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Friday, December 11, 2020

श्वेत बदलियाँ

 


रात्रि के सवा आठ बजे हैं। टीवी पर कारगिल दिवस पर दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आ रहा है। प्रधानमंत्री का संबोधन प्रेरणात्मक है। कुछ देर पूर्व नन्हे और सोनू से बात हुई, वे लोग काबिनी गए हैं, जो मैसूर से एक घण्टे की दूरी पर है. वे एक ईको रिजॉर्ट में ठहरे हैं. जहां एक नदी भी है, मिट्टी की दीवारों वाला कमरा है, छत भी छप्पर वाली है, पर एसी लगा है भीतर. आधुनिकता और परंपरा का अध्भुत मिश्रण. सुबह एक योग साधिका मिलने आयी, उसका दांया कंधा पट्टी से बंधा था, सिर पर चोट का निशान था, टेप लगा था. बताया, कल शाम को गैरेज के पीछे बगीचे से भिन्डी लेने गयी थी, गिर गयी. हाथ के बल गिरी थी सो कंधे में फ्रैक्चर हो गया. एक महीना लगेगा ठीक होने में. फिर भी वह काफी उत्साह से भरी थी, आत्मिक शक्ति से ओतप्रोत वह हँस रही थी. अगले वर्ष वह भी रिटायरमेंट के बाद कोलकाता जाने की तैयारी करेगी. पिताजी हाल में ही नहीं रहे. पुत्र दिव्यांग है, पर उसकी मुस्कान मिटती नहीं. जिसने अपने हृदय में परमात्मा की उपस्थिति को एक बार महसूस कर लिया है, वह हर हाल में प्रसन्न रह सकता है. एक अन्य साधिका राधा-कृष्ण की भक्त है, उनके भजन पूर्ण मगन होकर गाती है. सुबह स्कूल गयी तो पहली बार यह ड्राइवर आया था, वैसे वह कई वर्षों से गाड़ी चला रहा है पर उसका हाथ उतना सधा हुआ नहीं है. दोपहर को घर के सामने से एक शवयात्रा को जाते देखा. कल शाम ही कम्पनी के उन अधिकारी का काफी समय से चल रही किडनी की समस्या से देहांत हो गया था. शाम को बगीचे में टहल रही थी तो बच्चों ने कहा, आकाश में कितने सुंदर बादल हैं, तस्वीरें उतारने को भी कहा. बच्चों में सौंदर्य बोध स्वाभाविक होता है, उनकी आँखें शुद्ध होती हैं, तीन वर्ष का बालक भी बादल को दिखा कर कह रहा था, कितना सुंदर है ! भगवद्गीता पर व्याख्या सुनी आज, प्रकृति  और पुरुष के द्वारा इस सृष्टि की रचना होती है. जिन चीजों को हम छोड़ना चाहते हैं, वह छूट जाएँ यही मुक्ति है ! प्रेम से भरे रहना भक्ति है, अशांति से मुक्ति रहना शांति है ! रामानुजम की गीता पर व्याख्या पढ़ी कुछ देर. 

सुबह जल्दी नींद खुली, पर जब भ्रमण के लिए तैयार हुई तो आश्चर्यजनक रूप से बन्द हो गयी, आधा घन्टा रुकी रही, घर लौटने के बाद तेज वर्षा पुनः होने लगी. आज राज्यसभा में भी ‘मुस्लिम महिला विवाह सरंक्षण अधिनियम’ ट्रिपल तलाक बिल पास हो गया. आज वाकई मुस्लिम महिलाओं के लिए ख़ुशी का दिन है, मोदी सरकार ने जो कहा था, वह कर दिखाया है. महिलाओं में ख़ुशी का माहौल है. कितनी बड़ी कुरीति है यह तीन तलाक की प्रथा, दुनिया के बीस इस्लामिक देश इस प्रथा को बन्द कर चुके हैं. कश्मीर के बारे में एक कार्यक्रम देखा, सम्भवतः मोदी सरकार कोई बड़ा निर्णय लेने वाली है स्वतन्त्रता दिवस से पूर्व. 


छोटी बहन का जन्मदिन है आज, उसे मोबाइल पर केक काटते हुए देखा, ढेर सारी अन्य वस्तुएं भी थीं, पर एक विशेष व्यंजन था, करेले के चिप्स !उसके लिए एक कविता भेजी थी उसने सुबह. उसे राखियां भेजनी हैं, दो हफ्ते ही शेष हैं. इस बार यहाँ बच्चों को विशेष भोज देना है रक्षा बन्धन पर, यह अंतिम उत्सव होगा उनके जाने से पूर्व. आज भी सुबह से दोपहर तक लगातार वर्षा होती रही, शाम को सामने भ्रमण पथ पर टहलने गयी, मैदान में पानी भर गया था. तस्वीरें उतारीं, काफी अच्छी आयी हैं. आज सुबह देखा, वर्षा में भीगती हुई एक काली जंगली मुर्गी अपनी चोंच में एक कीड़ा पकड़े जा रही थी, लगा अवश्य अपने बच्चे के लिए ले जा रही होगी. तभी झाड़ियों से काला चूजा निकला, जरूर  उसके मुख में डाला होगा. दूर से देख नहीं पायी, प्रेम की भावना हर जीव में प्रकृति की तरफ से मिली है. वे यदि किसी से प्रेम करते हैं तो इसमें उनकी कोई सफलता नहीं है, बल्कि जब वे किसी से द्वेष करते हैं तो इसमें उनका प्रयास अवश्य सम्मिलित है. परमात्मा उन्हें मिला ही हुआ है, संसार उन्होंने खुद बना लिया है. संसार से परमात्मा ढक गया है. 


भक्त के दिल की हालत को बयान करते हुए शब्द फिर उस पुरानी डायरी में पढ़े  महादेवी वर्मा के लिखे - 


वर देते हो तो कर दो ना 

चिर आंखमिचौनी यह अपनी, 

जीवन में खोज तुम्हारी है 

मिटना ही तुमको छू पाना !


तुम चुपके से आ बस जाओ ‘

सुख-दुःख स्वप्नों में श्वासों में, 

पर मन कह देगा ‘यह वे हैं’

आँखें कह देगीं पहचाना !


क्यों जीवन के शूलों में 

प्रतिक्षण आते जाते हो ! 

ठहरो सुकुमार ! गलाकर 

मोती पथ में फैलाऊँ ! 


हंसने में छू जाते तुम 

रोने में वह सुधि आती,  

मैं क्यों न जगा अणु-अणु को 

हँसना-रोना सिखलाऊँ !


Thursday, September 20, 2018

सिस्टर शिवानी का कार्यक्रम



शाम के चार बजकर दस मिनट हुए हैं. आज भी क्लब में मीटिंग है. कल बड़े भाई आ रहे हैं, वह उन्हें लेने जाएगी. सुबह वह मृणाल ज्योति गयी थी, शिक्षक दिवस का कार्यक्रम था, क्लब की तरफ से व अपनी तरफ से भी उसने सभी अध्यापिकाओं को उपहार दिए. उनके द्वारा पेश किया कार्यक्रम भी अच्छा रहा. सुबह नींद जल्दी खुल गयी, कुछ देर ध्यान किया बाद में फिर नींद आ गयी, किसी ने आवाज दी उस नाम से जिसमें उसे जून बुलाते हैं. कैसा रहस्यमय यह संसार, कौन है जो बिना मुख के बोलता है, कौन है जो बिना हाथों के छूता है, उस दिन कंधों पर जो स्पर्श किसी ने किया था, वह अभी तक सिहरन पैदा कर देता है. पिछले कुछ दिनों से एक गंध हर समय साथ रहती है. कैसी है यह गंध, क्या है इसका स्रोत..कुछ पता नहीं. आज कई दिन बाद फोन ठीक हुआ, शायद दो-तीन दिन बाद ब्लॉग पर लिखा. कविता कई दिनों से नहीं लिखी, समय भी तो चाहिए और एक भिन्न भाव दशा, अब मन स्थिर हो गया है.

कल भाई की फ्लाईट समय पर थी. दोपहर बाद वे हवाई अड्डे से घर वापस आ गये थे. सुबह भ्रमण के लिए गये. भाई को यहाँ अच्छा लग रहा है. दिन भर कुछ न कुछ क्रिया-कलाप होता है. शाम को क्लब जाना था, वापस आकर भोजन करते और सोते काफी देर हो गयी. आज भी सुबह स्कूल गयी, शाम को क्लब में एक परिचित परिवार का विदाई समारोह था. अच्छा रहा, लौटने में देर हो गयी. भाई तब तक जगे ही थे. अखबार में सुडोकू हल कर रहे थे.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. समय जैसे तीव्र गति से भाग रहा है. आज वे ड्राइवर के साथ दूर तक घूमने गये, भाई को पाइप ब्रिज दिखाया. उन्होंने ही बाजार से सब्जी भी खरीदी. शाम को योगनिद्रा का अभ्यास किया. लगभग रोज ही एक बार सिस्टर शिवानी को सुनने का क्रम भी बन गया है. वह अस्पताल गयी, एक सखी की सासुमाँ वहाँ भर्ती हैं. उसे देखकर वह प्रसन्न हुई. प्रेम से किया गया छोटा सा कृत्य भी किसी को राहत दे जाता है.

शाम के साढ़े पांच बजे हैं. बाहर से जंगली काली मुर्गी की आवाज लगातार आ रही है, जो अपने पूरे परिवार के साथ बांस की हेज में रहती है. जब बगीचे में कोई नहीं होता तब घूमती फिरती है और शोर मचाती है, बाहर जाकर देखें तो छुप जाती है. अभी कुछ देर पूर्व वे बगीचे में थे. भाई ने एक तस्वीर ली, आंवले के वृक्ष पर बैठी गिलहरी की. आकाश पूर्व में गुलाबी हो रहा था. कल शाम वे भ्रमण पथ पर जाकर आकाश की तस्वीर उतारेंगे. आज जून इटली के शहर ट्यूरिन में हैं, उन्हें वापस आने में चार-पांच दिन और हैं. कल फेसबुक पर एक वरिष्ठ लेखक ने प्रश्न किया, वह फेसबुक पर क्यों है, सहज ही उत्तर लिख दिया, पर उन्होंने उसे टैग करके पोस्ट कर दिया, कितने ही लोगों ने पढ़ा, उसकी एक तस्वीर भी पोस्ट कर दी, कब किस मार्ग से लोगों से जुड़ना होगा, कौन जानता है. विचार किस प्रकार उनका भाग्य बनाते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण आज देखा. उन्हें मनसा, वाचा, कर्मणा कितना सजग रहना होगा.

Sunday, October 29, 2017

दही और मुसली


आज सुबह साढ़े तीन बजे ही नींद खुल गयी, लगा जैसे भीतर कोई कह रहा है, बैठ जाओ. उठकर कुछ देर बैठी. अद्भुत शांति थी सब ओर. फिर जब पंछी बोलने लगे दिनचर्या आरम्भ हो गयी. नाश्ता आज जून ने बनाया, मुसेली में दही मिलाकर, पिछले दिनों उसके न रहने पर वह यही खाया करते थे. आज भाई के यहाँ हवन और ब्राह्मण भोज है. उसने फोन किया पर शायद वह व्यस्त थे. समय के साथ उनके मन का घाव भी भर जायेगा. भाभी को याद करके उसे लगता है, कितना कुछ वे इस जगत में एकत्र करते हैं पर मृत्यु के एक झटके में सब खो जाता है.

कल इतवार था, कुछ नहीं लिखा. आज स्कूल का दिन था. सुबह अलार्म सुनकर बंद किया तो एक स्वप्न शुरू हो गया. एक हॉस्टल में वे हैं. ढेर सारी लडकियाँ हैं. सुंदर ड्रेसेज हैं उसके सूटकेस में. कालेज है जिसमें लडके भी हैं. वहाँ एक बगीचा भी है. सब्जियां लगी हैं उसमें, कितना स्पष्ट था सब कुछ पर सभी मिथ्या, असत्य..कितने दिनों बाद ऐसा स्वप्न देखा. इमारत, कमरा सब कुछ कितना बड़ा और कितना भव्य. निकुंजों में चिड़ियाँ भी दिखीं. स्वप्न जगाने के लिए ही आते हैं. शाम के चार बज चुके हैं. बाहर धूप तेज है. कल स्कूल में नन्हे-मुन्नों को व्यायाम कराते वक्त वह फिर से वह नन्हा भूरा कीट आया था, उसके वस्त्रों पर बैठ गया. सुबह नन्हे की मित्र व उसकी माँ को फोन किया, पर उन्होंने नहीं उठाया. नन्हे ने कहा किसी भी हालत में वह पुनः उस विषय पर नहीं सोच सकता है. अवश्य ही उसे बहुत दुःख हुआ होगा, पर वह समझदार है, आशावादी भी है. ईश्वर से प्रार्थना है उसे सद्बुद्धि दे, ईश्वर उसे सन्मार्ग पर ही ले जा रहे हैं. उसके लिए जो सही है वही प्रकृति उसके लिए प्रस्तुत करेगी. उनके भीतर जो साक्षी है, वे उसे न देखें पर वह सदा जागृत है ! इस समय भी वह उसे देख रहा है, भीतर एक अखंड शांति है, जिसमें कोई लहर भी नहीं उठती. मन कितना दूर है उससे, काश सभी उस मौन का अनुभव कर पाते ! कल शाम वे जून के मित्र के घर गये थे. आंटी के श्राद्ध व चौथे के लिए तैयारी शुरू हो गयी है.

आज सुबह भी दिनचर्या व्यवस्थित रही. प्रातः भ्रमण से आकर माली को कुछ निर्देश दिए, फिर सहज ही आईने में देखा तो पाया, एक तरफ का बुंदा गायब था, जबकि पीछे का स्टॉपर वहीं लगा था, इसका अर्थ था कि कुछ देर पूर्व ही गिरा होगा. भीतर कोई हलचल नहीं हुई पर बाहर ढूँढने का प्रयास जारी हो गया. माली व स्वीपर बाहर बगीचे में देखने लगे और वह घर में. बाद में नैनी को कपड़े धोते समय टब से मिला. कब गिरा होगा, पता नहीं. नैनी को पुरस्कार दिया, उसने कहा, नहीं चाहिए, पर शायद उसे इतन देय था जो यह घटनाक्रम घटा. कल रात नन्हे को फोन किया, वह परसों चेन्नई जा रहा है, वहाँ से वे पांडिचेरी भी जायेंगे. उसने कहा, वह अपनी मित्र से बात करेगा. आजकल बच्चे बहुत व्यावहारिक होते हैं. वे अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से नियन्त्रण में रख सकते हैं. एक तरह से देखा जाये तो प्रेम के नाम पर व्यक्ति एक-दूसरे का उपयोग ही तो करते हैं, जो स्वतंत्र वनाये वही वास्तविक प्रेम है. प्रेम बंधन का नाम तो नहीं. जो भविष्य में होगा वह तो होगा ही, पर वर्तमान को जीने से वे क्यों चूक जाएँ, वर्तमान का यही पल उनके हाथ में है.


Tuesday, April 18, 2017

सुबह की सैर


आज सुबह टहलने गयी तो पैरों में अचानक ताकत भर गयी थी. कुछ देर दौड़ कर बाकी वक्त तेज चाल से भ्रमण पूर्ण किया. घर आकर विश्राम किया, मन खाली था. जहाँ कुछ भी नहीं रहता, सारे अनुभव चुक जाते हैं, वहीं कैवल्य है, वहीं निर्वाण है. सारे अनुभव मन को ही होते हैं. मन एक मदारी है, वह ढेर से खेल दिखाए चले जाता है, लुभाए चले जाता है. लेकिन जहाँ कुछ भी नहीं रहता, दूसरा कोई रहता ही नहीं, मुक्ति है. गुरूजी कहते हैं, अच्छे से अच्छा अनुभव भी बाहर ही है. वहाँ द्वैत है, अब कुछ देखना नहीं, कुछ पाना नहीं, कुछ जानना नहीं, बस होना है..सहज अपने आप में पूर्ण..मौन ! इस मौन के बाद जो शब्द उठेंगे वह जीवन को उत्सव बना देगें..अर्थात जीवन को उत्सव बना देखने की कामना तो भीतर है ही..कैसा चतुर है मन..एक ही कामना में सब कुछ मांग लेता है और फिर अलग हो जाता है..

आज का भ्रमणकाल कल से अलग था. हरियाली, फूलों की लाली, मनहर मनभावन सुख वाली. नवम्बर की सुबह कितनी सुहानी होती है. आकाश पर रंगों की अनोखी चित्रकारी, वातावरण में हल्की सी ठंडक..पंछियों का कलरव और हवा इतनी हल्की सी..भीतर कोई प्रेरणादायक वचन बोलने लगा. बहुत सारे संशय दूर हो गये. उन्हें साक्षी भाव रहना है, पूर्व संस्कार वश यदि कोई विकार जगता है तो साक्षी भाव में रहने के कारण उसका कोई असर नहीं होता. कैसी अनोखी शांति है इस ज्ञान में. शाम को मीटिंग है, कल एक सखी का जन्मदिन है. सभी कुछ कितना सरल है. वे अपनी पूर्व धारणाओं और पूर्वाग्रहों के कारण जटिल बना लेते हैं. जीवन एक गुलाब की तरह जीना चाहिए या एक संत की तरह..निर्लिप्त..सदा मुक्त !

आज बदली है, ठंडी हवा भी बह रही है. कल आखिर कसाब को फांसी हो गयी. उसकी कहानी इस जन्म की तो खत्म हो गयी, लेकिन अगले जन्म में उसे जाना ही होगा. सुबह साढ़े तीन बजे ही नींद खुल गयी, उठी नहीं, एक स्वप्न चलने लगा. नन्हे को देखा, कल रात माँ, पुत्र के मिलन के जो डायलाग सुने थे, वे भी कहे, सुने, तभी भीतर विचार आया God loves fun वह परमात्मा उन्हें नाटक करते देखकर कितना हँसता न होगा ! सुबह वे साथ ही घूमने गये, बातचीत हुई ज्यादा, घूमना हुआ कम, वापस आये तो माली आ गया था.





Wednesday, July 24, 2013

बैड नहीं गुड मिन्टन

अभी-अभी बैडमिन्टन का एक थकाने वाला गेम खेलकर प्रसन्नचित वह घर वापस आई है, जून सवा छह तक आएंगे, घर कितना शांत है, केवल घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही है. नन्हा पढ़ाई में व्यस्त है सो लिखने का यह सर्वोत्तम समय है कम से कम उसके लिए, वरना लिखने वाले तो ट्रेन में भी लिख लेते हैं. दरवाजा खोलते समय नन्हे ने कहा, नैनी की बेटी आयी थी, जरुर कोई छोटी-मोटी वस्तु मांगने आई होगी, वह कुछ देर बाद पूछेगी, अभी तो साँस तेज चल रही है, आते वक्त सड़क खाली थी तो कुछ दूर तक दौड़ कर आयी, उसे अच्छा लगता है ठंडी हवा को चेहरे पर महसूस करते हुए हल्के धुंधलके में अकेले चल कर आना, पीपल की पत्तियों से झांकता चाँद (पूर्णिमा का लगता है) देखकर मन में एक कविता जग उठी. अभी पौने छह बजे हैं, बाद में वे सब एक मित्र परिवार से मिलने जायेंगे. यहाँ बैठक के इस कोने में मच्छर मोजों के ऊपर से पैरों में काट रहे हैं, उसे आश्चर्य हुआ, इतनी ठंड में भी मच्छर सही-सलामत हैं.
अभी-अभी वह घर लौटी है. सुबह के व्यायाम के बाद उसे जैसा अच्छा महसूस होता है, वैसा ही खेल कर भी. जून ने आज उसे एक गाइड दी है ‘अक्षर’, जो कम्प्यूटर पर हिंदी में काम करने में सहायक है, आज से वह इसे पढ़ेगी और शनि व रविवार को अभ्यास करेगी. जहाँ चाह वहाँ राह..कितनी बार और कितने तरीकों से ईश्वर उसकी सहायता करते हैं, वह उनकी आभारी है.
आज शनिवार है, सुबह नींद अपने आप ही जल्दी खुल गयी, नन्हे का अवकाश है. आंवले का मुरब्बा बनाने का दूसरा चरण शुरू हुआ. शाम को जून के दफ्तर गये, कम्प्यूटर पर हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखीं और एक गेम खेला. बाजार से गाजर-पालक के बीज और फ्लौस्क के बीज लिए, जो कल सुबह लगा देंगे. कल शाम पंजाबी दीदी के पति उनका एक खत और कुछ पकवान लेकर आये, उन्होंने रिटायर्मेंट के बाद एक कम्पनी ज्वाइन कर ली है, उसी के सिलसिले में आए थे.

अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण से वापस आए हैं और उसे रास्ते भर यह अहसास होता रहा, रोज वह वास्तव में अकेली होती थी आज साथ होते हुए भी अकेली है, जून चुपचाप रहे सारे रास्ते, शायद किसी चिंतन में व्यस्त, और संवाद हीनता की यह स्थिति भी शायद वही महसूस कर रही है, अन्यथा वह इसे दूर करने का प्रयास तो करते ही. किसी ने सच कहा है डायरी भी एक मित्र के समान है यदि किसी के पास कोई ऐसा नहीं जिससे वह दिल की बात कह सके तो इसके पन्नों को ही हाले-दिल सुना दे, सब कुछ सुनकर वे दिल का भार तो हल्का कर ही देगें. 

Tuesday, July 10, 2012

नदी तट पर पिकनिक



उसने बहुत दिनों बाद एक पत्र लिखा, उनकी शादी की सालगिरह थी, जून रोज की तरह ऑफिस गए थे. सोचा कुछ तो अलग होना चाहिए, मन में उथल-पुथल मची थी कि ऐसा कुछ लिखे जिससे उसके दिल का हाल वह जान ले. समय कितना जल्दी बीत जाता है, अभी उस दिन की ही तो बात है जब अपने कमरे में बैठकर वह उसका पत्र पढ़ रही थी. और अब तो वह सदा के लिये यहाँ आ गयी है, और उसके बाद आया नन्हा, उनका छोटा सा परिवार बना. उसे लगता है बचपन में वह भी इतना ही प्यारा लगता होगा, गोलमटोल, गोरा-गोरा और गुदगुदा. उसे हँसी आयी कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है मन, उसे याद आये शुरू के दिन उनकी बातें ही खत्म नहीं होती थीं. फिर कुछ दिनों के लिये वे अलग हुए थे वह कितना याद करती थी उसे. उसने सोचा कि वह रोज उसे जल्दी उठने के लिये  कहती है, व्यायाम करने के लिये कहती है, इतवार की सुबह नाश्ते के बाद जब वह फिर से सो जाता है तो टोकती है, साहित्य में रूचि जगाने के लिए कहती है, किताब पढ़ने को कहती है, यह सब पत्र में अच्छी तरह समझा कर लिखा.
आज जून कुछ देर से गया है सांध्य भ्रमण पर, पर माहौल वही है. शाम घिर आयी है, नन्हा सो रहा है, किसी किसी दिन वह खूब सोता है जैसे आज सुबह उठने का नाम ही नहीं ले रहा था, उसे
उठाना पड़ा. पेड़ों की पत्तियाँ देखकर कितना खुश होता है वह. आज सुबह वह कुछ लिखने का प्रयास कर रही थी कुछ लाइनें ही लिख पाई. पंजाब के बारे में रोज वही समाचार सुनते हैं, पढ़ते हैं, हत्या, आतंकवाद ने किस तरह अपने शिकंजे में जकड़ लिया है पंजाब प्रान्त को. क्या सोचते होंगे वहाँ के वासी. उसे अलका की याद हो आयी, उसकी मित्र तथा दीदी की भतीजी जिसकी शादी पंजाब में हुई है. उसने सोचा दीदी से कहकर उसका पता मंगवाएगी पंजाब के कुछ दूसरे समाचार तो जानने को मिलेंगे.
आज नेता जी की ९०वीं जयंती है, कुछ माह पूर्व उसने दो खंडों में एक पुस्तक पढ़ी थी, ‘मैं सुभाष बोल रहा हूँ’, पहली बार मालूम हुआ था कि नेता जी ने वास्तव में कितने साहस के साथ एक महान कार्य का बीड़ा उठाया था. जून आज तिनसुकिया गया है, वह नन्हें के साथ एक सखी के यहाँ गयी थी, वह पूरा एक घंटा चुपचाप खेलता रहा जरा भी परेशान नहीं हुआ. जून ने बताया है कि अगले महीने उसके विभाग के सभी लोग परिवार सहित पिकनिक पर जायेंगे, वे भी जायेंगे किसी नदी तट पर.

Tuesday, June 21, 2011

गुलाब का पौधा


नूना स्नानघर में थी कि दरवाजे पर खटखटाहट हुई, कल भी ऐसा हुआ था. बहुत कोफ़्त होती है ऐसे में. अभी सवा सात ही हुए थे, दूधवाला आज जल्दी आ गया था. आज सुबह वह साथ-साथ ही उठ गये  थे. बाहर लॉन में गए, सुबह का समय उसे सदा से सर्वप्रिय लगता है, उस वक्त वह सबसे अच्छी मनःस्थिति में होती है. याद आती हैं वे सुबहें जब प्रातः भ्रमण के समय गुलाब की झाड़ियों के साथ साथ चलती थी दूर तक अकेले पर हमेशा उसके बारे में सोचते हुए..... फूफाजी का पत्र आया है दादाजी की तबियत ठीक नहीं है, बुआजी घर गयी हैं. अब दूसरा पत्र आने तक उन्हें उनके स्वास्थ्य के बारे में पता भी नहीं चलेगा. आज रात्रिभोज पर जाना है, उसकी पसंद की पीली साड़ी पहनने वाली है नूना, कल रात को सपने में खूब होली खेली, बचपन की सहेली संतोष को देखा. उसकी मकान मालकिन व उनकी बेटियों को भी. उन गमलों का पता नहीं क्या हाल होगा, छोटी बहन ने एक बार भी तो नहीं लिखा, वह गुलाब का पौधा अब बड़ा हो गया होगा.