Thursday, January 14, 2021

चंदा और सूरज

 

आज सुबह अपने आप ही नींद खुल गयी पौने चार बजे. हल्की सी वर्षा हो रही थी. जब छाता लेकर वे टहलने निकले, सड़कों पर पानी जमा था पर कुछ ही देर में बारिश थम गयी. उससे पहले एक स्वप्न देखा था. वे सब कहीं बाहर गए हैं, किसी सराय या धर्मशाला में हैं. माँ व भाई एक कार में बैठ जाते हैं, वह सामान लेकर जाती है पर वे उसे वहीं छोड़कर चले जाते हैं. एक अन्य व्यक्ति भी कार में है  पर कौन है पता नहीं . बचपन में झगड़े का कारण किसी जन्म में हुई इस घटना में छिपा लगता है. इस दुनिया में अकारण कुछ भी नहीं होता, उनके जीवन में जो कुछ भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है. आज छोटे भाई से बात हुई वह माह के अंत में एक सप्ताह के लिए यहाँ आएगा, उसे एक बैंक में ऑडिटिंग करनी है. दोपहर साढ़े बारह बजे उन्हें मृणाल ज्योति जाना था, विदाई भोज के लिए. कार्यक्रम बहुत अच्छा था. हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी और सभी शिक्षक स्वागत के लिए खड़े थे. उन्हें सुंदर सा पीतल का होराई उपहार में दिया और कृतज्ञता पत्र भी पढ़कर सुनाया. इस संस्था से उनका जो संबंध है वह तो दिल में सदा ही रहेगा, जैसा कि जून ने अपने भाषण में कहा था. शाम को छोटे बच्चों के स्कूल में योग कक्षा की शुरुआत की. उनके जाने के बाद वहीं पर महिलाओं का नियमित योग का सत्र होगा।  कम्पनी की तरफ से विदाई समारोह के लिए जून को अगले हफ्ते की एक डेट देने को कहा गया था, पर दो दिन बाद वह बनारस जा रहे हैं. कल शाम छोटी बहन से बात की, रात अपने एक डॉ मित्र से उन्होंने बात की. आज सुबह ननदोई से, सभी ने कहा उनके एक बचपन के मित्र का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. जून ने तय किया कि वह उनसे मिलने जायेंगे.  


आज हफ्तों बाद ब्लॉग्स पर लिखा. अभी भी काफी सामान समेटना शेष है, आज कुछ पेपर्स जला  दिए, और भी निकलेंगे. जून अभी फ्लाइट में होंगे, देर रात वह घर पहुंचेंगे. आज सुबह  व्यर्थ ही उनसे विवाद किया, उनका स्वभाव जानते हुए भी. खुद की बात ही सही है ऐसा सबका विश्वास है. इसलिए हर बात को सिर झुकाकर क़ुबूल कर लेना चाहिए. आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला सूत्र भी यही है, लोगों और परिस्थितियों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकार करें.  दिल बहुत कोमल भी है और उतना ही कठोर भी. आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक और सूत्र है, विपरीत मूल्य एक दूसरे के पूरक हैं. आज मंझली भाभी से बात हुई, उनकी बिटिया मलेशिया गयी है, वहाँ से उसे स्पेन जाना है, उसका होने वाला पति भी उसी के दफ्तर में काम करता है. दो महीने बाद उनके विवाह में उन्हें जाना है. दीदी ने कहा है, वे लोग भी उनके साथ उस यात्रा के दौरान पंजाब व हिमाचल जायेंगे. जून ने उनकी भी टिकट बुक कर दी हैं. आज एक पुरानी साधिका का फोन आया, वह दो-तीन महीने के लिए अपनी बिटिया के पास विदेश जा रही है. कहने लगी, उसके जाने से यहाँ कमी खलेगी, पर इस दुनिया में किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता. दुनिया को उनकी नहीं उन्हें दुनिया की जरूरत होती है ! 


आज शाम से ही पुरानी नोटबुक्स को छाँटने का काम कर रही थी. चार-पांच घण्टे लग गए. जो डायरी साथ रखनी हैं और जो नष्ट कर देनी हैं, उन्हें अलग-अलग किया. किताबों में भी इसी तरह तीन समूह बनाये, एक जो ले जानी हैं, दूसरी जो स्कूल की लाइब्रेरी में देनी हैं , तीसरी जो  महिलाओं को देनी हैं. कुछ देर पहले जून से बात हुई, उनके मित्र अस्पताल में हैं पिछले तीन दिनों से, कल दोपहर तक शायद वापस घर आ जायेंगे. आज वह उन्हें एक अन्य डॉक्टर को दिखाने ले गए. उनके दोनों पुत्र भी आ गए हैं. कल दोपहर गायत्री योग साधिकाओं के समूह ने विदाई भोज रखा है. वे सभी उसके यहाँ आएंगी और अपने साथ भोजन बनाकर लाएंगी. वे भी उनके लिए शिलांग से उपहार लाये हैं. आज दोपहर स्वप्न में कोई सुस्वादु पदार्थ खाया, कैसा जीवन्त अनुभव था. सोने से पूर्व समाधि के बारे में सुना था. पुरानी डायरी में कृष्ण को लिखे पत्र पढ़े ! परमात्मा के लिए प्रेम जैसे उन दिनों पूरे ज्वर पर था, अब भीतर कैसी स्थिरता छा गयी है. दो दिन पूर्व कैसा अनोखा स्वप्न देखा, गुरूजी को देखा, वह सम्भवतः शिष्यों को परख कर रहे हैं, वह उन्हें देखती है और सुध खोकर गिर पड़ती है, फिर देह से निकल कर आकाश में उड़ने लगती है, कितना सजीव था सब कुछ ! जीवन के रहस्य को कोई कैसे समझ सकता है ! 


वर्षों पूर्व ...कालेज खत्म होने बाद उस दिन के पन्ने पर लिखा था - अभी-अभी वह सूरज और चाँद से मिलकर आ रही है. कितना सुख था यह कहना कि वह उनके लिए है ! एक तरफ सूर्य की हल्की लालिमा तथा दूसरी तरफ पूरा गोल चाँद और इतना बड़ा आकाश, कितना सुंदर मैदान, वह पागल थी उस एक क्षण... हँसी उसके होठों से फूट रही थी और शी वाज फुल विद दैट फेमिनिन फीलिंग ... जिस स्कुल में उसने पढाना शुरू किया था, कल वह उसकी प्रिंसिपल से मिलकर अपने ओरिजनल सर्टिफिकेट लेने वाली थी, जो जॉब देने से पहले उन्होंने रख लिए थे. उसे आगे पढ़ाई के लिए अप्लाई करना था. 


Wednesday, January 6, 2021

विदाई समारोह

 

पिछले तीन दिन व्यस्तता में बीते. डायरी लिखने का न समय था न ख्याल ही आया. इस समय रात्रि के नौ बजने वाले हैं जून अमेरिका में रहने वाले अपने कालेज के समय के एक पुराने मित्र से बात कर रहे हैं. जिस कम्पनी में वह रिसर्च का काम करते थे, वहां अनुसंधान विभाग बन्द हो गया है. अब उन्हें दूसरी जगह जाना है. विदाई समारोह में भाग लेने आज जून दफ्तर गए थे. समारोह अच्छा रहा, उन्हें कई उपहार भी मिले हैं, अभी खोलकर नहीं देखे हैं. सभी ने उनके लिए अच्छे शब्द कहे सिवाय एक के, जिन्हें शिकायत है कि जून उन्हें समय पर दफ्तर आने के लिए टोका क्यों करते थे. दुनिया में शत्रुता-मित्रता उसी तरह आती-जाती है जैसे दिन-रात और सर्दी-गर्मी. उन्हें साक्षी भाव से उसका वहन करना है. कल से गणेश पूजा का उत्सव आरम्भ हो गया है. वे तिनसुकिया गए और सभी के लिए पूजा के उपहार लाये. 


आज सुबह वे उस घर की तरफ गए, जहाँ वर्षों पहले पहली बार रहे थे, मात्र छह महीनों के लिए फिर उस घर की तरफ जहाँ नन्हे का जन्म हुआ था, बाहर से ही उसकी तस्वीर उतारी.इस घर में छह वर्ष रहे. शाम को एक अन्य घर की तस्वीर लेनी है जहाँ तेईस वर्ष रहे, और जिसमें अभी रह रहे हैं वह चौथा घर है. आज कपड़ों की आलमारी खाली की. ढेर सारे ऐसे वस्त्र निकले हैं जिन्हें अब पहनना नहीं है, कुछ गर्म कपड़े जो अब बंगलूरू में नहीं चाहिए. सभी को ठीक से तह करके अलग-अलग जगह बाँट देने हैं. बहुत सारी किताबें भी हैं जिन्हें वितरित करना है. कल शिक्षक दिवस है, मृणाल ज्योति में अंतिम बार इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा. 


शिक्षक दिवस पर सुंदर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. एक दूसरे स्कूल में भी उसे बुलाया था जहां योग सिखाने  जाती थी, उन्होंने दो उपहार दिए  हैं, एक विद्यार्थियों की तरफ से और एक स्कूल की तरफ से. उन्हें भी खोला नहीं है. बैठक में फूलों के ढेर और कई अनखुले उपहारों का ढेर लग गया है. लगता है जैसे अब किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह गयी है. उम्र के इस पड़ाव पर आकर जैसे एक तृप्ति की भावना प्रबल हो जाती है. मन की अपार शांति और सुख के सामने वस्तुएं  खिलौने जैसी ही जान पड़ती हैं. शाम को योग कक्षा में भी साधिकाओं ने शिक्षक दिवस मनाया. फूलों के गुलदस्ते और पीतल का एक सुंदर दीपदान उपहार में दिया. अगले हफ्ते से योग कक्षा स्कूल के हॉल में होगी. 


आज सुबह साढ़े आठ बजे वे मोरान के लिए रवाना हुए. कुछ देर पूर्व ही लौटे हैं. मोरान  अंध विद्यालय में श्री विक्टर बनर्जी और उनकी पत्नी श्रीमती माया बनर्जी से मुलाकात हुई. प्रिंसिपल वार्गीश और प्रशासनिक अधिकारी जोशी जी से भी मुलाकात हुई. हर क्लास में जाकर बच्चों को चॉकलेट दीं, प्रिंसिपल स्वयं ले गए. माहौल बहुत स्वच्छ और अच्छा था. मोरान गेस्ट हाउस में दोपहर का भोजन करने के बाद डिब्रूगढ़ में एक फर्नीचर की दुकान पर गए, बैम्बू का एक झूला  पसन्द आया जो असम की एक कलात्मक स्मृति के रूप में वे बैंगलोर ले जाने वाले हैं. 


रात्रि के सवा आठ बजे हैं. प्रधानमंत्री का अपनी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर जोशीला भाषण दिखाया जा रहा  है, जो उन्होंने रोहतक में दोपहर को दिया था. इसरो के प्रमुख सिवान को सांत्वना देता हुआ उनका वीडियो काफी देखा जा रहा है. वह हर स्थिति में अपनी भूमिका सहजता से निभाते हैं. आज सुबह वह एक नई दिशा में गए सूर्योदय की कई तस्वीरें उतारीं। प्रातः भ्रमण अब ज्यादा आनंददायक हो गया है, क्योंकि समय का कोई बंधन नहीं रह गया है. माली से कुछ पौधे प्लास्टिक के गमलों में लगवाये जिन्हें वे अपने साथ ले जायेंगे. दस दिनों तक यात्रा के दौरान उनमें से कितने बचेंगे कहना कठिन है. मात्र सवा महीना रह गया है उन्हें जाने में. अगले सप्ताह शिलांग जाना है. मेघालय में  डौकी नामका एक स्थान है, जहाँ एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव है तथा एक जीवित वृक्ष का पुल है, वहां भी जायेंगे. यह उनकी मेघालय की अंतिम यात्रा होगी.  कल शाम मंझले भाई ने बिटिया के विवाह का समाचार दिया जो दो महीने बाद होने वाला है. उन्होंने पिताजी से बात की, यदि उनका स्वास्थ्य ठीक रहा तो वे भी विवाह में आएंगे.


और अब उस पुरानी डायरी का पन्ना - 


तितली के दिन, फूलों के दिन 

गुड़ियों के दिन, झूलों के दिन 

उम्र पा गए, प्रौढ़ हो गए 

आटे सनी हथेली में 

बच्चों के कोलाहल में 

जाने कैसे खोये, छूटे 

चिठ्ठी के दिन, भूलों के दिन 


नंगे पाँव सघन अमराई 

बूंदाबांदी वाले दिन 

रिबन लगाने, उड़ने-फिरने 

झिलमिल सपनों वाले दिन !


अब बारिश में छत पर 

भीगाभागी जैसे कथा हुई 

पाहुन बन बैठे पोखर में 

पाँव भिगोने वाले दिन 

इमली की कच्ची फलियों से 

भरी हुई फ्राकों के दिन 

सीपी, मनकों, कौड़ी 

टूटी चूड़ी की थाकों के दिन !


अम्मा संझा बाती करती 

भौजी बैठक धोती थी 

बाबा की खटिया पर 

मुनुआ राजा की धाकों के दिन 

वो दिन मनुहारों के, झूलों पर 

झूले और चले गए 

वो सोने से मण्डित दुनिया 

ये नक्शों, खाकों के दिन !


Saturday, January 2, 2021

राष्ट्रीय खेल दिवस



सवा ग्यारह बजे हैं, जून आज देर से घर आने वाले हैं. क्लब में एजीएम चल रही है, शायद एक बजे के बाद आएंगे. नन्हा बाहर बगीचे में झूले पर बैठकर पढ़ रहा है. उसे नहाने के लिए कहा तो वह बाहर चला गया. मौसम इतना गर्म है और वह कल भी दोपहर तक नहीं नहाया था. उसे तन की साज-सज्जा का शौक नहीं है. अब इतनी उम्र होने को आयी है, विवाह भी हो गया है, यदि अब  भी रोज सुबह उठकर नहाने का मन नहीं होता तो आगे  खुदा ही मालिक है. सवा ग्यारह बजे हैं, जून आज देर से घर आने वाले हैं. क्लब में एजीएम चल रही है, शायद एक बजे के बाद आएंगे. नन्हा बाहर बगीचे में झूले पर बैठकर पढ़ रहा है. उसे नहाने के लिए कहा तो वह बाहर चला गया. मौसम इतना गर्म है और वह कल भी दोपहर तक नहीं नहाया था. उसे तन की साज-सज्जा का शौक नहीं है. अब इतनी उम्र होने को आयी है, विवाह भी हो गया है, यदि अब  भी रोज सुबह उठकर नहाने का मन नहीं होता तो आगे  खुदा ही मालिक है. 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. पिछले चार-पांच दिनों से नन्हे के आने तथा एजीएम के कारण जो व्यस्तता बनी हुई थी, वह समाप्त हो गयी है. उस दिन अचानक आकर उसने चौंका ही दिया था, कहने लगा, असम में अंतिम वर्ष है जब वे स्वतन्त्रता दिवस और जून के जन्मदिन की पार्टी दे रहे होंगे, बंगलौर से ढेर सारी मिठाई और अन्य व्यंजन भी लाया था. आज वापस चला गया, दोपहर को सन्डे क्लास में बच्चों को उसके लाये रसगुल्ले और नमकीन खिलाई, रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया. अभी उसका संदेश आया, पहुँच गया है. आज कई राज्यों में बहुत तेज वर्षा हुई, बाढ़, भू स्खलन आदि के कारण लाखों लोगों को कितने कठिन हालात में रहना पड़ रहा है. जून आजकल जरा जल्दी झुंझला जाते हैं, शायद सेवानिवृत्ति निकट आने की वजह से, वैसे यह उसका वहम भी हो सकता है. 


पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, शाम को लाइब्रेरी से लायी एक पुस्तक पढ़ी, पर जब जीवन ही माया है तो उसमें कल्पना का और समावेश करने की क्या आवश्यकता है, कविता ज्यादा करीब लगती है सत्य के... पिछले दिनों नियमित नहीं लिखा, असजगता का परिणाम था, आश्चर्य भी होता है कि अब भी उहापोह शेष है, पर शायद कोई कर्म उदित हुआ था जिसका भुगतान इसी तरह होना था. बहुत दिनों बाद आज चार पोस्ट प्रकाशित कीं, लेखन और पाठन ही उसके प्रिय कार्य हैं, जिन्हें करते समय समय का भी भान नहीं रहता. नन्हे ने मोबाइल में कई नए ऐप्स इनस्टॉल कर दिए हैं, उसके आने से टेक्नोलॉजी का ज्यादा उपयोग करने लगते हैं वे. समाचारों में सुना कांग्रेस के नेता व पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम को तलाश किया जा रहा है, उन्हें सीबीआई की कस्टडी में रखा जायेगा. कुछ दिन पूर्व पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री की हिरासत की बात सुनकर उसे लगा था , भारत में बदले की राजनीति नहीं होती. पर राजनीति में यह उठापटक सामान्य बात है. दुनिया के कई देश कश्मीर पर भारत का साथ दे रहे हैं. कल छोटी बहन से बात हुई, उसने अपनी ड्यूटी के दौरान पैंसठ फोन कॉल्स अटैंड कीं, कितनी श्रमसाध्य होती है एक डाक्टर  की जिंदगी. उसने बताया, मुस्लिम देशों में महिलाओं की स्थिति दयनीय होती है. उसके अस्पताल में कई महिलाएं आती हैं जो काफी दिनों से कितनी दवाएं खा रही हैं, वह भाषा की बाध्यता के कारण उन्हें ज्यादा सलाह नहीं दे पाती. लोग कितना दुःख उठाते हैं गलत दिनचर्या के कारण.  दीदी से बात हुई, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, डॉक्टर ने टीआईए बताया है, एक महीना दवा लेनी है, ज्यादा चलना-फिरना है, कोलस्ट्रॉल बढ़ गया है. छोटे भाई के लिए जन्मदिन की कविता लिखी, उसने अपने टूर के दौरान नए बैंक में अपना जन्मदिन मनाया, सभी कर्मचारी शामिल हुए. नई जगह जाकर भी वह सबको अपना मान लेता है. पिताजी को जून की भेजी चाय मिल गयी है, जो सोनू के पिता जी ने दी थी जब वे गोहाटी गए थे, वह चाय बागानों के लिए सलाहकार हैं. 


आज शाम को भजन संध्या थी, नैनी ने लाल फूलों से मन्दिर सजाया था. रात्रि के सवा आठ बजे हैं. टीवी पर पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के निधन पर शोक संदेश प्रसारित हो रहे हैं. प्रधानमंत्री विदेश यात्रा पर हैं, उनकी तरफ से राजनाथ सिंह जी ने श्रद्धांजलि दी. अमित शाह बहुत गमगीन नजर आ रहे हैं. हाल ही में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने अपनी देह त्याग दी. आज शाम वे जून के एक पूर्व सहकर्मी के यहां गए , उनका पुत्र एक संगीत अकादमी चलाता है. उनका घर संगीत के वाद्यों से भरा हुआ था, कई विद्यार्थी भी वहाँ थे. कल सुबह उन्होंने एक परिवार को नाश्ते पर बुलाया है, शाम को वे स्वयं आमन्त्रित हैं. अब उनके शेष दिन इसी तरह लोगों से मिलते विदाई लेते गुजरने वाले हैं. मात्र पाँच दिन शेष हैं जून के कार्यकाल के. शाम को उनके एक पूर्व कर्मचारी की बेटी आयी, वह एलआईसी एजेंट है, पॉलिसी लेने को कह रही थी. उससे पूर्व मृणाल ज्योति से दो लोग आये, उन्हें बगीचे से ढेर सारे पके कटहल तोड़कर ले जाने को कहा था.  


आज खेल दिवस है, हाकी खिलाडी ध्यान चन्द के जन्मदिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. देश व समाज को स्वस्थ रखने के लिए प्रधानमंत्री ने आज ‘फिट इंडिया’ का अभियान भी आरंभ किया.  


उस पुरानी डायरी में पढ़ा, ... “परीक्षाएं समाप्त हो गईं, अभी परिणाम नहीं आया, कुछ  बच्चों को घर पर पढ़ाना शुरू कर दिया है। एक स्कूल में नौकरी के लिए प्रार्थना पत्र लिखा है। सुबह उठी तो मूसलाधार बारिश हो रही थी। फिर मौसम स्वच्छ हो गया. लगभग नौ बजे तक उसने एक झोंपड़ी बनायी। हरा कागज चाहिए और मिट्टी भी, साथ ही हाथी, गाय, कुआँ  और पानी भरती हुई औरत की कटिंग, पेड़  और फूल। फिर रह जाएंगे बल्ब, चाँद और सितारे, उन्हें एक गत्ते पर बनाना होगा कटिंग करके। कल्पना साकार होगी अवश्य। रील मंगवानी है और हरा, सफेद, चमकीला और नारंगी कागज भी।” आज सोचती है तो कुछ भी याद नहीं आता कैसी बनी थी वह झोपड़ी और क्यों बनायी थी ! यहाँ एक ही जन्म की बातें याद नहीं रहतीं और मानव जन्मों की बात करता है !

 

Thursday, December 24, 2020

मैन वर्सेज वाइल्ड

 

रात्रि के आठ बजने को हैं, टीवी पर तेनाली रामा आ रहा है, रामा का बेटा बहुत नटखट है. पिछले हफ्ते वे गोहाटी गए थे, कल ही लौटे हैं. सुबह उठकर टीवी चलाया तो पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन का दुःखद समाचार मिला, भीतर तक पीड़ा हुई. इतनी प्रखर वक्ता और संवेदनशील नेत्री के इतनी कम आयु में असामयिक निधन से सारा देश व्याकुल हो रहा है. हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पक्ष के हों या विपक्ष के सभी नेता उन्हें नमन करने आये. दुनिया भर के नेताओं तथा विदेश मंत्रियों ने शोक व्यक्त किया है. धारा 370 खत्म होने के बाद कश्मीर में हालात सामान्य हैं. अभी भी धारा 144 लागू है. राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कश्मीर में जाकर स्थानीय लोगों से मुलाकात की. हालात धीरे-धीरे और सामान्य होने लगेंगे. पाकिस्तान ने भारत से सारे संबंध तोड़ने का फैसला कर लिया है. व्यापार तथा राजनयिक संबंध दोनों ही. समझौता एक्सप्रेस को वाघा बार्डर पर ही रोक दिया. उच्चायुक्त को वापस भेज दिया . पाकिस्तान अपना क्रोध, दुःख  व शर्मिंदगी को किसी न किसी तरह तो व्यक्त करेगा ही. वह अपनी शिकायत यूएन भी ले जाना चाहता है किंतु उसकी बात को शायद ही कोई सुनेगा. भारत का मानना है कि यह उसका आंतरिक मामला है. सारा देश कश्मीर को खुशहाल देखना चाहता है. 


आज रात्रि आठ बजे प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे. आज योग कक्षा में वह साधिका आयी थी, जिसे चोट लग गयी थी. अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है. आज उसने पके कटहल के कोये निकलवाये, जून को इसकी गंध जरा भी पसन्द नहीं है. उसके बीज घर में रखने पर भी नाराजगी दिखा रहे थे, उसने ईश्वर से प्रार्थना की उन्हें प्रसन्नता प्रदान करे. एक सखी के यहाँ गयी जिसके पतिदेव को हल्का हृदयाघात हो गया था. वे लोग कुछ दिनों बाद चेकअप के लिए देहली जायेंगे. अभी कुछ देर पूर्व समाचारों में सुना, श्री प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है. मौसम बेहद गर्म है आज, सुबह तेज वर्षा हुई, वे बारिश में खूब भीगे. नैनी ने तस्वीरें खींची, उसे चिंता है कि- उनके जाने के बाद नए साहब उसे काम के लिए रखेंगे या नहीं.  


आज शाम को एक दक्षिण भारतीय सखी के घर वरलक्ष्मी की पूजा में सम्मिलित होने गयी. बहुत सुंदर आयोजन था, प्रसाद भी स्वादिष्ट था, लेमन राइस, इमली राइस, स्वीट राइस और नारियल वाले काले चने. क्लब में टेक्निकल फोरम था, गोहाटी से एक साइकिलिस्ट व उनकी पत्नी आये थे, वे दोनों साईकिल पर लंबी- लंबी यात्रायें कर चुके हैं. उनका भाषण बहुत ही रोचक था, प्रकृति के साथ रहने व व्यायाम करने के बहुत से लाभ भी उन्होंने बताये.  गोहाटी में  केन का कुछ सामान खरीद कर बुक किया था, आज  पहुँच गया. असम की यादों को सदा सजीव रखने के लिए यहाँ के विश्वप्रसिद्ध बांस के फर्नीचर से बढ़कर और क्या हो सकता है. जून ने एक रॉकिंग चेयर ली है अपने लिए, सेवा निवृत्ति के बाद आराम से उसमें झूलते रहने के लिए ! जो फर्नीचर वे अपने साथ ले जाने वाले हैं, उसे पॉलिश भी करवाया है. 


आज प्रधानमंत्री का एक सुंदर कार्यक्रम देखा, ‘मैन वर्सेस वाइल्ड”,  जिसमें उन्होंने उत्तराखण्ड के जिम कार्बेट नेशनल पार्क में कई किमी पैदल यात्रा की. नदी में भी यात्रा की और जानवरों के भय से मुक्त होकर बेयर ग्रिल्स के साथ बातचीत की. अच्छा लगा उनकी बातें सुनकर, कितने सहज लग रहे थे वह, कितने सामान्य और इसीलिए वह इतने विशेष भी हैं वह ! आज दिन में एक सखी ने सावन के उत्सव के लिए बुलाया था, सभी ने सावन के गीत गाए, मेहँदी लगाई और पारंपरिक पकवान खाये. कल रक्षाबंधन के लिए मृणाल ज्योति जाना है, वे इस बार सभी को दोपहर का भोजन खिला रहे हैं, जून भी दफ्तर से वहीं आएंगे. कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं. पन्द्रह अगस्त मनाने की तैयारियां भी चल रही हैं, उस दिन दशकों बाद पूरे कश्मीर में झंडा फहराया जायेगा. 


उस पुरानी डायरी में उस दिन के पन्ने पर भी महादेवी वर्मा की एक कविता ही लिखी थी, शायद यह कविताएं उसे आज के लिए ही तैयार कर रही थीं, जब जीवन एक सरस् जलधारा सा बहता प्रतीत होता है समता का सूरज मानस के क्षितिज पर उगता हुआ लगता है तो यह कविताएं जो दशकों पहले उसने बिना समझे ही अपनी डायरी में उतारी थीं, उसके भविष्य को बता रही थीं, जिसकी उस समय दूर-दूर तक कोई झलक भी नहीं मिलती थी. क्योंकि अगले ही पन्ने पर उसने लिखे थे, “अर्थहीन असम्बद्ध शब्दों का एक रेला ही सही, कुछ तो लिखे” ! सम्भवतः मानव का अवचेतन उसके चेतन मन से ज्यादा छुपाये है. 


सखी मैं हूँ अमर सुहाग भरी ! 

प्रिय के अनन्त अनुराग भरी !

किसको त्यागूँ किसको माँगूँ 

है एक मुझे मधुमय, विषमय 


मेरे पद छूते ही होते 

कांटे कलियाँ, प्रस्तर रसमय 

प्रिय के सन्देशों के वाहक 

मैं सुख-दुःख भेटूँगी भुजभर 

मेरी लघु पलकों से छलकी 

इस कण-कण में ममता बिखरी !


Friday, December 11, 2020

श्वेत बदलियाँ

 


रात्रि के सवा आठ बजे हैं। टीवी पर कारगिल दिवस पर दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आ रहा है। प्रधानमंत्री का संबोधन प्रेरणात्मक है। कुछ देर पूर्व नन्हे और सोनू से बात हुई, वे लोग काबिनी गए हैं, जो मैसूर से एक घण्टे की दूरी पर है. वे एक ईको रिजॉर्ट में ठहरे हैं. जहां एक नदी भी है, मिट्टी की दीवारों वाला कमरा है, छत भी छप्पर वाली है, पर एसी लगा है भीतर. आधुनिकता और परंपरा का अध्भुत मिश्रण. सुबह एक योग साधिका मिलने आयी, उसका दांया कंधा पट्टी से बंधा था, सिर पर चोट का निशान था, टेप लगा था. बताया, कल शाम को गैरेज के पीछे बगीचे से भिन्डी लेने गयी थी, गिर गयी. हाथ के बल गिरी थी सो कंधे में फ्रैक्चर हो गया. एक महीना लगेगा ठीक होने में. फिर भी वह काफी उत्साह से भरी थी, आत्मिक शक्ति से ओतप्रोत वह हँस रही थी. अगले वर्ष वह भी रिटायरमेंट के बाद कोलकाता जाने की तैयारी करेगी. पिताजी हाल में ही नहीं रहे. पुत्र दिव्यांग है, पर उसकी मुस्कान मिटती नहीं. जिसने अपने हृदय में परमात्मा की उपस्थिति को एक बार महसूस कर लिया है, वह हर हाल में प्रसन्न रह सकता है. एक अन्य साधिका राधा-कृष्ण की भक्त है, उनके भजन पूर्ण मगन होकर गाती है. सुबह स्कूल गयी तो पहली बार यह ड्राइवर आया था, वैसे वह कई वर्षों से गाड़ी चला रहा है पर उसका हाथ उतना सधा हुआ नहीं है. दोपहर को घर के सामने से एक शवयात्रा को जाते देखा. कल शाम ही कम्पनी के उन अधिकारी का काफी समय से चल रही किडनी की समस्या से देहांत हो गया था. शाम को बगीचे में टहल रही थी तो बच्चों ने कहा, आकाश में कितने सुंदर बादल हैं, तस्वीरें उतारने को भी कहा. बच्चों में सौंदर्य बोध स्वाभाविक होता है, उनकी आँखें शुद्ध होती हैं, तीन वर्ष का बालक भी बादल को दिखा कर कह रहा था, कितना सुंदर है ! भगवद्गीता पर व्याख्या सुनी आज, प्रकृति  और पुरुष के द्वारा इस सृष्टि की रचना होती है. जिन चीजों को हम छोड़ना चाहते हैं, वह छूट जाएँ यही मुक्ति है ! प्रेम से भरे रहना भक्ति है, अशांति से मुक्ति रहना शांति है ! रामानुजम की गीता पर व्याख्या पढ़ी कुछ देर. 

सुबह जल्दी नींद खुली, पर जब भ्रमण के लिए तैयार हुई तो आश्चर्यजनक रूप से बन्द हो गयी, आधा घन्टा रुकी रही, घर लौटने के बाद तेज वर्षा पुनः होने लगी. आज राज्यसभा में भी ‘मुस्लिम महिला विवाह सरंक्षण अधिनियम’ ट्रिपल तलाक बिल पास हो गया. आज वाकई मुस्लिम महिलाओं के लिए ख़ुशी का दिन है, मोदी सरकार ने जो कहा था, वह कर दिखाया है. महिलाओं में ख़ुशी का माहौल है. कितनी बड़ी कुरीति है यह तीन तलाक की प्रथा, दुनिया के बीस इस्लामिक देश इस प्रथा को बन्द कर चुके हैं. कश्मीर के बारे में एक कार्यक्रम देखा, सम्भवतः मोदी सरकार कोई बड़ा निर्णय लेने वाली है स्वतन्त्रता दिवस से पूर्व. 


छोटी बहन का जन्मदिन है आज, उसे मोबाइल पर केक काटते हुए देखा, ढेर सारी अन्य वस्तुएं भी थीं, पर एक विशेष व्यंजन था, करेले के चिप्स !उसके लिए एक कविता भेजी थी उसने सुबह. उसे राखियां भेजनी हैं, दो हफ्ते ही शेष हैं. इस बार यहाँ बच्चों को विशेष भोज देना है रक्षा बन्धन पर, यह अंतिम उत्सव होगा उनके जाने से पूर्व. आज भी सुबह से दोपहर तक लगातार वर्षा होती रही, शाम को सामने भ्रमण पथ पर टहलने गयी, मैदान में पानी भर गया था. तस्वीरें उतारीं, काफी अच्छी आयी हैं. आज सुबह देखा, वर्षा में भीगती हुई एक काली जंगली मुर्गी अपनी चोंच में एक कीड़ा पकड़े जा रही थी, लगा अवश्य अपने बच्चे के लिए ले जा रही होगी. तभी झाड़ियों से काला चूजा निकला, जरूर  उसके मुख में डाला होगा. दूर से देख नहीं पायी, प्रेम की भावना हर जीव में प्रकृति की तरफ से मिली है. वे यदि किसी से प्रेम करते हैं तो इसमें उनकी कोई सफलता नहीं है, बल्कि जब वे किसी से द्वेष करते हैं तो इसमें उनका प्रयास अवश्य सम्मिलित है. परमात्मा उन्हें मिला ही हुआ है, संसार उन्होंने खुद बना लिया है. संसार से परमात्मा ढक गया है. 


भक्त के दिल की हालत को बयान करते हुए शब्द फिर उस पुरानी डायरी में पढ़े  महादेवी वर्मा के लिखे - 


वर देते हो तो कर दो ना 

चिर आंखमिचौनी यह अपनी, 

जीवन में खोज तुम्हारी है 

मिटना ही तुमको छू पाना !


तुम चुपके से आ बस जाओ ‘

सुख-दुःख स्वप्नों में श्वासों में, 

पर मन कह देगा ‘यह वे हैं’

आँखें कह देगीं पहचाना !


क्यों जीवन के शूलों में 

प्रतिक्षण आते जाते हो ! 

ठहरो सुकुमार ! गलाकर 

मोती पथ में फैलाऊँ ! 


हंसने में छू जाते तुम 

रोने में वह सुधि आती,  

मैं क्यों न जगा अणु-अणु को 

हँसना-रोना सिखलाऊँ !


Friday, December 4, 2020

गोल्डन पगोडा

 

अभी-अभी छोटी ननद से बात की. वे लोग गोहाटी पहुंच गए हैं कल सुबह यहाँ पहुंच जायेंगे. अगले नौ दिन काफी व्यस्त होंगे और अलग भी. नैनी ने बरामदे में एक सुंदर रंगोली बना दी है उनके स्वागत में. उसके हाथों में हुनर है और दिल में जोश भी. उसने अपने पति को काम दिलवाने के बारे में कहा है पर वे चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं. उसे कहा, वह जो काम कर रहा है उसे ही ठीक से करे. क्लब में होने वाली कविता प्रतियोगिता के लिए उसने गुलजार की एक कविता ‘किताबें’ चुनी है, अवश्य ही सबको पसन्द आएगी. 

सुबह समय पर मेहमान आ गए, स्वागत के लिए आरती की थाली सजाई थी, फूलों से उनका स्वागत किया. नाश्ते में अनानास खिलाये, जामुन का जूस दिया और दोपहर को बगीचे से तोड़े नारियल का पानी. वे लोग अपने साथ ढेर सारे बनारसी आम लाये हैं. दोपहर बाद उन्हें ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगी बील पुल दिखाने ले गए, एक सखी और उसकी बेटी भी साथ गए थे. आज शाम को स्थानीय पाइप से बना पुल देखने जाना है. 


रात्रि के आठ बजने वाले हैं. वे नामसाई वापस लौट आये हैं. कल सुबह नाश्ते के बाद रोइंग होते हुए गोल्डन पगोड़ा पहुंचे थे. भगवान बुद्ध की बहुत विशाल मूर्ति के दर्शन किये और रात्रि में निकट स्थित गेस्ट हाउस में रहे. उनके साथ एक परिवार और गया था. सभी महिलाएं एक गाड़ी में और सभी पुरुष दूसरी गाड़ी में. उन्होंने खूब गाने गए, अंताक्षरी खेली और पहेलियाँ पूछीं, कहानियाँ सुनायीं, सुनीं, गढ़ीं. एक साथ भोजन किया और प्रकृति के नजारों का आनंद लिया. ढेर सारे फोटो खींचे. घर लौटे तो पता चला कि किचन का दरवाजा लॉक हो गया है. कुछ देर तक अपनेआप प्रयत्न करने के बाद मदद के लिए फोन किया, आधे घण्टे बाद खुल गया और फिर रात्रि का भोजन बनाया. 


सुबह अलार्म बजा उसके पूर्व भीतर एक गीत सुनाई दिया, जिसकी एक पंक्ति थी, “आ गयी शुभ घड़ी” कोई है भीतर जो जानता है कि उठने का वक्त हो गया. आज धूप निकली है. पिछले दिनों दिन भर वर्षा होती रही. कल शाम मेहमानों को वापस जाना है. सुबह जामुन के बीजों का पाउडर बनाया जो ननद ले जाएगी. उनके लिए अनानास भी मंगाए हैं. कल शाम उस सखी ने जो उनके साथ घूमने गयी थी, डिनर पर बुलाया था, बहुत सारी डिशेज बनायी थीं. उसके पिताजी से मिलने गयी तो बोले, वह उसे पहचानते ही नहीं, उन्हें अल्जाइमर है. आज सुबह एक सखी के पतिदेव को माइल्ड हार्ट अटैक आया, वह उन्हें लेकर डिब्रूगढ़ गयी है. जबकि सुबह अपना बगीचा दिखाने के लिए उन सभी को बुलाया था. अकेले ही सुंदर बगीचा देखा, उसके बाद सब मृणाल ज्योति गए.  दोपहर को महीनों बाद कैरम खेला. नैनी की देवरानी अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखाने आई, उसका हीमोग्लोबिन बेहद कम था, ईएसआर बहुत ज्यादा, उसे खून चढ़ाना होगा. अगले महीने जून को दो दिनों के लिए गोहाटी जाना पड़ सकता है, असम छोड़ने से पूर्व वह भी एक बार वहां जाना चाहती है.  एक दिन वे कामाख्या जायेंगे और दूसरे दिन कुछ परिचितों के घर मिलने.  


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, छाता लेकर टहलने गए, वापस आकर योग साधना. जून होर्लिक्स पीकर दफ्तर चले गए फिर सवा आठ बजे लौटकर नाश्ता किया.  पिछले एक हफ्ते से यही कार्यक्रम था उनका. घर के सामने वाले हैलीपैड पर आज एक हैलीकॉप्टर उतरा और कुछ देर बाद उड़ गया. गेट पर से ही एक वीडियो बनाया. ननद बाजार गयी है, कुछ सामान खरीदने जो उसे यहां से साथ ले जाना है. पिछले आठ दिन कैसे पंख लगाकर उड़ गए, पता ही नहीं चला. आज उसका मन जैसे पिघल गया है, बात-बात पर बहने को तैयार बैठा है. 


बरसों पुरानी डायरी में लिखी महादेवी वर्मा की ये पंक्तियाँ भी कुछ इसी भाव को दर्शाती हैं - 


प्रथम जब भर आतीं चुपचाप

मोतियों से आँखें नादान 

आंकती तब आंसू का मोल 

तभी तो आ जाता यह ध्यान !


घुमड़ घिर क्यों रोते नव मेघ 

रात बरसा जाती क्यों ओस

पिघल क्यों हिम का उर  अवदात 

भरा  करता सरिता के कोष !

........

जिसका रोदन जिसकी किलकन

मुखरित कर देते सूनापन 

इन मिलन-विरह शिशुओं के बिन 

विस्तृत जग का आंगन सूना 


तेरी सुधि बिन क्षण-क्षण सूना ! 



Wednesday, December 2, 2020

महादेवी वर्मा की कविताएं

 

रात्रि के आठ बजकर बीस मिनट हुए हैं. जून से अभी-अभी बात हुई, कूर्ग में उनका कार्यक्रम अभी चल रहा है. उन्होंने वहां की एक तस्वीर भेजी है, बहुत सुंदर स्थान है. नन्हे ने बताया, नए घर में फ्रिज ठीक से काम नहीं कर रहा था, बदल कर नया आ गया है. मौसम आज दिनभर वर्षा का ही रहा, दोपहर को मूसलाधार वर्षा हुई, बगीचे में पानी भर गया था. बच्चों के साथ कागज की नाव चलाई. किचन गार्डन की सारी क्यारियां लगभग डूब ही गयी थी. दो छोटी लड़कियाँ पीछे की सर्वेंट लाइन में नयी आयी हैं, कहने लगीं उन्हें भी योग सीखना है । शाम को भजन संध्या थी, एक साधिका खुद की बनाई लौकी की बर्फी लायी थी. दोपहर को एक सखी का फोन आया, उसकी हफ्ते में दो दिन रात्रि की ड्यूटी लगती है, दिल के मरीज आते हैं, रात भर काफी व्यस्त रहना होता है. उसे भारत आना भी है पर विदेश की सुविधाएं भी नहीं छोड़नी, अब दोनों बातें एक साथ कैसे हो सकती हैं ! भारत में उनकी जायदाद है पर एक बार जो विदेश चला जाता है, घर वापसी कठिन होती जाती है. 

आज सुबह ‘पिता’  एक कविता लिखी, बचपन की जो स्मृतियाँ मन पर अंकित थीं, उन्हीं को शब्दों में उतार दिया, दीदी ने लिखा, बचपन याद आ गया. दोपहर को ‘माँ’ एक छोटा सा लेख लिखा, अपने-आप ही शब्द जैसे कम्प्यूटर की स्क्रीन पर उतरते जा रहे थे. भीतर एक शांति का अहसास हुआ, जैसे कोई भार हल्का हुआ हो. पापा जी ने कहा, जीवन बहुत बड़ा होता है, उसे कुछ शब्दों में कहना आसान नहीं है, वह उसके लेख के बारे में कह रहे थे, उन्हें भी कई बातें याद हो आयी होंगी. शाम को गुरूजी को सुना वह जर्मनी में थे सम्भवतः। बताया, अरस या अलस एक ही बात है, आलस्य जिसके जीवन में है, उसके जीवन में रस नहीं है. जब भी उन्हें दुख होता है, वे अपने पद से नीचे आ जाते हैं. कर्म जो उन्होंने बांधे थे राग-द्वेष के कारण, उन्हीं के कारण सुख-दुःख आते हैं. सुबह टहलने जाने से पूर्व बगीचे में जामुन बीने, इतने सारे थे कि सब उठाने में घँटों लग जाएँ, इस साल पेड़ों ने दिल खोल के सौगात दी है. परिचित परिवारों में सभी को बांट दिए हैं, धोबी, दूधवाले सभी को. बच्चे तो दिन भर पेड़ के नीचे से हटते ही नहीं हैं. कल सुबह माली ने अपने मित्र को पेड़ पर चढ़ा दिया और डालियों को हिलाकर वे जामुन नीचे गिराने लगे, कच्चे, पक्के, डालियाँ सभी कुछ,  उसने जाकर मना किया तब वह नीचे उतरा. उन्हें बस तीन महीने और यहाँ रहना है, फिर यह बाग़-बगीचे एक स्वप्न की तरह हो जायेंगे उनके लिए. जून ने वही से फ़ोन करके माली को  काम करने को कहा, उन्हें फ़िक्र है कि मेहमानों के आने से पूर्व बगीचा पूरी तरह से दर्शनीय हो. 


‘गुरु चरणन में दीन दुहाई’ आज सुबह नींद खुलने से पूर्व भीतर यह पंक्ति आयी, जाने कहाँ से आयी यह पंक्ति ! स्वयं को मधुर स्वर में गाते हुए सुना इस पंक्ति को. एक पुस्तक में किसी साधक के अनुभव पढ़े, जिसे भीतर से प्रेरणा हो रही थी कि जो कुछ भी मन में है, उसे बाहर ले आये. जो भी कामना, इच्छा अधूरी है उसे बाहर लाकर स्पष्ट देख ले, यह जन्म अंतिम जन्म है, ऐसा सोचकर कुछ भी ऐसा न रहे जिसके लिए उसे पुनः जन्म-मरण के फेर में आना पड़े. जब साधक खुद के भीतर ही उस शांति व समता को अनुभव कर लेता है, जो किसी भी स्थिति में खंडित नहीं होती तो सत्य को आँख में आँख डालकर देखने में कैसा भय ? उसने अपने भीतर देखा, स्वास्थ्य ठीक रहे यह प्रथम इच्छा है. संसार के किसी काम आ सके, कुछ कर सके समाज के लिए, यह दूसरी इच्छा है. परमात्मा के साथ एक होकर रहे, वाणी में स्थिरता हो, कभी किसी को दुःख न पहुँचे उसके व्यवहार से या वाणी से, ये तीसरी और चौथी इच्छाएं हैं. इतनी सारी इच्छाएं हैं भीतर, इसलिए कभी-कभी मन में हलचल होती है क्षण भर के लिए, पर सदा के लिए मुक्त होने का आनंद लेना हो तो इन सारी कामनाओं को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर देना ही उचित है, और मन को सदा खाली रखना होगा.  


कालेज के उन दिनों में महादेवी वर्मा की कितनी ही कविताएं डायरी में उतारा करती थी. 


कैसे कहती हो सपना है 

अलि ! उस मूक मिलन की बात 

भरे हुए अब तक फूलों में 

मेरे आंसू उनके हास ! 


किस भांति कहूँ कैसे थे 

वे जग से परिचय के दिन 

मिश्री सा घुल जाता था 

मन छूते ही आंसू कण 


अपनेपन की छाया तब 

देखी न मुकुट मानस ने 

उसमें प्रतिबिम्बित सबके 

सुख-दुःख लगते थे अपने 


किसने अनजाने आकर 

वह चुरा लिया भोलापन 

उस विस्मृति के सपने से 

चौंकाया छूकर जीवन !