Saturday, May 23, 2026

ऑडिबल-श्रवण योग्य

ऑडिबल-श्रवण योग्य



शाम को वे दोनों नन्हे व सोनू को लेने उनके घर गये थे। वापस आकर पहले सबने सूप पिया, फिर केक काटा, वे लोग फूल भी लाए थे, गुलाब के ढेर सारे सुंदर फूल ! उनके घर के लिए एक वैक्यूम क्लीनर भी लाए हैं और रिजार्ट में नूना के लट्टू चलाने के शौक़ को देखकर दो लट्टू भी लाए। रात्रि भोजन के बाद नन्हे ने छत पर टेलीस्कोप लगाया, एक-एक कर सबने चाँद-तारों को देखा।पूर्णिमा के एक दिन बाद का घटता हुआ चाँद बहुत मनमोहक था।चमकता हुआ वीनस, ज्यूपिटर और मंगल के साथ आकाश में शनि भी दिखायी दिया।  


आज सुबह नाश्ते के बाद बच्चे वापस चले गये। उन्हें एक मित्र के गृहप्रवेश में शामिल होने मदागी जाना था। नन्हे ने उसके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कर दिया है, ‘ऑडिबल’ जिसमें वह मनपसंद किताबें अंग्रेज़ी या हिंदी में सुन सकती है।मेंबरशिप लेने से हर महीने एक किताब क्रेडिट पर ख़रीद सकती है।दोपहर बाद एक अच्छी साहसिक फ़िल्म ‘ऊँचाई’ देखी, जिसमें चार बूढ़े दोस्तों की कहानी है, जो अपने एक मित्र की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक चढ़ाई करते हैं।हिमालय और एवरेस्ट के बहुत सुंदर दृश्य हैं फ़िल्म में।शायद इसी कारण शाम को वे निकट के गाँव में स्थित झील तक पैदल चलते गये, कुछ देर वहाँ रुके, दूसरे रास्ते से घूमकर वापस आये तो उमंग और उत्साह से भरा पूरा डेढ़ घंटा बीत चुका था। 


आज सुबह गुरुजी को सुना, उनके सीधे-सरल उपदेश मन को हल्का कर देते हैं। कल वाणी का जो दोष हुआ था, उसका मन पर थोड़ा सा प्रभाव शेष था, जो गुरुजी की प्रेम भारी वाणी सुनकर दूर हो गया। स्वतः ही कुछ पंक्तियाँ भी काग़ज़ पर उतर आयीं, हर संघर्ष सृजन को संभव होने का अवसर देता है। घिसकर ही पत्थर में चमक आती है। दुख मन को माँजता है। परमात्मा की स्मृति हर दुख को वैसे ही हर लेती है, जैसे सूर्य की किरण ओस की बूँद को हर लेती है। जून ने आज दो श्रमिकों को बुलवाया था, सिटआउट की शीशे की छत को धुलवाना था और बेंत के फ़र्नीचर पर पेंट करवाना था।नैनी साप्ताहिक सफ़ाई में लगी थी, थोड़ी देर बाद उसने आकर मज़दूरों की शिकायत की, उसके हावभाव से ऐसा लगा, तेज-तेज कन्नड़ा में कुछ बोली। फ़ेसबुक पर सुबह लिखा उसका छोटा सा आलेख पढ़कर पापाजी ने कहा, मन को ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए। उनकी चिंता उसे समझ में आती है, नन्हे की हल्की सी उदासी भी उसे भीतर तक छू जाती है। माता-पिता बच्चों से ऐसे ही जुड़े रहते हैं। आज शाम को भी वे सोसाइटी के पीछे वाली झील पर गये, पिछले गेट से निकल कर, नये बन रहे ले आउट में से सीमेंट की नई सड़क से होते हुए सीधे वहाँ पहुँच गये।शाम के समय दूर तक टहलने  के दो फ़ायदे हैं, एक तो वजन नियंत्रण में रहता है, दूसरा नये-नये स्थान देखने को मिलते हैं। दोपहर बाद समाचारों में सुना, ब्राज़ील में चुनी गयी सरकार के विरुद्ध विपक्ष आंदोलन पर उतर आया है। यूक्रेन में युद्ध जारी है, चीन ताइवान के पास युद्ध अभ्यास कर रहा है। जोशीमठ में ज़मीन धंस रही है, मकानों में दरारें पड़ रही हैं। इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, जहाँ कुछ लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया, शायद लोग अधिक संख्या में आ गये हैं। 


आज सुबह स्वामी श्री परमानंद जी का आत्मा पर सुंदर प्रवचन सुना।मुक्ति की कामना करने वाला मन है, आत्मा सदा मुक्त है, सुख स्वरूप आत्मा स्वयं को न पहचानकर सुख की कामना करती हुई सी लगती है। उन्होंने कहा, वास्तव में चिदाभास अर्थात बुद्धि में पड़ा चेतन का प्रतिबिंब ही स्वयं को बद्ध जानकर मुक्ति की कामना करता है।अज्ञान दशा में ही भीतर सुख-दुख, इच्छा-द्वेष आदि प्रकट होते हैं। अज्ञान के कारण ही चिदाभास स्वयं को कर्ता मानता है। चिदाभास के कारण ही निर्गुण आत्मा व्यवहार में ‘मैं’ (अहंकार) का अनुभव करती है। साधक को अमनी भाव में रहने का अभ्यास करना है, केवल आत्मसुख में ही टिकना है और अपने अनंत स्वरूप का स्मरण करना है।


आज वे साढ़े दस बजे घर से निकले थे और शाम सवा छह बजे वापस लौटे। एसबीआई की दो शाखाओं में जाना था, एक जगह काम हो गया, एक जगह परसों होगा। नन्हा दफ़्तर से एक बैंक में हस्ताक्षर करने आया था, फिर चला गया। सोनू को लेकर डेंटिस्ट के पास गये। आज उसने बहुत ख़्याल रखा।दोपहर का भोजन उसके साथ खाया। आजकल वह भी अपने स्वास्थ्य और वजन का भी ध्यान रख रही है। जून ने आज लगभग १०० किमी गाड़ी चलायी, वह शहर की भीड़भाड़ में कार चलाने में दक्ष हो गये हैं। 


आज सिटआउट की सफ़ाई का काम पूरा हो गया। जून ने यहाँ के पते के पर उनके नये पैनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन भर दिया है।सुबह 'अष्टावक्र गीता' सुनी, पूरा रास्ता कैसे कट गया, पता ही नहीं चला। मकान के लोन के चुकता होने के बाद सब रजिस्ट्रार के दफ़्तर में जाकर कुछ कार्यवाही करनी होती है, उसके लिए अगले गुरुवार को जाना है। कल डेंटिस्ट के पास जाना है। बैंक भी जाना है, लॉकर को रिन्यू करना है, आरबीआई गाइडलाइंस के अनुसार नया एग्रीमेंट साइन करना है। एओएल के दो अनुवाद कार्य किये, दोपहर को कुछ देर के लिए धूप में सिटआउट पर सोयी, गाड़ियों का शोर आ रहा था। आज भानु दीदी (गुरुजी की बहन) के जन्मदिन का कार्यक्रम देखा, आश्रम के बच्चों ने गीत गाये और श्लोक सुनाये। मिट्टी के जो बर्तन रिज़ौर्ट में बनाये थे, उन पर रंग करना शुरू किया है। पहले बेस कलर लगाया है। गमलों में मेथी, पालक व सरसों के बीज बोए थे, उनमें पानी दिया। 


No comments:

Post a Comment