"द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन
आज सुबह वे दोनों टहल कर आये तो नूना गुलाबी फूलों वाले पेड़ों के चित्र उतारने फिर से गई, जिन्हें “अमापा” कहते हैं। नन्हे का फ़ोन आया था, बातों-बातों में उसने बताया, उनका पालतू बिलाव ठीक सुबह छह बजे और शाम को सात बजे उससे भोजन माँगता है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त से ही वह समय का अंदाज़ा लगाता होगा। उसने नौ बड़े गमले और भेज दिये हैं। इतवार को माली उनमें पौधे लगायेगा।आज पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आये हैं, यूपी, उत्तराखण्ड, मणिपुर व गोवा में बीजेपी और पंजाब में आप जीत रही है।
आज सुबह-सुबह वे साराकी सब्ज़ी मंडी गये, काफ़ी सुना था इसके बारे में। सब्ज़ियाँ ख़रीद कर नन्हे के यहाँ पहुँचे तो उनके योग शिक्षक कक्षा ले रहे थे, नूना भी शामिल हो गई।घर लौटकर उसे गुरुजी के होली पर दिये संदेश का अनुवाद करना था। कल सोने से पूर्व गीतांजलि की कुछ कवितायें पढ़ीं। कितनी प्यारी कविताएँ हैं उसमें, रवींद्र नाथ टैगोर के दिल का हाल बतातीं। भक्ति और प्रेम में डूबी हुईं।वर्षों पूर्व न जाने किस भाव दशा में डूबकर नूना ने गीतांजलि की अनेक कविताओं का भावानुवाद किया था, एक बार फिर उन्हें सजाने की बेला आ गई है।आज सुबह उसने दूरदर्शन का एक पुराना कार्यक्रम ‘शब्दों के रंग’ सुना।जिसमें गुलज़ार का इंटरव्यू, कहानियों की एक किताब का विवरण और एक धारावाहिक ‘अपना अपना आसमान’ का पहला अंक भी था।कल रात अचानक एसी बंद हो गया, कुछ देर नींद नहीं आयी।जब सारी खिड़कियाँ खोलनी पड़ीं, पता चला, कुछ लोग देर रात को टहलने जाते हैं।
आज इतवार है, बच्चे आये, नाश्ते में मैसूर दोसा और मैंगो शेक लेने के बाद सब मिलकर उनके एक ख़ाली पड़े फ़्लैट को भावी ख़रीदार को दिखाने गये। इस बार घर में कोई सीपेज नहीं था, कुछ जगह पेंट उखड़ा हुआ था। वापसी में नये बन रहे क्लब हाउस को देखते हुए आये, जो बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था, फ़िलहाल तरणताल काफ़ी बन गया है।सुबह के भ्रमण के समय एक जगह संभवत: पाइप फट जाने के कारण पानी लीक होते हुए देखा था, जून ने अपनी देख-रेख में उसे ठीक करवा दिया है।
आज उन्होंने ‘कश्मीर फ़ाइल्स’ देख ली। जिसमें कश्मीर में हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिंदुओं के विस्थापन की हृदय विदारक कहानियों को दर्शाया गया है। विवेक अग्निहोत्री की यह फ़िल्म उस कड़वी सच्चाई को दिखा रही है, जिसे तीन दशकों से छुपाया गया था।सिनेमा हॉल पूरा भरा हुआ था। फ़िल्म में बहुत ही मार्मिक दृश्य हैं, जो भीतर तक कंपा देते हैं।१९९० की १९ जनवरी को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से जाने के लिए कहा गया। उन्हें टेंटों में रहकर गुजारा करना पड़ा, अनेक कष्ट उठाने पड़े। उन सब को आज तक न्याय नहीं मिला है।आज वह समय आया है कि दोषियों को सजा मिले।शाम को पापाजी से भी फ़िल्म के बारे में बात हुई, उन्हें विभाजन के दिन याद आ गये। कितनी मुसीबतें झेलकर, दो रातें रास्ते में बिताकर, पैदल चलते हुए वे लोग भारत आये थे। उसके पूर्व भी उन्हें बहुत दहशत भरे दिन गुजारने पड़े थे।
छोटा भाई परिवार सहित दुबई गया है, बड़े भाई पापाजी के पास रहने आये हैं।परसों होली का उत्सव है।आज यहाँ होलिका दहन का उत्सव पूरे-ज़ोर-शोर से मनाया गया।प्रसाद में सभी को काले चने व हलवा बाँटा गया। होली की ख़रीदारी भी होगई है।सोसाइटी में कल सुबह साढ़े नौ बजे एक पार्क में सामूहिक होली खेलने का कार्यक्रम है।
आज सुबह होलिका उत्सव सबके साथ मनाया। बच्चे व बड़े सभी उत्साह में भरे थे, बाद में समोसा व जलेबी का वितरण भी किया गया।शाम को वे आश्रम गये, गुरुजी ने होली का उदाहरण देते हुए कई ज्ञान वर्धक बातें कहीं। दो-तीन लोगों ने अपनी कविताएँ भी सुनायीं। स्वामी विरूपाक्ष द्वारा लिखी गई एक पुस्तक "द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन हुआ, जिसमें गुरुदेव द्वारा श्रीलंका में कराये गये शांति प्रयासों का वर्णन है। लेखक स्वयं श्रीलंका में नौ वर्षों तक रहे थे।यह पुस्तक वे ख़रीदने वाले हैं।आज छोटी भांजी के लिए एक कविता भेजी, कल उसकी मँगनी हो रही है। असम की एक परिचिता ने अपने लिए कुछ लिखने को कहा था, उसे भी अच्छी लगी कविता।
आज सुबह वे नन्हे के यहाँ आ गये थे। नाश्ता बाहर ही खाया फिर सोनू के भाई व मौसेरी बहन के साथ सभी लोग ‘एंबेसी हॉर्स राइडिंग स्कूल’ पहुँचे। भारत में घुड़सवारी के खेल को विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए पीछे तीन दशकों से वहाँ घुड़सवारी सिखायी जाती है। वहाँ २४० एकड़ ज़मीन पर घोड़ों को रखने की व्यवस्था की गई है। उनकी अच्छी देखभाल की जाती है। सभी घोड़े चुस्त-दुरस्त थे। सभी ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया।
वहाँ से उनका छह लोगों का समूह ‘मिस्ट्री रूम्स’ गया। बैंगलुरु के इंदिरा नगर में ‘मिस्ट्री रूम्स’ एक रोमांचक लाइव एस्केप गेम है।सभी को एक घंटे के लिए एक कमरे में बंद कर दिया गया। और वहाँ दी गई पहेलियों को बूझकर उन्हें बाहर निकलना था। अत्यंत अनोखा अनुभव था। उनके पास बाहरी दुनिया से संपर्क करने के लिए कोई साधन नहीं था, कमरे की दीवारें ऊँची थीं, और ताला बंद था, जिसकी चाबी का सुराग लगाना था। सभी बाधाएँ पार करके वे अंतिम द्वार तक पहुँचने ही वाले थे, पर समय सीमा समाप्त हो गयी और आयोजकों ने स्वयं ही दरवाज़ा खोल दिया। उसके बाद सभी ने राजस्थानी होटल में लंच खाया। शाम को घर लौटकर भांजी की माँगनी का लाइव टेलीकास्ट देखा।
आज नूना ने ध्यान की एक नयी विधि ‘तिब्बतियन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाइंग’ में पढ़ी और प्रयोग किया। सर्वप्रथम कुछ देर के लिए आँखें किसी वस्तु या किसी चित्र पर टिकाएँ, उसके बाद कुछ देर तक अपने प्रिय मंत्र का उच्चारण करें, तथा फिर श्वासों पर ध्यान दें। अंत में शून्य में टिक जायें। मन जब शांत होकर ठहर जाता है तब उसे अपने स्वरूप का दर्शन होता है। अपना स्वरूप कैसा है, इसका पता तो किसी को अनुभव के बाद ही चल सकता है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता! जून आज अपनी कार को पेंट करवाने के लिए देकर आये हैं, चार दिन बाद मिलेगी, कहने लगे, वे बेकार (बिना कार के ) हो गये हैं !





