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Thursday, December 28, 2023

टाटा टी सेंटर

अभी-अभी उसने कुछ नये पौधों को पानी पिलाया है। मॉर्निंग ग्लोरी की पौध बहुत अच्छी तरह बढ़ रही है। इसे रोज़ पानी देना होता है। डहेलिया व पिटुनिया के जो पौधे धूप की तरफ़ हैं, वहाँ भी पानी दिया। नन्हे ने कुछ और गमले भेजे हैं, जून शिकायत कर रहे थे कि इतने सारे पौधों को पानी देते-देते वह पहले ही थक जाते हैं। आज पंचायत के दफ़्तर गये थे, वहाँ हिन्दी या अंग्रेज़ी समझने वाला कोई नहीं था, स्थानीय भाषा न जानने पर भी वह परेशान हो रहे थे।  कहने लगे, अपने प्रदेश में रहना कितना अच्छा होता। बाद में वे दोनों धूप में टहलने गये, जिसका रेशमी स्पर्श भीतर तक सहला रहा था, शाम तक वह सामान्य हो गये थे। इंसान का दिल बहुत नाज़ुक होता है, दुनिया की सबसे नाज़ुक वस्तु ! आज सुबह वे सोसाइटी के एक घर से सूखे मेवे ख़रीद कर लाये।उन्हें आश्चर्य हुआ, महिला की तराज़ू ठीक से काम नहीं कर रही थी, बस अंदाज़ से ही उन्होंने सामान तोल दिया था । 


रात्रि के नौ बजे हैं। बायीं तरफ़ के पड़ोस के घर से आवाज़ें आ रही हैं। उनके यहाँ रात का ख़ाना बनना इस समय शुरू होता है। एक दिन देर रात को उसकी नींद खुली, शायद ग्यारह बजे होंगे, सड़क पर कुछ लोग टहलते हुए ज़ोर-ज़ोर से बातें करते जा रहे थे। वह मन ही मन मुस्कुरायी, शायद निशाचर इन्हें ही कहते हैं।आज सुबह वे टहलने गये थे तो रास्ते में जीवन के लक्ष्यों के बारे में बात चल पड़ी । जून ने कहा, वह बिना किसी अधिक परेशानी के सहज जीवन जीना चाहते हैं और आरामदेह मृत्यु भी। यानी जीवन की अंतिम श्वास तक स्वस्थ रहना चाहते हैं। उनके शब्द  थे, जैसे कि चाय पीते-पीते लुढ़क गये !  उसे हँसी आयी, अर्थात आख़िर तक भी चाय नहीं छूटने वाली  ! उसने कहा, वह भी ऐसा ही चाहती है, पर इसके लिए कुछ करना तो पड़ेगा। नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, सात्विक भोजन, अच्छी पुस्तकें पढ़ना, सेवा को भी स्थान देना होगा। वापस आते-आते सकारात्मकता से मन भर गया था। पौधों की निराई की, स्वाध्याय किया, दिन भर उत्साह बना रहा। आर्ट ऑफ़ लिविंग का अनुवाद कार्य किया, संयोजक ने कहा, एक दिन सभी अनुवादकों की भेंट गुरुजी से करवाने का प्रबंध वह कर रहा है।  


आज क्रिसमस का त्योहार है। उसने नापा के सेल्स ऑफिस में क्रिसमस की सजावट के चित्र उतारे। उनकी लेन में एक घर के सामने टॉय शॉप का पुतला लगा है, जहां बच्चे खिलौने ख़रीद सकते हैं। शहर में उनकी एक से अधिक दुकानें हैं।व्हाट्स एप और फ़ेसबुक पर अनेक संदेशों का आदान-प्रदान किया। नन्हे ने बताया, वे लोग टाटा टी सेंटर में चाय पीने गये, सोनू ने केक बनाये थे, जो वह अनाथ बच्चों के एक आश्रम में उनके लिए ले गई। यू ट्यूब पर ईसामसीह के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म देखी, कितने दुख उन्हें दिये गये, उन्होंने सब स्वीकार किया। अद्भुत है उनकी जीवनगाथा, सुंदर हैं उनकी कहानियाँ, जो अपनी बात समझाने के लिए वे लोगों को सुनाते थे !  


आज का दिन विशेष रहा। शनिवार को वैसे भी साप्ताहिक सफ़ाई का दिन होता है, और साप्ताहिक विशेष स्नान का भी। ग्यारह बज गये थे जब सारे काम ख़त्म होने के बाद वह तैयार होकर सीढ़ियों से नीचे उतरी। अचानक देखा, सोनू के माता-पिता बैठे थे, नन्हा और वह किचन में चाय बना रहे थे। उसे आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी हुई, कोरोना के बाद पहली बार किसी मेहमान के आने की ख़ुशी। सब ने मिलकर लंच में पुलाव, सब्ज़ी और रायता बनाया, डिनर में पास्ता, सूप व सलाद। 


आज इतवार का दिन भी सबके साथ बिताया। पंचायत के चुनाव की वजह से नैनी सुबह जल्दी आ गयी, उसे वोट देने जाना था। प्रातः भ्रमण के लिए जब वह निकली तब कोहरा छाया था। वातावरण बहुत मोहक लग रहा था। वापस आकर जून के साथ मिलकर दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया। दस बजे तक  नन्हा सभी को लेकर आया, साथ में माली भी था। दोपहर तक नये गमले तैयार करके पौधे लगाये। वह गया तो सभी ने मिलकर भोजन बनाया। कुछ बोर्ड गेम्स भी खेले, शाम को टहलने गये, और दिन कैसे बीत गया, इसका भान ही नहीं हुआ।


Wednesday, April 28, 2021

ऐनी विद एन इ

 रात्रि के नौ बजकर पांच मिनट हुए हैं. अभी-अभी जून ने दो किताबों का आर्डर दिया है, नए वर्ष के लिए सुंदर उपहार ! कल छोटा भाई यहां आ रहा है, उसने सोचा, शाम को वे उसे आम व अंगूर के बगीचे में ले जायेंगे, हो सका तो गाँव के खेत में भी. आज दोपहर बारह बजे वे असमिया सखी के यहां से लौटे, पूरे चौबीस घण्टे बाद. उन्होंने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, कल दिन में तथा रात्रि का भोजन व आज सुबह का नाश्ता प्रेम से खिलाया. तस्वीरें खींची, चाइनीस चेकर खेला , पुराने दिनों की बातें कीं, उन दिनों की तस्वीरें देखीं. आज मृणाल ज्योति से एक अध्यापिका का फोन आया, पूछ रही थी वह वहाँ कब आएगी. जून ने कहा है शायद दो वर्ष बाद वे वहाँ दुबारा जा सकें. मैक्स टीवी पर क्वीन का आठवां भाग देखा, शक्ति अब पुन: फिल्मों में काम करने के लिए तैयार है. मौसम आज सुहावन है, कल सखी की सोसाइटी में क्रिसमस पार्टी थी और आज उनके पड़ोसी के यहां क्रिसमस केक की सेल थी. असम में हर वर्ष वे क्रिसमस ट्री सजाते थे और बच्चों को केक खिलाते थे। 


अभी-अभी भाई का फोन आया, वह दोपहर ढाई बजे पुट्टपर्थी पहुंच गया था. वहां के स्टेट बैंक में पूरे आठ दिन उसे ऑडिटिंग करनी है, उसका भाग्य उसे तीर्थ स्थानों के दर्शन करा रहा है. तमिलनाडु व आंध्र के कितने ही मंदिर भी देख चुका है. कल सुबह विजयवाड़ा से बारह बजे तक घर आ गया था, बड़े भाई भी आधे घण्टे बाद पहुंच गए. कल शाम वे उसे एओल आश्रम ले गए थे, विशालाक्षी मंडप रौशनी में बहुत भव्य लग रहा था. सप्ताहांत में चार दिनों के लिए उन्हें काबिनी जाना है. घूमना और लिखना-पढ़ना यही काम होंगे वहां. उनके गैराज में किनारे की पट्टी पर मार्बल लगवा लिया है, जून कह रहे हैं सामने की दीवार पर टाइल्स लगवा लेते हैं, बरसों वे लोग सरकारी घरों में रहते आये हैं जिसमें कभी कोई काम नहीं करवाया, पर अब अपने घर को संवारने का कोई अंत ही नहीं है. सोनू ने उसे दो बंदनवार व दो मोबाइल बैग्स दिए, नन्हा आजकल ज्यादा बात नहीं करता है, अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहने लगा है. 


आज बहुत दिनों बाद रेडियो पर रात्रि समाचार सुने. बचपन में हर रात को सोने से पूर्व घर में रेडियो पर समाचार सुने जाते थे. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गयी है. सरकार लोगों तक सीएए की जानकारी पहुंचाने की कोशिश कर रही है. शरणार्थियों ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को धन्यवाद दिया है. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री व राज्यपाल के मध्य तनाव कम नहीं हो रहा है. सुबह-सुबह कुछ लिखने का प्रयास कर रही है नूना पिछले कुछ दिनों से, दिन भर लिखने का समय नहीं मिल पाता। छत पर काम चल रहा है, दिन भर कोई न कोई आता रहता है. सुबह मन कितना स्पष्ट रहता है खाली और निर्मल .. विचार अपने आप ही आते हैं । आज सुबह जून नए खुले रेस्त्रां से पुट्टू लाये,  साथ में काले चने की सब्जी. नए वर्ष के लिए कुछ संकल्प लेने का समय आ गया है. अगले वर्ष वे  ध्यान, लेखन, सेवा कार्य, पुस्तकें पढ़ना तथा बागवानी नियमित करेंगे. नया वर्ष आने में मात्र सात दिन रह गए हैं. कल क्रिसमस का त्योहार है, देश में शांति बढ़े, विकास हो, आर्थिक प्रगति हो और आपसी मेलजोल बढ़े. यह कामना उन्हें नए वर्ष के लिए करनी चाहिए. जून की पीठ में दर्द हो गया है, योग कक्षा में उन्हें विशेष आसन करने को कहा शिक्षिका ने. अगले महीने वह घर जाने वाली है, ऋषिकेश से यहाँ आयी है, किराये का घर लेकर अकेले ही रहती है। उसने सोचा  है, एक दिन उसे घर बुलाएगी।  


कल रात एक स्वप्न देखा, एक बड़ा हवाई जहाज है, जिसमें नन्हे और जून को कहीं जाना है, एक परिचित व्यक्ति और भी है, वह उन्हें छोड़ने भर आयी है, पता नहीं कैसे जहाज में पहुंच जाती है. तभी वह उड़ने लगता है, उन्हें लगता है, जहाज अभी रुकेगा और वह उतर जाएगी, पर ऐसा नहीं होता. उसके पास टिकट भी नहीं है. अंततः वह अपने लक्ष्य पर उतर जाता है, वे बाहर आते हैं, उनसे आगे तीन जन को निकलने देते हैं चौथे को रोक लेते हैं, वह सुनती है, वह कह रहा है, उसके पास टिकट नहीं है और गलती से वह बैठ गया था, पर उसकी बात वे सुन ही नहीं रहे. तभी नींद खुल जाती है, कितना स्पष्ट अर्थ है इस स्वप्न का, उसे जहाँ जाना नहीं है, जिसकी टिकट यानि क्षमता भी उसके पास नहीं है, वहीं वह जा रही है। सचेत हो जाना चाहिए अब तो ! उसके जीवन का लक्ष्य क्या है यदि वह खुद ही भूल गई तो आस-पास के लोग उसे कैसे याद रख सकते हैं। 

आज फिर दाहिने हाथ की मध्यमा में नख के निकट सूजन दिख रही है। कुछ हफ्ते पहले डॉक्टर को दिखाया था, ठीक भी हो गई थी पर पुन: किसी कारणवश संक्रमण हो गया है। यू ट्यूब पर घरेलू उपाय देखे, पानी में सेब का सिरका मिलाकर  लगाने से यह ठीक हो जाएगा, ऐसा सुना। नेटफलिक्स पर ऐनी विद एन इ धारावाहिक का पहला भाग देखा। उसमें एक तेरह वर्षीय कल्पनाशील बालिका की कहानी है।  आज क्रिसमस है उसके एक ब्लॉग का जिक्र एक वरिष्ठ ब्लॉग  लेखिका ने सम्मान पूर्वक किया है, क्रिसमस का उपहार ! दोपहर को छोटी ननद का फोन आया, पुत्र की बात बता रही थी, सुबह चार बजे सोता है और एक बजे उठता है, मित्रों के साथ ज्यादा समय बिताता है। आज की युवा पीढ़ी अपनी सेहत का भी ध्यान नहीं रखती। 


और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - 


मुक्त ! वे एक क्षण तो स्वयं अपने मन पर शासन नहीं कर सकते, यही नहीं, किसी विषय पर उसे स्थिर नहीं कर सकते और अन्य सबसे हटाकर किसी एक बिन्दु पर उसे केंद्रित नहीं कर सकते ! फिर भी वे अपने को मुक्त कहते हैं ! 


यदि वह अपने मन की सारी पीड़ा समेट कर एक वाक्य में कहे और अपने मन की सारी खुशी समेट कर एक वाक्य में कहे तो दोनों बार एक ही वाक्य उसके अधरों से निकलेगा- उसकी कविताओं में झलकता उसके मन का भ्रम  कितना सुंदर है ! लगता है सुख -दुख की चरम स्थिति में मनुष्य समभाव हो जाता है, यह बिल्कुल सही है। 


कई बार लगा है पानी में प्रतिबिंब देखते हुए, अपने अधूरेपन को देख, अपनी आवाज में टूटन देख, बिखरे हुए विचारों को देखकर कि  दुनिया में कोई ऐसी मिट्टी नहीं जो इतनी पक्की हो कि उसे जोड़ सके, कुछ मिट्टियाँ किन्हीं विशेष स्थानों पर ही मिलती हैं और उसके मन के मेल की मिट्टी कहाँ मिलेगी, यह नहीं मालूम ! 


Monday, June 24, 2019

क्रिसमस ट्री



आज क्रिसमस है. हर जगह उत्सव का माहौल है. सुबह बड़े दिन का संदेश सुना था. हर आत्मा को स्वयं पर लगे दाग-धब्बे साफ करने हैं ! न दीन बनना है, न अधीन बनना है, पूर्ण स्वाधीन बनना है. न बेबस, न मजबूर, न असहाय बनना है, जीवन के अंतिम क्षण तक. उम्र चाहे कितनी भी हो, मन को सदा युवा बनाना है. मृणाल ज्योति गयी वह, केक और क्रिसमस ट्री सजाने का कुछ सामान लेकर. पहुँची तो कुछ बच्चे काम में लगे थे, उनके हाथ मिट्टी से सने थे. हाथ धोकर आये, उन्हें संगीत  सुनाया, केक खिलाया, बहुत खुश हुए. जून भी आये बाद में उसे लेने. उन्होंने देखा किस तरह वहाँ  निर्माण कार्य चल रहा है, स्कूल आगे बढ़ रहा है. वहीं से वे नाहरकटिया पुल के नीचे नदी तट पर गये. पानी कम था, लगभग स्थिर ही लग रहा था. किनारे पर काई भी जमी थी. एक-दो पिकनिक पार्टियाँ भी चल रही थीं. इस समय शाम के पांच बजे हैं. कुछ देर पहले वे भ्रमण पथ पर टहलने गये, उससे सटा हुआ  बगीचा गुलाब के फूलों से भरा था. हर रंग के गुलाब थे वहाँ, लाल, गुलाबी, पीले, सुनहरे, नारंगी, हल्के जामुनी, पीच और मैरून !

आज इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद के बारे में एक कार्यक्रम देखा. सत्तर वर्ष की उम्र में वह विदेश गये और सत्तर देशों में गीता का ज्ञान फैलाया. ग्यारह बजने को हैं, आज मौसम खुशनुमा है. खिली-खिली धूप और वातावरण में शांति..ध्यान के बाद मन भी शांत है. पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. परसों सुबह रात्रि भोज की तैयारी में निकल गयी, दोपहर भोजन बनाने-बनवाने में व शाम खाने-खिलाने में. जून के एक सहकर्मी आये थे परिवार के साथ, तीन बच्चे, तीन बुजुर्ग तथा दो व्यस्क. बहुत अच्छा समय बीता. उसके पूर्व की संध्या को वे संगीत सुनने गये थे, शास्त्रीय गायन व वादन ! उससे पूर्व एक सखी ने विदाई पार्टी में बुलाया था. इस वर्ष के दो दिन शेष हैं. आज वे अरुणाचल प्रदेश जा रहे हैं. नये वर्ष का स्वागत तेजू में करेंगे, जहाँ सूर्य की किरणें सर्वप्रथम उदित होती हैं. जून कुछ देर में आने वाले होंगे. वह बगीचे की धूप में हाथ में डायरी थामे खड़े होकर ही लिख रही है. घास अभी भी भीगी हो शायद, सो वस्त्र खराब होने के भय से नीचे नहीं बैठ रही है, पर धूप इतनी तेज हैं कि नन्ही-नन्ही ओस की बूँदें कब की सूख चुकी होंगी, उसका भय हजार भयों की तरह व्यर्थ ही सिद्ध होगा यदि वह बैठ जाये.

सुबह वे टहलने गये, फूलों की सुगंध जो पहले दूर से ही आ जाती थी, आज निकट से गुजरने पर भी नहीं आयी. उसकी सूंघने की शक्ति पूरी तरह वापस नहीं लौटी है. गले में कभी-कभार खराश भी हो जाती है. खैर, भोजन के प्रति उसकी आसक्ति को छुड़ाने के लिए ही शायद प्रकृति के द्वारा रचा गया यह प्रपंच है. उसे अपना उद्धार करना है. परमात्मा इसमें सहायक है. कोई भी व्यक्ति, वस्तु या परिस्थति उसे अनंत से जुड़ने से रोक न पाए, अपनी ही नजरों में वह पराजित न बने. मन संकुचित न रहे, निज स्वार्थ से ऊपर उठे. नये वर्ष में यही प्रार्थना लेकर प्रवेश करना है. कुछ भी ऐसा न रहे जो उसे भारी कर दे, रोग का कारण बने. साधना के प्रति श्रद्धा सदा बनी रहे इसका ध्यान रखना है. साधक को ज्ञान प्राप्ति के लिए सदा विद्यार्थी बनकर रहना है. कैवल्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करना है, जब तक कैवल्य की प्राप्ति न हो तब तक विश्राम नहीं, आराम नहीं. जीवन का एक भी पल विवाद में न बीते. शोक और मोह से आत्मा एक क्षण के लिए भी ग्रस्त न हो. परमात्मा उसी हृदय में विराजमान होंगे जो हृदय खाली होगा. संबंधों का बोझ जब तक आत्मा पर है तब तक वह उड़ान नहीं भर सकती. परमात्मा सदा ही उसका रक्षक है. वह भीतर से शिक्षा देता है और बाहर से कृपा रूप में ऐसी परिस्थतियाँ खड़ी करता है कि आत्मा स्वयं की परख कर सके. कितने दाग लगे उसे यह स्पष्ट दिखाई दे. उनकी यात्रा आत्मशुद्धि की यात्रा है. जगत इसमें सहायक होता है, जगत दर्पण है, जिसमें वे अपने ही अक्स को देखते हैं.

Wednesday, June 22, 2016

क्रिसमस की कविता


कल क्लब में हसबैंड नाईट है, जून जाने वाले हैं नहीं. उसे तो जाना चाहिए, उनके क्लब का सबसे बड़ा कार्यक्रम है और नहीं तो सजावट ही देखने लायक होगी, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी अवश्य ही बहुत अच्छा होगा, वह अकेले ही जाएगी. अभी कुछ देर पूर्व असम में जनमत कराया जाये या नहीं इस बात पर जून और उसके मध्य चर्चा चली, अपने विचारों के प्रति मोह ही इसका कारण है. भीतर अहंकार है जरा सा भी विरोध उसे सहन नहीं होता. क्षण भर के लिए सिर में भार सा महसूस हुआ पर सजग होते ही चला गया स्वप्न में देखे अशोभन दृश्य के समान. गुरूजी कहते हैं वात, पित्त तथा कफ के कुपित होने पर भी चित्त विकार ग्रस्त हो सकता है, लेकिन ये दोष भी तो उनकी बेहोशी से ही जन्मते हैं. उनके भीतर जन्मों-जन्मों की तथा इस जन्म की कामनाएं तो भरी ही हुई हैं, जरा सी असावधानी से वे सतह पर आ जाती हैं. अध्यात्म के पथ पर चलने वाले साधल को निरंतर होश चाहिए !

जून की अंगुली में परसों चोट लग गयी थी जब वह मिक्सर साफ कर रहे थे. उन्हें दर्द हो रहा है इस कारण या शायद अन्य किसी बात पर वह आज दोपहर उसे बिना उठाये आफिस चले गये. आज सुबह क्रिया के बाद कितना अनोखा अनुभव हुआ. काफी देर तक वह भावसमाधि में थी. परमात्मा उनके कितने करीब है, उसमें और उनमें कोई दूरी नहीं है, वह वे हैं और वे वह है. वे हट जाएँ तो वही रह जाता है और भीतर एक संगीत गूँजता रहता है ! इस समय भी गूँज रहा है. आज उसने अपने आप pdf फाइल बनाकर दीदी को कविता भेजी. कल उन्होंने बरामदे में क्रिसमस ट्री सजाया है, आज जून उसकी तस्वीर उतारेंगे. कल पिताजी से बात की, चाचाजी की दसवीं थी, तेहरवीं भी करनी है. वह लिख रही थी की वर्षा होने लगी और झट हाथों ने कविता की डायरी उठा ली, कविता परी उतर आयी हो जैसे उसके अंतर की बगिया में ! शब्द झर रहे थे जैसे बूंदें बरस रही हों बारिश में !

आज शाम वे अपने क्रिश्चियन पड़ोसी के यहाँ जायेंगे, एक उपहार, क्रिसमस कार्ड व एक कविता लेकर. उसकी क्रिसमस पर लिखी कविता छोटी भतीजी के स्कूल के बोर्ड पर लग गयी है. आज वह यहाँ के क्रिश्चियन स्कूल के फादर को भी उसका एक प्रिंट देने वाली है. दीदी व कुछ अन्य लोगों को भी भेजी है, कुछ शब्द जो लय में व्यवस्थित हो गये हों, कितना असर कर जाते हैं. उसे नये वर्ष पर भी एकदम नयी सी कविता लिखनी है, कुछ ऐसी जो पढने वाले के भीतर जोश भर दे. उनके भीतर अपार क्षमता है, वे शक्ति के पुंज हैं ! यूँ ही वे अपने को कोसे चले जाते हैं.

कितना सुंदर है यह जहान, कितना अद्भुत है यह वितान !
भरनी है अनंत गगन में ऊंची एक उड़ान, थक के न बैठो ओ प्यारे विहान !
उसे लगता है वे अपनी ऊर्जा के एक अंश का भी यदि उपयोग करें तो...
बदल के रख दें अपनी किस्मत, नजर उठाके जिधर देख लें, बदले जमाना अपनी फितरत ! 
प्यार के बीज बिखरा दें गर फूल दोस्ती के खिल जाएँ,
दिल से जरा सा मुस्का दें, कितनी राहें मिल जाएँ !
अपने इन दो हाथों में कितनी बड़ी जागीर छुपी है,
मानव के इस नन्हे दिल में जन्नत की ताबीर छुपी है !
करे इरादा एक बार वह सब हासिल कर सकता है,
पल भर में रोती आँखों में मुस्कानें भर सकता है !   

Sunday, May 1, 2016

झाऊ के वन


मुहब्बत का दिया मद्धम न होगा
उजालों का परचम कभी खम न होगा
अगर अश्कों से दामन नम न होगा
बिछड़ने का हमें क्या गम न होगा
तेरा जलवा यकीनन कम न होगा
मेरी आँखों में लेकिन दम न होगा

ये शेर उसके दिल की हालत की कितनी सही बयानी करते हैं. उसकी आंख्ने भले सूख गयी थीं पर भीतर तड़प थी, ‘उसका’ जलवा तो पहले सा कायम था, वह तो सृष्टि के अस्तित्त्व में आने से पहले भी था और बाद में भी रहेगा. उनकी आँखों में वह शक्ति नहीं होती कि वे उसे देख सकें. वह तो हर क्षण उन्हें संदेश भेजता रहता है. चौबीसों घंटे वह उसके पास ही रहता है. वह उसकी हाजिरी को नजर अंदाज कर जाती थी. आज सुबह अनोखा अनुभव हुआ, अनुभव होना कठिन नहीं पर उसमें टिकना कठिन है. कभी प्रमाद कभी प्रारब्ध उन्हें भटका देता है. साधक के भीतर प्रेम नदिया की धारा की तरह कभी-कभी गुफाओं में छिप जाता है.

आज क्रिसमस है, यानि बड़ा दिन. ईसामसीह का जन्मदिवस. दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में लोग इस त्यौहार को मना रहे हैं. उनका भी मन उल्लास से भरा है. सुबह सभी को sms भेजे, कुछ ने जवाब भी दिए. जून का अवकाश है, वे शाम से थोड़ा पहले दिन रहते लम्बी ड्राइव पर जायेंगे. कल शाम क्लब में विशेष सज्जा की गयी थी. एक सखी के यहाँ विवाह की वर्षगांठ की पार्टी भी थी. आज वे अपने मित्रों, संबंधियों की सूची भी बनाने वाले हैं, जिन्हें नये वर्ष के शुभकामना संदेश व कार्ड्स भेजने वाले हैं. कल वे निकट ही स्थित पक्षी विहार जा रहे हैं. आजकल मौसम बहुत अच्छा है. धूप, नीला आकाश, फूल और सूखी हरी घास ! टीवी पर एक व्यक्ति पानी में बड़े, मोटे सर्प के साथ तैर रहा है, खेल रहा है, वे व्यर्थ ही डरते रहते हैं. डर उनके मन की उपज है. प्रकृति के निकट रहकर ही वे अपने सहज रूप में आ सकते हैं. मनुष्यों के निकट वे बनावटी व्यवहार करते हैं.


आज वे ‘डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क’ देखने गये. सुबह साढ़े आठ बजे वे निकले और साढ़े नौ बजे पहुंच गये. बनश्री नामका छोटा सा रिजोर्ट रंगीन वस्त्र की झंडियों से सजा हुआ था, आर्मी की एक यूनिट ने उसे शाम तक के लिए लिया हुआ था वे हीरक जयंती मना रहे थे, उन्होंने एक नाव किराये पर ली और डिब्रू नदी के नील स्वच्छ जल में निकल पड़े. हवा ठंडी थी और आकाश नीला था. नाविक एक बूढ़ा व्यक्ति था उसका सहायक एक छोटा बच्चा था. वे उन्हें नदी के दूसरे किनारे पर ले गये, जहाँ हरियाली के मध्य में जगह-जगह श्वेत रेत बिछी थी, जो सुबह की रौशनी में चमचमा रही थी. वे चलते रहे और काफी दूर चलने के बाद झाऊ वन आये, जिसे पार करने के बाद पुनः रेतीले स्थान, जिन्हें पार करने के बाद फिर से वन मिले जहाँ नीचे हरी घास उगी थी. वे कुछ देर के लिए वहाँ बैठ गये, साथ लायी लेमन टी, कॉफ़ी बिस्किट और नमकीन खाकर तरोताजा हो गये. गायों का एक झुण्ड और कुछ भैंसें वहाँ घास चर रही थीं और सफेद बगुले उनके साथी बने साथ साथ चल रहे थे. विशाल नीले गगन के नीचे और कोई मनुष्य उस समय वहाँ नहीं था. उन्होंने विभिन्न प्रकार के पक्षियों को भी आते व जाते समय देखा. वापसी में तिनसुकिया में दोपहर का भोजन करके वे तीन बजे घर लौट आये.

Saturday, June 13, 2015

थैंक्स गिविंग परेड - ह्यूस्टन


Yesterday was very cold; she was in the room whole day. Once went out but cool wind was piercing. Jun came around six thirty in the evening. Today they all went to BJ Company in the afternoon and returned in the evening. From tomorrow onward three days are holidays. Already shops are decorated with Christmas trees and toys. Jun clicked some photographs of the shops and they have come nicely.
आज छुट्टी का पहला दिन है, सुबह उठकर ‘क्रिया’ आदि कर वे दस बजे तक तैयार थे. एक अच्छी फिल्म देखी, एक छोटा बच्चा जो ईश्वर में अटूट विश्वास करता है, अपने अथक प्रयास से उसे पा लेता है. विश्वासी सदा ईश्वर के निकट है. वे हार्विन  रोड भी गये पर वहाँ की दुकानों में सामान भरा होने के बावजूद कुछ खरीदने का मन नहीं हुआ, फिर वे डॉलर शॉप में गये जहाँ बच्चों के लिए गिफ्ट खरीदे, Manhattan pizza shop में पिजा खाया और चलते-चलते वापस होटल पहुंचे. वे लगभग चालीस मिनट चले होंगे पर थकान जरा भी नहीं थी. यहाँ हवा स्वच्छ है और ऐसा कुछ है जो लोगों को अनथक चलते रहने को प्रेरित करता है. दोपहर बाद वालमार्ट गये, कुछ और उपहार लिए. यहाँ के भौतिकतावादी जीवन का असर उन पर भी पड़ने लगा है, लेकिन आसपास दुकानों के अलावा कुछ है भी नहीं. भारत से इतना दूर रहकर वे अपने मित्रों- संबंधियों से अधिक स्नेह करने लगे हैं, सभी के लिए कुछ न कुछ खरीदने का मन होता है.
Just now they talked to Nanha, papa and ma in India. They said that they all are happy and fine but she felt a trace of sadness or something in their talk. Due to continental distance time lag prevents to speak smoothly. But at least they can chat from their room whenever they wish with the help of phone card. Today is thanksgiving festival, celebrated with great joy and show in America. There will be a parade in down town; they will see it on TV. Shops will be closed. Got up at five, did pranayama and yoga, it helps them very much in starting their day energetically. There friends are going to Las Vegas today and from there to Las angels. Yesterday they went to Harvin road to purchase a camera, but could not get it. Trip to Harvin was free, the other day cab driver promised them to take to Harvin free of cost, and he kept his words.  Sitting here and viewing thanks giving parade is a thing which does not happen often, it’s a life time experience. She is thankful to God who made it possible for her and thankful to all the people through whom God made it possible. Jun, Nanha, in-laws, jun’s company and many persons across the globe who made their journey a pleasant one. Her thanks go to these hotels’ personals and also to America, where people of every part of the world live gracefully is celebrating thanksgiving today!
She wrote the description of parade in her diary-
·         Blue, orange and white clad children are dancing on fast tune.
·         A black suited man was dancing amazingly, with some ladies, very fast on his steps.
·         Some wicked looking green clad dancers, some are wearing long pointed caps, and main dancer is black.
·         Here come fat clowns having long neck.
·         An eleven year old boy is singing and dancing wearing white shirt, grey half pant and red tie.
·         Wearing Red frocks with white fur border and heavy silver ornaments looking like circus artists, girls are showing there dance item.
·         A big turkey made of a balloon is being shown with other balloons of different shapes. Judy Collins is singing in slow tune wearing a black dress with pink shawl, big size red capsicum and other vegetables are being shown on the stage.
·         Now Pulaski high school Houston band has come on the center stage.
·         A big yellow bird (wool bird) with two small chicks is singing.
·         A white big plastic dog is moving slowly and a girl is singing.
·         Now Disney’s jungles have come with Micky and mini and other cartoons characters. Peter pan wearing green dress is large and huge, double story high.
·         Sam Houston high school band is playing some fast tune.
·         Other balloon is Pinocchio.
·         Now Santa clause is coming with Christmas bell and other decor of Christmas.
·         One Indian group is also coming with a big elephant decorated with golden plate on forehead and group of sari clad women and girls are dancing.
·         A  sardar ji is displaying his sword action.

Friday, February 14, 2014

उड़िया फेस्टिवल



आज क्रिसमस ईव है और एक मित्र के विवाह की वर्षगाँठ भी. शाम को उनके यहाँ जाना है, नन्हे को क्लब जाना है, जहां बच्चों को सांता क्लाज उपहार व स्नैक्स देते हैं. आज ही उनका कम्प्यूटर भी आने वाला है. कल शाम जून ने दीदी का पत्र दिया, वह आध्यात्मिक रूप से कहीं आगे हैं. उनकी सहनशक्ति कहीं ज्यादा है, उसे लगा, इस तरह तुलना नहीं करनी चाहिए, उनका दृष्टिकोण बिलकुल स्पष्ट है कहीं शंका की गुंजाइश नहीं जबकि वह इधर-उधर बिना पतवार की नौका की तरह डोलती रहती है. उसे उनके पत्र से कुछ जवाब तो मिले हैं पर कुछ नये सवाल भी खड़े हो गये हैं. कल जून ने शिकायत की कि उसके पास उनके लिए समय नहीं है. वह कर्त्तव्य मात्र समझकर किसी कार्य को करना नहीं चाहती पर उसे लगा जीवन में संतुलन के लिए ऐसा करना जरूरी है. कल उन्हें पिकनिक पर जाना है, दिसम्बर के महीने में गुनगुनी धूप में नदी के ठंडे पानी की छुअन, सोचकर अच्छा लगता है, माँ-पापा के आने पर उन्हें भी ले जायेंगे वे नदी के तट पर.

नये साल का आखिरी दिन...कभी तो यह साल भी नया ही था, हर वर्ष नया बनकर ही आता है और कल...यह इतिहास बन जायेगा. पिछले कई दिनों से वह कुछ नहीं लिख सकी, पिकनिक अच्छी रही, उसके अगले दिन जून तिनसुकिया गये उसके सिर में दर्द था. उनका एसी भी बनकर आ गया है. नन्हे के साथ सुबहें कैसे बीत जाती हैं पता ही नहीं चलता, आज उसके शीतावकाश का अंतिम दिन है. कल से यानि नये साल के पहले दिन से स्कूल खुल रहे हैं, जिसे आने में अब कुछ ही घंटों का वक्त रह गया है.

नये वर्ष की सुबह नशीली भी है और सुहानी भी ! सुबह अलसाये से सात बजे के थोड़ा बाद ही उठे, सभी को फोन पर नये वर्ष की शुभकामनायें दीं, सभी को उनके कार्ड्स भी मिल गये होंगे. एक उत्सव की तरह सेवइयों की खीर से नये वर्ष का स्वागत किया, उसे याद आया, धर्मयुग का विशेषांक निकलता था नये साल पर, अब तो उन्हें महीनों, वर्षों हो जाते हैं धर्मयुग पढ़े हुए. हिंदी की कोई पत्रिका वह इस वर्ष मंगाएगी, सृजनात्मक लेखन का कोर्स जो करना है. हसबैंड नाईट के लिए एक skit भी लिखनी है. पाठ और योगासन करने के बाद उसने मन ही मन संकल्प लिया है,  इन दोनों कार्यों के साथ साथ प्रतिदिन कुछ लिखेगी भी. अभी काफी काम पड़ा है लेकिन उन कामों के कारण अपने निजी कार्यों की बलि नहीं चढने देगी. जून अपनी कार को वैक्यूम क्लीन कर रहे हैं और नन्हा पास खड़े होकर खुद भी करने की जिद करके उन्हें झुंझला रहा है. कल रात जून ने प्रेस जाकर हिंदी की कम्पोजिंग का काम पूरा करा दिया. मेहमानों के आने में ग्यारह दिन का वक्त रह गया है, उसे सारे घर की सफाई करनी है और सिलाई का कार्य भी अभी शेष है. आज शाम को क्लब में ‘उड़िया टी’ का आयोजन किया गया है, उसकी उड़िया पड़ोसिन सुबह से तैयारी में व्यस्त है.




Monday, November 19, 2012

काजीरंगा का गैंडा



माँ-पिता का पत्र आया है, कुछ दिन पूर्व दादीजी का स्वर्गवास हो गया. उसके मन में यादों का एक चलचित्र चलने लगा, उनके साथ बिताए कितने ही दिन याद आए, कितनी अच्छी थीं वह, लिखा है, चोट लगने से एकाएक मृत्यु हो गयी. उसने सोचा, वह जैसी मृत्यु चाहती थीं वैसी ही उन्हें मिली, जीवन चाहे वैसा न मिला हो. कल सोनू का पहला पेपर हो गया इंग्लिश का, आज गणित और कविताओं का है. जून को सम्भवतः एक डेढ़ महीने और इसी तरह तलप आना-जाना पड़ेगा. इतवार दोपहर को आए थे, सोमवार सुबह चले गए. उसने उनसे वह बात भी कह दी, सोचेंगे, कहा है उन्होंने. उसके मन में भी कितनी ही बातें घुमड़ती रहीं इस सिलसिले में.

नन्हे का आज हिंदी का इम्तहान है, कल अंतिम परीक्षा है. कल शाम को उसकी एक उड़िया मित्र आयी थी, पिछले कुछ दिनों में अपने बेटे को तीसरी बार स्टीम-बाथ देने, उसका बेटा कुछ मोटा हो गया है, किसी ने कहा कि भाप में नहलाने से स्लिम हो जायेगा. उसे लगता है वह कुछ ज्यादा ही परेशान हो रही है.

पिछले कई दिनों से डायरी नहीं लिखी, उन्हें राष्ट्रीय उद्यान काजीरंगा जाना था, पहले कुछ दिन यात्रा की तैयारी में लगे, फिर यात्रा में और फिर क्रिसमस की छुट्टियों में क्लब, पिकनिक आदि. आज वर्ष का अंतिम दिन है. काजीरंगा में उन्हें बहुत अच्छा लगा, सुबह सवेरे घने कोहरे में पगडण्डी पर कार चलाकर उस स्थान पर जाना जहां से हाथी की सवारी शुरू होती है, एक अविस्मरणीय क्षण था. वहां एक सींग वाले गैंडे मिलते हैं, वहाँ का विस्तृत वृतांत लिखे उसका मन तो है, पर कब लिखेगी कुछ कह नहीं सकती. जून अभी तक बाहर ही हैं बीच-बीच में आते हैं एकाध दिन के लिए. नन्हे का स्कूल भी परसों खुल रहा है. इस वक्त वह चित्र बना रहा है.

पिछले दिनों अकेले होने के कारण कई बार वे लोग कई बार उस पंजाबी परिवार से मिले. पिछली बार जब वह घर गयी थी तो माँ-पिता से उनके बारे में पूछा था कि किस तरह से वे हमारे रिश्तेदार हैं. उन्होंने विस्तार से बताया एक अच्छी खासी कहानी बन गयी.

पाकिस्तान में एक लालचंद कटारिया थे, जिनकी शादी बागां से हुई, नूना की दादी की दादी के भाई की लड़की इस बागां की माँ थी. लालचंद व बांगा की पुत्री की शादी नूना की माँ के ममेरे भाई के साथ हुई. उनका पुत्र था अमर, जो नूना के पिता जी का सहपाठी था. उसकी शादी राज से हुई जो उसकी माँ की सहपाठिनी थी. इनके पुत्र ही असम में रहने आए..जिनकी पत्नी के माता-पिता भी नूना के माँ-पिता के परिचित थे. उनकी माँ नूना की माँ के साथ भारत आने के बाद पढ़ती थीं.
एक दिन उसने ये बातें जब उनको बतायीं तो वे भी चकित हुए.


Friday, July 6, 2012

दाल का पानी


नन्हा देर से सोया है सो अभी तक जगा नहीं है, नूना के मन का अश्व विचारों की धूल उड़ाता जा रहा है. उसे समझ में नही आता क्या उचित है क्या अनुचित, सब कुछ जैसे अपने आप हो रहा है, उनका कोई अधिकार ही नहीं, वे पर चले जा रहे हैं बस यूँ ही... जैसे बहे जा रहे हों नदी की धारा में. वह पल भर भी बैठ कर सोच नहीं पाती कि क्या करना चाहिए. क्या थे वे और क्या  हो गए हैं, कोई व्यवस्था नहीं रह गयी है. वर्ष समाप्त होने को आया है. अगले महीने उनके विवाह की वर्षगाँठ है, पिछले वर्ष उसने जून से कहा था कि बहुत अच्छी तरह मनाएंगे वे यह दिन पर अब उसे लगता है कि किसी को भी नहीं बुला पाएंगे. मन में बातें उठती ही चली जाती हैं बिन बुलाए मेहमान की तरह या फिर बिन बुलाई नदी की बाढ़ की तरह. उसने सोचा आज दोपहर वह सोयेगी नहीं, बस चुपचाप बैठकर सोचेगी कुछ. आज धूप तेज है मन होता है बाहर धूप में बैठे थोड़ी देर, उसने सोचा जून भी आने वाले होंगे.

कल क्रिसमस है, बचपन में सभी त्योहारों को मनाने का कितना चाव होता है. वे क्रिसमस ट्री सजाया करते थे, और दिन भर यीशू के गीत गाते थे. आज इस समय वह जो डायरी लेकर बैठी है उसका कारण वही यादें हैं. अभी सुबह ही है सोनू खेल रहा है बीच-बीच में शोर मचाता है. रेडियो सीलोन से बौद्ध संदेश सुनाया जा रहा है पर उसे कुछ भी समझ में नहीं अ रहा है. क्योंकि उनका ट्रांजिस्टर थोड़ा अस्वस्थ है. नन्हा अब करवट लेकर सोने लगा है, बड़ा हो रहा है. मैच आरम्भ हो गया है भारत और श्रीलंका के मध्य. उसने खाना तो बना लिया है पर स्नान नहीं किया महरी कपड़े धो रही है. रोज सुबह का वही क्रम है ऐसे जाने कितने दिन गुजर गए और कितने और गुजर जायेंगे. एक दिन वे सोचेंगे कि सारा जीवन बीत गया इसी उहापोह में, कुछ तो किया ही नहीं. सचमुच सिर्फ अपने तन-मन की चिंता ही व्यस्त रखती है हर पल. और कुछ कहाँ सोच पाते हैं, यह जो दुनिया में इतनी बातें होती हैं उन्हें  पता ही नहीं चलता. कितना दुःख है दुनिया में पर साथ में कितनी खुशी भी तो है कहाँ मिलती है उन्हें उसकी झलक भी ज्यादा. हाँ, अपने में व्यस्त तो वे खुश हैं बेहद खुश. जून, नूना और नन्हा बस तीन प्राणी, छोटा सा संसार है उनका. उसे ध्यान आया दाल उतारनी है कहीं कुकर में पानी खत्म ही न हो जाये. 
क्रमशः