Thursday, April 9, 2020

चिड़िया की कूजन


दोपहर के ढाई बजे हैं, कुछ ही देर में दोपहर की योग कक्षा के लिए महिलाएं आएँगी. कुछ देर पहले दो ब्लॉग्स पर लिखा. कमरे में एसी चल रहा है पर उसकी आवाज को भी चीरते हुए बाहर से चिड़िया की मधुर चहकार आ रही है, भले ही तेज धूप हो पर इसके बावजूद पंछी दोपहर भर  कूजते हैं, विश्राम वे रात को ही करते हैं सूर्यास्त के बाद. कल शिक्षक दिवस सोल्लास मनाया, सुबह मृणाल ज्योति में, दोपहर को बाहर बरामदे में बच्चों के साथ और शाम को गायत्री समूह की योग साधिकाओं के साथ ! गुरूजी के प्रेम का जादू उन पर भी चलने लगा है, कल वे बहुत सुंदर दीपदान लायीं पूजा कक्ष के लिए, साथ ही ढेर सारी खाने की वस्तुएं, उनका उत्साह देखते ही बनता था. एक ने कबीर के दोहे गाए, दूसरी ने अपनी रची दो पंक्तियाँ और एक अन्य ने सुंदर बंगाली भजन गाया।  मन होता है उनके लिए एक कविता लिखे. दोपहर को भी बच्चों ने सुंदर सजावट की. समोसे, केक व कोल्डड्रिंक्स का इंतजाम किया, उन्होंने आपस में पैसे जमाकर के ये सामान खरीदा. उनका भी उत्साह बहुत था. स्कुल में सभी टीचर्स को उपहार अवश्य ही पसन्द आये होंगे. कल जाने पर फीडबैक मिलेगा. जीवन एक उत्सव है , यह गुरूजी का वाक्य सत्य सिद्ध हो रहा है. दोपहर बाद उसने लिखा 

दिलों में प्रेम और उत्साह भरे
चमकते हुए ख़ुशी से आपके चेहरे
चुपके-चुपके से उत्सव का आयोजन
मानो लौट आया हो फिर से बचपन

दीप स्तम्भ सजा थाल में
 भरा मिष्ठान और फूलों-फलों से
चहकते पंछियों से सुमधुर गान
याद आएंगे जब तक हैं प्राण

गुरु का ज्ञान जब फलता है
तभी जीवन में ऐसा फूल खिलता है
मिलन घटता है पावन आत्माओं का
जीवन एक सुवास बन झरता है

वैसे तो कभी न आएगा अब
पतझड़ दिल के मौसम में
यदि कभी भूले से आ भी जाये
तो इस शाम का वसन्त भर देगा उसे
जीवन पथ को प्रकाशित कर देगा
फूलों, दीपों और मिठास से

बनी रहे इसी तरह मुखड़े पर मुस्कान हर पल
भरी रहे जीवन सरिता छल छल
कोई आस न रहे अधूरी, हर साध हो पूरी
क्योंकि खुद को जानकर मिल जाती है
श्रद्धा और सबूरी !

सुबह के पौने आठ बजे हैं, ड्राइवर अभी आने वाला होगा, फिर कार निकालेगी, वैसे अकेले भी जा सकती है पर घर में सफाई का काम चल रहा है. पोहे का नाश्ता किया और केला, जून ने कहा केला खाने से वजन बढ़ता है. वह बंगलूरू में अपना मेडिकल चेकअप कराके आये हैं, उनका वजन ज्यादा है. उन्होंने टहलने का वक्त भी बढ़ा दिया है और लंबा रास्ता लिया है पहले से. वापस आकर भी देह में स्फूर्ति नहीं लग रही थी, तमस का अनुभव हुआ पर प्राणायाम से फर्क पड़ा. कल रात को नींद ठीक से नहीं आयी, जून को एओल के कोर्स में जाने के लिए दुबारा कहा तो वह नाराज हो गए और उनकी नकारात्मक ऊर्जा शायद उसे विचलित कर रही हो, सूक्ष्म स्तर पर ऐसा हो सकता है. कुछ वर्ष पूर्व किसी आवाज ने भीतर से बार -बार कहा था, दूसरे कमरे में सोने जाओ पर वह भीरु आजतक हिम्मत नहीं जुटा पायी, जून क्या सोचेंगे, उन्हें बुरा लगेगा. इसलिए विवाह को बन्धन कहा गया है, एक-दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखना होगा. आँखों में नींद का सा अनुभव हो रहा है अब बाहर जाना चाहिए. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति की एक परिचारिका को देखने अस्पताल जा रही थी, एक अध्यापिका से पता चला वह दो दिन पूर्व ही रिलीज हो गयी है. सो पब्लिक लाइब्रेरी चली गयी, एक किताब ली, लाइब्रेरियन ने बताया, माह के अंत में बच्चों की कहानी प्रतियोगिता है, जिसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे. उसे हिंदी में निर्णायक के रूप में सहायता करनी है. कल मृणाल ज्योति में मीटिंग है, विधान परिषद के एक सदस्य ने पांच लाख की सहायता का वचन दिया है जिससे स्कूल में एक स्टेज बनेगा, जहां भविष्य में कई कार्यक्रम हो सकते हैं. 

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