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Monday, June 27, 2011

गीता ज्ञान


समय है शाम का, वे दोनों डाइनिंग कम रायिटिंग टेबिल वाले कमरे में हैं, आज का दिन अच्छा सा था, उजला-उजला. सुबह नींद खुली छह बजे, जल्दी-जल्दी में बस हॉर्लिक्स बनाया. दोपहर बाद टीटी खेलने गए फिर लाइब्रेरी, शाम का नाश्ता और अब यहाँ हैं, पत्र लिखने हैं. आजकल नूना लोकदास बर्मन की सरल गीता पढ़ रही है पर पढ़ते वक्त जितना समझ में आता है, बाद में याद नहीं रहता, आचरण में नहीं ला पाती. जैसे क्रोधित न होने की सीख है, छोटी-छोटी बातों पर रुष्ट होना और दुखी होना नहीं छूटता. वह सोचती है कि ईश्वर उसके साथ है और वही उसे मार्ग दिखायेगा.