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Wednesday, May 13, 2026

श्री रुद्रम स्तोत्र

श्री रुद्रम स्तोत्र 




कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण के लिए गये तो बायीं तरफ़ के पड़ोसी की नयी कार देख कर ठिठक गये, सिल्वर XUS 700, उनकी कार जैसी है। अभी तक बादल बरसे नहीं, शायद आधी रात तक बरसेंगे। आज मोदीजी ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथन’ के अंतिम दिन भाग लेने वाले पंद्रह हज़ार विद्यार्थियों को संबोधित किया।इस आयोजन में दो हज़ार से अधिक संस्थानों के एक लाख साठ हज़ार छात्रों ने भाग लिया है। आज सुबह वे घर से पंद्रह किमी दूर वैकुण्ठ हिल-इस्कॉन मंदिर देखने गये थे।तिरुमाला मंदिर की तरह बनाया यह राजाधिराज गोविन्दा का अति विशाल और सुंदर मंदिर एक पहाड़ी पर बना है। आज ‘अथर्वशीर्ष’ के अंतिम भाग को भी लिखा, यह अथर्ववेद का ही एक अंश है, जिसे गणेश उपनिषद भी कहते हैं। इसमें भगवान गणेश को ही ब्रह्मांड का कर्ता, धर्ता और हर्ता माना गया है।अद्भुत हैं वेद और उनमें की गयी प्रार्थनाएँ !


आज कोर्स से आने के बाद पहली बार मोबाइल पर राजनीतिक चर्चा सुनी, अच्छी नहीं लगी। गुरुजी को सुनना कितना अच्छा लगता है, वह आज भी उतनी ही शिद्दत से बोलते हैं, जितना सन् बयासी में बोलते थे। वह दिल से बोलते हैं, वह कितना मीठा बोलते हैं। उनकी बात सीधे दिल को छूती है। ‘रुद्रम’ पर उनका पहला प्रवचन सुना, बहुत ही प्रभावशाली है, अनोखा है। रुद्र की परिभाषा दी है, वह कौन हैं? कहाँ रहते हैं ? कल दूसरा व्याख्यान आएगा। ‘श्री रुद्रम स्तोत्र’ कृष्ण यजुर्वेद से लिया गया है, इसमें दुख-पाप के नाश और कल्याण के लिए भगवान शिव की स्तुति की गयी है। वह ‘अथर्वशीर्ष’ की तरह इस पर भी लेख लिख सकती है।कोर्स में सभी को सेवा करने के लिए कहा गया था, साहित्य की जितनी सेवा हो सके, वही उसका प्राप्य है। सुबह टहलते समय एक शिशु चमगादड़ देखा, काले रंग का। वे तस्वीर लेते, उससे पहले ही उड़ गया। 


आज दोपहर को आगे ‘रुद्रम’ सुना, अनोखा स्तोत्र है यह। रुद्र को इस जगत की सब वस्तुओं में, हर कोने में, हर बात में शामिल किया गया है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की अध्यापिका का फ़ोन आया था, वरिष्ठ शिक्षक के यहाँ मीटिंग है, उसे न जा पाने का अफ़सोस हुआ पर बाद में पता चला, वह मीटिंग स्थगित हो गई थी।कुछ देर के लिए सोई तो एक खिचड़ी सपना देखा, पिछले दिनों घटी बातों का मिला-जुला एक सपना, जिस पर एक कहानी बन सकती है। कल पूरे पंद्रह दिनों के बाद बच्चे आने वाले हैं, मिलकर अच्छा लगेगा। जीवन में जैसे एक ठहराव आ गया है। गुरुजी की वाणी आश्वासन देती हुई प्रतीत होती है। बच्चे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हैं, वे उनकी प्रतीक्षा या उनके फ़ोन की प्रतीक्षा ही कर सकते हैं। यही जीवन है, यहाँ ईश्वर के सिवाय तथा अपनी आत्मा के सिवाय कोई भी सहायक नहीं है। प्रसन्न रहकर सदा सबके कल्याण की कामना करना ही जीवन का सर्वाधिक अच्छा सदुपयोग है। 


आज का इतवार अच्छा रहा। सुबह बगीचे में दो घंटे बिताये। दोनों बच्चे तो आये ही साथ में दोनों के कज़िन भी। सब मिलकर स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय नाश्ते के लिए नये खुले रेस्तराँ उडुपी गये। वापसी में निकट स्थित फ़ार्म हाउस की ज़मीन देखने। घर आकर आईपीओ गेम खेला, शेयर ख़रीदने व बेचने का खेल, रोचक है। दोपहर को भाप में चावल के आटे  और नारियल के पाउडर से पुड्डु बनाया, साथ में काले चने की सब्ज़ी, जिसे यहाँ ‘कदले काई’ कहते हैं। कुछ देर ‘सैंड मैन’ देखा, अनोखी कहानी है इसकी। शाम को सब लोग नया बन रहा क्लब हाउस देखने गये।कुछ बच्चे तरणताल में थे, कुछ कैरम खेल रहे थे।अंधेरा होने से पहले ही वे वापस चले गये। 


आज शेयर मार्केट के बारे में कुछ जानकारी हासिल ली, कल से और लेनी है। आज सुबह मूसलाधार वर्षा हुई, नदियों, झीलों आदि में पानी का स्तर बहुत बढ़ गया है। राम नगर में लोगों के घरों में पानी भर गया है। और हाईवे पर कारें पानी में बह रही हैं। प्रलय का ही दृश्य है। प्रकृति का विकराल रूप दिखायी दे रहा है। जीवन कितना अस्थिर है। पापाजी से बात हुई, उन्होंने कहा, शरीर का ध्यान रखना चाहिए, उनका स्वास्थ्य कभी-कभी ऊपर-नीचे होता है, जो स्वाभाविक भी है। उन्होंने बताया, छोटी बहन दो-तीन दिनों के लिए आ रही है। 


आज सुबह ‘गणेश चतुर्थी’ के उत्सव में शामिल होने वे नैनी के यहाँ गये और शाम को एक परिचित के यहाँ। मौसम अच्छा रहा, नाइट क्वीन का एक फूल कल की तरह आज रात भी नौ बजे खिलने वाला है। आज भी प्रांजल कामरा से शेयर मार्केट के बार में और जानकारी हासिल की, बीस दिन बाद पहला शेयर ख़रीदना है। आज एक पुरानी सखी का फ़ोन आया, वह आस्ट्रेलिया जाकर बेटे से मिलकर आयी है। 


एक और दिन बीत गया। कुछ नया सीखा, कुछ नया लिखा भी। आज ‘अष्टावक्र गीता’ भी आ गयी है।यह अद्वैत वेदान्त का अति महत्वपूर्ण ग्रंथ है। जिसमें ऋषि अष्टावक्र तथा मिथिला के राजा जनक के मध्य आध्यात्मिक संवाद है।सुबह वे टहलने गये तो कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं थी।एक नई सड़क पकड़ी तो कुत्ते भौंकने लगे। थोड़ा पहले ही वे घर लौट आये।सोसाइटी में गणेश पूजा की सजावट आरंभ हो गयी है। मुख्य स्टेडियम के बाहर  बत्तियों से गणेश जी का चित्र बनाया गया है। जून ने आज काफ़ी लोगों से फ़ोन पर बात की। वह आजकल अपने सहज स्वभाव में हैं, प्रसन्न तथा सक्रिय !


आज श्रील प्रभुपाद की आत्मकथा सुनी, उससे पहले अदानी की। प्रभुपाद इस्कॉन के संस्थापक थे। एक व्यक्ति कितना कुछ कर सकता है। परमात्मा सभी के भीतर है, सभी की संभावनाएँ अपार हैं। गुरुजी कितना काम कर रहे हैं, वे उनके शिष्य होकर भी यदि स्वयं को कमजोर मानें तो इसमें उनका ही दोष है। दोपहर को अनुवाद कार्य किया। नूना ने नज़र उठाकर देखा, सिटआउट में लगी सोलर से जलने वाली मशाल दिख रही थी, उसका प्रकाश एक मोहक वातावरण उत्पन्न कर रहा था। दिन भर वर्षा नहीं हुई, पर सुबह टहलने गये तो कोहरा छाया हुआ था, सब कुछ रहस्यमयी सा लग रहा था।