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Friday, July 24, 2026

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

आज शाम को वे एक मित्र दंपत्ति के घर गये, अमेरिका से आयी उनकी बहन से मिलने, जिसका ज़िक्र उन्होंने कुछ दिन पहले किया था। नौ वर्ष पहले वह दिल्ली में रहती थीं, उनके पति व वह स्वयं सरकारी नौकरी में उच्च पदों पर कार्यरत थे। कुछ समय हैदराबाद में भी रह चुकी हैं। जब उनके पति नहीं रहे, तब बड़ी पुत्री उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गई। इस बार कई वर्षों के बाद भारत आयी हैं, जयपुर, दिल्ली, बैंगलुरु और मुंबई घूमते हुए वापस जायेंगी। तमिल भाषी होते हुए भी हिन्दी अच्छी बोल लेती हैं, कन्नड़ भाषा भी जानती हैं।  

नूना और जून की पंचकर्म की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। अगले दो हफ़्ते चाय-काफ़ी नहीं लेनी है। हल्का भोजन लेना है। उदर हल्का रहे तो मन भी हल्का रहता है। सुबह वे सूर्योदय की तस्वीर लेने सोसाइटी के गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ़ गये पर बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। वापस आकर साधना करते समय देवदत्त पटनायक की आवाज़ में उनकी पुस्तक ‘मेरी गीता’ का कुछ अंश सुना। न जाने कितने कितने अनुवाद और व्याख्याएँ हुई हैं आज तक भगवद् गीता की, कृष्ण ने तो अर्जुन को एक ही बात कही होगी, पर हर लेखक अपने अनुवाद को वास्तविक बताता है, इसी लिए कहा गया है, “हरि अनंत हरि कथा अनंता”। जून आजकल मुग़ल बादशाह अकबर की कहानी पर बना एक टीवी शो देख रहे हैं। नवनीत का जून अंक पर्यावरण पर आधारित है, जिसके बार में जितनी जानकारी लोगों को दी जाये कम है। कर्नाटक जैसे विकसित राज्य में, बैंगलोर जैसे जागरूक शहर में, सड़कों पर अभी भी  कूड़े के ढेर दिखायी पड़ते हैं।ट्रैफ़िक का जो हाल है, वह तो जगत प्रसिद्ध है, हर दिन सैकड़ों नये वाहन आ जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। झीलें सूखती जा रही हैं, उन्हें साफ़-सफ़ाई की भी ज़रूरत है और वर्षा के जल को रोककर रखने के उपायों की भी। एओएल का एक अनुवाद कार्य भी उसने किया, जो पूरे दिन को एक पावन भाव से भर देता है। 

पंचकर्म में आयुर्वेदिक दवा लेते हुए आज दूसरा दिन है। सिर के पिछले हिस्से व दाहिनी आँख में हल्का दर्द है। शरीर के भीतर जो भी फेर-बदल हो रहे हैं, उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप यह स्वाभाविक है। अवश्य ही उनका वजन भी कुछ कम होगा। नूना ने अमेरिका से आयी नयी परिचिता के लिए एक कविता लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। घुटने के दर्द के लिए व्यायाम पर बनाया जून का वीडियो भी उन्होंने देखा, जिसका लिंक उसने भेजा था। हो सकता है, घुटने के दर्द में उन्हें आराम मिले। शरीर में भारीपन होने से अर्थात वजन बढ़ जाने से उनका दर्द अधिक बढ़ गया है। आज ऑडिबल पर एक नई पुस्तक सुनना आरंभ की। नवनीत में एक-दो अच्छी कहानियाँ पढ़ीं। दीदी के जन्मदिन पर एक कविता उन्हें भेजी। 

आज सुबह नैनी को नहीं आना था, सो वे आराम से उठे। छह बजे टहलते हुए सुबह के समाचार सुने। उड़ीसा में हुई भयंकर रेल दुर्घटना के बारे में सुना, पर इसकी भीषणता का पता तब चला, जब शाम को छह बजे टीवी पर समाचारों में ह्रदय विदारक दृश्य देखे। बालासोर ज़िले में तिहरे रेल हादसे में लगभग तीन सौ लोग मारे गये सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। कोरोमंडल एक्सप्रेस, ग़लत सिग्नल के कारण मुख्य लाइन की बजे लूप लाइन में चली गई, जहाँ एक मालगाड़ी खड़ी थी, टक्कर के कारण उसके कई डिब्बे पटरी से उतर गये और साथ वाले ट्रैक पर आ रही बैंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गये। किसी की छोटी सी भूल की कितनी बड़ी सजा सैकड़ों परिवारों को भुगतनी पड़ी है। उसकी आँखें अभी भी पूर्ववत् नहीं हुई हैं, कुछ और समय लगेगा। इस समय बायीं आँख में हल्की सी जलन है, दायीं आँख में हल्का भारीपन आज भी था, जून ने डाक्टर को दिखाने की बात कही। उसने अगले एक महीने के लिए, डालने वाली दवा दे दी है। अब ईश्वर का ही आश्रय है, जो भी होगा अच्छा ही होगा। 

आज नन्हा और सोनू आये थे। सब मिलकर लंबी ड्राइव पर गये। उन्हें नया बन रहा ले आउट ‘विशुद्ध प्रकृति’ भी दिखाया। नन्हे ने ड्रोन उड़ाया। फ़ार्म हाउस, हरे-भरे मैदानों और झील के सुंदर चित्र भी लिए, कई वीडियो भी बनाये।आज ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा है, चंद्र दर्शन के बाद जून ने तस्वीरें उतारीं। 

आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है। असम से एक सखी ने बच्चों की योग कक्षा की तस्वीरें माँगी हैं। उस समय हर वर्ष वे लोग बच्चों के साथ पौधे लगाते थे व आसपास सफ़ाई का काम करते थे। दोपहर को पर्यावरण दिवस पर एक पोस्ट लिखी। कुछ देर पहले आयुर्वेदिक अस्पताल की डाक्टर से बात हुई। कल सुबह वहाँ जाना है, स्नेह पान करना होगा। विरेचन  का अगला भाग कल से शुरू हो रहा है।  

आज सुबह ख़ालीपेट वे ‘स्नेहपान’ के लिए अस्पताल गये थे।पहले औषधि युक्त तीस मिली घी पिलाया गया फिर थोड़ा सा गरम पानी भी।जून ने दस बजे ढेर सारे पानी में उबाल कर थोड़े से चावल खाये, उसे दोपहर साढ़े बारह बजे तक जरा भी भूख नहीं लग रही थी। आज एसी नहीं चलाना है, शरीर को गर्म रखना है। अभी दो दिन यही दिनचर्या रहेगी। उसके बाद दो दिन  अस्पताल में रहना होगा।ईश्वर ही इस प्रक्रिया से (शरीर शुद्धि के साथ मन भी जुड़ा है) बाहर ले जाएँगे। सुबह उठी तो ध्यान स्वतः ही होने लगा था, ब्रह्म मुहूर्त में कितनी शांति होती है, वह पवित्र समय है, देवताओं के जागने का समय ! आज शरत चन्द्र की कहानियों पर बनी दो फ़िल्में देखीं, ‘अनुराधा’ व ‘विराज बहू’। पुरानी फ़िल्में कितनी सारगर्भित होती थीं, भावपूर्ण और संगीतमय भी। 

आज सुबह भी वे स्नेहपान के लिए गये थे। आज पचहत्तर मिली घी पिलाया गया। दोपहर के दो बजे तक भूख का नाम नहीं था। आज दिन में एक अच्छी पुरानी फ़िल्म देखी, ‘सरस्वती चन्द्र’। शाम को कुछ देर टहलने भी गये।पापाजी से बात की, उन्हें नवनीत के लेख बहुत अच्छे लग रहे हैं। उसके  लेखन कार्य में एक विराम लग गया है, पहले आँख के कारण अब पंच कर्म के कारण। लेकिन शरीर्व की शुद्धि के लिए यह आवश्यक है। वे भोजन पर कितने अधिक आश्रित हो गये थे। ऐसे भोजन पर भी जो उनके लिए हानिप्रद था। पिछले एक हफ़्ते से चाय के बिना जरा भी दिक्क्त नहीं हो रही है। उसे पूरी उम्मीद है इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर उनका स्वास्थ्य पहले से कहीं अधिक अच्छा होगा। 

आज स्नेहपान का तीसरा दिन है। सुबह साढ़े छह बजे ही वे अस्पताल पहुँच गये थे। नब्बे मिली घी उसे व जून को सौ मिली घी पीना था। वापसी में गुलमोहर के वृक्षों के चित्र खींचे। शाम के चार बजे तक मुँह में घी का स्वाद बना हुआ था। भोजन के बार में सोचने का भी मन नहीं था। शाम को उबली हुई खिचड़ी खायी, जिसे पतीले में बनाना था, कुकर में नहीं। शाम को उनके मित्र दंपत्ति मिलने आये थे, अक्तूबर में होने वाली उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में बात करने।उन्होंने कुछ वीडियोज़ देखे और टूर ऑपरेटर से बात की। नन्हे का फ़ोन भी आया। वह घर जा रहा था, रास्ते में ट्रैफ़िक के कारण एक जगह रुका हुआ था।


Monday, July 20, 2026

पंचकर्म का अभ्यास

पंचकर्म का अभ्यास

शाम को हुई वर्षा के कारण मौसम अति सुहावना हो गया है।आज नूना ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की एक पाकिस्तानी शिक्षिका का इंटरव्यू मोबाइल पर सुन रही है, जो पहले बांग्लादेश में एक चाय बाग़ान में भी रह चुकी हैं। वह कह रही हैं, किन्हीं हज़रत रहमतकार की परंपरा में वह सातवीं पीढ़ी की हैं। जब गुरुजी २००४ में पाकिस्तान गये थे, उन्हीं के यहाँ ठहरे थे। वह बहुत उत्साह से बेसिक कोर्स के बारे में बता रही हैं। सुदर्शन क्रिया से उन्हें जो लाभ हुआ, वह उसे लोगों में बाँटना चाहती हैं। क्रिया से मन की उलझनें समाप्त हो जाती है, अंतर्ज्ञान बढ़ जाता है। कोई चीज़ कठिन नहीं लगती। उनके अनुसार, हरेक को जीवन में कोई न कोई मक़सद चाहिए। जिसका मक़सद जितना बड़ा होगा, रुकावटें भी उतनी आयेंगी, पर कायनात ऐसे लोगों की मदद करती है।वह कहती हैं, दिन में एक समय ऐसा होना चाहिए जब आपकी ऊर्जा चरम पर हो। वह स्वयं दोपहर एक बजे तक बहुत काम करती हैं। उसके बाद साधना में लग जाती हैं। उन्होंने लाहौर में कोर्स भी कराये हैं, जिनमें अनेक लोग शामिल होते हैं। वह बहुत शिद्दत से यह काम कर रही हैं।उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है।उनके अनुसार, गुरुजी जीवन के शिक्षक हैं, वह पहले इंसान हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य और तनाव में कोई संबंध बताया है। तनाव से ही सारी बीमारियाँ होती हैं। गुरुजी के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा है। यह सब सुनकर नूना को आश्चर्य मिश्रित हर्ष हुआ, संभवत: समाज में आज योग के प्रति पहले का सा विरोध नहीं रह गया है। कई मुस्लिम देशों के प्रतिभागी आश्रम में भी आते हैं। वैसे देखा जाये तो योग एक चिकित्सा प्रणाली है, जो देह और मन दोनों की चिकित्सा करती है। 

आज सुबह उन्होंने निर्धारित समय तक प्रातः भ्रमण किया, योग अभ्यास का भी शुभारंभ हो चुका है। लेखन कार्य भी आरंभ हुआ है, पर अभी भी आँखों को प्रकाश थोड़ा सा प्रभावित करता है। एक सप्ताह और शेष है, जब दवा पूरी तरह से बंद हो जाएगी। आज एक फ़िल्म देखी, ‘एक ही बंदा काफ़ी है’। जिसमें अंततः सत्य की जीत होती है।पापाजी से भी बात हुई, उन्होंने फ़ेसबुक पर पढ़ी उसकी कविता से आनंद मिलने का ज़िक्र किया। शब्दों के माध्यम से ही यदि किसी के ह्रदय में आनंद या उत्साह का लेशमात्र भी पहुँचता है तो लेखन कार्य सार्थक है और इस अर्थ में जीवन भी अर्थवान है। 

आज उसने ‘वैष्णो देवी’ की कथा आगे सुनी। त्रिकूट पर्वत वासिनी माँ की कथा बहुत ही मनोरम है। वह अपना नाम त्रिकुटा बताकर गाँव में जाती हैं। भारती नामकी कन्या को उनमें देवी के दर्शन होते हैं। दैवीय गुणों से युक्त बालक हो या बालिका, युवा हो या वृद्ध सभी के भीतर एक ही तरह के गुण होते हैं। वे प्रसन्नचित्त, धैर्यवान और सबका मंगल चाहने वाले होते हैं। वे साहसी होते हैं और सत्यवान भी। इस कथा में देवताओं का राजा असुरों का अंत भी चाहता है और उनके साथ भी मिला हुआ है। वह उनके द्वारा वैष्णवी देवी को हराना चाहता है ताकि शिव प्रलयंकारी हों और अंततः असुरों का नाश हो। वह मात्र अपना सर्वस्व बचाना चाहता है। वे सब भी तो केवल अपने ही बारे में सोचते हैं। 

आज शाम को वे आश्रम गये थे। कल आने वाले मेहमानों के लिए उपहार ख़रीदे।इस वर्ष ओबीए की मीटिंग सितंबर महीने में कोयम्बटूर में होगी। उसकी तैयारी के संबंध में कमेटी की मीटिंग कल उनके घर पर होने वाली है। आज असमिया पड़ोसी के पोते का जन्मदिन है। वे शाम को गये थे। गैराज में चाट का स्टाल लगा था। केक और चाट खिलाकर उन्होंने स्वागत किया।  

आज दिन भर मौसम अच्छा रहा।दोपहर के विशेष भोज की पूरी ज़िम्मेदारी नन्हे ने ली, उसने स्वादिष्ट पराँठे बनाये। उसने चावल रखने का एक सुंदर डिब्बा भी मँगवाया है। शाम को वे मेहमानों को लेकर आश्रम गये, उन्हें पंचकर्मा केंद्र भी दिखाया। कल नूना का जन्मदिन है। बच्चों ने कहा है, वे सुबह ही आ जाएँगे। कुछ देर देवदत्त पटनायक की ‘मेरी गीता’ सुनी। वह बहुत गहराई से चीजों का विश्लेषण करते हैं। ब्लॉग पर नयी कविता पोस्ट की।  

आज पूरा दिन अच्छी तरह बीता। सुबह बच्चों व जून के साथ केक व नाश्ते का आनंद लिया। मिठाई-फल आदि कुछ सामान लेकर वे शांति धाम गये, जहाँ वृद्धजनों के साथ कुछ समय बिताया।दोपहर को वैष्णवी के साथ ध्यान साधना का। कथा में लक्ष्मी नारायण से विलग हो जाती हैं, जब छह रिपुओं में से एक ‘लोभ’ का प्रकोप हो जाता है। सरल शब्दों में ध्यान की व्याख्या भी की गई थी। माँ काली ने कर्म के महत्व के बारे में भी बताया, धर्मयुद्ध के लिए हरेक को सदा तत्पर रहना चाहिए। षट् रिपुओं का नाश करना है न कि उस आत्मा से कोई द्वेष रखना है, जिसके भीतर ये अवगुण हैं। शाम को वे आश्रम गये थे,  सत्संग में भाग लिया, गुरुजी का सुंदर प्रवचन सुना।असम में जिन महिलाओं व बच्चों को वह योग सिखाती थी। उनमें से एक ने उसके लिए बच्चों द्वारा गाया गया बधाई संदेश भेजा है। उसने भी एक संदेश उन्हें लिखकर भेजा जिसमें गुरुजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी थी, और उस सखी के लिए भी, जो सदा उसके साथ इस काम में सहयोग करती रही थी।  

मौसम आजकल अधिक गर्म नहीं है। दोपहर बाद लॉन में नीचे घास पर बैठकर नवनीत पत्रिका पढ़ी।पौधों को पानी दिया, बेगोनिया का दूसरा गमला भी शिकायत कर रहा है कि उसे धूप की कमी महसूस हो रही है। कल उसे ऊपर छत पर ले आयेंगे। कल से उनका पंचकर्म का विरेचन अभ्यास आरम्भ हो रहा है। जो दस-ग्यारह दिन चलेगा। उम्मीद है, वे इसे भली-प्रकार पूर्ण कर पायेंगे। जन्मदिन पर बच्चों ने उसे नई स्मार्ट घड़ी दी है, जो कई तरह से फिट रहने को प्रेरित करती है। आज भी कई पुरानी परिचितों के बधाई संदेश मिले, जन्मदिन का सर्वोत्तम लाभ यह है कि सबका हाल मिल जाता है। एक पुरानी सखी का फ़ोन भी आया, बहुत दिनों बाद दिल से दिल की  कुछ बातें हुईं।