Wednesday, March 13, 2019

गुलमोहर के वृक्ष



मौसम आज भी वर्षा का है, सुबह छाता लेकर टहलने गये, वापसी में वर्षा आरम्भ हो गयी थी. पौने ग्यारह बजने को हैं. भोजन तैयार है, जून के आने में पन्द्रह मिनट का समय है, उसने डायरी उठा ली है. केजरीवाल ने फिर ईवीएम की गड़बड़ी का राग अलापना शुरू कर दिया है. मोदी जी द्वारा किये काम उन्हें नजर ही नहीं आते. बंगाली सखी को संदेश भेजा है, अभी उसने देखा नहीं है, उसके लिए शुभकामनायें ! छोटी बहन ने एक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, अभी दो शेष हैं, उसे जो नया जॉब लेना है उसके लिए, विदेश में नौकरी करना इतना भी सहज नहीं है. दीदी भी अपनी बिटिया के पास सुदूर महाद्वीप की यात्रा पर जा रही हैं. कल रात्रि जून ने अपने बचपन के बारे में पहली बार सहजता से बताया. प्राइमरी स्कूल की अपनी अध्यापिका सरोज मैम के बारे में तथा अन्य स्कूलों के बारे में भी. इंटर में उनका दाखिला काफी लेट हुआ था. उन्हें अपने उन स्कूलों में जाने का मन है. अगली यात्रा में वे उस कालेज में जा सकते हैं, जहाँ साथ पढ़ते थे.

परमात्मा की धुन, उसका भजन और उसकी शरण में जब मन को आनंद आने लगता है तो उसे दीन दुनिया की कोई खबर ही नहीं रह जाती ! वह ही पाने योग्य है और भजने योग्य है ! आत्मा कर्म फल को भोगने वाला है, पिछले दिनों जो स्वास्थ्य की समस्या से उसे दोचार होना पड़ा उसका कारण पूर्व में उसके द्वारा किये कौन से कर्म थे, उनका भी स्पष्ट अनुभव हुआ, इतनी तीव्रता से वह अनुभव उसे प्रकृति द्वारा कराया गया. वे वस्तुओं को वैसा नहीं देख पाते जैसी वे हैं, इसे ही निंदा कहते हैं. वे अपने दृष्टिकोण से ही वस्तुओं को परखते हैं, जबकि वास्तव में वे वैसी नहीं होतीं. उनके हर कर्म का फल परमात्मा से मिलने ही वाला है, उनकी जरा भी हानि नहीं होती. यदि वे प्रशंसा के रूप में अपने कर्म का फल पहले ही ले लेते हैं तो ईश्वर की व्यवस्था में इसका भी विधान है. उनके किसी कर्म से यदि अन्य का हित या अहित होता है तो यह उसके कर्मों का हिसाब है. अपेक्षा ही उन्हें आत्मा से नीचे ले आती है. कल पुस्तकालय से एक किताब लायी है, First thing First everyday  अच्छी है. कल उन्हें बंगलूरू की यात्रा पर निकलना है.

इस समय वे बंगलूरु शहर से दूर हवाई अड्डे के पास एक रिजोर्ट में हैं. कल सुबह दस बजे वे यहाँ आये थे. यहाँ का वातावरण सुंदर है. हरियाली है, पंछी हैं, फलों और फूलों के वृक्ष हैं, सुंदर रास्ते हैं. सुबह–सुबह बाहर तक टहल कर आये. गुलमोहर तथा ताड़ के वृक्ष सडक के दोनों ओर लगे थे और रिजॉर्ट के अंदर भी विभिन्न तरह के इंडोर व आउटडोर खेल का इंतजाम है. कमरे वातानुकूलित हैं, जिसमें आरामदेह फर्नीचर है. इसी वर्ष नवम्बर माह में यहीं पर नन्हे और सोनू  का सामाजिक रीति से विवाह तथा रिसेप्शन होने वाला है. कल उन्होंने मैनेजर और शेफ के साथ बैठकर भोजन की सूची के बारे में वार्तालाप किया. पंडित जी भी आकर मिल गये और विवाह नियोजक भी. टीवी पर सुरेश ओबेराय व शिवानी बहन संस्कारों पर बात कर रहे हैं. नन्हा अपने मित्र को हवाईअड्डे छोड़ने गया है. अभी-अभी सोनू ने एक दुखद समाचार सुनाया. कल उसका भतीजा मुंबई में जिस मित्र के यहाँ रुकने वाला था, उसे बचपन से जानता था, वह उनके पारिवारिक मित्र का पुत्र था. वह कल घर शिफ्ट कर रहा था. तीन मित्र और भी थे, सभी ने सहायता की. रात को जब भतीजा सो रहा था तो बाहर शोर सुनकर उठा, पता चला, उसके मित्र ने अठाहरवीं मंजिल से गिरकर जान दे दी है. दो मित्र चले गये, एक लड़का और वह खुद रह गये. सोनू की चचेरी बहन भी मुम्बई में रहती है, उसे फोन किया तो वह रात को दो बजे उसे अपने घर ले आई. मृतक के पिता तंजानिया में हैं तथा माँ कोलकाता में. आज की पीढ़ी की सहनशक्ति कितनी घटती जा रही है. उस आत्मा की शक्ति तो वास्तव में बहुत कम थी. अभी कुछ दिन पूर्व ही उनके एक संबंधी की पुत्री ने ऐसा कदम उठाया था पर वह बच गयी. वर्षों पूर्व कालेज में जल जाने पर एक बार उसने भी ऐसा ही सोचा था. मन की दुर्बलता ही इसके पीछे एकमात्र कारण है और अपने मन की बात किसी से न कह पाने की दुर्बलता भी. नाश्ते का समय हो रहा है, जून के आते ही वे नाश्ते के लिए जायेंगे.

4 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 14.3.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3274 में दिया जाएगा

    हार्दिक धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. बहुत बहुत आभार !

    ReplyDelete
  3. गुलमोहर के वृक्ष अच्छे लगे। सादर।

    ReplyDelete