Friday, January 29, 2016

हुम्मस की रेसिपी


आज ध्यान में पूरा एक घंटा नहीं बैठ सकी, नाश्ता करने के बाद कुछ भारीपन लग रहा था और ठंड भी. लेकिन ध्यान का अनुभव अच्छा था. श्वेत रंग का प्रकाश दिखा तथा सोहम् की धुन सुनाई दी. भीतर कितनी ध्वनियाँ तथा कितने प्रकाश छिपे हैं, वे बाहर ही देखते हैं बाहर का सुनते हैं, जो एक ही जैसा है पर भीतर की दुनिया अचरज से भरी है. भीतर का सब कुछ नया है अभी उसके लिए, हर पल कुछ नया ही होता है. कल शाम ऑयल पर हिंदी में लिखे एक लेख को वे थोड़ा ठीक-ठाक करते रहे, जून उसकी कविता भी दे रहे हैं क्योंकि स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रकाशित होने वाली पत्रिका में हिंदी में लिखे लेख बहुत कम मिल पाए हैं. उसे भी ऑयल से जुड़े किसी विषय पर एक लेख लिखना है, जून से सहायता लेनी होगी. नैनी की बेटी के रोने की आवाज आ रही है, उसके पैर पर लगी चोट पर उसके पिता पट्टी बाँध रहे हैं. नैनी अपने बेटे को प्यार से पुकार रही है, प्रेम कहीं भी हो सब सुंदर कर देता है. आज धूप खिली है. उसने ‘हुम्मस’ बनाया है, काबुली चने की अरब देश में खायी जाने वाली चटनी, पर वैसा नहीं बना है, उसे और पीसने की आवश्यकता है सम्भवतः. आज गुरूजी ने ‘नारद भक्ति सूत्र’ पर बोलना शुरू किया है. दम्भ, अहंकार, आसक्ति बाँधते हैं, वे निर्दोष भाव में रहकर स्वयं को मुक्त रख सकते हैं. जहाँ कोई अहंकार न हो, प्रेम ही झलकता हो, सहज प्रेम जिसमें कोई प्रदर्शन नहीं है. मुम्बई में बाबा रामदेवजी का योग विज्ञान शिविर चल रहा है, जहाँ एक जैन मुनि भी आये थे. कितना सुंदर भाषण उन्होंने दिया. देश में सौ करोड़ की लागत से पुराने ऐसे स्थान नये बनाये जा रहे हैं जहाँ पशुओं की हत्या की जाती है. जो लोग ऐसा जघन्य काम करते हैं, वे स्वयं भी पशु योनि में जन्म लेते हैं तथा मारे जाते हैं.

आज फिर धूप गायब है, लेकिन भीतर का सूरज खिला है ध्यान का, प्रेम का, मस्ती का और रचनात्मकता का सूरज ! दस बजने को हैं, जब तक बच्चे आते हैं, उसे कुछ खास कार्य करने हैं. बुआजी तथा फुफेरी बहन को फोन करना है. दीदी को भी उनकी सुखद यात्रा के लिए शुभकामनायें देनी हैं वह कल दुबई जा रही हैं, कोहरे के कारण फ्लाइट लेट भी हो सकती है, तथा नया लेख लिखने की तैयारी करनी है. अभी-अभी फोन पर बात की, फुफेरी बहन बीमार होने पर भी उत्साह से भरी है. उसके दोनों गुर्दे खराब हो गये हैं, पर जीने का उत्साह जरा भी घटा नहीं है. जिजीविषा ही है जो भयानक से भयानक रोग से लड़ने की शक्ति भीतर भर देती है. नैनी की बेटी पढ़ने आ गयी है, गाना गाते-गाते गृह कार्य कर रही है. आज लंच में मकई की रोटी बनानी है, सरसों की जगह मूली का साग.


आज भी कल के सूत्रों को आगे बढ़ाया गुरूजी ने, जो भक्त होता है वह स्थूल जगत को आनन्दित करता ही है, सूक्ष्म जगत को भी प्रभावित करता है. आज जून ने सिन्धी साईं दादा जेपी वासवानी के बताये तीन वाक्य बोले- God is with me, God is watching me, God is witnessing me. वह भी धीरे-धीरे रंग ही जायेंगे, आखिर कब तक कोई परमात्मा से दूर रह सकता है. वे अपना जीवन तभी तो प्रेममय तथा शांतिमय बना सकते हैं जब विकारों से दूर हों ! ..और विकारों से दूर होने की शक्ति उन्हें परमात्मा से मिलती है, जब उसके प्रेम का अहसास होता है. इस क्षण मन शांत है, अभी-अभी ध्यान करके उठी है, कुछ दृश्य बिलकुल स्पष्ट दीखते हैं ध्यान में सामान्य अवस्था से भी स्पष्ट, भीतर ही यह सारा ब्रह्मांड छिपा है. कल ‘विवाह संस्कार’ पर कुछ लाइनें लिखीं. कल्याण के संस्कार विशेषांक से पढ़कर. पति-पत्नी को एक मन होना ही चाहिए नहीं तो सिवाय तनाव के कुछ हाथ नहीं आता, लेकिन सत्य का आश्रय लेकर ही, अन्याय में गलत कार्य में साथ दिया तो दुःख ही मिलेगा.. इस हफ्ते कई विवाह कार्ड मिले, सभी को बधाई संदेश भी भेजने हैं. इस ठंड में भी बच्चे पढ़ने आये हैं, ज्ञान पाने की इच्छा मानव में नैसर्गिक रूप से होती है. 

No comments:

Post a Comment