Wednesday, May 20, 2026

‘त्रिपुरा रहस्य’

‘त्रिपुरा रहस्य’


कल से संसद का सत्र शुरू हो रहा है।परसों गुजरात व हिमाचल प्रदेश में हुए चुनावों का परिणाम भी आ जाएगा। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है। आज वे जून के पूर्व उच्च अधिकारी के घर गये, जहां एक अन्य सहकर्मी भी मिले।मेज़बान महिला ने घर का बना ‘मुरक्कु’ खिलाया, जो दक्षिण भारत का एक कुरकुरा स्वादिष्ट पारंपरिक नाश्ता है, ‘मुरुक्कु’ का अर्थ है मुड़ा हुआ। उन्होंने साथ में ताजा निकाला संतरे का रस पीने को दिया। कुछ देर सब पुरानी यादें ताजा करते रहे,  इसके बाद सब लंच के लिए ‘पाकशाला’ गये। जहाँ सबकी पसंद थी, ‘उत्तर भारतीय भोजन’ दोपहर बाद वे घर लौटे। शाम को पुन: गले में दर्द महसूस हुआ। 


आज स्वास्थ्य कल से बेहतर है। कई बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे किए और भाप भी ली।कल रात को देखे अनोखे स्वप्न के कारण आज जीरा-धनिया का पानी पिया और उसकी सुगंध भी ग्रहण की। आज एक अच्छी हास्य फ़िल्म देखी, ‘नज़र अन्दाज़’, जिसमें एक उदार अंधे व्यक्ति की कहानी है। उनकी नौकरानी और एक चोर के बीच हुई रोचक प्रतिस्पर्धा की कहानी ! गुजरात में बीजेपी और हिमाचल में कांग्रेस को विजय हासिल हुई है।आज दोपहर छोटे भाई का फ़ोन आया, बिहार के मुज्ज़फ़रनगर के उस आश्रम से, जहाँ असम में रहने वाली  नूना की एक परिचिता रहने गयी थी, पर लौट आयी।आश्रम के संचालक ने उससे विवाह तो किया पर निर्वाह नहीं कर पाये, वैसे यह बेमेल विवाह था। आज उसने पहली बार आई पैड पर लिखा, आश्चर्य है, इतने दिनों से अभ्यास क्यों नहीं किया।बहुत आसान है उस पर लिखना और इसे यात्रा में साथ भी रखा जा सकता है। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, पंजाब में उनके मकान को बेचने में आने वाली अड़चनें घटने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उन्हें अदेयता प्रमाणपत्र नहीं मिला है। घर के लिए अठारह साल पहले ऋण लिया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। 


आज नन्हा आया था, सोनू असम में है। परसों सुबह उन्हें एक और यात्रा पर निकलना है। सुबह साढ़े छह बजे नन्हा उन्हें एयरपोर्ट ले जाएगा।आज वे पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्रीश्री आयुर्वेदिक अस्पताल गये, आना-जाना मिलाकर तीन घंटे लग गये। वैद्य ने सर्दी के लिए एक हफ़्ते की दवा दी है और बाद में सामान्य आरोग्य के लिए एक महीने की। ‘मृणाल ज्योति’ की रजत जयंती का उत्सव संपन्न हो गया। अगले हफ़्ते उन सभी से नूना की भेंट होगी। 


आज पूरे एक हफ़्ते बाद इस डायरी में लिख रही है। दोनों यात्रायें अच्छी रहीं। पूरे विश्वास और धैर्य के साथ सफ़र का आनंद लिया, घर वापस आकर भी अच्छा लग रहा है। कल से घर की बायीं दीवार पर रंगरोगन होगा, जो दो साल से साथ वाले मकान के निर्माण के दौरान स्वच्छ नहीं रह पायी है। 


आज महीनों बाद उसने ब्लॉग्स पर पोस्ट प्रकाशित कीं, पूरी पाँच पोस्ट ! अच्छा लग रहा है।असम में जब थी तो कभी-कभी ही होता था कि कुछ न लिखे। जब कोई रचनात्मक होता है तो ईश्वर उसके साथ होते हैं। हर कर्म में देव का योगदान तो होता ही है। चेतना ही मन-देह के द्वारा अभिव्यक्त हो रही होती है। दीदी से बात हुई, उन्हें डाक्टर ने घुटने बदलवाने की बात कही है, यह भी कहा है, अभी कोई जल्दी नहीं है।कुछ दिन की दवा भी दी है। पापाजी ने कहा, मोबाइल पर जो गेम वह खेलते हैं, उसके पैसे भी देने चाहिये, आख़िर किसी ने इतनी मेहनत से बनाया है।वह अति आदर्शवादी हैं।


आज शाम उसने ‘त्रिपुरा रहस्य’ का कुछ अंश सुना, ‘ललितासहस्रनाम’ में  देवी त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप, महत्व और रहस्य को बताया गया है। कितने सरल शब्दों में आत्मा का ज्ञान दिया है, और यह भी कहा है कि आत्मा का ज्ञान देना ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि उसे उसकी आँखें दिखला दो।आज उसने गुरुजी के नये वर्ष के दो संदेशों का अनुवाद किया। गूगल की सहायता से काम बहुत सरल हो गया है। समाचारों में सुना, चीन में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, अन्य कई देशों में भी कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। दोपहर को वे नन्हे के यहाँ गये थे, उसे लेकर एसबीआई होम लोन की दो शाखाओं में गये, अब उनके घर का कोई लोन बकाया नहीं है। अगले महीने मकान के कागज मिल जाएँगे। 


आज आँख है कि भर-भर आती है, प्रेम की इस तरह की तड़प का अनुभव बहुत दिनों बाद हुआ। यह भी परमात्मा की कृपा है, वह भावपूर्ण हृदय से ही ज़्यादा संतुष्ट होते हैं, उन्हें ज्ञानी भक्त ही प्रिय हैं, रूखा-सूखा ज्ञानी नहीं ! प्रीत के आँसुओं से भरकर जब कोई गोपी कृष्ण को याद करती होगी, तो वह रह ही नहीं पाते होंगे, आत्मिक रूप से उसके भीतर आकर उसे सांत्वना देते होंगे, प्रेम का अनुभव केवल प्रेम के लिए कैसा होता है, भक्ति यही सिखाती है, उसमें कोई चाह नहीं है, अपनी माँग नहीं है, बस यही भावना है कि सामने वाले को कोई दुख न हो, वह प्रसन्न रहे। जब अन्य का दुख देखा न जाये और उसे मिटाने का भाव भीतर प्रबल हो जाये तब समझना चाहिए कि प्रेम अपने शुद्ध स्वरूप में है। ईश्वर प्रतिपाल उसके साथ है, बल्कि वही है ! आज शाम को वे एक घंटा टहलते रहे, फिर ‘योग निद्रा’ की, पहले श्रम फिर विश्राम, बहुत अच्छा अनुभव था। आज भी अनुवाद कार्य किया, गुरुजी ने कितने ही विवादों का हल करने में विश्व की मदद की है। बहुत दिनों बाद उसने ‘चिदाकाश गीता’ पढ़ी। जो महान अवधूत संत भगवान नित्यानन्द के मुख से निकले आध्यात्मिक वचन हैं। जिनमें वह अहंकार का नाश करके, वैराग्य को साधकर, साक्षी भाव का अभ्यास करने की बात कहते हैं । गुरुजी की तरह वह भी कहते हैं एक ही सत्ता से, एक ही ब्रह्म चेतना से सब कुछ निर्मित हुआ है। यह अद्वैत बोध पहले समाधि में घटित होता है, फिर सहज हो जाता है ।   


आज क्रिसमस है, संदेश भेजे और संदेश आये। नन्हा सुबह आ गया था, शाम को गया, पहले गो- कार्टिंग फिर घर।कह रहा था, अगले हफ़्ते वे सब नये वर्ष का स्वागत करने कहीं बाहर जाएँगे, सोनू भी वर्ष के अंतिम दिन आ जाएगी। वे लोग अगले वर्ष मार्च में घर जा सकते हैं, पापाजी को आश्चर्य होगा, दीदी-जीजाजी को भी।


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