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Wednesday, April 22, 2026

वर्डल - शब्दों का एक खेल


वर्डल - शब्दों का एक खेल 


आज का दिन बहुत व्यस्त रहा, फ़िटबिट २४,५२३ कदम दिखा रहा है और ३३ फ़्लोर भी। उनके मित्रगण साढ़े बारह बजे तक आ गये थे। उनके आने से पूर्व सभी कमरों की चादरें बदलीं। भोजन बनाया, जो उन्हें पसंद आया। शाम को उन्हें सोसाइटी (नापा) दिखायी, निकट स्थित एक झील भी, फिर सभी आश्रम गये। गुरुजी यहाँ नहीं हैं, इसलिए सत्संग नहीं हुआ। दोपहर को हुई कन्नड़ा क्लास में १२ वाक्य बनाने को दिये, पता नहीं वह कर पाएगी या नहीं ।  


आज वे मेहमानों के साथ पिरामिड वैली देखने गये। नीचे स्वागत कक्ष में कुछ देर ध्यान सिखाया गे, फिर ऊपर पिरामिड में बैठकर ध्यान किया। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह स्पष्ट प्रतीत हो रहा था। शाम को वर्षा हो गयी, मौसम सुहावना हो गया है। आज से सोसाइटी में नई एजेंसी ने काम करना शुरू कर दिया है, पर बहुत सारी दिक़्क़तें आ रही हैं। पुरानी टीम ने काम करने से मना कर दिया है। कुछ दिन तो लगेंगे, सब कुछ व्यवस्थित होने में। 


आज सुबह वे झील पर सूर्योदय देखने गये। मेहमानों को बहुत अच्छा लगा। दोपहर को नन्हा और सोनू आये थे, बाद में मित्र की बिटिया भी आयी। जून और उनकी टीम ने अति विरोध के कारण कमेटी भंग कर दी है।अब कल से उन्हें व्यर्थ के तनाव से नहीं गुजरना होगा।आज सोनू ने अपने दिल की बात कही। ईश्वर उसकी यह इच्छा पूर्ण करें। जीवन में कितनी भी उलझनें हों, आत्मा की निकटता से सब घुल जाती हैं। 


कल शाम वे नन्हे के घर गये थे। उसके एक मित्र के पिताजी से मिलने, उन्हें नूना ने अपनी लिखी पुस्तक व एक असमिया गमछा भेंट किया।दोनों बच्चे कुछ उदास लगे। उम्मीद है अब बादल छँट गये होंगे। 


आज सुबह दोनों से बात हुई, आपसी विश्वास और बातचीत से सब सुलझ जाता है। जून भी आजकल पुन: सामान्य हो गये हैं। उनसे मिलने हर दिन कोई न कोई आता है, शायद सभी को चिंता है कि इतना श्रम करने के बाद यह परिणाम नहीं आना चाहिए था। नूना को लगता है, जो भी हुआ, वैसा ही होना था, और उसी में सबकी भलाई है। आज निकट वाले गाँव से पहली बार कपड़े प्रेस करने वाला एक व्यक्ति घर से आकर कपड़े ले गया। सोसाइटी में आजकल शांति है। नई एजेंसी को शिकायत है, उन्हें काम करने न देकर अच्छा नहीं हुआ।कुछ लोग निहित स्वार्थ के कारण जरा सा भी परिवर्तन नहीं चाहते। पापा जी से बात हुई, यूक्रेन में चल रहे युद्ध में हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वह भी चिंता व्यक्त कर रहे थे, पता नहीं पुतिन को कब सद्बुद्धि आयेगी। आज सुबह उन्होंने एक घंटे से अधिक ही पैदल यात्रा की, घर से घर तक की यात्रा, जीवन भी तो यही है। अव्यक्त से चलकर अव्यक्त हो जाने की यात्रा ! कल से छोटी बहन की भारत यात्रा आरम्भ हो रही है। ईश्वर उसे शक्ति दे और उसकी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो। आज नैनी ने दोनों सफ़ेद कार्पेट धो दिये हैं और अब सारे डोर मैट्स धोने वाली है। उसे काम करने में कोई कष्ट नहीं होता। दिन भर घर से बाहर ही रहती है, बहुत जीवट है उसमें। 


आज जून की इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार हो गयी। शाम को वे दोनों साइकलिंग के लिए गये। नन्हे को अब रोज़ ही दफ़्तर जाना है। घर से काम करने की छूट अब नहीं रही। सुबह वे टहल कर आये तो दो दुबले-पतले से कुत्ते दिखे, शाम को एक मोटा-तगड़ा कुत्ता दिखा अपने मालिक के साथ, जिसे व्यायाम की ज़रूरत है। आदमियों की तरह कुत्ते भी अमीरी व ग़रीबी में पलते हैं।आज उसने ‘द टाइगर पॉज’ पुस्तक समाप्त कर दी। बहुत रोचक किताब है। गुरुजी के काम करने का तरीक़ा भी पता चलता है। उनका यह कहना कि कोई व्यक्तिगत जीवन नहीं होता, सेवा करो। अपने शिष्यों पर कितना भरोसा है उन्हें। तमिलों ने श्रीलंका में बहुत कष्ट सहे हैं, लेकिन युद्ध से कभी किसी भी समस्या का हल नहीं निकला है। प्रभाकरण भी अंत में मारा गया, हज़ारों तमिलों को नर्क से भी भयानक स्थिति का अनुभव कराके।  


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण करके आये हैं, हवा चेहरे को छू रही थी, शीतलता लिए तेज हवा! जबकि गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है, दिन में धूप काफ़ी तेज होती है। आज तिब्बतियन पुस्तक  में पढ़ा, नींद मृत्यु की झलक है, स्वप्न, मृत्यु के बाद की अवस्था की झलक और गहरी नींद समाधि की झलक है। यदि कोई नींद में प्रवेश करते समय स्वप्न में और गहरी नींद में भी सजग रह सके तो वह मृत्यु के क्षण में भी सजग रह सकता है। आजकल उसका ध्यान गहरा नहीं हो पा रहा है, भाव के ऊपर विचार हावी हो जाते हैं। रविवार को बच्चों से मिलने के बाद शायद मन ज़्यादा स्थिर हो।जून ने इतने दिनों की व्यस्तता के बाद अपने आपको अख़बार, शेयर आदि में व्यस्त रखना सीख लिया है। आज कन्नड़ा कक्षा हुई पर क्रिया के भेदों को याद रख पाना सरल नहीं है। जब तक वह बोलने का अभ्यास नहीं करेगी कठिनाई बनी ही रहेगी।


आज पहली बार ऑन लाइन शब्द पहेली खेल, ‘वर्डल’ खेला, कठिन लग रहा है, अभी अभ्यास नहीं है। इस खेल को पहली बार जॉश वार्डेल ने अपनी मित्र के लिए बनाया था, पर लोकप्रिय हो जाने के कारण न्यूयार्क टाइम्स ने इसे ख़रीद लिया है। शाम को दीदी से बात की, जब वे निकट के गाँव की सड़क पर घूमने गये थे। सड़क नयी बनी है। क्षितिज पर पहाड़ भी स्पष्ट दिख रहे थे, खेत ख़ाली थे। रास्ते में फूलों से लदे पेड़ भी देखे, बैंगनी व पीले, सफ़ेद बोगेनविलिया भी। गुरुजी को सुना, वह कल ही हरिद्वार से लौटे हैं। एक नया दिन उनकी प्रतीक्षा कर रहा है, परमात्मा हर घड़ी, हर जगह उनके साथ है ! उसे पाने के लिए कुछ करना नहीं है, केवल विश्राम करना है, मन की अतल गहराई में विश्राम ! छोटा भाई कोलकाता के पास मायापुर में है। कल अष्टमी है, नन्हा व सोनू आयेंगे, वह काले चने, हलवा व तवा रोटी बनाएगी।