Friday, June 12, 2026

शिव-शक्ति संवाद


शिव-शक्ति संवाद 

आज सुबह भी नूना ने ‘विज्ञान भैरव’ आगे सुना, कितना अद्भुत ग्रंथ है यह, जिसमें परमात्मा स्वयं अपने बारे में बता रहे हैं। शिव और शक्ति के मध्य हुआ यह वार्तालाप अपने आप में एक महान घटना है। भारत को विश्व गुरु ऐसे ही नहीं कहा गया है। भारत के पास ही वह बात है, जो विश्व में कहीं और होना तो दूर, उसकी झलक भी नहीं है। पाँच हज़ार साल पुरानी परंपरा के अनुसार नियमित ध्यान-साधना करने से मन में कितनी शांति का अनुभव होता है। पापाजी ने आज भी नवनीत में पढ़ी एक रचना का ज़िक्र किया, उन्होंने फ़ेसबुक पर नूना की रचना भी पढ़ी। रात्रि भ्रमण के समय अचानक एक काले रंग के कुत्ते ने जून के हाथ को स्पर्श कर लिया, शायद वह अपनापन दिखाना या पाना चाहता था। दिन में उनकी असम के एक पुराने सहकर्मी से बात हुई, वहाँ उनके दफ़्तर के लोग अभी तक उन्हें याद करते हैं, वे चाहते हैं कि पुन: उनके जैसा अनुशासन प्रिय कोई अधिकारी आये। नूना को हँसी भी आयी, उस समय वे ही लोग कभी न कभी उनके अनुशासन की शिकायत भी करते रहे होंगे। जून ने बिग बास्केट से होली के विशेष भोज के लिए ढेर सारा सामान मँगवाया है। कुछ देर पहले समाचार मिला कि बड़े भाई की बिटिया को एमबीए में दाख़िला मिल गया है, वह चंडीगढ़ आईएसबी में पड़ेगी। परसों वह यहाँ आ रही है, तभी वे उसे बधाई देंगे। 


आज सुबह योग साधना के समय जून ने ‘जोड़ों के योग’ शीर्षक से एक वीडियो बनाया, लगभग पचास मिनट का है, उन्होंने बहुत अच्छी तरह से प्राणायाम व घुटने तथा अन्य जोड़ों के लिए आसन व व्यायाम आदि करवाए हैं। यू ट्यूब पर उसे डाल देने से कितने ही लोग उसे देखकर आसन कर सकते हैं।पापाजी से आज बात की तो उन्हें सुनने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी।कान में मशीन लगाने का अभी उन्हें अभ्यास नहीं हुआ है। कुछ दिनों में उन्हें इस महीने की नवनीत मिल जाएगी। अवश्य ही उन्हें अच्छा लगेगा। 


आज उन्होंने सोल्लास होली का उत्सव मनाया। नन्हा व सोनू सुबह नौ बजे आ गये थे, साथ में सोनू की मौसेरी बहन व नन्हे की ममेरी बहन भी। दोपहर को भांजा व उसकी नव विवाहिता भी आ गये। वे दोनों दो दिन उस रिज़ौर्ट में रहकर आये थे, जहाँ नन्हे का विवाह हुआ था। बहुत खुश  नज़र आ रहे थे। जून ने भिस की विशेष सब्ज़ी बनायी। पालक पनीर, रायता व पुलाव बच्चों ने आपसी सहयोग से बनाया। फूलों से बने हर्बल रंग पहले ही नन्हे ने मँगवा लिए थे। जिसमें ठंडाई की एक बोतल भी थी। लंच से पहले ही सबने एक-दूसरे को रंगा और बधाई दी। शाम को वे सब चले गये, उसने बहुत सारी तस्वीरें उतारी हैं उत्सव की, रंग-बिरंगी तस्वीरें ! 


आज से उनके घर की बाहरी दीवारों पर रंग-रोगन का काम शुरू हुआ है। दो हफ़्ते लग जाएँगे। डाइनिंग टेबल की कुर्सियों की रैगजीन भी पुरानी हो गई है, मात्र पौने चार वर्षों में, चाइना की बनी हैं शायद इसीलिए! जून का कहना है, उन्हें बैठक में भी एसी लगवा लेना चाहिए। उन्हें घर की देखभाल करने व घर चलाने में बहुत आनंद आता है, उनमें विष्णु शक्ति बहुत है। उसे ख़ुद सबसे अधिक आनंद ध्यान में आता है, परमात्मा से एकत्व में और संतों की वाणी सुनने में। विज्ञान भैरव सुनने से काफ़ी शंकाओं का निवारण हो जाता है। आज भी सुबह सुना, गुना और और भीतर तक उसके सूत्रों को अनुभव किया। न जाने कितनी पुरानी है यह पुस्तक और कितने संतों ने इसकी व्याख्या की है।आज सुबह ध्यान में अनोखा अनुभव हुआ, जागते हुए ही अनेक दृश्यों को बंद आँखों के पीछे देखा, तारों से भरा आकाश और जंगल, नदी आदि भी ! यह सारा जगत उनके भीतर भी है, वे परमात्मा की अभिव्यक्ति ही तो हैं ! जीव, जगत और ईश्वर तीनों परमात्मा की अभिव्यक्ति हैं ! 


आज कल वह ‘कितने पाकिस्तान’ पढ़ रही है। कितनी अनोखी पुस्तक है यह, इतिहास का कितना ज्ञान था लेखक को, और विश्व को हिंसा मुक्त बनाने की गहरी चाह ! मावन इतिहास से कुछ भी सीखना नहीं चाहता, बार-बार वही गलती दोहराता है।आज भी घर में रंग-रोगन का काम चलता रह, दिन भर मज़दूरों का आना-जाना चलता रहे तो कैसा बिखरा-बिखरा सा हो जाता है घर के साथ मन भी। जून ने आज तीन और एसी लाने की बात की और तुरंत उनका ऑर्डर भी कर दिया। नवनीत का मार्च अंक पूरा पढ़ लिया, कई व्यंग्य रचनायें हैं तथा विद्यानिवास मिश्र जी का एक ललित निबंध है, जो बहुत प्रभावित करता है। दादा धर्माधिकारी का लेख भी अच्छा है, स्त्री को आत्मनिर्भर होने के संदेश देता हुआ।   

आज भी सुबह जल्दी उठकर वे टहलने गये, सड़कें सूनी थीं, हवा शीतल और आकाश में आधा स्वर्णिम चंद्रमा !! विज्ञान भैरव सुनते-सुनते भीतर कैसा बोध हुआ, आनंद की जैसे एक वर्षा सी हो गयी। विश्व समाचारों में देखा, इज़राइल में जनता सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है। यूक्रेन-रुस युद्ध चलता ही जा रहा है। ‘बाल्मीकि रामायण’ की अगली पोस्ट लिखी, अनोखा है राम और भरत का प्रेम ! पापाजी से बात हुई, उन्हें भी अध्यात्म के पथ पर शांति का अनुभव होता है, उन्हें इसका महत्व ज्ञात है।यही आस्था उनके दीर्घ और सुखमय जीवन का राज है।वह ‘कितने पाकिस्तान’ जितना-जितना पढ़ती है, लेखक के प्रति सम्मान बढ़ता जाता है। भारत का इतिहास कितनी साज़िशों से घिरा हुआ है। दारा शिकोह की हत्या एक ऐसा कलंक है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। जे कृष्णामूर्ति की एक पुस्तक ऑडिबल पर सुन रही है, कितना गहन ज्ञान था उनका और कितना अटल विश्वास ! वह चीजों को बहुत स्पष्ट देखते थे, उनकी किताबें पढ़ते-सुनते भीतर जैसे एक आकाश खुलता जाता है ! मन से मुक्ति मिलती है ! 

आज तीन नये एसी घर में लग गये। सारा घर धूल से भर गया था। रंग करने के लिए दीवार से सटे फूलों के दो पेड़ ऊपर से काटने पड़े, जड़ें हैं, इसलिए पुन: नये पत्ते और शाखाएँ आ जायेंगी। बोगनवेलिया का जो पेड़ उनके घर की शोभा बढ़ा रहा था, हटाना पड़ा, उसकी डालियों को  काटना भी पड़ा, और भी कई पेड़ कटवाने पड़े हैं, पर संभवत: कुछ ही महीनों में वे फिर से हरे-भरे हो जाएँगे। आज भी हिन्दी पढ़ने दोनों बालिकाएँ आयी थीं, कल उनकी परीक्षा है।


No comments:

Post a Comment