Monday, July 7, 2014

टैगोर की सहजता



At this moment she is feeling as light as wind. It seems that she has found the way to know herself. Since morning most of the time she was conscious of the thoughts of her mind ie she was aware of every feeling and reaction. This is first step towards her goal.

उसने जागरण में सुना, “मन को विकारों से मुक्त रखना ही धर्म है. जैसे ही कोई विकार जगता है, कुदरत की ओर से फल मिलता है. अहंकार होते ही व्याकुलता छा जाती है, द्वेष की भावना जगते ही दुःख मन को घेर लेता है. जब मन सद्भावना व मैत्री से भर जाये तो उसका फल शांति और आनन्द के रूप में तत्काल मिल जाता है”.
उसने सोचा जो धर्म को जानता, मानता और उसका पालन करता होगा वह मन को शुद्ध करने का प्रयास ही नहीं करेगा सदा इसी चेष्टा में लगा रहेगा कि मन की चादर पर कोई दाग न लगे वह कोरी की कोरी रहे जैसे उन्हें कुदरत से सौंपी गयी थी. धर्म कोई बौद्धिक विलासिता नहीं है, यह तो अनुभव की चीज है. कदम-कदम चलना होता है इस पथ पर ! धर्म की बातें कहते बहुत हैं, सुनते बहुत हैं पर करता कोई-कोई है, उसे तो अन्तर्मुखी होकर विकारों को जड़ से निकलना होगा, कोरी बात नही रहे उसके लिए धर्म. इसके लिए जीवन में एक अनुशासन भी लाना होगा.

परीक्षा के बाद की छुट्टियों के समाप्त होने पर आज नन्हे का स्कूल खुला है, नई कक्षा में उसका पहला दिन है. वर्षा का मौसम पूरे जोर-शोर से आरम्भ हो गया है. जून आजकल खुश हैं, स्वस्थ भी दीखते हैं, उनकी सारी परेशानी दोपहर को दफ्तर से अकेले आकर ताला खोलने, स्वयं लेने व अकेले भोजन करने और इसी तरह की बातों के कारण रही होगी. उसके घर पर न रहने के कारण सफाई भी ठीक से नहीं हो पाती थी, उन्हें चमकता हुआ सलीके से सजा घर भाता है. घर-परिवार का उनके लिए बहुत महत्व है. उसे भी यह आजादी भा रही है, अभी स्कूल का काम शेष है, कुछ दिनों में जब पूर्ण हो जायेगा तब पूर्ण स्वतन्त्रता होगी.

उसने पढ़ा तो बहुत है पर केवल पठन ही नहीं मनन भी आवश्यक है, मनन के बाद जीवन में उसको व्यवहारिक कसौटी पर कसना होगा, और फिर उसके द्वारा जो अनुभूति प्राप्त होगी वास्तव में ज्ञान तो वही होगा. किताबों की बातें जब जीवन में उतरने लगें तभी पूर्ण ज्ञान मिलता है. विपरीत वातावरण में रहकर भी मानसिक संतुलन बनाये रहना ही तप है जो उसे करना है. इस तरह संतुष्ट रहने से आत्मिक बल बढ़ता है. यदि बाधाओं को पार करना तपस्या मान लें तो बाधाएँ भी सुखकर प्रतीत होंगी, क्योंकि जो भी सुख-दुःख किसी को प्राप्त होता है उसके ही पूर्व कर्मों का परिणाम है. मन यदि शांत नहीं रहा तो देखना होगा कहीं अभिमान तो नहीं जला रहा, जब हृदय में कुछ चुभता हो, मन कसमसाता हो तो पहले अपने भीतर झंकना होगा बाद में बाहर ! क्योंकि मन की भावनाओं को ही मन प्रतिबिम्बित करता है, मन की विशालता जहाँ सहजता लाती है, क्षुद्रता अशांति का कारण बनती है. उसने कहीं पढ़ा था, टैगोर ने कहा है, उनके भीतर की सहजता, सरलता और सहनशीलता ही उन्हें इस ऊँचाई तक लायी है. जून और नन्हा अपने आफिस और स्कूल गये हैं और वह यहाँ है जिसे घर को संवारने व जीवन को संवारने का मौका मिला है. ईश्वर ने उसे यह मार्ग दिया है.







Sunday, July 6, 2014

शिवरात्रि का उत्सव


There was a time when  mind was full of despair and there was a time when  mind was full oh hope. In fact both were not real.

फरवरी आरम्भ हुए अठारह दिन हो गये हैं और आज प्रथम बार डायरी खोलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, पिछले दिनों काफी कुछ घट गया जिसमें उसका यह निश्चय स्पष्ट हो गया कि अगले सत्र से वह स्कूल नहीं जा रही है. जून की अस्वस्थता का कारण उसका घर से बाहर जाना ही था. आजकल वह ठीक हैं, पर यहाँ तक पहुंचने के लिए उन दोनो को ही तनाव और घुटन के माहौल से गुजरना पड़ा. उन दिनों डायरी खोलते हुए भी डर लगता था कहीं मन की पीड़ा कटु शब्दों का रूप न धर ले. नन्हे की परीक्षाएं ठीक चल रही हैं, आज उसका संस्कृत का इम्तहान है. उसका स्कूल आज बंद है. पिछले दिनों वहाँ भी काफी कुछ बदल गया है. हेड मिस्ट्रेस ने इस्तीफा दिया, एक सीनियर टीचर को उनका कार्यभार सौंपा गया. अभी तक दिसम्बर की भी पे टीचर्स को नहीं मिली है. वार्षिक परीक्षाएं पहली मार्च से आरम्भ होनी हैं. स्कूल में तैयारियां ठीक हो रही हैं पर टीचर्स में पहले का सा उत्साह नहीं है. उसका सेकंड सिग्नेट्री होना भी किसी-किसी को खटक रहा है पर उसने अब मन से अपने को स्कूल से पूरी तरह अलग कर लिया है सो किसी बात का असर नहीं पड़ता. वैसे भी सदा उसका प्रयास यही होता है कि मन को मुक्त रखे, जिससे उच्चता की ओर उन्मुख हो सके. पिछले दिनों जिन्दगी ने एक और पाठ सिखाया है कि आपका प्रिय से प्रिय पात्र भी अथाह दुःख का कारण हो सकता है. यह बात तो वह पहले से मानती थी कि व्यक्ति को अपना रास्ता स्वयं तय करना पड़ता है उस दिन जून को अपने मन की बात बताकर उस मार्ग का पता भी चल गया, उसका मार्ग सहज है.. सरल भी और जून और नन्हा दोनों के मार्गों को छाया और स्नेह से पूर्ण करने वाला.

आज फरवरी का अंतिम दिन है. पुनः वह अपना लेखन का अभ्यास जारी नहीं रख पायी. कल से स्कूल में परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं. उसके बाद कापी जांचने का काम शुरू होगा, रिजल्ट मार्च के अंत में दिया जायेगा. इसका बाद ही वह त्यागपत्र दे देगी और पुनः स्वतंत्र हो जाएगी अपने समय को अपने अनुसार बिताने के लिए. संगीत, किताबें और बागवानी में. राज्य के एक मंत्री की मृत्यु के विरोध में आज ‘एजीपी’ ने असम बंद का आह्वान किया है. सभी को पैदल ही दफ्तर जाना पड़ा है. लंच में जून घर देर से आएंगे. आज उसने बहुत दिनों बाद दो पत्र लिखे. बढ़ई ने नन्हे की स्टडी टेबल में रैक्स लगा दिए हैं, बहुत सुंदर और सफाई से काम किया है उसने. नन्हा अपने मित्रों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया है. कल रात्रि उसने स्वप्न में सुंदर स्थान देखे, मनोहर बगीचे और झील, झरने आदि. कल पड़ोसी मिलने आये थे, उन्होंने यात्रा के फोटोग्राफ्स उन्हें दिखाए और इसी बहाने स्वयं भी पुनः देखे, वही स्वप्न में एक बार फिर. जून और नन्हा आयें इससे पहले, अभी वह कुछ देर भगवद् गीता पढ़ेगी, फिर कुछ मिनट का ध्यान और रियाज. मौसम आज खिला हुआ है जो उसके दिल के करीब है.

आज शिवरात्रि का उत्सव है. अभी कुछ देर पूर्व वह बैक डोर पड़ोसिन के यहाँ गयी, उसके स्कूल छोड़ने की बात वह पहले से ही जानती थी. जून आज आ रहे हैं, परसों वह शिवसागर गये थे. नन्हे और उसे अब अकेले रहने का अभ्यास हो गया है सो अकेलेपन के अलावा और कोई दिक्कत नहीं हुई. परीक्षा की कापियां जांचने में कल तो उसे समय का पता ही नहीं चला, अभी कुछ दिन और चलेगा यह सिलसिला, फिर सिलाई के काम में व्यस्त रहेगी और तब मेहमानों के आने की तैयारी व उनके साथ कुछ दिन बेहद व्यस्त बीतेंगे. बैसाखी पर उनके जाने के बाद घर की सफाई, स्वेटर आदि धोकर रखना. फिर मई में उनके खुद के जाने की तैयारी यानि जून में जाकर वे कम व्यस्त होंगे, फिर नन्हे के स्कूल खुलने का वक्त आ जायेगा और जिन्दगी का सफर यूँ ही चलता चला जायेगा.






Friday, July 4, 2014

बाइकर्स के कारनामे



आज फिर कुछ दिनों के बाद मौका मिला है खुद से बातें करने का. नया वर्ष शुरू हुआ और देखते ही देखते साल का पहला महीना समाप्त होने को है. उन लोगों ने गणतन्त्र दिवस को एक उत्सव की तरह मनाया, टीवी पर परेड देखकर, छोटे-बड़े कलाकारों को राजपथ पर रंग-बिरंगी पोशाकों में नाचते हुए देख कर और विभिन्न राज्यों की मनभावन झांकियां देखकर मन-प्राण उल्लास से भर जाते हैं. नन्हे का प्रिय दृश्य है जेट की उड़ान और मोटर बाइकर्स के कारनामे. विवेकानन्द आश्रम उनके द्वारा रचित साहित्य ‘राज योग’ और ‘ज्ञान योग’ को पढ़ने पर मन में उन्नत विचारों का अभ्युदय होता है. जीवन के महत् उद्देश्य को पा लेने के प्रयास को बल मिलता है. अंततः तो उनके जीवन का उद्देश्य अंतिम सत्य की प्राप्ति है, मन को एकाग्र करते हुए जो जो अनुभव होते जाते हैं, वे प्रेरणा देते हैं.

इतवार की शाम ! कल की तरह आज वर्षा नहीं हो रही है, मौसम ठंडा तो पर सुहाना भी है. सुबह उनकी नींद थोड़ी देर सही खुली, फिर इतवार की सुबह के आवश्यक कार्य, घर की साप्ताहिक विशेष सफाई, कार की धुलाई, मालिश आदि के बाद विशेष स्नान और विशेष नाश्ता, इतवार का दिन बीच में आकर जैसे सब कुछ नया कर जाता है. दोपहर को कुछ देर हिंदी फिल्म मेला देखी, ज्यादा अच्छी नहीं लगी. अभी रियाज के बाद इरादा है कहीं बाहर जाने का. आज से क्लब में हिंदी किताबें भी मिलनी थीं, पर सुबह लाइब्रेरी जाने का समय नहीं होता, शाम को सप्ताह के बाकी दिन खुलती है. जून इस समय दफ्तर का कुछ काम कर रहे हैं, नन्हा पढ़ाई में व्यस्त है और उसे समय मिल सकता है ध्यान के लिए, पांच फरवरी से स्कूल में भी ‘ध्यान’ जरूरी होगा.

जब बात करने को कोई न हो तो डायरी से बढ़कर कोई नहीं, यह उसकी हर बार सुनती है, समझती भी होगी. आज महीने का, नये वर्ष के पहले महीने का अंतिम दिन है. सुबह उठे तो बादल नहीं थे, दिन भर धूप खिली रही पर ठंड बहुत थी. हेड मिस्ट्रेस ने PF के बारे में कहा और यह स्वीकार किया कि स्कूल पैसे कमाने की मशीन बनता जा रहा है शिक्षा संस्था वालों के लिए, खैर, उसे इस विषय में ज्यादा जानकारी भी नहीं है और स्कूल में न इन सब बातों के लिए वक्त बचता है. जून आजकल अस्वस्थ चल रहे हैं, हर समय परेशान रहते हैं और उन्हें खुद भी नहीं पता कि उनकी परेशानी की वजह क्या है. उससे बात करना भी उन्हें नागवार गुजरता है, उसे यह देख-सुनकर अच्छा नहीं लगता पर वह यह समझ पाने में असमर्थ है कि उन्हें किस बात का दुःख है ? नन्हे के फाइनल एग्जाम इसी महीने यानि फरवरी में हैं, वह वहाँ व्यस्त है, घर एकदम चुपचुप सा लगता है जैसे यहाँ कोई रहता ही न हो. आज सुबह उसने माँ-पिता से बात की वह उसके पत्र की प्रतीक्षा करते रहे, और पता नहीं कहाँ उसके दो पत्र रास्ते में ही गुम हो गये.




भावातीत ध्यान- महर्षि की देन



आज दो महान हस्तियों का जन्मदिन है, एक स्वामी विवेकानन्द और दूसरे महर्षि महेश योगी, जिनका जन्मदिन आज वे स्कूल में वार्षिक उत्सव के रूप में मनाने वाले हैं. यह डायरी जून ने उसे तब दी जब वे अपनी यात्रा से लौटे थे, पर यह इतनी सुंदर है और जून के दफ्तर से मिली है सो वह इसमें लिखने से झिझक रही थी पर आज जब उसे लगा कुछ लिखना ही है तो इसने उसे लुभाया और उसने तय किया है आज के बाद यह पूरे वर्ष यह उसके साथ रहेगी. नया साल गोवा में आया. वे वापस उस दिन लौटे जब उनके विवाह की वर्षगाँठ थी. अज दस जनवरी है, सब ठीक है बस सिवाय कभी-कभार एक उड़ते हुए से बेचैनी के ख्याल के..उसे पता नहीं क्यों, जानने का न तो प्रयास ही किया न ही समय ही मिला कि इस बेचैनी के कारण तक पहुंचे.

आज बीहू का अवकाश है, यूँ तो कल भी छुट्टी थी, परसों वार्षिक उत्सव अच्छा रहा. अब सोमवार को पुनः स्कुल खुलेगा. जून आज कोलकाता गये हैं, वहाँ से मुम्बई और फिर पनवल, जहाँ दो दिन की कांफ्रेंस है. कुल एक हफ्ता लग जायेगा. आज बहुत दिनों के बाद वह संगीत के अभ्यास के लिए गयी, टीचर ने एक बंगला गीत सिखाया बड़े ही धैर्य पूर्वक. एक गाना लिखने को भी दिया कैसेट से ही. सुबह से वर्षा हो रही थी, इस वक्त थमी हुई है पर बाहर अँधेरा है और ठंड भी. चारों तरफ एक अजीब सी ख़ामोशी है. नन्हा फाइनल परीक्षा के लिए पढ़ाई कर रहा है. दफ्तर में छुट्टियाँ शुरू हो गयी हैं. लोग वर्षा की वजह से या त्योहार के कारण अपने-अपने घरों में बंद हैं. वह थोड़ी देर बाद सांध्य भ्रमण के लिए जाना चाहती है, पर बेहतर होगा अपने लॉन का ही उपयोग किया जाये, हफ्तों बाद अकेले शाम को टहलने जाना कुछ अटपटा सा लगेगा. क्लब की पत्रिका छपकर आ गयी है.

कल रात और आज सुबह भी जून का फोन आया, वे ठीक हैं और आज किसी सम्बन्धी से मिलने जा रहे हैं. सुबह-सुबह पिता का फोन भी आया, उन्हें लग रहा था, मुम्बई से वे घर भी जायेंगे, सो कुछ दवाइयां मंगवानी थीं. जरूर जून के मित्र को भी उनका इंतजार होगा, खैर आज के माहौल में व्यक्ति इतना समझदार होता जा रहा है कि अपने व्यक्तिगत कार्यों को छोड़कर और कहीं जाने आने का न तो समय है न सामर्थ्य, न इच्छा !

आज अवकाश का अंतिम दिन है, कल से स्कूल जाना है, पूरे एक महीने बाद क्लास में जाना कुछ नया सा लगेगा. जून का फोन आज नहीं आया सम्भवत वह यात्रा में होंगे. मौसम खिला-खिला सा है, लॉन में सफाई की गयी है सो बहुत सुंदर लग रहा है. कल शाम एक सखी मिलने आई, बहुत खुश थी, पर पता नहीं यह ख़ुशी कब तक टिकेगी. कल एक दूसरी सखी ने फोन किया पता नहीं क्यों उसे अब पहले सा उत्साह नहीं होता. इस यात्रा में इतने निकट से एक दूसरे को देखकर वे पास आने के बजाय दूर हुए हैं. उसे पता है जून ऐसे में क्या कहते, समय सब ठीक कर देता है, दो, तीन, चार बार बात करने के बाद फिर पहले की सी निकटता हो जाएगी. सब धूल-धवांस झर जाएगी.

आज उसे पांच बजे उठ जाना था ताकि नन्हा समय पर स्कूल जा सके. पर सुबह पंछियों की आवाजें सुनकर उसे लगा अभी बहुत जल्दी है. वह स्वप्न देखने लगी और जब नींद खुली तो बहुत देर हो चुकी थी, नन्हे ने कहा वह सिटी बस से चला जायेगा. जल्दी से उसने टिफिन बनाया और पड़ोसी ने उसे बस स्टैंड तक छोड़ दिया. वह अपने स्कूल गयी और अभी एक घंटा पहले लौटी है, इस दौरान उसे नन्हे का ख्याल आता रहा. वह सोचती रही, स्कूल से आकर वह यही कहेगा सब ठीक रहा. आज उसका एक टेस्ट भी था. उसे खुद पर आश्चर्य भी हुआ कैसे समय पर नहीं उठ सकी, उसके मन, बुद्धि और भावनाओं तीनों ने उसे धोखा दिया. वह वास्तविकता से दूर कल्पनाओं और स्वप्नों में खोयी थी जबकि समय भाग रहा था. आज की घटना उसे यह भी याद दिलाएगी कि “jun’s absence was not incident free”, it was never.

फिर कुछ दिनों के बाद उसने डायरी खोली है. जब जून यहाँ नहीं थे तो वह बेहद व्यस्त थी और जब वे आये तो उनके साथ और ज्यादा व्यस्त हो गयी. आज बहुत दिनों बाद जागरण भी सुना, कोई कथा चल रही थी पर उसे कहानियाँ सुनना पसंद नहीं है. छब्बीस जनवरी को वे दोपहर को लंच पार्टी करंगे. सुबह उसे परेड भी देखनी है, स्कूल बंद होने के बावजूद वह दिन भर व्यस्त रहेगी. परसों स्कूल में हेड मिस्ट्रेस ने उसे घर आने के लिए कहा, शनिवार को उनके घर गयी तो उन्होंने मैडिटेशन के बारे में बात की, उनका विचार था कि छुट्टी से पहले हर क्लास में कुछ मिनट के लिए ही सही अध्यापिकाओं को ध्यान कराना चाहिए. वह उनकी बात से पूरी तरह सहमत है.

She read a beautiful Swedish proverb- “Those who wish to sing always find a song”.  She wrote- …And I wish to sing the song of love and love is ‘God’. I wish to sing the songs of all things that are beautiful and good, a song of life and  song of death also.





Thursday, July 3, 2014

गोवा से मुम्बई


आज गोवा में उनका प्रथम दिन है, सुबह आठ बजे वे निकट के स्टेशन लोंडा पहुंच गये, जहाँ से चार घंटों में ओल्ड गोवा स्थित टूरिस्ट होटल. शाम के चार बजे रिवर क्रूज के लिए गोवा की राजधानी पंजिम पहुंचे. अन्य कई यात्रियों के साथ सेंटा-मोनिका बोट  द्वारा मांडवी तथा जुआरी नदियों के खाड़ी में गिरने के संगम स्थल तक की एक घंटे की यात्रा का आनन्द उठाया. नौका पर संगीत व नृत्य का आयोजन था, गोअन तथा पुर्तगीज धुनों पर नाचते कुछ जोड़े बहुत मोहक लग रहे था. कुछ बच्चे सांता क्लाज के साथ नाच रहे थे. नदी में अनेक सजी हुई नावें तथा जहाज आ जा रहे थे. उनकी नाव भी रंग-बिरंगे बल्बों से जगमगा रही थी. मांडवी की लहरों पर की इस यात्रा ने उनके चारों ओर उमंग और उल्लास का एक आवरण ओढ़ा दिया है.

गोवा के समुद्र तटों के बारे में एक उत्सुकता सभी के दिलों में थी, अगला दिन उन्हीं तटों पर घूमते हुए बिताया. अगले दिन दक्षिण गोवा के चार सौ साल पुराने दो चर्च देखे. सेंट कैथरीना व से-कैथेड्रल दोनों विशाल एवं भव्य चर्च हैं. प्राचीन गोवा के रहन-सहन को दिखाता एक गाँव भी देखा. मीरामार तट पर सूर्यास्त का आनन्द लिया. गोवा में भगवान शिव व दुर्गा के भव्य मन्दिर भी हैं.  

आज वर्ष के अंतिम दिन वे ‘विलेज दर्शन टूर’ पर निकले. जहां विभिन्न पेड़-पौधों के बारे में नई-नई जानकारियां मिलीं. कभी गोवा उनके लिए एक सुखद स्वप्न हुआ करता था. वे जहाँ भी गये पर्यटकों का मेला दिखा. यहाँ की हवा में कुछ ऐसा है जो तनमन को हल्का कर जाता है. मस्ती की गंध के साथ-साथ मछलियों. समुद्री जीवों और खारे पानी की गंध भी यहाँ कण-कण में घुली हुई है.

आज नव वर्ष का प्रथम दिन है. पूर्व रात्रि को वे मास प्रेयर के लिए चर्च गये, वहाँ सारा कार्यक्रम पुर्तगाली भाषा में हो रहा था. सारा हॉल लोगों से भरा था. बारह बजते ही बाहर कुछ लोग पटाखे चलाने लगे, कुछ नाच रहे थे. उन्हें दोपहर को ही मुम्बई के लिए विदा लेनी है

मुम्बई के नये-नये फ़्लाईओवर्स पर उनकी कार जब दौड़ती हुई गुजरी तो ऐसा लग रहा था मानो वे भारत में नहीं किसी आधुनिक देश में हैं. दिन भर एसल वर्ल्ड, गेटवे ऑफ़ इण्डिया, मैरिन ड्राइव की सैर के बाद सभी अगले दिन के लिए ऊर्जा जुटाने के लिए विश्राम करना चाहते थे. स्वप्न में उसने दूधिया रौशनी में नहाये रस्तों के किनारे लहराता सागर देखा.

बच्चों को नेहरु म्यूजियम तथा नेहरु प्लेनेटोरियम में बहुत कुछ सीखने को मिला. वाकई मुम्बई दुनिया के चुन्निदा खुबसूरत शहरों में से एक है. कल उन्हें ट्रेन से कलकत्ता जाना है जहाँ से फ्लाईट द्वारा परसों वापस असम.

Wednesday, July 2, 2014

लाल बाग़ के फूल



आज सुबह आठ बजे वे बैंगलोर पहुंच गये. इस होटल का सुंदर प्रवेश द्वार काले पत्थर का बना है. कल शाम मदुराई के रेलवे स्टेशन पर एक बूढ़ी स्त्री की अजीब सी भाव-भंगिमा व विद्रूपता भरी हँसी बेचैनी उत्पन्न कर रही थी. जल्दी ही ट्रेन आ गयी और वे आरामदेह यात्रा के बाद कर्नाटक राज्य की राजधानी गार्डन सिटी आ पहुंचे. पहली नजर में शहर सामान्य ही प्रतीत हुआ, स्टेशन से होटल के मार्ग में गंदगी भी दिखी. स्नान व नाश्ते के बाद शहर देखने निकले. जब आमने-सामने स्थित विधान सभा तथा उच्च  न्यायालय की विशाल शानदार इमारतें तथा उनके बाहर सुंदर बगीचे दिखे तब बैंगलोर का स्वच्छ व हरा-भरा रूप देखने को मिला. ‘विश्वसरैया विज्ञान संग्रहालय’ उनका प्रथम पड़ाव था, जहाँ बच्चों को बहुत आनन्द आया. संध्या काल में क्रिसमस के कारण यहाँ के बाजार सजे हुए थे. एमजी रोड पर सांता क्लाज बना एक व्यक्ति सभी को आकर्षित कर रहा था. संगीत का शोर ट्रैफिक के शोर को दबा रहा था. ‘कावेरी आर्ट एंड हैंडीक्राफ्ट सेंटर’ में चन्दन की विशाल व लघु मूर्तियाँ दर्शनीय हैं. तीन सौ एकड़ में फैले ‘कब्बन पार्क’ में स्थित बाल उद्यान व अजायबघर में बच्चों के साथ बड़े भी आनन्दित हुए.  

आज प्रातः वे मैसूर के लिए रवाना हुए. मैसूर महल की शाही शानोशौकत देखकर सभी दंग रह गये. ऊंचे-ऊंचे विशाल हॉल, लम्बे गलियारे व संगमरमर के फर्श, झाड़फानूस व लकड़ी की अद्भुत नक्काशी सभी कुछ आकर्षक थे. उन्हें प्राचीन भारत की संपदा व भव्यता देखकर गर्व हो रहा था. महल की दीवारों पर लगे राज घराने की महिलाओं व पुरुषों के चित्र भी आकर्षक थे. अगला पड़ाव था टीपू सुल्तान व हैदर अली के किलों के अवशेष तथा मकबरे. किले के प्रांगण में एक मन्दिर भी था, जहाँ काफी भीड़ थी.

मैसूर से कुछ दूर लगभग दो हजार वर्ष पुराना चामुंडा देवी का मन्दिर है. मन्दिर के मार्ग में काले पत्थर की विशाल नंदी बैल की मूर्ति दर्शनीय है. कावेरी, हेमवती तथा लक्ष्मण तीर्थ नदियों के संगम पर बने वृहत कृष्णा सागर बाँध को देखते हुए लगभग डेढ़ किमी पैदल चलकर वे विश्व प्रसिद्ध वृन्दावन गार्डन पहुंचे. जहाँ फूल तो अधिक नहीं थे किन्तु जगह-जगह फौवारे व स्वच्छ जल की झीलें मोहक लग रही थीं. किनारे पर लगी रंगीन बत्तियों की छाया पानी पर पड़ने से तो उनकी आभा और बढ़ गयी थी. संगीतमय फौवारों तथा थिरकती रोशनियों का जादू सब पर छा गया था. पूरा बगीचा लोगों के हुजूम से भरा हुआ था.

आज वे किड्स कैम्प तथा इस्कॉन मन्दिर देखने गये थे. बच्चों के लिए किड्स कैम्प में ढेर सारे आकर्षण थे. एक छोटी सी पहाड़ी पर स्थित फूलों व बगीचों से सजे संगमरमर से बने विशाल तिमंजिला इस्कॉन मन्दिर में ‘हरे कृष्ण हरे राम’ की धुन गूँज रही थी. राधा-कृष्ण की सुंदर मूर्तियों के दर्शन कर उन्होंने प्रसाद लिया और ‘लाल बाग’ का रुख किया. जितना विशाल है यह बाग उतना ही रोचक है इसका इतिहास. इसको पहले-पहल हैदर अली ने १७६० में बनवाना आरम्भ किया था. दो सौ चालीस एकड़ में फैले इस बाग को बाद में टीपू सुल्तान ने विकसित किया. यहाँ स्थित लंदन के क्रिस्टल पैलेस की झलक दिखाते ग्लास हाउस में चल रही पुष्प प्रदर्शनी देखकर सभी के दिल बाग-बाग हो  गये.  

Tuesday, July 1, 2014

जुड़वां चट्टानें- कोडाई कनाल


आज सुबह वे आश्रम के ‘योग केंद्र’ गये, जहाँ आश्रमवासी ध्यान कर रहे थे. इसके पूर्व इमली के घने वृक्षों से घिरे रास्तों से गुजरकर सूर्योदय देखने भी गये पर बादलों तथा धुंध के कारण सूर्य छिपा रहा. श्वेत फेन उगलती व चट्टानों से टकराती लहरों का जाल और उन पर सवार छोटी-छोटी नावों में नाविक, ये दृश्य कैमरों में कैद किये. थोड़ी देर में वे यहाँ से विदा लेंगे और तीन सागरों के पावन संगम तथा पवन चक्कियों के शहर कन्याकुमारी के सुंदर दृश्य उनके मानस पटल पर सदा के लिए अंकित हो जायेंगे.

कन्याकुमारी से बस की यात्रा करके कल संध्या छह बजे वे मदुराई पहुंचे. यह होटल काफी अच्छा है, कर्मचारी आदेश की प्रतीक्षा में हर समय हाथ बांधे खड़े रहते हैं. सबसे अच्छी बात है कि ‘मीनाक्षी देवी’ का मन्दिर यहाँ से कुछ ही दूरी पर स्थित है.  प्राचीन काल से मदुराई तमिल संस्कृति का केंद्र रहा है, स्कूल में उसने पढ़ा था, मन्दिर स्थित स्तम्भों में से संगीत के सप्त सुर निकलते हैं, आज उसकी सत्यता को अपनी आँखों से देखा. यह उन सभी के लिए एक अनोखा अनुभव था. मन्दिर मार्ग में जगह-जगह फूलों के हार तथा सुगन्धित गहरे बिक रहे थे. मन्दिर के गोपुरम को छूकर आती पवित्र गंधों से पूरित हवा उनके नासापुटों में भर गयी.  एक मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है. मन्दिर का विशाल भव्य गोपुरम अतुलनीय है बड़े-बड़े प्रांगण, हजारों स्तम्भ, तथा विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक मूर्तियाँ देखते ही बनती हैं. मीनाक्षी देवी की मुख्य प्रतिमा की तो वे झलक ही पा सके क्योंकि दर्शनार्थियों की भीड़ बढ़ती जा रही थी.

आज वे दक्षिण भारत के सुंदर पर्वतीय शहर ‘कोडाइकनाल’ में हैं. सुबह सिटी टूर पर निकले तो मौसम काफी ठंडा था, सूर्य देव भी बादलों व धुंध के पीछे दुबक कर बैठे थे. दिन भर बदली छाई रही और बूँदाबांदी होती रही. गाइड बाबू बहुत कुशल था, विभिन्न दर्शनीय स्थलों के बारे में उसे विस्तृत जानकारी थी. ‘कुरिंजी अंडावर मन्दिर’ देखा जो  बारह वर्ष में एक बार खिलने वाले कुरिंजी फूल के नाम पर किसी यूरोपियन की याद में बनाया गया है. कोडाई का रोचक व विचित्र अजायबघर भी देखा, जहाँ मानव भ्रूण की विभिन्न अवस्थाओं को बोतलों में बंद करके रखा था. बहुत से पक्षियों व जानवरों के तन भूसे से भर कर रखे हुए थे जो जीवंत लगते था. मीलों तक फैले कतार में लगे सुंदर चीड़ के वृक्षों को नजदीक से देखना भी अच्छा अनुभव था. यहाँ युकिल्प्ट्स के भी अनेक वृक्ष हैं, जिनकी तीव्र गंध हर कहीं पीछा करती है.

आज मौसम मेहरबान है. गगन में सूरज चमक रहा है. आज वे सभी ‘कोकर वॉक’ पर घूमने जाने वाले हैं. कोडाई वाकई एक बेहद सुंदर पहाड़ी प्रदेश है. गहरी घाटियाँ और उनसे उठते बादल जो पल भर में ही सारे दृश्य को आँखों से उझल कर देते हैं, अति मोहक हैं. जुड़वाँ चट्टानें देखने गये तो सारा दृश्य धुंध से घिरा था, अचानक पल भर के लिए कोहरा छंटा और दो चट्टानों की झलक मिली, सारे यात्री मारे ख़ुशी के चिल्ला उठे पर अगले ही पल सब कुछ पुनः बादलों से ढक गया. उसे इलाचंद्र जोशी का वर्षों पहले पढ़ा उपन्यास स्मृति में कौंध गया जिसमें ऐसे किसी पर्वतीय स्थल का वर्णन था. कुछ देर में यहाँ से उन्हें वापस मदुराई जाना है जहाँ से रात्रि को रेल द्वारा बैंगलोर.