Wednesday, April 28, 2021

ऐनी विद एन इ

 रात्रि के नौ बजकर पांच मिनट हुए हैं. अभी-अभी जून ने दो किताबों का आर्डर दिया है, नए वर्ष के लिए सुंदर उपहार ! कल छोटा भाई यहां आ रहा है, उसने सोचा, शाम को वे उसे आम व अंगूर के बगीचे में ले जायेंगे, हो सका तो गाँव के खेत में भी. आज दोपहर बारह बजे वे असमिया सखी के यहां से लौटे, पूरे चौबीस घण्टे बाद. उन्होंने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, कल दिन में तथा रात्रि का भोजन व आज सुबह का नाश्ता प्रेम से खिलाया. तस्वीरें खींची, चाइनीस चेकर खेला , पुराने दिनों की बातें कीं, उन दिनों की तस्वीरें देखीं. आज मृणाल ज्योति से एक अध्यापिका का फोन आया, पूछ रही थी वह वहाँ कब आएगी. जून ने कहा है शायद दो वर्ष बाद वे वहाँ दुबारा जा सकें. मैक्स टीवी पर क्वीन का आठवां भाग देखा, शक्ति अब पुन: फिल्मों में काम करने के लिए तैयार है. मौसम आज सुहावन है, कल सखी की सोसाइटी में क्रिसमस पार्टी थी और आज उनके पड़ोसी के यहां क्रिसमस केक की सेल थी. असम में हर वर्ष वे क्रिसमस ट्री सजाते थे और बच्चों को केक खिलाते थे। 


अभी-अभी भाई का फोन आया, वह दोपहर ढाई बजे पुट्टपर्थी पहुंच गया था. वहां के स्टेट बैंक में पूरे आठ दिन उसे ऑडिटिंग करनी है, उसका भाग्य उसे तीर्थ स्थानों के दर्शन करा रहा है. तमिलनाडु व आंध्र के कितने ही मंदिर भी देख चुका है. कल सुबह विजयवाड़ा से बारह बजे तक घर आ गया था, बड़े भाई भी आधे घण्टे बाद पहुंच गए. कल शाम वे उसे एओल आश्रम ले गए थे, विशालाक्षी मंडप रौशनी में बहुत भव्य लग रहा था. सप्ताहांत में चार दिनों के लिए उन्हें काबिनी जाना है. घूमना और लिखना-पढ़ना यही काम होंगे वहां. उनके गैराज में किनारे की पट्टी पर मार्बल लगवा लिया है, जून कह रहे हैं सामने की दीवार पर टाइल्स लगवा लेते हैं, बरसों वे लोग सरकारी घरों में रहते आये हैं जिसमें कभी कोई काम नहीं करवाया, पर अब अपने घर को संवारने का कोई अंत ही नहीं है. सोनू ने उसे दो बंदनवार व दो मोबाइल बैग्स दिए, नन्हा आजकल ज्यादा बात नहीं करता है, अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहने लगा है. 


आज बहुत दिनों बाद रेडियो पर रात्रि समाचार सुने. बचपन में हर रात को सोने से पूर्व घर में रेडियो पर समाचार सुने जाते थे. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गयी है. सरकार लोगों तक सीएए की जानकारी पहुंचाने की कोशिश कर रही है. शरणार्थियों ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को धन्यवाद दिया है. पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री व राज्यपाल के मध्य तनाव कम नहीं हो रहा है. सुबह-सुबह कुछ लिखने का प्रयास कर रही है नूना पिछले कुछ दिनों से, दिन भर लिखने का समय नहीं मिल पाता। छत पर काम चल रहा है, दिन भर कोई न कोई आता रहता है. सुबह मन कितना स्पष्ट रहता है खाली और निर्मल .. विचार अपने आप ही आते हैं । आज सुबह जून नए खुले रेस्त्रां से पुट्टू लाये,  साथ में काले चने की सब्जी. नए वर्ष के लिए कुछ संकल्प लेने का समय आ गया है. अगले वर्ष वे  ध्यान, लेखन, सेवा कार्य, पुस्तकें पढ़ना तथा बागवानी नियमित करेंगे. नया वर्ष आने में मात्र सात दिन रह गए हैं. कल क्रिसमस का त्योहार है, देश में शांति बढ़े, विकास हो, आर्थिक प्रगति हो और आपसी मेलजोल बढ़े. यह कामना उन्हें नए वर्ष के लिए करनी चाहिए. जून की पीठ में दर्द हो गया है, योग कक्षा में उन्हें विशेष आसन करने को कहा शिक्षिका ने. अगले महीने वह घर जाने वाली है, ऋषिकेश से यहाँ आयी है, किराये का घर लेकर अकेले ही रहती है। उसने सोचा  है, एक दिन उसे घर बुलाएगी।  


कल रात एक स्वप्न देखा, एक बड़ा हवाई जहाज है, जिसमें नन्हे और जून को कहीं जाना है, एक परिचित व्यक्ति और भी है, वह उन्हें छोड़ने भर आयी है, पता नहीं कैसे जहाज में पहुंच जाती है. तभी वह उड़ने लगता है, उन्हें लगता है, जहाज अभी रुकेगा और वह उतर जाएगी, पर ऐसा नहीं होता. उसके पास टिकट भी नहीं है. अंततः वह अपने लक्ष्य पर उतर जाता है, वे बाहर आते हैं, उनसे आगे तीन जन को निकलने देते हैं चौथे को रोक लेते हैं, वह सुनती है, वह कह रहा है, उसके पास टिकट नहीं है और गलती से वह बैठ गया था, पर उसकी बात वे सुन ही नहीं रहे. तभी नींद खुल जाती है, कितना स्पष्ट अर्थ है इस स्वप्न का, उसे जहाँ जाना नहीं है, जिसकी टिकट यानि क्षमता भी उसके पास नहीं है, वहीं वह जा रही है। सचेत हो जाना चाहिए अब तो ! उसके जीवन का लक्ष्य क्या है यदि वह खुद ही भूल गई तो आस-पास के लोग उसे कैसे याद रख सकते हैं। 

आज फिर दाहिने हाथ की मध्यमा में नख के निकट सूजन दिख रही है। कुछ हफ्ते पहले डॉक्टर को दिखाया था, ठीक भी हो गई थी पर पुन: किसी कारणवश संक्रमण हो गया है। यू ट्यूब पर घरेलू उपाय देखे, पानी में सेब का सिरका मिलाकर  लगाने से यह ठीक हो जाएगा, ऐसा सुना। नेटफलिक्स पर ऐनी विद एन इ धारावाहिक का पहला भाग देखा। उसमें एक तेरह वर्षीय कल्पनाशील बालिका की कहानी है।  आज क्रिसमस है उसके एक ब्लॉग का जिक्र एक वरिष्ठ ब्लॉग  लेखिका ने सम्मान पूर्वक किया है, क्रिसमस का उपहार ! दोपहर को छोटी ननद का फोन आया, पुत्र की बात बता रही थी, सुबह चार बजे सोता है और एक बजे उठता है, मित्रों के साथ ज्यादा समय बिताता है। आज की युवा पीढ़ी अपनी सेहत का भी ध्यान नहीं रखती। 


और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - 


मुक्त ! वे एक क्षण तो स्वयं अपने मन पर शासन नहीं कर सकते, यही नहीं, किसी विषय पर उसे स्थिर नहीं कर सकते और अन्य सबसे हटाकर किसी एक बिन्दु पर उसे केंद्रित नहीं कर सकते ! फिर भी वे अपने को मुक्त कहते हैं ! 


यदि वह अपने मन की सारी पीड़ा समेट कर एक वाक्य में कहे और अपने मन की सारी खुशी समेट कर एक वाक्य में कहे तो दोनों बार एक ही वाक्य उसके अधरों से निकलेगा- उसकी कविताओं में झलकता उसके मन का भ्रम  कितना सुंदर है ! लगता है सुख -दुख की चरम स्थिति में मनुष्य समभाव हो जाता है, यह बिल्कुल सही है। 


कई बार लगा है पानी में प्रतिबिंब देखते हुए, अपने अधूरेपन को देख, अपनी आवाज में टूटन देख, बिखरे हुए विचारों को देखकर कि  दुनिया में कोई ऐसी मिट्टी नहीं जो इतनी पक्की हो कि उसे जोड़ सके, कुछ मिट्टियाँ किन्हीं विशेष स्थानों पर ही मिलती हैं और उसके मन के मेल की मिट्टी कहाँ मिलेगी, यह नहीं मालूम ! 


2 comments:

  1. एक आनंदित करने वाला सिलसिला.. पढ़ते हुये एक तारतम्य स्थापित हो जाता है और स्वयम को उन सभी घटनाओं और पात्रों के साथ खड़े पाता हूँ... ऐसा लगता है कि इस यात्रा में मैं भी उनका सहयात्री हूँ... किंतु अगले ही पल यह अनुभव होता है कि इस यात्रा का मैं बेटिकट यात्री हूँ... एक मूक दर्शक... फिर भी यह यात्रा इतनी सुखद है कि बस चलती रहे ऐसा मन करता है!!

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  2. वाह ! इतने सुंदर शब्दों में आपने इस श्रृंखला को प्रोत्साहन दिया है, स्वागत व बहुत बहुत आभार !

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