रहे हैं. यही जीवन है. वह अक्सर सुबह न स्नान कर पाती थी न समय पर नाश्ता ही. जून की परीक्षा भी नजदीक आ रही है, वह रात को देर तक पढ़ता है पर ध्यान उसका उन दोनों की ओर ही रहता है. नन्हें के सब काम करना चाहता है.
शिशु की नींद गहरी थी, उसे मालिश करके बाँधकर सुलाने से आराम से सोता रहता है. सो दोपहर को उसने कई पत्र लिखे राखी भेजने के लिये सभी भाइयों को. घर से इस हफ्ते का पत्र अभी तक नहीं आया है, शायद सोमवार को आये, उसने सोचा. इसी महीने जून का जन्मदिन है और स्वतंत्रता दिवस भी, वे दोनों दिन बड़े जोश से मनाते हैं.
नन्हा बड़ा हो रहा है, खूब हँसता है, और रोता भी तो बहुत है. कल रात शायद कोई स्वप्न देखकर डर गया, पहले बहुत रोया फिर दुबक कर सो गया. उसके नए कपड़े सिलकर आ गए हैं, बहुत जंचता है वह उन वस्त्रों में. आज काम वाली अभी तक नहीं आयी है, कुनमुना कर, हिलडुल कर वह पुनः सो गया है, अभी उसे नहीं उठना चाहिए, महरी को अब आ ही जाना चाहिए, या वह आज नहीं आयेगी? उसने अलसाते हुए किचन की ओर देखा.



Tuesday, June 19, 2012

विवाह का एल्बम


अगस्त माह का पहला सोमवार ! सुबह पांच बजे ही कमरा कितना रोशन हो गया है, चमचमाती धूप से. आज तीज है, मेहँदी और झूला याद आ रहा है, इस समय बाप-बेटा दोनों सो रहे हैं, वह पिछले दिनों नियमित नहीं लिख पायी, जून से कहा पर उसकी अपनी विवशता है, वह हर काम में नूना की सहायता करना चाहता हैं, उसकी सुविधा, उसके आराम का उसे हर क्षण ध्यान रहता है और इन्हीं सब कामों में वह थक जाता है. रात को दोनों को ही नन्हें के कारण कई बार जागना पड़ता है, दिन में कभी-कभी मन व शरीर दोनों थकान से बोझिल लगते हैं, बस चुपचाप सो जाने का मन होता है. कितना बड़ा हो गया है वह, उसे पहचानने लगा है अच्छी तरह से. उसकी आवाज भी वह पहचानने लगा है. रो रहा हो तो कुछ कहते ही चुप हो जाता है. सुबह उसकी मालिश करके जब स्पंज करती है तो दूध पीते-पीते ही वह सो जाता है.
आज सुबह जून की नींद देर से खुली, कहने लगा आज देर हो गयी है आधी छुट्टी ले लेते हैं, रात्रि जागरण का असर उसकी आँखों में साफ दिखाई दे रहा था. उसने कोई जवाब नहीं दिया, जैसे उसे इस बात से कोई सरोकार नहीं था, पर बाद में उसी के कहने पर वह जल्दी-जल्दी तैयार होकर ऑफिस गया. कल शाम को वह पहली बार क्लब गया था नन्हे के जन्म के बाद. लौटकर चुप-चुप ही रहा, उसे समझ नहीं आया, क्या यह नन्हें के कारण है, शायद यह स्वाभाविक ही है, सब कुछ बदल रहा है. कल उन्होंने अपने विवाह का एल्बम देखा, लगा ही नहीं कि यह उनका अतीत है, लगा जैसे किसी और का एल्बम देख रहे हैं. कितने सजे संवरे लग रहे थे उसमें और अब दिन भर कितना असत-व्यस्त सा रहता है सब कुछ. 

Sunday, June 17, 2012

हँसता शिशु


सुबह के साढ़े सात बजे हैं, नन्हे को अभी कुछ देर पूर्व ही सुलाया था पर दादी ने उसे उठा दिया है. बस अब दो ही दिन तो रह गए हैं उन्हें वापस जाने में, चाहते हैं कि वह अधिक से अधिक जगता रहे.  रात से ही वर्षा हो रही है. कल रात सोने से पूर्व उसने जून से कहा था कि रात को वह न जगा करे, शिशु के उठने पर वह खुद ही सम्भाल लेगी, उसकी नींद पूरी नहीं हो पाती, वह तो दिन में किसी भी समय सो जाती है. कल बड़ी बुआ का एक अच्छा सा पत्र मिला. यह पेन जिससे वह लिख रही है जून ने उसे उपहार में दिया था उनके विवाह के अवसर पर, कुछ दिन खराब रहकर यह पुनः लिखने लगा है अपने आप.
कल सुबह से ही उसकी मनःस्थिति ठीक नहीं थी जिसका असर शायद अब तक है, अक्तूबर से ही उन्होंने पैसे इकठ्ठे करने आरम्भ किये थे, वह चाहती थी कि उसके खुद के नाम से एक पासबुक हो, माना कि वह अभी तक सब आवश्यक वस्तुएं ले आया है पर उसे स्वयं के आत्मनिर्भर न होने का दंश तो चुभ ही रहा है. पिछले कई महीनों से वह जून को नए कपड़े लेने के लिये कह रही है पर वह उसे टाल जाता है. उसे आश्चर्य भी होता है कि धन के बारे में उसके विचार ऐसे थे उसे खुद भी पता नहीं था.
सब लोग चले गए हैं, घर पर वे तीनों रह गए हैं. नन्हें को ठंड लग गयी लगती है, उसके गले से खर-खर आवाज आ रही थी, और उसके पेट से भी आवाज आ रही थी, छोटा सा तो है वह और इतनी सारी मुसीबतें. हँसता है तो बहुत प्यारा लगता है. अगस्त के दूसरे हफ्ते में जून के इम्तहान  हैं, ऑफिस से आकर उसका ज्यादातर समय बच्चे के साथ ही बीतता है. आज से उसे पढ़ाई में ज्यादा समय देना है, वह तो सम्भाल ही सकती है उनके बेटे को.

  

Friday, June 15, 2012

जन्मदिन का गीत


सुबह के सात बजे हैं. लगभग दो हफ्ते बाद वह डायरी लिख रही है. सुबह नन्हे का एक काम याद आ गया था. जून उसके लिये कमीजों का कपड़ा लाया था जब वह अस्पताल में थी. उसने आज कटिंग कर दी है बड़ी ननद सिलाई कर देगी. अभी कुछ देर पूर्व ही उसे दूध पिलाकर सुलाया था पर लगता है उठ गया है, कपड़े बदल दिये हैं, कुनमुना कर फिर सो गया. आज पहली बार वर्षा हो रही है, जब से वह दुबारा अस्पताल से आयी है. घर आने के बाद उसे बेबी जौंडिस हो गया था पुनः चार दिनों के लिये अस्पताल में रहना पड़ा. कल उन्होंने पहली बार उसकी फोटो उतारीं.
सुबह पांच बजे ही वह उठ गया था, उसके पापा भी साथ ही उठ जाते हैं, दोनों दोबारा सो गए और कितना उठाने पर भी नहीं उठ रहे थे, फिर जल्दी-जल्दी बिना नहाये-धोए चले गए हैं. मौसम सुहाना है, बादल हैं छितराए हुए, वर्षा समेटे बादल. छोटी बहन का जन्म दिन है उसे बधाई कार्ड भेजना है,कुछ पंक्तिया उसके मन में आ रही हैं-
बचपन की बीती सुधियाँ
याद दिलाने, कुछ बतलाने  
पुनः आया जन्मदिवस तुम्हारा
समेटे हुए कुछ नूतन स्वप्न
और छुपाये कई सौगातें !
तुम थीं कल नन्हीं सी गुड़िया
आज खड़ी हो जीवन पथ पर
विश्वास दिलाने, नई राह दिखाने
फिर आया शुभदिन
स्नेह सहित लो दुआ हमारी.....