Tuesday, March 28, 2017

जल, जंगल और जमीन


टीवी पर हिरोशिमा में बापू की कथा का प्रसारण हो रहा है. हवा की तरह हल्का, फूल की तरह महकता हुआ और पानी की तरह बहता हुआ मन कथा सुनकर ही होता है, लेकिन कथा के पूर्व ही कोई वक्ता बोल रहे हैं, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे. बोलने का भी एक आकर्षण होता है. सत्य का रथ, प्रेम के पथ पर, करुणा के मनोरथ के साथ चलता रहे यही तो बापू चाहते हैं. जून अहमदाबाद में हैं, सुबह उनका फोन आया था. नन्हा इतवार को तमिलनाडु गया था, फुफेरी बहन व जीजाजी से मिलने. बाइक पर यात्रा करना उसे मेडिटेशन जैसा लगता है, पूरे होश में रहना पड़ता है, नितांत अकेले अपने साथ ! साढ़े दस बजे हैं, आज वे भोजन देर से करेंगे, वह एक घंटा कम्प्यूटर पर बैठकर आज की पोस्ट लिखेगी.

जी-टीवी पर दिल्ली के रामलीला मैदान से बाबा रामदेव का काला धन लाने के लिए दिया गया भाषण प्रसारित हो रहा है. देश में कितना तेल, कितना कोयला आदि प्राकृतिक संपदा के रूप में पड़ा है, जल, जंगल, जमीन की जो लूट मची है, उस पर बोल रहे हैं. काला धन कितना है, इसका तो पता नहीं, पर लाखों करोड़ों में है. जनता को सजग करना ही उनका उद्देश्य है.

अज जून का जन्मदिन है, उसका मन भी खिला है. कल दिन भर एक अजीब सा भाव छाया था. छोटी बहन की सासुमाँ ने देह त्याग दी. रामदेव जी का आन्दोलन अपनी चरम सीमा पर था. कल दोपहर भर टीवी पर वही देखती रही. आज बहुत दिनों बाद एक परिचिता का फोन आया, उनके पुत्र का विवाह किसी कारण से टूट गया है, उस अनुभव से उबर रही थीं, अब मन कुछ ठहरा है. क्लब की प्रेसिडेंट के बारे में उनसे कुछ बातें पूछीं. उनके लिए कविता लिखनी है. वह एक अच्छी अध्यक्षा साबित हुई हैं. मिलनसार हैं, अच्छी लीडर हैं, मैनेजर हैं और सुलभ हैं. सब कोई उनसे बात कर सकते हैं. अहंकार नहीं है. सामाजिक कार्यों के प्रति उत्साह है, समाज सेवा का जज्बा है. दादी, नानी बन चुकी हैं. सास की अच्छी बहू हैं, अच्छी माँ हैं, स्वास्थ्य व सौन्दर्य के प्रति सजग हैं, इस उम्र में भी युवा दिखती हैं. ऊँचा कद है, वस्त्र शालीन हैं और एक गरिमा है उनमें. इतना सब तो काफी है उनके बारे में लिखने के लिए. आज मौसम सुहाना है, कल दिन भर बेहद गर्मी थी. कल बंगाली सखी की बिटिया को अचानक देखकर बहुत ख़ुशी हुई, वह पहले से ज्यादा मुखर हो गयी है और थोड़ी मोटी भी. नौकरी करने लगी है.

बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण जी को जमानत मिल गयी है. उनके आन्दोलन से पूर्व ही उन्हें फर्जी डिग्री व फर्जी पासपोर्ट के कारण जेल में रखा गया था. बाबा पूरी निर्भयता की साथ प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को शासन की कमियों की तरफ आकर्षित कर रहे हैं. देश के हालात इस समय नाजुक बने हुए हैं. सारे विश्व में ही मंदी के कारण परेशानी है फिर भी युद्द्धों पर व्यर्थ पैसे खर्च किये जा रहे हैं. इन्सान अपने स्वार्थ के कारण दुःख पा रहा है.   

तुम मेरे साथ होते हो, कोई दूसरा नहीं होता ! बापू की कथा आ रही है राजस्थान के नाथद्वारा से. विरह ही प्रेम है. किसी के जाने के बाद जो सन्नाटा हो जाता है, उसमें कितनी पीड़ा है, जो इस सन्नाटे को सहता है, वही प्रेम को अनुभव कर ही सकता है. एक शून्य प्रकट होता है जीवन में तभी प्रेम प्रकटता है. उनका कोई क्रियाकलाप ऐसा न हो जो प्रेमास्पद के प्रतिकूल हो. 

3 comments:

  1. जून जी को जन्मदिन पर शुभकामनाएं।
    दिवंगत की आत्मा को शांति मिले ।

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  2. स्वागत व आभार सुशील जी !

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  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - १६० वर्ष पहले आज भड़की थी प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की ज्वाला में शामिल किया गया है।कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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