Wednesday, April 24, 2013

गणपति बप्पा मोरया



श्रीलंका में ‘पीपुल्स अलाइंस’ को वरीयता, श्रीमती चन्द्रिका कुमार तुंगे नई प्रधान मंत्री चुनी गयी हैं. आज फिर एक अंतराल के बाद उसने डायरी खोली है, जबकि पिछले कई दिनों से मन में यह बात आ रही थी, अपने विचारों को केंद्रित करने का यही एकमात्र साधन है. पिछली रात से ही मस्तिष्क में विचार मंथन चल रहा है, यहाँ तक कि सुबह प्रार्थना के समय भी मन स्थिर नहीं रह पाया. लगा शायद तन के भारीपन के कारण ऐसा हुआ हो, सो दोपहर भोजन में फल ही लिए, एक नाशपाती और एक सेब. जून भी देर से आने वाले थे, अब तन हल्का है ही डायरी उठाते ही मन भी शांत है. कई बार वादा तोड़ चुकी है सो अब नियमित लिखने का कोई वादा नहीं, जबकि उसे मालूम है, यह उसके लिए नितांत आवश्यक है और वर्षों बाद कभी इस साल की कोई बात देखने के लिए डायरी खोलेगी तो खाली पन्ने उसका मुँह तो नहीं चिढ़ायेंगे. पिछले दिनों अपने करीब आने से बचने के लिए ही भागती रही इन पन्नों से. आज शाम को एक मित्र परिवार में बच्चे के पहले जन्मदिन की पार्टी में जाना है, याद आता है उनकी शादी के बाद उन्हें चाय पर बुलाया था. उसने पिस्ते के छिलकों से एक गणपति की आकृति बड़े से लकड़ी के बोर्ड पर बनाई है, उसे सेलोफेन पेपर से ढकना होगा धूल से बचाने के लिए और शिव-पार्वती की उस पेंटिंग को भी फ्रेम करना है जो भाभी ने बनायी था.

  कल शाम पार्टी में किसी दक्षिण भारतीय महिला ने कहा, यू हैव एन आर्टिस्टिक फेस, वर्षों बाद कोई ऐसी बात  सुनकर मन में कई भूली यादें ताजा हो गयीं. वह उसकी परिचिता नहीं थीं, और न ही उसने उनका नाम पूछा. पर घर आकर बाथरूम के शीशे में अपने ही चेहरे को ऐसे देखा जैसे पहली बार देख रही हो. पार्टी में जाने से पहले वे एक और परिचित के यहाँ गए थे, उसने ध्यान दिया अच्छा सामान स्टोर में रखा है और सामान्य सामान बाहर सजाया है. उसका मन हुआ कहे क्या एक दिन उन्हें घर सजाने में मदद कर दे.. ? जून को उसने कहा, वही, उस कम्प्लीमेंट के बारे में, कुछ नहीं बोले...तारीफ करने के मामले में थोड़ा कंजूस हैं, पर प्यार के मामले में नहीं. उसके स्वास्थ्य को लेकर जरा सा पता चल जाये तो इतना ध्यान रखते हैं..नन्हे का आज हिंदी का टेस्ट है, और सोमवार से उसके यूनिट टेस्ट भी हैं, अब उसे परीक्षा से कोई घबराहट नहीं होती, आनंद आता है. कल पार्टी में एक और परिवार मिला, वही जो उस दिन उनके यहाँ आये थे, जून के बीएचयू के प्रोफेसर तथा उनकी बेटी व दामाद. होस्ट अच्छी लग रही थी, बहुत जीवंत है वह, ढेर सारे स्वर्ण आभूषण और भारी बार्डर वाली साड़ी, थकावट का नामोनिशान नहीं था उसके चेहरे पर, शायद नन्हे के पहले जन्मदिन पर नूना भी इतनी ही खुश थी, किसी ने कहा भी था, बेटे से ज्यादा खुश माँ है. गमले में गुलाब का एक सुंदर फूल खिला है उसने सोचा, जून को दिखाएगी.

  सुबह के सवा दस हुए हैं, शनिवार को इस वक्त वह टीवी के सामने होती हैं, ‘जमीन-आसमान’ के पात्रों के साथ, लेकिन आज बिजली चली जाने के कारण पसीने में तर हवा के झोंके की प्रतीक्षा कर रही है. सचमुच अभी-अभी हवा का एक हल्का सा झोंका उसके चेहरे को सहला गया है. ‘धर्मयुग’ में उस लम्बी कहानी का अंत अच्छा नहीं हुआ, बुरे अंत भाते न हों, लेकिन होते हैं, वेद राही की कहानी में बांधे रखने की क्षमता थी. कल बहुत दिनों बाद वे एक परिचित के यहाँ गए, जून ने कहा, लुकिंग गुड, गले में नेकलेस पहन लेने से कितना अंतर आ जाता है व्यक्तित्व में, उसे अब बढ़ती उम्र के साथ इन बातों का ख्याल ज्यादा आ रहा है, शायद यही उचित भी हो. कल उन लोगों से भगवद् गीता का एक कैसेट भी लायी, अभी ध्यान से बैठकर नहीं सुना है, वाचक की आवाज उतनी मधुर नहीं है, पर उसे आवाज से क्या लेना, उनकी बात पर ध्यान देना होगा. सुबह-सुबह एक स्वप्न देखा, वे लोग घर गए हैं, राखी का दिन है पर वह राखी लाना ही भूल गयी है, सभी भाई बैठे हैं, इतने वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि शायद उसकी राखी वक्त पर नहीं मिलेगी. इसी कारण यह स्वप्न आया होगा. कल शाम उन्होंने कैरम खेला. खुली हवा में साइकलिंग की, अब उसे आसान लगती है, अभ्यास न होने के कारण ही पहले उसे परेशानी होती थी.  




No comments:

Post a Comment