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Wednesday, July 5, 2023

पीले रंग की साइकिल


पीले रंग की साइकिल 


जीवन एक शांत नदी की धारा की तरह सुचारू रूप से चल रहा है। आज दोपहर को उसने गणेश जी की पाँच छोटी मूर्तियों पर रंग भरना आरंभ किया। महादेव में समुद्र मंथन हो गया है, किंतु अमृत का बँटवारा अभी शेष है। गायत्री के संस्थापक आचार्य राम शर्मा जी की पुस्तक “चेतन, अचेतन व सुपर चेतन” एक बार फिर पढ़नी आरंभ की है, जो वर्षों पूर्व महिला क्लब की एक एक वरिष्ठ महिला ने भेंट में दी थी। वह कहते हैं, विचार प्राणशक्ति की स्फुरणा है, यदि प्राणशक्ति प्रबल है तो विचार भी सुदृढ़ होंगे। 


आज शाम को आकाश पर बादलों के सुंदर रूप-रंग देखने को मिले। सारा आसमान जैसे रंगों से सराबोर हो गया था।वे टहलने गये थे तथा कुछ फल भी ख़रीदने थे, जून जब दुकान में गये, तो उसने तस्वीरें उतारीं। सुबह-सुबह मन ने यह निर्णय लिया था कि प्रकृति के सौंदर्य के चित्र खींचना और उन्हें प्रकाशित करना यदि इस भाव से हो कि इससे वातावरण में सात्विकता का प्रसारण होगा तो यह भी पूजा का एक कृत्य है। उनके सभी कार्य ईश्वर के लिए हों तो वे यज्ञ स्वरूप हैं। शाम को नन्हे का फ़ोन आया, वे लोग रात को आयेंगे। ठीक आठ बजे वे पहुँच गये। उसके लिए एक पीले रंग की सुंदर लेडीज़ साइकिल लाए हैं। सुबह या शाम वह सुविधानुसार उसमें अभ्यास कर सकती है। साइकिल पर बैठकर हवा को चेहरे पर महसूस करना उसे बचपन में बहुत भाता था। कक्षा सात में थी जब पहली बार पिताजी की बड़ी साइकिल पर सीखना शुरू किया था। अब वर्षों से नहीं चलायी है पर एक बार कोई सीख ले तो भूल नहीं  सकता। जून के पास भी नन्हे की गियर वाली साइकिल है। सोनू उसके लिए लाल छोटे फूलों वाला गाउन भी लायी है। उन्हें एक मित्र के विवाह में सम्मिलित होने कुर्ग जाना है। उसके लिए नृत्य का अभ्यास कर रहे हैं। कोई महिला कोरियोग्राफ़र हैं जो ऑन लाइन अभ्यास कराती हैं। आज सुबह उठी तो दिल में एक हल्की सी ख़लिश थी एक कामना की, जब भी वे आत्मा से नीचे उतर कर अनात्मा के साथ अपनी पहचान बना लेते हैं, तभी भीतर असंतोष उभरता है। बाद में चिंतन-मनन के द्वारा भीतर ही समाधान मिल गया। कर्ता भाव से ही मन बंधन में बंधता है। यही दुख का कारण है। स्वयं को परमात्मा का एक अंश मानकर कर्म होते देना है, पर फल की इच्छा नहीं रखनी। स्वयं को वह परदा मानना है जिस पर दृश्य आ रहे हैं और जा रहे हैं। देह के भीतर उत्पन्न होने वाले स्फुरण को उत्पन्न होते व अस्त होते हुए देखना ही आत्मा की तरफ़ कदम बढ़ाना है; जिसे कोई व्याकुलता नहीं होती, चाहे कितने ही स्फुरण उत्पन्न होकर नष्ट हो जायें, वह सदा पूर्ववत ही रहती है। सुबह साइकिल भी चलायी, बहुत हल्की चलती है। नाश्ते में मकई की रोटी खाकर बच्चे चले गये , उन्हें अपने तीन मित्रों के यहाँ जाना था। शाम को नन्हे का भेजा मोमबत्ती बनाने वाला बॉक्स खोला, जिसमें पूरी विधि लिखी है तथा शीशे की बोतलें भी दी गई हैं, जिसमें वे मोम को पिघलाकर डालने वाले हैं। पापा जी से बात की, अब वे स्वस्थ हैं। उन्होंने ट्रम्प व बाईडेन की बातें भी की। टहलने गये तो वही वृद्ध व्यक्ति मिले, उनका ड्राइवर उनकी बहुत शिकायत कर रहा था। उसे पता ही नहीं है, उनकी शिकायत करके वह अपना ही नुक़सान कर रहा है। 


रात्रि भ्रमण हो चुका है। वापस आकर मोबाइल हाथ में लिया तो समय का पता ही  नहीं चला। इधर-उधर करते-करते बहुत समय ले लेता है, जब कि उस समय का कुछ और उपयोग भी किया जा सकता है। आज सुबह तन्मात्रा पर जानकारी ली, पाँच तत्वों की जो सूक्ष्म शक्तियाँ हैं, इनकी इंद्रियजनित अनुभूति को तन्मात्रा कहते हैं। अभी भी पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं हुआ है। शब्द, स्पर्श आदि का सूक्ष्म रूप है या स्थूल रूप यह तन्मात्रा। जब वे कोई शब्द सुनते हैं तो मन में जो भाव उत्पन्न होता है वह है तन्मात्रा या वह शब्द है। कोई विशेष गंध न होकर शायद गंध मात्र को ही तन्मात्रा कहते हैं।इंद्रियों और तन्मात्राओं के मिश्रण से जो अनुभूति होती है, उसे ही पाने के लिए मनुष्य के विविध विचार और कार्य होते हैं। वह आजकल ‘मन’ के बारे में पुस्तक पढ़ा रही है, अंततः मन की साधना ही तन्मात्रा की साधना है।  


Friday, February 15, 2013

साइकिल की सवारी



कल सुबह से लग रहा था कि कहीं कुछ गड़बड़ है, दोपहर को उपवास किया, फिर शाम को टिफिन में उबले आलू खा लिए कि कुछ तो खा लेना चाहिए और खेलने चली गयी, खाली पेट में आलू वात बढ़ाते हैं, यह पता ही नहीं था, गैस सिर पर चढ़ गयी और दर्द से फटने लगा अच्छा भला सिर. घर आकर वमन किया फिर एक घंटा आराम और तब जाकर सब ठीक हुआ. पूरे वक्त जून के साथ नन्हा उसका बहुत ख्याल रख रहा था. उसको हिंदी में पूरे नम्बर मिले हैं, अगले हफ्ते उसे हिंदी में समाचार बोलने हैं स्कूल की असेम्बली में. उन्हें साथ वाले घर में हो रही शादी में जाना था, जल्दी ही लौट आए वे. वहाँ का प्रबंध बहुत अच्छा था, न ज्यादा शोर न भीड़भाड़, दुल्हन बहुत छोटी लग रही थी बहुत सुंदर. कल उसका फैब्रिक पेंटिंग का काम पूर्ण हो गया, आज दोपहर को पहले पत्रिका पढ़ेगी, फिर न्यूजट्रैक का कैसेट देखेगी फिर थर्मोकोल पर काम शुरू करेगी वह. कल शाम जून ने बहुत दिनों के बाद कहा कि वह हरी साड़ी में अच्छी लग रही थी, उन्हें शिकायत थी कि वह सिर्फ कहीं जाने के लिए ही क्यों तैयार होती है, इसका अर्थ हुआ कि वह उसकी पोशाक आदि पर नजर रखते हैं.

“आदमी अगर जिन्दा रहे तो उसे सौ साल बाद भी खुशी मिल सकती है”, अभी-अभी बाल्मीकि रामायण में हनुमान के मिलने पर सीता के मुख से यह वाक्य पढा. यह बिलकुल ठीक है, हम थोड़ी सी परेशानी होने पर जीवन को व्यर्थ मानने लगते हैं लेकिन कहीं न कहीं खुशी होती है, जो हमें मिलने वाली है. जैसे आज वे खुश हैं, कल उसने गाजर का हलवा बनाया, लाल गाजरें यहाँ नहीं मिलती, नारंगी रंग का हलवा कुछ अलग सा लगता है. उन्होंने किचन में पेंट करवाया था, नई नैनी ने सूखने की प्रतीक्षा लिए बिना पानी डाल दिया, सारा पेंट उतर गया पर..अब इसे कुछ कहने से क्या लाभ. नन्हे के स्कूल जाना है, जून ने फोन पर कहा था, उसको क्लास कैप्टन ने कल मारा था, शाम को वह थोड़ा उदास था, पर सुबह बिलकुल ठीक था. फरवरी का आरम्भ हो गया है, आदर्श महीना है, न सर्दी न गर्मी..यानि वसंत का महीना. कल उसकी पड़ोसिन ने गुलाब की एक कटिंग दी, पीला, लाल व नारंगी रंग का मिलाजुला रंग है उसका, माली ने शाम को लगा दी थी, इस मौसम में तो शायद ही खिले लेकिन अगले मौसम में जरूर फूल आयेगा. कल की तरह आज भी उसने साड़ी पहनी है, अच्छा लगता है हल्का-हल्का, खुला-खुला सा. जून को पसंद भी है, और उन्हें क्या पसंद है क्या नहीं इसका तो ख्याल उसे रखना है न...और इससे उसे खुशी मिलती है, और खुशी इंसान की पहली जरूरत है.

आज नैनी जल्दी आ गयी है, खाना भी बन गया है, इसका अर्थ गाड़ी पटरी पर आ रही है, पिछले दिनों ग्यारह बज जाते थे और काम बिखरा रह जाता था. कल वे स्कूल गए थे, नन्हे की क्लास टीचर और साइंस टीचर से मिले. आज सुबह नन्हा बहुत अच्छे मूड में था, खिला- खिला और ताजा सा. टेप रिकार्डर पर ‘मिली’ फिल्म का गाना आ रहा है, छोटे भाई का उपहार उनकी शादी की सालगिरह पर. कल भी परसों की तरह उसने साइकिल चलाई, बहुत अच्छा लगता है हवा को काटते हुए गति से आगे बढ़ना. लगभग दस सालों के बाद वह साइकिल चला रही है. कितना अजीब लगता है सोचकर कि बचपन कितना पीछे छूट गया है. याद करो तो लगता है कल की ही तो बात है. नन्हा कल पिछले या उससे पिछले साल की गर्मियों को याद कर रहा था कि कैसे एक आम के लिए वह गुस्सा कर रही थी, फिर जून और भी नाराज हो गए थे, उसकी याददाश्त बहुत तेज है. उसे कहानी सुनाने की प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार मिला, उदास था कि प्रथम क्यों नहीं मिला.